पञ्चांग 01 अप्रैल 2020 दिन बुधवार।।

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Panchang 01 April 2020
Panchang 01 April 2020

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।

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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 01 अप्रैल 2020 दिन बुधवार।।

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।

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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).

पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

Panchang 01 April 2020

आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 01 अप्रैल 2020 दिन बुधवार।।
Aaj ka Panchang 01 April 2020.

विक्रम संवत् – 2077.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – प्रमादी.

शक – 1941.

अयन – उत्तरायण.

गोल – दक्षिण.

ऋतु – बसन्त.

मास – चैत्र.

पक्ष – शुक्ल.

गुजराती पंचांग के अनुसार – चैत्र शुक्ल पक्ष.

Panchang 01 April 2020

तिथि – सप्तमी 03:50 AM बजे तक उपरान्त अष्टमी तिथि है।।

नक्षत्र – आर्द्रा 19:29 PM तक उपरान्त पुनर्वसु नक्षत्र है।।

योग – शोभन 16:56 PM तक उपरान्त अतिगण्ड योग है।।

करण – वणिज 03:50 AM तक उपरान्त विष्टि 15:51 PM तक उपरान्त बव करण है।।

चन्द्रमा – मिथुन राशि पर।।

सूर्योदय – प्रातः 06:32:46

सूर्यास्त – सायं 18:51:07

राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 12:00 बजे से 13:30 बजे तक।।

विजय मुहूर्त (शुभ) – दोपहर 12.30 बजे से 12.54 बजे तक।।

Panchang 01 April 2020

अष्टमी तिथि विशेष – अष्टमी को नारियल एवं नवमी को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) त्याज्य होता है। अष्टमी तिथि बलवती एवं व्याधि नाशक तिथि मानी जाती है। इस तिथि के देवता भगवान शिव जी माने जाते हैं। इसलिये इस तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए।।

कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है। जया नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।।

मंगलवार को छोड़कर बाकि किसी दिन की भी अष्टमी शुभ मानी गयी है परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है, इसलिये भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।।

मित्रों, अष्टमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति धर्मात्मा होता है। मनुष्यों पर दया करने वाला तथा हरेक प्रकार के गुणों से युक्त गुणवान होता है। ये कठिन से कठिन कार्य को भी अपनी निपुणता से पूरा कर लेते हैं। इस तिथि के जातक सत्य का पालन करने वाले होते हैं यानी सदा सच बोलने की चेष्टा करते हैं। इनके मुख से असत्य तभी निकलता है जबकि किसी मज़बूर को लाभ मिले।।

Panchang 01 April 2020

मित्रों, जैसा कि आपको विदित है, कि बासन्तीय नवरात्र चल रहा है। आज इस चैत्र नवरात्र का अष्टम दिवस है, और आठवें दिन माता महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। जगतजननी, जगदम्बा, माता दुर्गा की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। दुर्गापूजा के आठवें दिन महागौरी की पूजा-उपासना का विधान है। इनकी शक्ति अमोघ और तत्काल फलदायिनी एवं सिद्धिदायिनी है। इनकी उपासना से भक्तों के सभी पापों का क्षय हो जाता है और पूर्वकृत पाप भी विनष्ट हो जाते हैं।।

माता के भक्तों को भविष्य में पाप-संताप, दैन्य-दुःख उसके पास कभी नहीं आते। वह सभी प्रकार से पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी हो जाता है। माता महागौरी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए देवी ने कठोर तपस्या की थी। जिससे इनका शरीर काला पड़ गया था। देवी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इन्हें स्वीकार किया।।

कहा जाता है, कि स्वयं शिव जी ने इनके शरीर को गंगा-जल से धोया था। कहते हैं, कि तब माता का स्वरुप विद्युत के समान अत्यंत कांतिमान गौर वर्ण का हो गया था और तभी से इनका नाम गौरी पड़ा। माता महागौरी रूप में देवी करूणामयी, स्नेहमयी, शांत और मृदुल दिखती हैं। देवता, ऋषि तथा मनुष्य सभी देवी के इसी रूप की प्रार्थना इस मन्त्र से करते हैं “सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते।।”

मित्रों, माता महागौरी से संबंधित एक अन्य कथा भी प्रचलित है, कथा के अनुसार एक बार की बात है, कि एक शेर काफी भूखा था। वह भोजन की तलाश में वहां पहुंचा जहां माता देवी उमा शिव को पति रूप में प्राप्ति हेतु तपस्या कर रही थीं। देवी को देखकर सिंह की भूख बढ़ गयी परंतु वह देवी के तपस्या से उठने का इंतजार करते हुए वहीं बैठ गया। इस इंतजार में वह काफी कमज़ोर हो गया और देवी जब तपस्या से उठी तो सिंह की दशा देखकर उन्हें उस पर बहुत दया आ गयी।।

तब माता ने उसे अपना सवारी बना लिया क्योंकि एक प्रकार से उसने भी तपस्या की थी। इसलिए माता गौरी का वाहन बैल और सिंह दोनों ही हैं। अष्टमी के दिन सुहागिनी महिलाओं को अपने सुहाग की दीर्घायु एवं सफलता के लिए देवी मां को चुनरी भेंट करना चाहिये। सबसे पहले लकड़ी की चौकी पर या मंदिर में माता महागौरी की मूर्ति स्थापित करें।।

इसके बाद चौकी पर सफेद वस्त्र बिछाकर उस पर माता महागौरी के यंत्र की स्थापना करें। मां सौंदर्य प्रदान करने वाली देवी हैं। हाथ में श्वेत पुष्प लेकर मां का ध्यान करें। मां का गौर वर्ण है, इस गौर वर्ण की तुलना शंख, चन्द्रमा और कुंद के पुष्प से की गयी है। इनकी आयु आठ वर्ष की मानी जाती है यथा – ‘अष्टवर्षा भवेद् गौरी।’ इनके समस्त वस्त्र एवं आभूषण आदि भी श्वेत हैं।।

महागौरी की चार भुजाएं हैं तथा इनका वाहन वृषभ है। इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल विराजमान है। ऊपरवाले बाएं हाथ में डमरू और नीचे के बाएं हाथ में वर-मुद्रा है। नवरात्रि के आठवें दिन माता महागौरी की पूजा की जाती है। माता अपने भक्तों के भीतर पल रही बुराइयों को मिटाकर उनको सद्बुद्धि एवं ज्ञान प्रदान करती है।।

अखण्ड सौभाग्य एवं सफलता की प्राप्ति हेतु आज माता महागौरी की विशिष्ट पूजा एवं विशिष्ट भोग का विस्तृत विश्लेषण, उनके प्रिय भोग तथा उनके मन्त्र के विषय में विस्तृत जानकारी हेतु इस लिंक को क्लिक करें:

Panchang 01 April 2020

आज बुधवार के दिन ये विशेष उपाय करें – बुधवार गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी का दिन है। इसलिये आज के दिन इनकी पूजा का विशेष महत्त्व होता है। आज के दिन गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।।

बुधवार का विशेष – बुधवार के दिन तेल मर्दन अथवा मालिश करने से माता लक्ष्मी प्रशन्न होती हैं और धनलाभ होता है – (मुहूर्तगणपति)।।

बुधवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से धन एवं पूण्य का लाभ होता है।। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।

दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो, यात्रा करनी ही हो तो धनिया, तिल की वस्तु, ईलायची अथवा पिस्ता खाकर यात्रा कर सकते है।।

Panchang 01 April 2020

मित्रों, बुधवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति मधुर वाणी बोलने वाले होते हैं। इस तिथि के जातक पठन पाठन में रूचि रखते हैं और ज्ञानी होते हैं। ऐसे लोगों का लेखन में अत्यधिक रूचि होती है और अधिकांशत: इसे अपनी जीवका का साधन भी बना लेते हैं। ये जिस विषय का चयन करते हैं उसके अच्छे जानकार होते हैं। इनके पास धन तो होता है परंतु ऐसे लोग धोखेबाज भी होते हैं।।

ऐसे जातक सामन्य रंग-रूप, बुद्धिमान, लेखक, पत्रकार, प्रकाशक एवं द्विस्वभाव के होते हैं। किसी एक कार्य को न कर अनेक कार्य में जुटे होते हैं। वैसे शान्तिप्रिय रहना इनका स्वभाव होता है। अधिकांशतः मार्केटिंग के क्षेत्र में ऐसे लोगों को उत्तम सफलता मिलती है। बुधवार को जन्म लेने वाले हमेशा असमंजस के शिकार रहते हैं। वह एक समय कई कार्यों पर हाथ आजमाने की कोशिश करते हैं, कई बार सफलता मिल भी जाती है और कई बार गिरते भी हैं।।

इनमें छल-कपट नहीं होता और कई बार तो ये दूसरों की गलतियां खुद पर तक ले लेते हैं। इनको लेखन, पत्रकारिता, प्रकाशन, बैंकिंग और मार्केटिंग के क्षेत्र में अपना किस्मत आजमाना चाहिये। इन क्षेत्रों में इन्हें अच्छी सफलता की संभावना होती है। इनके लिये बुधवार एवं शुक्रवार का दिन भाग्यवर्धक होता है तथा 3 और 6 इनका लकी नम्बर होता है।।

आज का सुविचार – मित्रों, यदि जीवन में लोकप्रिय होना हो तो सबसे ज्यादा “आप” शब्द का, उसके बाद “हम” शब्द का और सबसे कम “मैं” शब्द का प्रयोग करना चाहिए। इस संसार में कोई किसी का हमदर्द नहीं होता, लाश को शमशान में रखकर अपने लोग ही पुछ्ते हैं.. और कितना वक़्त लगेगा।।

Panchang 01 April 2020

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“मिथुन राशि में गुरू की महादशा में सभी ग्रहों का फल, भाग-13।।” – My Latest video.

“कर्क राशि में केतू की महादशा में सभी ग्रहों का फल, भाग-13।।” – My Latest video.

“सिंह राशि में बुध की महादशा में सभी ग्रहों का फल, भाग-13।।” – My Latest video.

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Panchang 01 April 2020

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वापी ऑफिस:- शॉप नं.- 101/B, गोविन्दा कोम्प्लेक्स, सिलवासा-वापी मेन रोड़, चार रास्ता, वापी।।

वापी में सोमवार से शुक्रवार मिलने का समय: 10:30 AM 03:30 PM.

वापी ऑफिस:- शनिवार एवं रविवार बंद.

सिलवासा ऑफिस:- बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के बाजु में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा।।

प्रतिदिन सिलवासा में मिलने का समय: 05: PM 08:30 PM

WhatsAap & Call: +91 – 8690 522 111.
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