धनतेरस को स्थिर लक्ष्मी प्रदायक पूजन विधि एवं मुहूर्त।।

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Dhanteras Ki Pooja
Dhanteras Ki Pooja

आज धनतेरस को आशातीत परिणाम प्रदायक पूजन विधि एवं मुहूर्त ।। Dhanteras Ki Pooja.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, धनतेरस क्या है, क्या करें इस दिन तथा कैसे अपने जीवन के आर्थिक संकटों से मुक्ति पायें ? आज हम इसी विषय पर चर्चा करेंगे । साथ ही इस दिन पूजन का सर्वोत्तम मुहूर्त और विधि भी बताएँगे । आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान धन्वन्तरि का जन्म हुआ था ।।

इसलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है । यह पर्व हमारे वैदिक धर्म के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण त्यौहार दिपावली से ठीक दो दिन पहले मनाया जाता है । दिपावली जो पांच दिनों तक चलने वाला पर्व होता है, यह उसका सबसे पहला दिन होता है । अब बात करते हैं, पूजन के मुहूर्त एवं विधि के विषय में ।।

विशेष बात – दिपावली के इन पांच दिनों में श्रीयंत्र खरीदने और उसकी पूजा करने से अचल सम्पदा की प्राप्ति होती है । परन्तु श्रीविद्या से संस्कारित अथवा सिद्ध किया गया श्रीयंत्र ही किसी जानकार एवं विद्वान् से ही लेवें । सही और प्रमाणित तथा स्वामी जी के द्वारा सिद्ध किया गया श्रीयंत्र खरीदने के लिए कॉल करें – 8690522111 और वर्षपर्यंत पाएं अभूतपूर्व लाभ ।।

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Dhanteras Ki Pooja

मित्रों, आज भगवान धनवन्तरी के अलावा देवी लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर के पूजन की परंपरा है । इस दिन कुबेर के अलावा यम को भी दीपदान किया जाता है । इस दिन यमराज की पूजा करने के विषय में एक मान्यता है, कि इस दिन यमराज की पूजा करने से घर में अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है । आज यमराज की पूजा करने के बाद पूरी रात घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर लौ करके दीप जलाना चाहिए । इस दीपक में कुछ पैसा व कौड़ी भी डाली जाती है ।।

धनतेरस पर गहनें, बर्तन और वाहनों की खरीदारी भी अत्यन्त शुभ माना जाता है । इस दिन नये उपहार, सिक्का, बर्तन वाहन और गहनों की खरीदारी करना शुभ माना जाता है । लक्ष्मी एवं गणेश जी की चांदी की प्रतिमाओं को इस दिन घर लाना, घर-कार्यालय, व्यापारिक संस्थाओं में धन, सफलता एवं उन्नति को बढ़ाता है । इस दिन भगवान धनवन्तरी समुद्र से कलश लेकर प्रकट हुए थे । इसलिये इस दिन खास तौर से बर्तनों की खरीदारी की जाती है ।।

इस दिन सूखे धनिया के बीज खरीद कर घर में रखना भी परिवार की धन संपदा में वृद्धि करता है । इस दिन ज्वेलर्स के पास भी काफी भीड़ रहती है और लोग अपनी क्षमता के हिसाब से सामानों की खरीदारी करते हैं । इतना ही नहीं इस दिन वाहनों की भी जमकर खरीदारी होती है । लोग पहले से ही बुकिंग करवाकर रखते हैं और उस दिन वाहन घर ले आते हैं ।।

धनतेरस पर पूजन के लिये शुभ मुहूर्त की बात करें तो सर्वोत्तम मुहूर्त प्रदोष काल को माना जाता है । सूर्यास्त के बाद के 2 घंटे 24 मिनट के समय को प्रदोषकाल कहा जाता है । यमराज के लिये दीपदान और लक्ष्मी पूजन भी इसी मुहूर्त में करना चाहिए । सांय काल में शुभ महूर्त की बात करें तो प्रदोष काल का समय शाम 5:31 से रात 8.04 बजे तक, स्थिर लग्न शाम 7.26 बजे से रात 9.25 बजे तक और धनतेरस पूजा के लिए समय शाम 6.10 बजे से रात 8.04 बजे तक है ।।

उपरोक्त मुहूर्त शास्त्रानुसार सिर्फ धनतेरस हेतु बताया गया है। परन्तु आप चौघाडियों के अनुसार भी मुहूर्त देखकर पूजन कर सकते हैं। हर वर्ष की अलग-अलग समय में अलग-अलग चौघडियाँ होती हैं। इसलिए आपको जिस वर्ष जब भी पूजा करनी हो उस दिन की चौघडियाँ देखकर करें। इन चौघडियों में भी पूजा करने का उतना ही लाभ होता है।।

धनतेरस पूजन विधि:- धनतेरस की पूजा शुभ मुहूर्त में ही करनी चाहिए। सबसे पहले तेरह दीपक जला कर तिजोरी में कुबेर का पूजन करना चाहिए। कुबेर का ध्यान करते हुए उन्हें फूल चढाएं। इसके बाद धूप, दीप, नैवेद्य आदि से पूजन करें। इस दिन स्थिर लक्ष्मी के पूजन का विशेष महत्व होता है।।

आज स्फटिक पर निर्मित श्रीयंत्र खरीदने और उसकी पूजा करने से अचल सम्पदा अर्थात स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है । धनतेरस के दिन यमराज की पूजा की जाती है । माना जाता है, की इस दिन यमराज का पूजन करने से यमराज हमारे अकालमृत्यु का भय दूर करते हैं । इसलिए अकालमृत्यु से बचने के लिए धनतेरस को यमराज की पूजा की जाती है ।।

Astro Classes, Silvassa के प्रधान संचालक – भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आप सभी सनातनियों को धनतेरस एवं दिपावली की ढ़ेरों शुभकामनायें एवं अनन्तानन्त बधाईयाँ।।

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