उन्नति का रहस्य दिशाओं में छुपी है – वास्तु टिप्स ।।

घर का उत्तर-पश्चिम अर्थात वायव्य कोण के देवता पवन देव हैं । जो वायु के स्वामी हैं, जिनके माध्यम से सम्पूर्ण विश्व में वायु तत्व संचालित होता है । यह दिशा विवेक, जिम्मेदारी, योग्यता, योजनाओं एवं बच्चों को प्रभावित करती है ।।

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उन्नति का रहस्य दिशाओं में छुपी है – वास्तु टिप्स ।। The secret lies in the progress for directions.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, चुम्बकीय तरंगे एवं प्राकृतिक ऊर्जा के स्रोत भी एक निश्चित दिशा में लाभ-हानि, अनुकूलता-प्रतिकूलता प्रदान करते हैं । जिससे मानव जीवन को प्रगति और विकास एवं उन्नति संभव हो पाती है ।।

हवा के चलने को आज भी हमारे भारत में उसे उसी दिशा का नाम दे दिया जाता है । जैसे- पूर्वी बयार पूर्व से चलने वाली हवा को कहते हैं । इसी प्रकार अन्य दिशाओं से चलने वाली हवाओं का भी अलग-अलग नाम होता है ।।

मित्रों, प्रत्येक मनुष्य जब भी चलता है किसी न किसी दिशा में ही चलता है । बिना दिशा के ज्ञान के वह कभी चल ही नहीं सकता । अगर चलेगा तो वह सही दिशा में जाएगा या गलत दिशा में ।। progress for directions

जिस व्यक्ति, परिवार, समुदाय, समाज, राष्ट्र एवं विश्व की दिशा सही है, तभी वह विकास कर सकता है, अपनी दशा को सुधार सकता है । दिशा ही तो है जिसके सहारे जीवन में सुख और दुःख की सौगात आया करती है ।।

मित्रों, इन दिशाओं का बड़ा ही महत्त्व है चाहे वह लक्ष्य प्राप्त करने हेतु हो या फिर भवन निर्माण के लिए हो । प्रत्येक पल हम इन दिशाओं के सहारे ही चलते हैं । वास्तु में इन दिशाओं का कुछ ज्यादा ही महत्त्व है ।। progress for directions

व्यक्ति को जीवन पथ पर चलने में लापरवाही अथवा दिशा हीनता उसे कहीं का नहीं छोड़ती । उसी प्रकार वास्तु शास्त्र में अथवा भवन निर्माण में की गई दिशाओं की उपेक्षा उसे आजीवन कष्ट देती रहती है ।।

मित्रों, ऐसे में सही और गलत दिशाओं का चयन बिल्कुल आप पर निर्भर है । क्योंकि जीवन में हमें हर पल सही दिशा की जरूरत रहती है । फिर चाहे वो अध्ययन का क्षेत्र हो या व्यापार का क्षेत्र हो अथवा भवन बनाने का क्षेत्र हो ।।

सभी कार्य के लिए नियम व दिशाएँ निर्धारित हैं जिनके सदुपयोग से आप अपने जीवन को उच्च स्तरीय बना सकते हैं । अपने जीवन की प्रतिकूलता को सुधार कर बेहतर बना सकते हैं ।। progress for directions

मित्रों, आज के इस आधुनिकता की दौड़ एवं जानकारी के अभाव में हम वास्तु जैसे अमूल्य विद्या को लगभग भूलते जा रहे हैं । यही कारण है की हम अपने रहने के स्थान अर्थात भवन निर्माण की कला से अनभिज्ञ हैं ।।

यही वजह है की प्राकृतिक ऊर्जा का प्रवेश हमारे जीवन में अवरूद्ध हो जाता है और हमारा जीवन भ्रम, दुःख, हानि, तनाव और क्रोध के भंवर में फँस जाता है । वास्तु ही एक ऐसा विषय है जो दिशाओं तथा प्राकृतिक ऊर्जा का तालमेल बिठाता है ।।

मित्रों, इस विद्या के सहारे हम हमारे जीवन के रास्तों को सुगम बना सकते हैं । इस कला के प्रयोग से जहाँ हम प्राकृतिक तालमेल बैठाते हुए हानि से बच सकते हैं एवं अपने भवन को अति सुन्दर, मजबूत और टिकाऊ भी बना सकते हैं ।।

वास्तु शास्त्र में दिशाओं को विशेष स्थान प्राप्त है जिसके वैज्ञानिक आधार भी होते हैं । यह दिशाएँ प्राकृतिक ऊर्जा और ब्रह्माण्ड में व्याप्त रहस्यमयी ऊर्जा को संचालित करती हैं ।। progress for directions

मित्रों, वो प्रकृति की उर्जा ही होती है जो राजा को रंक और रंक को राजा बनाने की क्षमता रखती हैं । वास्तु शास्त्र के अनुसार प्रत्येक दिशा में अलग-अलग तत्व संचालित होते हैं । इन तत्वों का सञ्चालन अथवा उनका प्रतिनिधित्व भी अलग-अलग देवताओं द्वारा किया जाता है ।।

जैसे उत्तर दिशा के देवता कुबेर हैं जिन्हें धन का स्वामी कहा जाता है । सोम को स्वास्थ्य का स्वामी कहा जाता है । जिससे आर्थिक मामले और वैवाहिक तथा यौन संबंध एवं स्वास्थ्य प्रभावित होता है ।।

मित्रों, उत्तर-पूर्व अर्थात ईशान कोण के देवता सूर्य को कहा जाता हैं जिन्हें रोशनी और ऊर्जा तथा प्राण शक्ति का कारक बताया गया हैं । इससे व्यक्ति में स्फूर्ति, जागरूकता, बुद्धि एवं ज्ञान का विभाग प्रभावित होता हैं ।।

पूर्व दिशा के देवता इंद्र हैं जो सम्पूर्ण देवताओं के राजा हैं । वैसे आम तौर पर सूर्य को भी इस दिशा का स्वामी माना जाता । जिनके माध्यम से प्रत्यक्ष रूप से सम्पूर्ण विश्व को रोशनी और ऊर्जा मिलती है ।। progress for directions

परन्तु वास्तुशास्त्रानुसार इस दिशा का प्रतिनिधित्व देवराज करते हैं । जिससे सुख-संतोष तथा आत्मविश्वास प्रभावित होता है । अगर आपकी पूर्व दिशा ठीक नहीं है तो आपके जीवन में सुख-संतोष एवं आत्मविश्वास की कमी का होना स्वाभाविक बात है ।।

मित्रों, आपके घर का दक्षिण-पूर्व अर्थात “अग्नेय कोण” इसके देवता अग्नि देव हैं जो आग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं । जिससे पाचन शक्ति तथा धन और स्वास्थ्य के मामले प्रभावित होते हैं ।।

अगर आपके घर की इस दिशा में समस्या है तो स्वाभाविक है इस मामले के तकलीफ का होना । दक्षिण दिशा के देवता यमराज हैं जो मृत्यु के देवता हैं । परन्तु इनकी प्रसन्नता से जीवन में धन, सफलता, खुशियाँ एवं शान्ति की प्राप्ति होती है ।।

मित्रों, दक्षिण-पश्चिम दिशा के देवता निरती हैं जिन्हे दैत्यों का स्वामी कहा जाता है । जो व्यक्ति को आत्मशुद्धता, आत्मविश्वास और रिश्तों में सहयोग तथा आयु प्रभावित होती है ।। progress for directions

अगर आपके घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा ठीक नहीं होगी तो आपकी आत्मशुद्धता, आत्मविश्वास और रिश्तों में असहयोग तथा आपकी आयु प्रभावित होगी । पश्चिम दिशा के देवता वरूण देव हैं जिन्हें जलतत्व का स्वामी कहा जाता है ।।

मित्रों, वरुण देव जो अखिल विश्व में वर्षा करने और रोकने का कार्य करते हैं । जो सौभाग्य, समृद्धि एवं पारिवारिक ऐश्वर्य तथा संतान प्रभावित करते हैं । ऐसे में ये सबकुछ आपका प्रभावित होता है अगर आपके घर की पश्चिम दिशा सहीं होती ।।

घर का उत्तर-पश्चिम अर्थात वायव्य कोण के देवता पवन देव हैं । जो वायु के स्वामी हैं, जिनके माध्यम से सम्पूर्ण विश्व में वायु तत्व संचालित होता है । यह दिशा विवेक, जिम्मेदारी, योग्यता, योजनाओं एवं बच्चों को प्रभावित करती है ।।

घर के वायव्य कोण को ठीक रखने से जीवन में ये सभी बातें सहजता से प्राप्त होती है । इस प्रकार यह ज्ञात होता है कि वास्तु शास्त्र में जो दिशा निर्धारण किया गया है वह प्रत्येक पंच तत्वों के संचालन में अहं भूमिका निभाते हैं ।। progress for directions

मित्रों, हम मनुष्यों का ये शरीर जिन पंच तत्वों से बना हुआ है । अगर ये शरीर दिशाओं के अनुकूल रहे तो यही दिशाएँ हमें रंक से राजा बना देतीं हैं और हमारे नीरस जीवन को भी हर प्रकार के रस और रंगो से भर देती हैं ।।

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