ऐसा मंगल प्रबल भाग्यवान बनाता है।।

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Lagnesh Mangal Navam Me
Lagnesh Mangal Navam Me

ऐसा मंगल यदि लग्नेश होकर नवम भाव में बैठा हो तो जातक को प्रबल भाग्यवान बनाता है।। Lagnesh Mangal Navam Me.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, सर्वप्रथम मंगल के कुछ दोषों कि बात करें तो अगर कुण्डली में अशुभ हो तो गर्मी के रोग, विषजनित रोग, व्रण, कुष्ठ, खुजली, रक्त सम्बन्धी रोग, गर्दन एवं कण्ठ से सम्बन्धित रोग देता है ।।

इतना ही नहीं ऐसा मंगल जातक को रक्तचाप, मूत्र सम्बन्धी रोग, ट्यूमर, कैंसर, पाइल्स, अल्सर, दस्त, दुर्घटना में रक्तस्त्राव, कटना, फोड़े-फुन्सी, ज्वर, अग्निदाह तथा गम्भीर चोट लग्न इत्यादि परेशानियाँ देता है ।।

परन्तु यदि लग्नेश होकर मंगल यदि कुण्डली के नवम में बैठा हो तो निरन्तर भाग्यवृद्धि करता है । मंगल एक ऐसा ग्रह है, जहाँ आज वैज्ञानिकों द्वारा जीवन की तलाश की जा रही है ।।

जैसा कि आप भी जानते होंगे कि नासा ने मंगल पर अपना उपकरण छोड़ा था जिससे कई महत्वपूर्ण जान‍कारियाँ भी प्राप्त हुई हैं । हमारे पूर्वज मुनियों ने पहले से उसके रंग को जान लिया था वही वैज्ञानिकों ने भी बताया है, कि मंगल लाल ग्रह है ।।

मंगल जन्म पत्रिका में शुभ होकर दशम, नवम अथवा लग्न में बैठ जाए तो जातक को अनेक लाभों से युक्त कर देता है । लग्नेश मंगल यदि नवम में हो तो भाग्यवृद्धि करवता है और स्वप्रयत्नों से सफलता दिलाने वाला होता है ।।

Lagnesh Mangal Navam Me

परन्तु यह धर्म के मामलों में कठोर होता है । चन्द्रमा यदि ऐसे मंगल के साथ हो तो माता, भूमि, भवन एवं वाहन का उत्तम सुख देता है । सूर्य साथ हो तो संतान विद्या से सुखी होते हैं ।।

बुध साथ हो तो मित्रों और भाइयों का साथ मिलता है तथा नाना-मामा से भी लाभ होता है । गुरु साथ हो तो भाग्यशाली होकर प्रत्येक क्षेत्र में सफलता पाने वाला होता है ।।

गुरु साथ हो तो धर्म-कर्म को भी मानने वाला होता है । शुक्र साथ हो तो पत्नी या पति से लाभ होता है और विवाह के बाद भाग्योदय होता है । शनि-मंगल साथ हों तो भाग्य में बाधा, स्वास्थ्य में गड़बड़ी रहती है ।।

राहु साथ हो तो भाग्योन्नति में रुकावटें आती हैं । लाख प्रयत्न करने पर भी सफलता नहीं मिलती । केतु साथ हो तो उच्च सफलता मिलती है । मंगल दशम में हो तो लग्नेश उच्च का होने से जातक भाग्यशाली होता है ।।

पुलिस प्रशासन में सफल होता है तथा पिता से लाभ, राजनीति में हो तो सफल होता है । चंद्र साथ होने पर माता-पिता से लाभ मिले एवं सभी प्रकार से सुखी होता है । सूर्य साथ हो तो बच्चों की पढ़ाई ठीक रहेगी ।।

बुध साथ हो तो अपनी सूझ-बुझ एवं परिश्रम से व्यापार में लाभ मिलेगा । परन्तु दशम में मंगल के साथ गुरु हो तो थोड़ी बाधा के बाद सफलता मिलती है । शुक्र साथ हो तो इलेक्ट्रॉनिक के व्यापार में सफल होता है ।।

शनि साथ हो तो तेल एवं मशीनरी, आटोपार्ट्‍स के व्यापार में सफल होता है । राहु साथ हो तो राजनीति में सफलता मिलती है । केतु साथ हो तो पिता, राज्य एवं व्यापार में हानि हो सकती है ।।

मंगल एकादश में हो तो संतान से लाभ परन्तु शेयर बाजार में हों तो बचकर रहें । ग्यारहवें भाव में सूर्य साथ हो तो विद्या उत्तम हो लेकिन आर्थिक मामलों में सावधानी बरतें ।।

बुध साथ हो तो व्यापार आदि में मित्रों-भाइयों से लाभ मिले । गुरु साथ हो तो आर्थिक मामलों में मिले-जुले परिणाम मिलें । शुक्र साथ हो तो धन-कुटुम्ब से लाभ, पत्नी या पति से लाभ, शेयर आदि में सफल होता है ।।

शनि साथ हो तो लोहे या ऑयल के व्यापार में सफल होकर लाभ अच्छा मिलता है । एकादश में राहु साथ हो तो मिले-जुले परिणाम मिलते हैं । केतु साथ हो तो खर्च अधिक करवाता है ।।

मंगल द्वादश में हो तो विदेश में सफल होता है या जन्मस्थान से दूर सफलता मिलती है । बारहवें में सूर्य साथ हो तो विद्या उत्तम हो एवं विदेश जाने का मौका मिलता है । चन्द्रमा साथ हो तो सुख में कमी और माता को कष्ट होता है ।।

बुध साथ होने पर विदेश या जन्मस्थान से दूर सफलता मिलेगी । गुरु साथ हो तो बाहर भाग्योदय हो एवं विदेश जाने का मौका मिलता है । शुक्र साथ हो तो ऐश्वर्य-संपन्नता देता है ।।

शक्र साथ हो तो भोग-विलास में खर्च अधिक करवाता है । शनि साथ हो तो हानि की आशंका, चश्मा अवश्य लगे । राहु साथ हो तो बाहरी संबंध ठीक न हों । केतु साथ हो तो विदेश में सफल हों परन्तु चश्मा अवश्य लगेगा ।।

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