पूजन विधि ।। भाग – 3.

0
244
Poojan Vidhi Part-3
Poojan Vidhi Part-3

पूजन विधि ।। भाग – 3. Poojan Vidhi Part-3.

जय श्रीमन्नारायण,

मित्रों, आप सभी को पूजन विधान के अंतर्गत मैंने पहले पूजन की तैयारी, पूजा सामग्री सजाने की विधि बताया । आगे भी मैंने अपने दुसरे अंक में आचमन, प्राणायाम, पवित्रीकरण, तिलक धारण करने की विधि से लेकर रक्षा विधान तक बताया ।।

अब यहाँ से आगे स्वस्तिपाठ से लेकर संकल्प तक की प्रक्रिया सरल करके सहज भाषा में बताने का प्रयास कर रहा हूँ ।।

अपनी जानकारी हेतु पूजन शुरू करने के पूर्व प्रस्तुत पद्धति एक बार जरूर पढ़ लें।

प्रथम पूजन की व्यवस्था, तब दीप प्रज्वालन, आचमन, पवित्रकरण, आसन शुद्धि, पवित्री धारणं, तिलक करणं, ग्रंथि बन्धनं, रक्षा विधान ।।

ब्राह्मण के हाथ से यजमान अपने हाथ में रक्षा सूत्र इस मन्त्र से बंधवाए:-

ॐ यदाबध्नन दाक्षायणा हिरण्य(गुं)शतानीकाय सुमनस्यमानाः ।
तन्म आ बन्धामि शत शारदायायुष्मांजरदष्टियर्थासम्‌ ।।

दीपक:- दीपक प्रज्वलित करें एवं हाथ धोकर दीपक का पुष्प एवं कुंकु से पूजन करें-

भो दीप देवरुपस्त्वं कर्मसाक्षी ह्यविघ्नकृत ।
यावत्कर्मसमाप्तिः स्यात तावत्वं सुस्थिर भव ।।

(दीप का पूजन कर प्रणाम करें)

स्वस्ति-वाचन:- निम्न मंगल मन्त्रों का सहज भाव से उच्चारण करें:- हस्ते अक्षत पुष्पाणि गृहीत्वा शांतिपाठं पठेयु: तदुपरि लक्ष्मीनारायणादिदेवान्प्रणमेत् ।।

।। अथ शान्तिपाठः ।।

ॐ आनोभद्राः क्रतवोयन्तु व्विश्वतोदब्धासोऽअपरीतासऽउद्धिदः ।।
देवानोयथासदमिद्वृधेऽअसन्नप्प्रायुवोरक्षितारोदिवेदिवे ।। १ ।।
देवानांभद्रासुमतिऋजूयतान्देवाना (गुं) रातिरभिनोनिवर्तताम् ।।
देवाना (गुं) सख्यमुप सेदिमाव्वयन्देवानऽआयुः प्प्रतिरंतुजीवसे ।। २ ।।
तान्पूर्व्वयानिविदाहूमहेव्वयम्भगम्मित्रमदितिन्दक्षमस्त्रिधम् ।।
अर्य्यमणम् ब्वरुण (गुं) सोममश्विनासरस्वतीनः सुभगामयस्करत् ।। ३ ।।
तन्नोव्वातोमयोभुव्वातुभेषजन्तन्मातापृथिवीतत्पिताद्यौः ।।
तद्‌ग्रावाणः सोमसुतो मयो भुवस्तदश्विनाश्रृणुतन्धिष्ण्यायुवम् ।। ४ ।।
तमीशानञ्जगतस्तस्थुषस्पतिन्धियञ्जिन्न्वमवसेहूमहेव्वयम् ।।
पूषानोयथाव्वेदसामसदवृधेरक्षितापायुरदब्धः स्वस्तये ।। ५ ।।

स्वस्तिनऽइन्द्रोवृद्धश्रवाः स्वस्तिनः पूषाव्विश्ववेदाः ।।
स्वस्तिनस्तार्क्ष्योऽअरिष्टनेमिः स्वस्तिनोबृहस्पतिर्द्दधातु ।। ६ ।।
पृषदश्वामरुतः पृश्रिमातरः शुभंयावानोव्विदथेषुजग्मयः ।।
अग्निर्जिव्हामनवः सूरचक्षसोव्विश्वेनोदेवाऽअवसागमन्निह ।। ७ ।।
भद्रङ्‌कर्णेभिः श्रृणुयामदेवाभद्रंपश्येमाक्ष भिर्यजत्राः ।।
स्थिरैरङैस्तुष्टुवा (गुं) सस्तनूभिर्व्व्यशेमहिदेवहितंयदायुः ।। ८ ।।
शतमिन्नुशरदोऽअन्तिदेवायत्रानश्चक्राजरसन्तनूनाम् ।।
पुत्रासोयत्र पितरोभवन्तिमानोमध्यारीरिषतार्युगन्तोः ।। ९ ।।
अदितिर्द्योरदितिरन्तरिक्षमदितिर्मातासपितासपुत्रः ।।
विश्वेदेवाऽअदितिः पञ्चजनाऽअदितिर्जातमदिति र्ज्जनित्त्वम् ।। १० ।।
तम्पत्प्नीभिरनुगच्छेमदेवाः पुत्रैर्भ्रातृभिरुतवाहिरण्यैः ।।
नाकृङश्णानाः सुकृतस्य लोकेतृतीयेपृष्ठेऽअधिरोचनेदिवः ।। ११ ।।
आयुष्यँव्वर्च्चस्व (गुं) रायस्पोषमौद्धिदम् ।।
इद (गुं) हिरण्यं वर्च्चस्वज्जैत्रायाविशतादुमाम् ।। १२ ।।

द्यौः शांतिरन्तरिक्ष (गुं) (र्ठः) शांतिः पृथिवीशांतिरापः शांति रोषधयः शांतिः ।।
व्वनस्पतयः शांतिर्विश्वेदेवाः शांतिर्ब्रह्मशांतिः सर्व्व (गुं, र्ठः) शांतिः शांतिरेवशांतिः सामाशांतिरोधि ।। १३ ।।

यतोयतः समीहसेततोनोऽअभयङ्‌कुरु ।।
शन्नः कुरु प्रजाभ्योभयन्नः पशुभ्यः ।। १४ ।।

।। सुशांतिर्भवतु ।।

देवता नमस्कार:-
ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः ।। ॐ श्री लक्षीनारायणाभ्यां नमः ।। ॐ श्री उमामहेश्वराभ्यां नमः ।। ॐ श्री वाणीहिरण्यगर्भाभ्यां नमः ।। ॐ श्री शचीपुरंदराभ्यां नमः ।। ॐ श्री मातृपितृचरणकमलेभ्यो नमः ।। ॐ श्री कुलदेवताभ्यो नमः ।। ॐ श्री इष्टदेवताभ्यो नमः ।। ॐ श्री ग्रामदेवताभ्यो नमः ।। ॐ श्री स्थानदेवताभ्यो नमः ।। ॐ श्री वास्तुदेवताभ्यो नमः ।। ॐ श्री सर्वेभ्यो देवभ्यो नमः ।। ॐ श्री सर्वाभ्यो देविभ्यो नम: ।। ॐ श्री सर्वेभ्यो ब्राह्मणेभ्यो नम: । ॐ श्री सिद्धिबुद्धिसहितेन श्री मन्महागणाधिपतये नम: ।।

ॐ सुमुखश्चैकदंतश्च कपिलोगजकर्णकः ।।
लंबोदरश्च विकटो विघ्रनाशो विनायकः ।। १ ।।
धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचंद्रो गजाननः ।।
द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि ।। २ ।।
विद्यारंभे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा ।।
संग्रामेसंकटे चैव विघ्रस्तस्य न जायते ।। ३ ।।
शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजं ।।
प्रशन्न वदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ।। ४ ।।
अभीप्सितार्थसिद्धयर्थम् पूजितो यः सुरासुरैः ।।
सर्वविघ्रहरस्तस्मै श्री गणाधिपतये नमः ।। ५ ।।
सर्वमङगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।।
शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोस्तुते ।। ६ ।।
सर्वदा सर्व कार्येषु नास्ति तेषाम् मंगलं ।।
येषां हृदयस्थो भगवान मंगलायतनम् हरिः ।। ७ ।।
तदेव लग्नं सुदिनं तदेव ताराबलं चन्द्रबलं तदेव ।।
विद्याबलं दैवबलं तदेव लक्ष्मीस्पतेतेंघ्री युगं स्मरामि ।। ८ ।।
लाभस्तेषां जयस्तेषां कुतस्तेषां पराजयः ।।
येषांमिन्दीवरस्यमो ह्रिदयस्थो जनार्दनः ।। ९ ।।
यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः ।।
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवानीतिर्मतिर्मम् ।। १० ।।
अनन्याश्चिन्तयन्तो माम् ये जनाः पर्युपासते ।।
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् ।। ११ ।।
स्मृते: सकलकल्याणं भाजनं यत्र जायते ।।
पुरुषं तमजं नित्यं व्रजामि शरणं हरिम् ।। १२ ।।
सर्वेष्वारम्भ कार्येषु त्रयस्त्रिभुवनिश्वरा: ।।
देवा दिशन्तु न: सिद्धिं ब्रह्मेशानजनार्दना: ।। १३ ।।
विश्वेशं माधवं ढूण्ढीम् दण्डपाणिम् च भैरवं ।।
वन्दे काशीं गुहां गंगां भवानीम् मणिकर्णिकां ।। १४ ।।
विनायकं गुरुं भानुं ब्रह्मविष्णुमहेश्वरान् ।।
सरस्वती प्रणम्यादौ सर्वकार्यार्थसिद्धये ।। १५ ।।
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ ।।
निर्विघ्रं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ।। १६ ।।

।। इति प्रणम्य ।।

हस्ते जलाक्षत पूगीफल द्रव्यं च गृहीत्वा संकल्पं कुर्यात् ।।

संकल्प:- अपने दाहिने हाथ में जल, पुष्प, अक्षत व द्रव्य लेकर श्रीसत्यनारायण भगवान आदि के पूजन का संकल्प करें-

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य अद्य श्री ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीयेपरार्धे श्री श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कृत त्रेता द्वापरान्ते कलि-युगे कलि प्रथम चरणे जम्बूद्विपे भूर्लोके भरतखंडे भारतवर्षे आर्य्यावर्तेकदेशांतर्गते (अमुक) क्षेत्रे/नगरे/ग्रामे (अमुक) संवत्सरे, (अमुक) ऋतौ, मासानाममासोत्तमे मासे (अमुक) मासे (अमुक) तिथौ (अमुक) वासरे (अमुक) नक्षत्रे (अमुक) राशिस्थिते श्री चन्द्रे (अमुक) राशिस्थिते श्री सूर्ये शेषेषु ग्रहेषु यथा यथं राशि स्थान स्थितेषु सत्सु एवं ग्रहगुण विशेषण विशिष्टायां शुभ पुण्यतिथौ अमुकगोत्रोत्पन्नोऽहं अमुक (अगर ब्राह्मण हो और चाहे कोई भी टाइटल हो, तो भी – शर्माऽहं बोले) (अगर क्षत्रिय हो और चाहे कोई भी टाइटल हो, तो भी – वर्माऽहं बोले) (अगर बनिये की श्रेणी में हो और चाहे कोई भी टाइटल हो, तो भी – गुप्तोऽहं बोले) और (उसके नीचे चाहे कोई भी टाइटल हो, तो भी – भक्तोऽहं बोले) ममगृहे सकुटुंबस्य सपरिवारस्यसर्वारिष्टप्रशांत्यायुरारोग्यैश्वर्यसुख श्रीप्राप्त्यर्थं पुत्रपौत्रधनधान्यादिसंपत्प्रवृध्दये अभिलषितमनोरथसिध्यर्थं वास्तुकृतदोषोपशांतये समस्त देव्यादिदेवताप्रीतये सनवग्रहसहितेन अमुक देव पूजनं ऽहं करिष्ये ।।

तदंगत्वेनगणपतिपूजनं पुण्याहवाचनं मातृकावसोर्धारापूजनं वृध्दि श्राध्द आचार्य ऋत्विग्वरणादिकर्मऽहंकरिष्ये ।।

।। इति संकल्प्य ।।

गणपतिपूजनं स्वस्तिपुण्याहवाचनं मातृकावसोर्धारापूजनम आयुष्यमंत्रजपं नांदीश्राध्दंचपूर्ववत् ‍कृत्वा आचार्यमष्टौचतुरोवाऋत्विजश्चवृत्वावस्त्रालंकारादिभिः संपूजयेत ।।

(अमुक) गोत्रोत्पन्न (अमुक) नाम ( शर्मा/ वर्मा/ गुप्तो भक्तोऽहम्‌ अहं) ममअस्मिन कायिक वाचिक मानसिक ज्ञातज्ञात सकल दोष परिहारार्थं श्रुतिस्मृतिपुराणोक्त फल प्राप्त्यर्थं आरोग्यैश्वर्य दीर्घायुः विपुल धन धान्य समृद्धर्थं पुत्र-पौत्रादि अभिवृद्धियर्थं व्यापारे उत्तरोत्तरलाभार्थं सुपुत्र पौत्रादि बान्धवस्य सहित श्रीसत्यनारायण देव पूजनं अहम् करिष्ये । तत्र सर्वे आदौ मम जीवने तथा च कार्य क्षेत्रेण आगतायां विघ्नायां सर्व विघ्न प्रशमनार्थाय गणेश-अम्बिका पूजनम्‌ च अहम् करिष्ये/ करिष्यामि अथवा कारयिष्ये ।।

।। इति संकल्प्य ।।

ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे  YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं – Click Here & Watch My YouTube Channel.

इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज – My facebook Page.

वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।

किसी भी तरह के पूजा-पाठ, विधी-विधान, ग्रह दोष शान्ति आदि के लिए तथा बड़े से बड़े अनुष्ठान हेतु योग्य एवं विद्वान् ब्राह्मण हमारे यहाँ उपलब्ध हैं ।।

संपर्क करें:- बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के बाजु में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा ।।

WhatsAap & Call: +91 – 8690 522 111.
E-Mail :: balajijyotish11@gmail.com

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here