चन्द्र ग्रहण का विवरण एवं नियम पालन की आवश्यकता ।।

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मित्रों, 31 जनवरी 2018 दिन बुधवार को माघ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर खग्रास चन्द्रग्रहण लग रहा है । यह ग्रहण सम्पूर्ण भारत में दिखाई देनेवाला होगा । भारत के अलावा यह सम्पूर्ण एशिया, रूस, मंगोलिया, जापान, आस्ट्रेलिया, आदि में चंद्रोदय के समय प्रारंभ होगा ।।


यह ग्रहण उत्तरी अमेरिका, कनाडा, पनामा के कुछ भागों में चन्द्रास्त के समय इस ग्रहण का मोक्ष दृष्टिगोचर होगा । भारतीय मानक समय के अनुसार पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों जैसे असम, मेघालय, बंगाल, झारखण्ड, बिहार में खण्डग्रास चन्द्रग्रहण का स्पर्श सायं 5 बज कर 19 मिनट से तथा मोक्ष रात्रि 8 बज कर 43 पर होगा ।।


खग्रास चन्द्रग्रहण की कुल अवधि 01 घंटा 17 मिनट तथा चन्द्रग्रहण की कुल अवधि 03 घंटा 24 मिनट की होगी । इस चन्द्रग्रहण का स्पर्श सायं 05 बजकर 19 मिनट पर होगा, ग्रहण का मध्य सायं 07 बजकर 01 मिनट पर तथा ग्रहण का मोक्ष रात्रि 08 बजकर 43 मिनट पर होगा ।।


मित्रों, चंद्र ग्रहण के स्पर्श काल से 9 घंटा पहले सूतक लग जाता है । यह सूतक चंद्र ग्रहण में 9 घंटा पहले और सूर्य ग्रहण में 12 घंटे पहले लगता है । सूतक जब लगे उसके पहले भोजन पानी कर लेना चाहिए तथा बचे हुए अन्य भोजन सामग्रियों में अथवा जल एवं दूध-दही-घी आदि में कुशा डाल देनी चाहिए ताकि वह ग्रहण के दोष से अशुद्ध ना हो ।।


ग्रहण काल में विशेषकर गर्भवती महिलाओं को विशेष रूप से कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है । क्योंकि ग्रहण काल में जितना अधिक पूजा-पाठ जप किया जाए वह सिद्धियां देता है । लेकिन यही ग्रहण जब किसी गर्भवती महिला के ऊपर पड़ता है तो उसके गर्भ में पलने वाला बच्चा विकलांग हो जाता है ।।


शास्त्रानुसार ऐसी मान्यता है, कि ग्रहण काल में गर्भवती स्त्रियों को सोना नहीं चाहिए और एक जगह पर ज्यादा देर तक बैठना भी नहीं चाहिए । क्योंकि जिधर बच्चा दबेगा उधर से उसका वह अंग कमजोर हो जाता है ।।


ग्रहण काल में शौच आदि पर भी नियंत्रण रखना चाहिए । सूतक के नियमों का पालन करते हुए भोजन में अन्न-जल भी जब तक ग्रहण का मोक्ष ना हो जाए तब तक नहीं ग्रहण करना चाहिए ।।


ग्रहण का मोक्ष होने के बाद स्नान करके और कुछ दान करने के बाद ही भोजन-पानी बनाकर फिर उसे भगवान का भोग लगाकर ग्रहण करना चाहिए । इन नियमों का पालन जितना अधिक किया जाए उतना भविष्य के लिए अच्छा होता है ।।


मित्रों, यह नियम के स्वस्थ व्यक्तियों के लिए ही बनाया गया है । जो असक्त हैं, वृद्ध हैं अथवा रोगी हैं उनके लिए इन नियमों का पालन आवश्यक नहीं बताया गया है । उनके उपर इन सभी नियमों का कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है ।।

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