प्रतियोगी परीक्षा में सफलता का योग।। Yoga for Success in Competitive Examinations.
प्रतियोगी परीक्षा का ज्योतिषीय परिचय।। Introduction.
मित्रों, हमने पिछले लेखों में शिक्षा, उच्च शिक्षा तथा विदेश में शिक्षा से जुड़े योगों को विस्तार से समझा था। परंतु वर्तमान युग में एक अत्यंत व्यावहारिक तथा सर्वाधिक चिंताजनक प्रश्न यह भी है कि प्रतियोगी परीक्षाओं, जैसे लोक सेवा आयोग, बैंकिंग, रेलवे अथवा अन्य किसी भी कठिन चयन-परीक्षा में जातक को सफलता मिलेगी अथवा नहीं। आज लाखों युवक-युवतियां वर्षों तक अथक परिश्रम करते हैं। परंतु फिर भी बार-बार असफलता का सामना करना पड़ता है। जिसके पीछे प्रायः कुछ सूक्ष्म ज्योतिषीय कारण भी उत्तरदायी होते हैं।।
वैदिक ज्योतिष में प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के योग का विश्लेषण करने के लिए मुख्य रूप से षष्ठ भाव, अर्थात प्रतिस्पर्धा तथा विजय का प्रमुख भाव, पंचम भाव अर्थात बुद्धि एवं स्मरण-शक्ति, दशम भाव अर्थात अंतिम परिणाम, तथा इन सभी के स्वामियों के परस्पर संबंध का गहन अध्ययन किया जाना चाहिए। जब यह सभी भाव तथा ग्रह एक साथ अनुकूल स्थिति में मिलते हैं। तब जातक को प्रतियोगी परीक्षा में निश्चित सफलता प्राप्त होती है।।
मित्रों, यहाँ यह समझना भी अत्यंत आवश्यक है कि केवल बुद्धिमान होना ही प्रतियोगी परीक्षा में सफलता की गारंटी नहीं देता। अपितु इसके लिए षष्ठ भाव की विशेष शक्ति भी आवश्यक होती है। क्योंकि यही भाव प्रतिस्पर्धा में दूसरों पर विजय प्राप्त करने की क्षमता को दर्शाता है। कई बार अत्यंत मेधावी जातक भी केवल इसी भाव की निर्बलता के कारण कठिन परिश्रम के बावजूद असफल रह जाते हैं।।
तो आज हम विस्तार से आज के इस विषय को समझेंगे कि षष्ठ भाव तथा उसका स्वामी किस प्रकार प्रतियोगी परीक्षा में सफलता को निर्धारित करते हैं। पंचम तथा दशम भाव का इसमें क्या योगदान है। दशा-अंतर्दशा का इस पर क्या प्रभाव पड़ता है। तथा इस योग को शीघ्र फलित करने के वैदिक उपाय कौन-कौन से हैं।।
षष्ठ भाव तथा षष्ठेश की शुभता।। Auspiciousness of the Sixth House and Its Lord.
मित्रों, षष्ठ भाव को शत्रु, प्रतिस्पर्धा तथा संघर्ष पर विजय प्राप्त करने का प्रमुख भाव माना गया है। अतः प्रतियोगी परीक्षा के विश्लेषण में सबसे पहले इसी भाव का अध्ययन किया जाता है। सामान्य धारणा के विपरीत, यह भाव यहाँ अशुभ नहीं, अपितु अत्यंत आवश्यक माना जाता है। क्योंकि प्रतियोगिता में स्वयं को अन्य प्रतिस्पर्धियों से आगे रखने की क्षमता यहीं से प्राप्त होती है।।
यदि षष्ठेश बलवान होकर केंद्र अथवा त्रिकोण भाव में स्थित हो, अथवा दशमेश से शुभ संबंध बनाए। तो जातक प्रतिस्पर्धा में सहजता से विजय प्राप्त करता है। तथा उसे अन्य अभ्यर्थियों की तुलना में स्पष्ट रूप से आगे देखा जाता है। इसके विपरीत यदि षष्ठेश अत्यंत निर्बल अथवा पीड़ित हो, तो जातक को कठोर परिश्रम करने के बावजूद भी बार-बार अंतिम चरण में असफलता का सामना करना पड़ता है।।
पंचम भाव तथा स्मरण-शक्ति का योगदान।। Contribution of the Fifth House and Memory Power.
मित्रों, प्रतियोगी परीक्षा में केवल विजय-क्षमता ही नहीं, अपितु तीव्र स्मरण-शक्ति तथा विश्लेषणात्मक बुद्धि का होना भी अनिवार्य माना जाता है। जिसका प्रमुख कारक पंचम भाव तथा बुध ग्रह बताये गये हैं। यदि पंचमेश तथा बुध बलवान होकर षष्ठ भाव से भी शुभ संबंध बनाएं, तो जातक परीक्षा के दौरान अपनी पढ़ी हुई सामग्री को सहजता से स्मरण कर पाता है। तथा प्रश्नों का विश्लेषण भी शीघ्रता से कर लेता है।।
इसके अतिरिक्त गुरु ग्रह की शुभता भी इस संयोग को और अधिक सुदृढ़ बनाती है। क्योंकि गुरु को ज्ञान की गहनता का कारक माना जाता है। जब पंचम भाव की बुद्धि, षष्ठ भाव की प्रतिस्पर्धा-क्षमता, तथा गुरु का ज्ञान, यह तीनों एक साथ मिलते हैं। तो यह संयोग प्रतियोगी परीक्षा में सफलता हेतु अत्यंत शुभ माना जाता है।।
दशम भाव तथा अंतिम परिणाम पर प्रभाव।। Influence on the Tenth House and Final Result.
मित्रों, दशम भाव को कर्म तथा अंतिम परिणाम का भाव माना गया है। अतः चाहे षष्ठ तथा पंचम भाव कितने भी शुभ क्यों न हों, परिणाम की अंतिम पुष्टि दशम भाव तथा दशमेश की स्थिति देखकर ही की जाती है। यदि दशमेश बलवान होकर षष्ठेश अथवा पंचमेश से संबंध बनाए। तो यह जातक को न केवल चयनित होने, अपितु उच्च स्थान पर नियुक्ति प्राप्त होने का भी प्रबल संकेत देता है।।
इसके विपरीत यदि दशमेश त्रिक भाव में जाकर निर्बल हो जाए, तो भले ही जातक परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर ले। परंतु अंतिम चयन-सूची में स्थान पाने में कुछ विलंब अथवा बाधा उत्पन्न हो सकती है। जिसके लिए धैर्यपूर्वक पुनः प्रयास करना आवश्यक होता है।।
दशा-अंतर्दशा का प्रतियोगी परीक्षा के योग पर प्रभाव।। Effect of Dasha-Antardasha on Competitive Exam Yoga.
मित्रों, कुंडली में प्रतियोगी परीक्षा का योग चाहे कितना भी प्रबल क्यों न हो, इसका वास्तविक फलितार्थ षष्ठेश, पंचमेश अथवा दशमेश की महादशा अथवा अंतर्दशा सक्रिय होने पर ही प्राप्त होता है। विशेष रूप से यदि इस अवधि में शनि की दशा चल रही हो, तो यह दीर्घकालिक तथा निरंतर परिश्रम के पश्चात ही सफलता दिलाती है। जबकि गुरु अथवा सूर्य की दशा अपेक्षाकृत शीघ्र फल प्रदान कर सकती है।।
ऐसे जातकों को अपनी दशा-अंतर्दशा का सूक्ष्म विश्लेषण करवाकर, अनुकूल समयावधि में अपनी तैयारी को और अधिक तीव्रता के साथ आगे बढ़ाना चाहिए। ताकि शुभ दशा-काल का पूर्ण लाभ उठाया जा सके। तथा प्रतिकूल दशा-काल में भी निराश हुए बिना निरंतरता बनाए रखनी चाहिए।।
प्रतियोगी परीक्षा योग को बलवान बनाने के वैदिक उपाय।। Vedic Remedies to Strengthen Competitive Exam Yoga.
मित्रों, प्रतियोगी परीक्षा में सफलता हेतु बुधवार के दिन भगवान श्रीगणेश जी की उपासना तथा “ॐ बुं बुधाय नमः” इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक नियमित जप करना चाहिए। इसके साथ ही षष्ठ भाव को बलवान बनाने हेतु मंगलवार के दिन हनुमान जी की उपासना तथा बजरंग बाण का पाठ भी अत्यंत सहायक सिद्ध होता है।।
परीक्षा के दिन प्रातःकाल गणपति जी का स्मरण करना, माता सरस्वती की वंदना करना, तथा नियमित रूप से गायत्री मंत्र का जप करना भी स्मरण-शक्ति तथा एकाग्रता को प्रबल बनाने में विशेष रूप से सहायक माना जाता है। इसके साथ ही शनि के पीड़ित होने पर शनिवार का व्रत तथा जरूरतमंदों की सेवा करना भी लाभकारी बताया जाता है।।
शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.
मित्रों, बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में षष्ठ भाव को प्रतिस्पर्धा तथा विजय का प्रमुख भाव बताया गया है। तथा इसकी शुभता को प्रतियोगिता में सफलता का मुख्य आधार माना गया है। फलदीपिका के अनुसार पंचम, षष्ठ तथा दशम भाव का संयुक्त बल ही किसी भी कठिन चयन-परीक्षा में सफलता की वास्तविक गारंटी देता है।।
सारावली में भी यह स्पष्ट किया गया है कि केवल एक भाव की शुभता पर्याप्त नहीं। अपितु इन तीनों भावों का समन्वित विश्लेषण ही सटीक निष्कर्ष तक पहुँचाता है। अतः किसी भी अंतिम निर्णय के लिए संपूर्ण जन्मकुंडली तथा दशा-अंतर्दशा का समन्वित अध्ययन आवश्यक माना जाता है।।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)
प्रश्न 1. प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए कुंडली का कौन-सा भाव सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।। Which House Is Most Important for Success in Competitive Exams.
उत्तर:- षष्ठ भाव को प्रतिस्पर्धा तथा विजय का प्रमुख भाव माना जाता है। तथा इसकी शुभता इस सफलता के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।।
प्रश्न 2. क्या षष्ठ भाव हमेशा अशुभ ही होता है।। Is the Sixth House Always Inauspicious.
उत्तर:- नहीं, प्रतिस्पर्धा तथा विजय की दृष्टि से षष्ठ भाव का बलवान होना अत्यंत आवश्यक तथा शुभ माना जाता है।।
प्रश्न 3. स्मरण-शक्ति तथा एकाग्रता के लिए कौन-सा भाव उत्तरदायी होता है।। Which House Is Responsible for Memory and Concentration.
उत्तर:- पंचम भाव तथा बुध ग्रह को स्मरण-शक्ति तथा विश्लेषणात्मक बुद्धि का प्रमुख कारक माना जाता है।।
प्रश्न 4. परीक्षा में अच्छे अंक आने के बावजूद चयन क्यों नहीं होता।। Why Is There No Selection Despite Good Marks in the Exam.
उत्तर:- यदि दशमेश त्रिक भाव में स्थित होकर निर्बल हो, तो अच्छे अंक प्राप्त होने के बावजूद भी अंतिम चयन-सूची में स्थान पाने में बाधा आती है।।
प्रश्न 5. प्रतियोगी परीक्षा के योग को बलवान बनाने का सबसे प्रभावी उपाय क्या है।। What Is the Most Effective Remedy to Strengthen Competitive Exam Yoga.
उत्तर:- बुध देवता के मंत्र का जप, हनुमान जी की उपासना तथा नियमित गायत्री मंत्र का जप सबसे प्रभावी उपाय माने जाते हैं।।
लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.
मित्रों, प्रतियोगी परीक्षा में सफलता का योग मुख्य रूप से षष्ठ भाव की शुभता, पंचम भाव तथा बुध की बुद्धि-प्रधान स्थिति, दशम भाव में अंतिम परिणाम की पुष्टि, तथा इन सभी के अनुकूल दशा-अंतर्दशा पर निर्भर करता है। इन सभी कारकों का समन्वित अध्ययन करके ही यह निश्चित रूप से जाना जा सकता है कि जातक की कुंडली में यह विशिष्ट योग विद्यमान है अथवा नहीं।।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार बुध तथा हनुमान जी की नियमित उपासना इस योग को अधिक शीघ्रता से सक्रिय करने में सहायक मानी गई है। और यहाँ मैं यही कहूँगा कि आध्यात्मिक उपायों के साथ-साथ अनुशासित अध्ययन, निरंतर अभ्यास तथा धैर्य भी उतना ही आवश्यक होता है। क्योंकि योग चाहे कितना भी प्रबल क्यों न हो, परिश्रम के बिना वह पूर्ण फल नहीं दे पाता।।
परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि इस विषय पर किसी भी निर्णायक निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले किसी विद्वान, योग्य, अनुभवी वैदिक ज्योतिषी से अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली का विश्लेषण विधिपूर्वक अवश्य करवाना चाहिए। ताकि सही एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।।
#प्रतियोगी_परीक्षा_में_सफलता_का_योग #षष्ठ_भाव_और_प्रतिस्पर्धा #पंचम_भाव_और_स्मरण_शक्ति #परीक्षा_में_सफलता_के_उपाय #प्रतियोगिता_में_विजय_योग #Competitive_Exam_Yoga_Astrology #Sixth_House_And_Competition #Fifth_House_Memory_Power #Success_In_Exam_Remedies #Vedic_Astrology_Exam_Success
ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं – Click Here & Watch My YouTube Channel.
इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज – My facebook Page.
वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।
