माता चंद्रघंटा की विशेष भोग-पूजन विधि एवं विशिष्ट मंत्र।। Maa Chandraghanta Special Bhog And Mantras.
माता चंद्रघंटा के पूजन का परिचय।। Introduction.
मित्रों, नवरात्रि के तृतीय दिवस माँ दुर्गा के तृतीय स्वरूप, माता चंद्रघंटा की उपासना की जाती है। माता के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्ध-चंद्र सुशोभित होने के कारण ही इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। यह स्वरूप माता पार्वती के उस रूप का प्रतीक है, जब विवाह के पश्चात उन्होंने अपने मस्तक पर चंद्र धारण किया था। माता सिंह पर आरूढ़ होकर, अपने दस हाथों में त्रिशूल, तलवार, धनुष-बाण, कमल तथा अन्य शस्त्र धारण करती हैं। जो शौर्य, वीरता तथा युद्ध के लिए सदैव तत्पर रहने वाली प्रकृति का प्रतीक मानी जाती हैं।।
वैदिक शास्त्रों में माता चंद्रघंटा को शुक्र ग्रह का भी अधिष्ठाता माना गया है। अतः इनकी उपासना से साधक के भीतर साहस, निर्भीकता तथा शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने की शक्ति का संचार होता है। जो साधक अपने जीवन में भय, शत्रु-बाधा अथवा किसी प्रकार के संकट से मुक्ति की कामना रखते हैं। उनके लिए तृतीय दिवस का यह पूजन अत्यंत फलदायी माना जाता है।।
परन्तु आप बिलकुल घबराएँ नहीं। आज हम इसी विषय पर विस्तार से समझेंगे कि माता चंद्रघंटा का पूजन किस प्रकार करना चाहिए। इन्हें कौन सा भोग सर्वाधिक प्रिय है, तथा किस विशिष्ट श्रृंगार एवं किस मंत्र के जप से माता की शीघ्र प्रसन्नता प्राप्त होती है। आज के इस लेख में हम इस विषय को विस्तृत रूप में इस लेख के माध्यम से समझेंगे।।
माता चंद्रघंटा की पूजन-विधि।। Puja Vidhi Of Maa Chandraghanta.
मित्रों, नवरात्रि के तृतीय दिवस प्रातःकाल ब्रह्म-मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके पश्चात पूजा-स्थान को शुद्ध करके, माता चंद्रघंटा की प्रतिमा अथवा चित्र को एक स्वच्छ चौकी पर स्थापित करना चाहिए।।
सर्वप्रथम श्रीगणेश जी तथा कलश का स्मरण करके पूजन आरंभ करना चाहिए। तत्पश्चात माता चंद्रघंटा का आवाहन करना चाहिए। माता को रोली-अक्षत अर्पित करने के पश्चात लाल रंग के पुष्प, विशेषकर कमल अथवा गुड़हल का पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है। माता को कुमकुम तथा सिंदूर अर्पित करना भी विशेष रूप से शुभ फलदायी सिद्ध होता है। इसके पश्चात धूप-दीप प्रज्वलित करके माता की आरती करनी चाहिए। तथा अंत में क्षमा-प्रार्थना के साथ पूजन संपन्न करना चाहिए।।
माता को सर्वाधिक प्रिय भोग, दूध एवं खीर का योग।। The Bhog Most Dear To The Mother, The Offering Of Milk And Kheer.
मित्रों, शास्त्रों के अनुसार माता चंद्रघंटा को दूध तथा दूध से निर्मित वस्तुओं का भोग सर्वाधिक प्रिय माना जाता है। क्योंकि यह शीतलता, पवित्रता तथा मानसिक शांति का प्रतीक मानी जाती है। माता को दूध की खीर अथवा दूध से बनी मिठाई अर्पित करने से साधक की शारीरिक पीड़ाओं तथा मानसिक कष्टों का निवारण होता है।।
इसके साथ ही माता को शहद का भोग लगाना भी अत्यंत प्रिय माना जाता है। जो वाणी में माधुर्य तथा व्यवहार में मधुरता लाने में सहायक सिद्ध होता है। कुछ विद्वानों के अनुसार माता को केसर-युक्त खीर अथवा मिठाई का भोग अर्पित करना विशेष रुप से शुभ फलदायी माना जाता है। जिससे साधक को सौम्यता तथा वीरता दोनों की प्राप्ति होती है।।
माता का विशिष्ट श्रृंगार, स्वर्ण-आभूषण तथा लाल वस्त्र का योग।। Special Adornment Of The Mother, Golden Ornaments And Red Attire.
मित्रों, माता चंद्रघंटा को अपनी वीर तथा तेजस्वी प्रकृति के अनुरूप भव्य तथा चमकीला श्रृंगार अत्यधिक प्रिय माना जाता है। माता को लाल अथवा सुनहरे रंग के वस्त्र अर्पित करने चाहिए। जो शौर्य तथा तेज के प्रतीक माना जाता है। इनके श्रृंगार में स्वर्ण-आभूषण, विशेषकर मस्तक पर अर्ध-चंद्राकार आभूषण धारण कराना विशेष शुभ माना जाता है।।
इसके साथ ही माता को लाल पुष्पों की माला पहनाना भी अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। जो साहस तथा ऊर्जा का प्रतीक भी होता है। इस प्रकार के भव्य तथा तेजस्वी श्रृंगार से माता शीघ्र प्रसन्न होकर साधक को निर्भीकता तथा शत्रु-विजय का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।।
माता चंद्रघंटा के विशिष्ट मंत्र, जप से शीघ्र प्रसन्नता का योग।। Special Mantras Of Maa Chandraghanta, The Yoga Of Swift Grace Through Chanting.
मित्रों, माता चंद्रघंटा की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए अग्रलिखित इस मूल-मंत्र का श्रद्धापूर्वक नियमित जप करना चाहिए। मन्त्र:- “ॐ ऐं श्रीं शक्त्यै नमः।।” इसके साथ ही ध्यान-मंत्र के रूप में निम्न श्लोक का भी पाठ करना चाहिए।।
“पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।।”
मित्रों, इस मंत्र का अर्थ है कि श्रेष्ठ सिंह पर आरूढ़, प्रचंड क्रोध तथा शस्त्रों से युक्त, चंद्रघंटा के नाम से विख्यात देवी मुझ पर प्रसाद अर्थात कृपा करें। प्रातः तथा सायं दोनों समय इस मंत्र का कम से कम एक माला अर्थात एक सौ आठ बार जप करने से माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं।।
मित्रों, मंत्र-जप के समय कुछ विशिष्ट सावधानियाँ रखनी चाहिए। जैसे मंत्र-जप सदैव स्वच्छ आसन पर बैठकर, पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके ही करना चाहिए। जप के समय रुद्राक्ष अथवा स्फटिक की माला का प्रयोग विशेष रूप से शुभ माना जाता है। चूँकि माता चंद्रघंटा वीरता तथा शौर्य की देवी हैं, अतः इस दिन साधक को निर्भीक भाव से, मन में किसी भी प्रकार का भय अथवा संदेह लाए बिना ही जप करना चाहिए। जिससे मंत्र का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।।
इस पूजन से प्राप्त होने वाले फल।। Benefits Obtained From This Worship.
मित्रों, जो साधक नवरात्रि के तृतीय दिवस विधिपूर्वक माता चंद्रघंटा का पूजन, निर्धारित भोग-अर्पण तथा मंत्र-जप करता है। उसे जीवन में साहस, निर्भीकता तथा शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने की शक्ति प्राप्त होती है। इसके साथ ही मणिपुर-चक्र के जागृत होने से साधक की वाणी में भी मधुरता तथा आकर्षण उत्पन्न होता है। जिससे उसके सभी कार्य निर्विघ्न रूप से संपन्न होते हैं।।
और मेरी सलाह तो यही रहेगी कि इन उपायों को केवल औपचारिकता के लिए नहीं, बल्कि पूर्ण श्रद्धा तथा निरंतरता के साथ करना चाहिए। माता का पूजन शुद्ध मन, निर्भीक भाव तथा सच्ची भक्ति-भावना के साथ ही करना चाहिए। क्योंकि बाह्य आडंबर की अपेक्षा आंतरिक साहस तथा श्रद्धा ही माता की वास्तविक प्रसन्नता का कारण बनती है।।
शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.
मित्रों, देवी भागवत पुराण तथा दुर्गा-सप्तशती में माता चंद्रघंटा को नवदुर्गाओं में तृतीय तथा मणिपुर-चक्र की अधिष्ठात्री देवी बताया गया है। स्कंद पुराण में भी यह उल्लेख मिलता है कि तृतीय नवरात्रि में इनकी विधिपूर्वक उपासना करने से साधक को समस्त शत्रु-बाधाओं से मुक्ति प्राप्त होती है।।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)
प्रश्न 1. माता चंद्रघंटा को कौन सा भोग सर्वाधिक प्रिय है।। Which Bhog Is Most Dear To Maa Chandraghanta.
उत्तर:- दूध तथा दूध से निर्मित खीर अथवा मिठाई, तथा शहद माता को सर्वाधिक प्रिय भोग माना जाता है।।
प्रश्न 2. माता चंद्रघंटा का मूल-मंत्र क्या है।। What Is The Primary Mantra Of Maa Chandraghanta.
उत्तर:- “ॐ ऐं श्रीं शक्त्यै नमः।।” यह माता का मूल-मंत्र माना जाता है। जिसका नियमित जप माता की शीघ्र प्रसन्नता प्रदान करता है।।
प्रश्न 3. माता को किस रंग के वस्त्र अथवा श्रृंगार अर्पित करने चाहिए।। Which Colour Clothes Or Adornment Should Be Offered To The Mother.
उत्तर:- माता को लाल अथवा सुनहरे रंग के वस्त्र तथा स्वर्ण-आभूषण अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है।।
प्रश्न 4. माता चंद्रघंटा किस चक्र की अधिष्ठात्री देवी हैं।। Which Chakra Is Maa Chandraghanta The Presiding Deity Of.
उत्तर:- माता चंद्रघंटा को मणिपुर-चक्र की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। जो साहस तथा आत्म-तेज का संचार करती हैं।।
प्रश्न 5. मंत्र-जप कितनी बार तथा किस समय करना चाहिए।। How Many Times And At What Time Should The Mantra Be Chanted.
उत्तर:- प्रातः तथा सायं दोनों समय कम से कम एक माला अर्थात एक सौ आठ बार मंत्र-जप करना चाहिए। जिससे माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं।।
लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.
मित्रों, नवरात्रि के तृतीय दिवस माता चंद्रघंटा की विधिपूर्वक उपासना, दूध तथा खीर के भोग का अर्पण, भव्य श्रृंगार तथा “ॐ ऐं श्रीं शक्त्यै नमः” इस मंत्र के नियमित जप से साधक को माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह पूजन न केवल आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। बल्कि साधक के भीतर साहस, निर्भीकता तथा शत्रु-विजय की शक्ति भी उत्पन्न करता है। जो आगामी नवरात्रि-साधना के लिए अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।।
परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि इस पूजन को विधिपूर्वक संपन्न करने हेतु किसी विद्वान तथा अनुभवी ब्राह्मण या फिर किसी आचार्य से विस्तृत मार्गदर्शन अवश्य प्राप्त करना चाहिए। ताकि पूजन में किसी भी प्रकार की कोई त्रुटि न रह जाए तथा माता की पूर्ण कृपा प्राप्त हो सके।।
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