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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 05 जुलाई 2026 दिन रविवार।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

आज का पञ्चांग 05 जुलाई 2026 दिन रविवार।।
Aaj ka Panchang 05 July 2026.
विक्रम संवत् – 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – सिद्धार्थ.
शक – 1948.
अयन – याम्यायनम्.
गोल – सौम्य.
ऋतु – ग्रीष्म.
मास – आषाढ़.
पक्ष – कृष्ण.
गुजराती पंचांग के अनुसार – निज ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष.
Panchang 05 July 2026
तिथि – पञ्चमी 13:31 PM बजे तक उपरान्त षष्ठी तिथि है।।
नक्षत्र – शतभिषा 15:13 PM तक उपरान्त पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र है।।
योग – आयुष्मान 16:40 PM तक उपरान्त तक उपरान्त सौभाग्य योग है।।
करण – कौलव 01:10 AM तक उपरान्त तैतिल 13:31 PM तक उपरान्त गर करण है।।
चन्द्रमा – कुम्भ राशि पर।।
सूर्य – मिथुन राशि एवं मृगशिरा नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:04:35
मुम्बई सूर्यास्त – सायं 19:20:33
वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 05:14:40
वाराणसी सूर्यास्त – सायं 18:46:52
राहुकाल (अशुभ) – सायं 17:42 बजे से 19:22 बजे तक।।
विजय (शुभ) मुहूर्त – दोपहर 12.31 PM से 12.55 बजे तक।।
Panchang 05 July 2026
पञ्चमी तिथि विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।।
इस पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।।
मित्रों, पञ्चमी तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति गुणवान होता है। इस तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह माता पिता की सेवा को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म समझता है। इनके व्यवहार में उत्तम श्रेणी का एक सामाजिक व्यक्ति दिखाई देता है। इनके स्वभाव में उदारता और दानशीलता स्पष्ट दिखाई देती है। ये हर प्रकार के सांसारिक भोग का आनन्द लेते हैं और धन धान्य से परिपूर्ण जीवन का आनंद उठाते हैं।।
Panchang 05 July 2026
शतभिषा नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- शतभिषा नक्षत्र में जन्मा जातक बहुत साहसी एवं मजबूत विचारों वाला होता है। अत्यधिक सामर्थ्य एवं स्थिर बुद्धि के होते हुए भी कभी-कभी जिद्दी और संवेदनहीन प्रतीत होते हैं। सभी प्रकार से ज्ञानी होते हुए भी आप आत्म केन्द्रित होते हैं। आप अधिक संतान वाले एवं दीर्घायु होते हैं। शतभिषा नक्षत्र के जातक रहस्यमय एवं समृद्धशाली व्यक्ति होते हैं। इनको अपने आस-पास के लोगों से सम्मान प्राप्त होता है।।
यदि आपका जन्म शतभिषा नक्षत्र में हुआ है तो आप अत्यंत आकर्षक और मजबूत व्यक्तित्व के स्वामी होंगे। आपकी उपस्थिति गरिमामय और प्रभावशाली होती है जो कि दूसरों को आपकी ओर आकर्षित होने को विवश कर देती हैं। चौड़ा माथा, तीखी नाक और सुंदर नेत्रों के कारण आप और भी आकर्षक दिखते हैं। तेज़ स्मरण शक्ति आपके व्यक्तित्व को और मजबूती देती है।।
शतभिषा नक्षत्र के जातकों में सकारात्मक और नकारात्मक पहलू का संतुलित समावेश रहता है। आप अपने सिद्धांतों पर अडिग रहते हैं और किसी भी कीमत पर उनसे समझौता नहीं करते। जिस कार्य को आप उचित नहीं समझते वह कार्य करने के लिए आपको कोई बाध्य नहीं कर सकता। आप सहृदय व्यक्ति होंगे जो कोमल स्वभाव के कारण सदा ही दूसरों की मदद के लिए तैयार रहते हैं।।
आप किसी को हानि नहीं पहुंचाते जब तक की सामने वाला आपको नुक्सान न पहुंचाए। आप एक बुद्धिमान व्यक्ति हे जो इश्वर में पूर्ण आस्था रखते हैं। आप सादा जीवन ब्यतित करने में ही विश्वास रखते हैं। परन्तु आपके व्यक्तित्व से आकर्षित हुए बिना कोई नहीं रह सकता। आप जीवन में खूब प्रशंसा और सम्मान पाते हैं। अपने कार्यक्षेत्र में आप पूरी लगन और मेहनत के साथ काम करते हैं और निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहते हैं।।
अच्छी शिक्षा के कारण आप जीवन में बहुत पहले ही अपने करियर का आरंभ कर लेते हैं। 34 वर्ष तक आप संघर्षरत रहते हैं परन्तु उसके बाद का समय बिना किसी बड़ी रुकावट के आपको उन्नति देता है। आपका पारिवारिक जीवन आपके व्यावसायिक जीवन की भांति सुखपूर्वक नहीं होता है। आप अपने परिजनों के कारण जीवन में बहुत कठिनाइयाँ झेलते हैं। हालाँकि आपका व्यवहार उनके प्रति प्रेमपूर्ण ही रहता है।।
इस कारण शतभिषा नक्षत्र के जातक मानसिक रूप से अशांत रहते हैं। पिता की अपेक्षा माता से आपको अधिक लगाव रहता है। साथ ही आपको भी उनसे बहुत स्नेह भी मिलता है। शतभिषा के जातकों का दांपत्य जीवन सुखमय नहीं होता है। सब कुछ होते हुए भी आपका अपने जीवन साथी के साथ सदा ही मतभेद रहता है। शतभिषा नक्षत्र में जन्मी जातिकायें कर्मपरायण एवं परोपकारी होती हैं।।
शतभिषा नक्षत्र में जन्मी जातिकायें सादे किन्तु आकर्षक व्यक्तित्व के कारण लम्बे अरसे तक स्मरण रखी जाती है। शतभिषा नक्षत्र में जन्मे जातक बिगड़े हुए काम को भी बड़े सूझ-बूझ के साथ बना देते हैं। शतभिषा नक्षत्र के जातक ह्रदय रोग, उच्च रक्तचाप, मुख से सम्बंधित अथवा गुप्त रोगों के शिकार हो ही जाते हैं।।
प्रथम चरण:- शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है। शतभिषा नक्षत्र में जन्म होने पर जन्म राशि कुंभ तथा राशि का स्वामी शनि, वर्ण शूद्र, वश्य नर, योनि अश्व, योनि महिष, गण राक्षस तथा नाड़ी आदि हैं। ऐसे जातक पर राहु और शनि का प्रभाव रहता है। इस शतभिषा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी बृहस्पति हैं। शतभिषा नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा जातक कुशल वक्ता होता है। शतभिषा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी बृहस्पति शनि का शत्रु है और राहु का भी शत्रु है। अतः बृहस्पति की दशा अपेक्षित फल नहीं देती है। बृहस्पति में राहु एवं शनि की अंतरदशा कष्टदायी होगा। परन्तु राहु की दशा उत्तम फल देती है।।
द्वितीय चरण:- शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस शतभिषा नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शनि हैं। शतभिषा नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्मा जातक अपने समाज के अग्रगण्य धनवानों में गिने जाते हैं। शतभिषा नक्षत्र के दूसरे चरण का स्वामी शनि लग्नेश भी है। अतः शनि की दशा शुभ फलदायी होती है। राहु की स्वतंत्र दशा उत्तम फल देगी, परन्तु राहु में शनि या शनि में राहु की अन्तर्दशा शत्रु तुल्य कष्ट देगी।।
तृतीय चरण:- शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस शतभिषा नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शनि हैं। शतभिषा नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मा जातक अपने समाज में सुखी एवं संपन्न व्यक्ति होता है। शतभिषा नक्षत्र के तीसरे चरण का स्वामी शनि लग्नेश भी है। अतः शनि की दशा शुभ फल देती है। राहु की स्वतंत्र दशा उत्तम फल देती है परन्तु राहु में शनि या शनि में राहु की अन्तर्दशा शत्रु तुल्य कष्ट देती है।।
चतुर्थ चरण:- शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस शतभिषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी बृहस्पति हैं। शतभिषा नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मे जातक का पुत्र योग प्रबल होता है। शतभिषा नक्षत्र के चौथे चरण का स्वामी बृहस्पति शनि का शत्रु है और राहु का भी शत्रु है। अतः बृहस्पति की दशा अपेक्षित फल नहीं देती है। लग्नेश शनि की दशा-अन्तर्दशा जातक को उत्तम स्वस्थ्य एवं उन्नत्ति देती है।।
Panchang 05 July 2026
मित्रों, आज रविवार को सुबह भगवान सूर्य को ताम्बे के एक लोटे में लाल चन्दन, गुड़ और लाल फुल मिलाकर अर्घ्य इस मन्त्र से प्रदान करें। अथ मन्त्रः- एही सूर्य सहस्रांशो तेजो राशे जगत्पते। अनुकम्प्य मां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकर।। अथवा गायत्री मन्त्र से भी सूर्यार्घ्य दे सकते हैं।।
इसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। भोजन में मीठा भोजन करना चाहिये नमक का परित्याग करना अत्यन्त श्रेयस्कर होता है। इस प्रकार से किया गया रविवार का पूजन आपको समाज में सर्वोच्च प्रतिष्ठा एवं अतुलनीय धन प्रदान करता है। क्योंकि सूर्य धन और प्रतिष्ठा का कारक ग्रह है।।
दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।।
रविवार का विशेष – रविवार के दिन तेल मर्दन करने से ज्वर (बुखार लगता) होता हैं – (मुहूर्तगणपति)।।
रविवार को क्षौरकर्म (बाल, दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से बुद्धि और धर्म की हानि होती है। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
विशेष जानकारी – मित्रों, रविवार के दिन, चतुर्दशी एवं अमावस्या तिथियों में तथा श्राद्ध एवं व्रत के दिन स्त्री सहवास नहीं करना चाहिये। साथ ही तिल का तेल, लाल रंग का साग तथा कांसे के पात्र में भोजन करना भी शास्त्रानुसार मना है अर्थात ये सब नहीं करना चाहिये।।
Panchang 05 July 2026
रविवार ध्रुव प्रकृति का दिन माना जाता है। रविवार भगवान सूर्य का दिन होता है। यह भगवान विष्णु का दिन भी माना जाता है। वैदिक सनातन धर्म में इसे सर्वश्रेष्ठ वार माना गया है। अच्छा स्वास्थ्य व तेजस्विता पाने के लिए रविवार के दिन उपवास रखना चाहिए। प्रचलन से सप्ताह का पहला वार सोमवार को माना जाता है क्योंकि रविवार को छुट्टी का नाम घोषित है। परंतु सही मायने में तो रविवार सप्ताह का प्रथम वार ही है। परंतु रविवार को कुछ ऐसे कार्य जिसे यदि आप करते हैं तो इससे आपन नुकसान उठाना पड़ सकता है।।
रविवार के दिन पश्चिम और वायव्य दिशा में यात्रा न करें। इन दिशाओं में यात्रा करना जरूरी हो तो रविवार को दलिया, घी या पान खाकर या इससे पहले पांच कदम पीछे चलकर ही इस दिशा में जाएं क्योंकि इस दिन खासकर पश्चिरम में दिशा का शूल माना जाता है। रविवार को तांबे से निर्मित चीजों को बेचने से बचना चाहिए। तांबे के अलावा सूर्य से संबंधित अन्य धातु या वस्तुएं भी ना बेचें।।
रविवार के दिन नीले, काले, कत्थई और ग्रे कलर के कपड़े नहीं पहनना चाहिए। काले या नीले से मिलते जुलते कपड़े तो कदापि ना पहनें। रविवार को नमक नहीं खाना चाहिए। इससे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है और हर कार्य में बाधा आती है। खास कर सूर्यास्त के बाद तो नमक बिलकुल भी नहीं खाना चाहिए।।
रविवार को दिन में सहवास करना और मांस एवं मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन शनि से संबंधित पदार्थों का सेवन भी नहीं करना चाहिए। आमतौर पर लोग रविवार को ही बाल कटाते हैं परंतु इस दिन बाल कटाने से सूर्य कमजोर होता है। इस दिन शरीर में तेल मालिश भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह सूर्य का दिन होता है और तेल शनि का होता है।।
Panchang 05 July 2026
मित्रों, रविवार सप्ताह का प्रथम दिन होता है, इसके अधिष्ठात्री देव सूर्य को माना जाता है। इस दिन जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति तेजस्वी, गर्वीले और पित्त प्रकृति के होते है। इनके स्वभाव में क्रोध और ओज भरा होता है तथा ये चतुर और गुणवान होते हैं। इस दिन जन्म लेनेवाले जातक उत्साही और दानी होते हैं तथा संघर्ष की स्थिति में भी पूरी ताकत से काम करते हैं।।
रविवार को जन्म लेनेवाले जातक सुन्दर एवं गेंहूए रंग के होते हैं। इनमें तेजस्विता का गुण स्वाभाविक ही होता है। महत्वाकांक्षी होने के साथ ही प्रत्येक कार्य में जल्दबाजी करते है और सफल भी होते हैं। उत्साह इनमें कूट-कूट कर भरा होता है तथा ये परिश्रम से कभी भी घबराते नहीं हैं। ये हर कार्य में रूचि लेने वाले होते हैं परन्तु ये लोग समय के पाबंद नहीं होते। ये जातक अपना करियर किसी भी क्षेत्र में अपने कठिन परिश्रम से बनाने की क्षमता रखते हैं। इनका शुभ दिन रविवार तथा शुभ अंक 7 होता है।।
आज का सुविचार – मित्रों, गलती कबूल़ करने और गुनाह छोङने में कभी देर ना करना। क्योंकि सफर जितना लंबा होगा वापसी उतनी ही मुशिकल हो जाती हैं। दुनिया में सिर्फ माँ-बाप ही ऐसे हैं जो बिना किसी स्वार्थ के प्यार करते हैं। कोई देख ना सका उसकी बेबसी जो सांसें बेच रहा हैं गुब्बारों में डालकर।।
Panchang 05 July 2026
सूर्य की महादशा में मंगल विजय और बुध कुष्ठ रोग देता है ।।…. आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें:

