ग्रहों के रत्न मनुष्य की तकदीर बदल देते हैं ।।

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ग्रहों के रत्न मनुष्य की तकदीर बदल देते हैं।। Gems Stones Kismat Badal Dete Hai.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, कहते हैं, कि संसार परिवर्तन शील हैं । यदि सबकुछ परिवर्तनशील है तो इंसान के भाग्य अथवा किस्मत क्यों नहीं । यदि आपकी कुंडली सही है तो उसके अनुसार रत्न धारण करने से आपको निश्चित सफलता मिलेगी । लेकिन रत्न धारण करने से पहले किसी विद्वान् ज्योतिषी से सलाह अवश्य लेना चाहिये ।।

आजकल तो सुनार लोग भी एवं कई ज्योतिषी लोग भी राशि के अनुसार रत्न पहना देते हैं । परन्तु इस प्रकार से रत्न धारण करना शायद आपको उम्मीद से अधिक नुकसान कर सकता है । आप इस राशि के हैं तो यह रत्न पहन लीजिए, ऐसा कहकर जो लोग रत्न पहनाते हैं ।।

मित्रों, रत्न धारण करने के लिए केवल राशि ही पर्याप्त नहीं होता । अपितु राशि के साथ ही राशि स्वामी की स्थिति, उसके बैठने का स्थान, उसका अन्य ग्रहों के साथ सम्बन्ध ये सब भी बहुत ज्यादा महत्व रखते हैं । इन सभी को जाने-देखे-परखे बिना यदि जातक कोई भी रत्न धारण कर लेता है, तो शायद उसकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं ।।

किसी भी ज्योतिषी अथवा व्यक्ति विशेष को अपने फायदे से पहले जातक के जीवन एवं उसके फायदे-नुकसान के विषय में अवश्य सोंच लेना चाहिए । किसी भी ग्रह के रत्न किसी को भी पहनाने के पहले उस ग्रह के नवांश एवं अन्य वर्गों में क्या स्थिति है, उसकी डिग्री क्या है? यह देखना जरूरी होता है ।।

तभी जाकर किसी भी रत्न को पहनकर उसका भरपूर लाभ उठाया जा सकता है एवं किसी भी तरह के नुकसान से बचा जा सकता है । कहते हैं, कि सबके दिन भी बदलते हैं तो इंसान के क्यों नहीं । कहावत सच तो है लेकिन लंबा इंतजार करने से अच्छा है यदि आपकी कुंडली सही है तो रत्न धारण करने से अच्छी सफलता मिल सकती है ।।

आपकी जन्म पत्रिका में लग्नेश मित्र राशि में हो या भाग्य में मित्र का होकर बैठा हो या पंचम में स्वराशि का हो या मित्र राशि का हो । चतुर्थ भाव में मित्र का हो या उच्च का हो तब उससे संबंधित रत्न धारण करने से अच्छे परिणाम मिल सकते हैं ।।

भाग्य नवम भाव का स्वामी नवम में हो या स्वराशि का होकर बैठा हो या मित्र राशि का होकर लग्न, चतुर्थ, पंचम, तृतीय, दशम या एकादश में हो या उच्च का होकर द्वादश में भी हो तो उससे संबंधित रत्न पहनकर अच्छा लाभ उठाया जा सकता है ।।

विद्या/संतान भाव को प्रबल करना हो तो उस भाव का स्वामी नवम में होकर मित्र राशि का हो तो उस भाव के स्वामी का रत्न एवं पंचम भाव का रत्न नवम भाव से संबंधित रत्न जिस उँगली में पहनते हों तो उसमें पहनने से संतान का भाग्य एवं विद्या दोनों बढ़ते हैं और मनोरंजन के साधनों में भी वृद्धि होती है ।।

इतना ही नहीं, इससे आपकी मान-प्रतिष्ठा भी बढ़ती है । चतुर्थ भाव का रत्न भी पहनकर माता, भूमि, भवन, जनता से संबंधित कार्यों में लाभ उठाया जा सकता है । ध्यान देने वाली बात यह है, कि नवांश में नीच का न हो, नहीं तो लाभ के बजाए नुकसान ही होता है ।।

इसी प्रकार पंचमेश विद्या, विचार शुभ हो तो उस रत्न से अच्छा लाभ मिल सकता है । यदि जो रत्न पहना जाए उसकी महादशा का या अंतर्दशा चल रही हो तो अच्छे परिणाम मिलते हैं । रत्न पहनने से पहले शुभ मुहूर्त में ही रत्न बनवाना चाहिए और प्राण-प्रतिष्ठा करके ही पहनना चाहिए । फिर देखिए कैसे नहीं रत्न तकदीर बदलने में कामयाब होता है ।।

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