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वर्ष 2026 में धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त एवं विधि।।

वर्ष 2026 में धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त एवं विधि।। Dhanteras Puja Muhurat And Vidhi In 2026.

धनतेरस का परिचय।। Introduction.

मित्रों, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस अथवा धनत्रयोदशी का पावन पर्व मनाया जाता है। यह पर्व पाँच दिवसीय दीपोत्सव का प्रथम दिवस होता है। इसी दिन से घर-आँगन में लक्ष्मी के आगमन की तैयारियाँ विधिवत आरंभ हो जाती हैं। मान्यता है कि इस दिन आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि धन के अधिपति कुबेर देवता, माँ लक्ष्मी तथा मृत्यु के देवता यमराज का पूजन करने से धन, स्वास्थ्य तथा दीर्घायु तीनों की प्राप्ति होती है।।

परंतु मित्रों, प्रत्येक वर्ष धनतेरस की सही तिथि, पूजा के शुभ मुहूर्त, खरीदारी के नियम तथा यम-दीपदान की विधि को लेकर अनेक जिज्ञासाएँ उत्पन्न होती हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि त्रयोदशी तिथि प्रायः दो दिनों में फैली होती है। साथ ही इस पर्व का पूजन केवल तिथि से नहीं, बल्कि प्रदोष काल तथा वृषभ लग्न के संयोग से निर्धारित होता है। अतः सही मुहूर्त का ज्ञान अत्यंत आवश्यक हो जाता है।।

परन्तु आप बिलकुल घबराएँ नहीं। आज हम इसी विषय पर विस्तार से समझेंगे कि वर्ष 2026 में धनतेरस कब है। पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, तथा पूजन एवं यम देवता के लिए दीपदान की सम्पूर्ण शास्त्रोक्त विधि क्या है। इतना ही नहीं आज हम खरीदारी के नियम तथा कुछ सरल वैदिक उपाय भी आपलोगों को बताएँगे। ताकि आप इस पावन पर्व का पूर्ण लाभ अपने जीवन में प्राप्त कर सकें।।

वर्ष 2026 में धनतेरस की तिथि।। Date Of Dhanteras In 2026.

मित्रों, वर्ष 2026 में धनतेरस का पर्व 6 नवंबर शुक्रवार को मनाया जाएगा। पंचांग-गणना के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि का आरंभ 6 नवंबर को प्रातः लगभग 10:31 AM पर होगा। तथा इसका समापन 7 नवंबर को प्रातः लगभग 10:49 AM पर होगा।।

धनतेरस का पूजन प्रदोष काल में किया जाता है। और प्रदोष काल 6 नवंबर की संध्या को ही प्राप्त हो रहा है। इसी कारण धनतेरस का पर्व तथा यम देवता के लिए दीपदान 6 नवंबर शुक्रवार को ही मान्य होगा। वैसे भी शुक्रवार का दिन माँ लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। अतः इस वर्ष धनतेरस का शुक्रवार को पड़ना विशेष शुभ संयोग माना जाता है।।

धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त।। Shubh Muhurat For Dhanteras Puja.

मित्रों, मुंबई के रेखांश के अनुसार धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त 6 नवंबर को सायं 18:02 PM से लेकर 20:34 PM तक रहेगा। इस मुहूर्त की कुल अवधि लगभग 2 घंटा 32 मिनट की है। इसी अवधि में वृषभ लग्न भी विद्यमान रहेगा। जिसे स्थिर लग्न माना जाता है। और स्थिर लग्न में की गई पूजा से लक्ष्मी का स्थायी वास निश्चित माना जाता है।।

प्रदोष काल सायं लगभग 18:02 PM से लेकर 20:34 PM तक रहेगा। यम-दीपदान भी इसी दिन सायंकाल प्रदोष काल में किया जाता है। ये समय नई दिल्ली के अनुसार हैं। अतः अपने नगर का सटीक मुहूर्त स्थानीय पंचांग से अवश्य देख लें। क्योंकि स्थान-भेद से इनमें कुछ मिनटों का अंतर संभव है।।

धनतेरस का महत्व तथा पौराणिक मान्यता।। Significance And Mythological Belief Of Dhanteras.

मित्रों, पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र-मंथन के समय कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को भगवान धन्वंतरि हाथ में अमृत-कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण यह दिन धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। तथा आयुर्वेद के चिकित्सक एवं स्वास्थ्य के आकांक्षी इस दिन उनका विशेष पूजन करते हैं। कलश तथा पात्र की खरीदारी की परंपरा भी इसी अमृत-कलश की स्मृति से जुड़ी मानी जाती है।।

इसके साथ ही यम देवता के लिए दीपदान की कथा भी अत्यंत प्रसिद्ध है। लोक-कथा के अनुसार एक राजकुमार के विवाह के चौथे दिन उसकी मृत्यु का योग था। उसकी नवविवाहिता पत्नी ने उस रात्रि द्वार पर स्वर्ण-आभूषण तथा दीपों का ढेर लगा दिया। और रात भर गीत-कथाओं से जागरण करती रही। यमराज सर्प के रूप में आए, किंतु दीपों की चकाचौंध से उनकी आँखें चौंधिया गईं। और वे प्राण लिए बिना लौट गए। तभी से धनतेरस पर यमराज के निमित्त दीपदान की परंपरा चली आ रही है।।

धनतेरस पूजा की सामग्री।। Puja Samagri For Dhanteras.

मित्रों, पूजन से पूर्व सामग्री का संग्रह कर लेना चाहिए। इसमें भगवान धन्वंतरि, माँ लक्ष्मी, श्रीगणेश तथा कुबेर देव की प्रतिमा अथवा चित्र। चौकी, लाल अथवा पीला वस्त्र, रोली, कुमकुम, अक्षत, हल्दी, पुष्प, धूप, दीप, घी, कपूर, मौली, फल, मिष्ठान्न तथा गंगाजल सम्मिलित हैं। साथ ही कलश, नारियल, सुपारी, पान, सिक्के तथा नवीन खरीदे गए पात्र अथवा आभूषण भी पूजन में रखे जाते हैं।।

यमदेवता के लिए दीपदान हेतु मिट्टी का एक बड़ा चौमुखा दीपक। सरसों का तेल अथवा तिल का तेल। रुई की बत्ती तथा दीपक रखने के लिए थोड़ा अन्न अथवा गेहूँ की ढेरी भी आवश्यक होती है। घर की सजावट हेतु तोरण, रंगोली तथा सुगंधित पुष्पों की व्यवस्था भी इसी दिन कर ली जाती है।।

धनतेरस की पूजन विधि।। Dhanteras Puja Vidhi.

मित्रों, धनतेरस के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। तथा घर की साफ-सफाई कर मुख्य द्वार पर रंगोली एवं तोरण सजाएँ। सायंकाल मुहूर्त से पूर्व पूजन-स्थल को गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें। और उत्तर अथवा पूर्व दिशा में चौकी पर नवीन वस्त्र बिछाकर भगवान धन्वंतरि। माँ लक्ष्मी, गणेश जी तथा कुबेर देवता की प्रतिमा स्थापित करें।।

मुहूर्त आरंभ होने पर घी का दीपक प्रज्वलित कर हाथ में जल, अक्षत तथा पुष्प लेकर संकल्प लें। कि मैं अपने परिवार के आरोग्य, धन-समृद्धि तथा सुख-शांति के लिए यह पूजन कर रहा हूँ। सर्वप्रथम गणेश जी का पूजन करें। तत्पश्चात भगवान धन्वंतरि को स्नान-तुल्य जल अर्पित कर रोली, चंदन, पुष्प, धूप, दीप तथा नैवेद्य अर्पित करें।।

इसके पश्चात माँ लक्ष्मी तथा कुबेर देवता का पूजन करें। कुबेर देव को पीले अथवा सफेद पुष्प तथा मिष्ठान्न अर्पित करना शुभ माना जाता है। इस समय “ॐ धन्वंतरये नमः” तथा “ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का यथाशक्ति जप करें। और श्री सूक्त अथवा कुबेर देवता के मंत्र का पाठ करें। पूजन के अंत में आरती उतारकर प्रसाद सभी में वितरित करें।।

यम-दीपदान की विधि।। Yama Deepdan Vidhi.

मित्रों, यम देवता के लिए दीपदान धनतेरस की सायंकाल प्रदोष काल में किया जाता है। इसके लिए मिट्टी के चौमुखे दीपक में सरसों अथवा तिल का तेल भरकर चार बत्तियाँ लगाएँ। इसे घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखें। क्योंकि दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना जाता है।।

दीपक जलाते समय हाथ जोड़कर यमराज से परिवार के सभी सदस्यों के अकाल-मृत्यु के भय से रक्षा की प्रार्थना करें। दीपदान के पश्चात उस दीपक को पुनः उठाना नहीं चाहिए। इसके साथ ही परिवार में आरोग्य की कामना से घर के अन्य द्वारों एवं पूजा-स्थल पर भी दीपक जलाने की परंपरा है।।

धनतेरस पर खरीदारी के नियम।। Rules For Shopping On Dhanteras.

मित्रों, धनतेरस पर स्वर्ण, रजत, पीतल अथवा तांबे के पात्र, नवीन बर्तन, सिक्के तथा आभूषण की खरीदारी शुभ मानी जाती है। झाड़ू की खरीदारी भी लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक मानी जाती है। इसके साथ ही साबुत धनिया, कौड़ी, गोमती चक्र तथा लक्ष्मी-गणेश की नवीन प्रतिमा भी इस दिन खरीदी जाती है। तथा खरीदारी प्रदोष काल अथवा शुभ चौघड़िया में करना श्रेष्ठ माना गया है।।

वहीं इस दिन लोहे अथवा स्टील के नुकीले पात्र, काँच की वस्तुएँ तथा काले रंग की वस्तुएँ खरीदने से परंपरागत रूप से परहेज किया जाता है। उधार लेकर अथवा अपनी सामर्थ्य से अधिक खर्च कर खरीदारी करना भी उचित नहीं माना गया। खरीदारी का उद्देश्य श्रद्धा तथा शुभता है, दिखावा अथवा ऋण नहीं।।

धनतेरस पर क्या करें क्या न करें।। Don’ts Dos On Dhanteras.

मित्रों, इस दिन घर को स्वच्छ रखें, मुख्य द्वार पर रंगोली एवं तोरण सजाएँ। तथा सायंकाल घर के सभी कोनों में दीपक जलाएँ। जो भी नवीन वस्तु खरीदें, उसे पूजा-स्थल पर रखकर तिलक कर पूजन के बाद ही प्रयोग में लाएँ। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र अथवा धन का यथाशक्ति दान करना भी इस दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।।

परन्तु इस बात का ध्यान रखें, कि इस दिन किसी को अपना पैसा या धन उधार न दें। तथा घर के मुख्य द्वार अथवा पूजा-स्थल को अंधकारमय न रखें। क्रोध, कलह तथा कटु-वाणी से दूर रहें। और मांसाहार, मदिरा जैसे तामसिक पदार्थों का सर्वथा त्याग करें। पूजन-स्थल पर गंदगी अथवा बासी पुष्प न रहने दें।।

धनतेरस पर किए जाने वाले वैदिक उपाय।। Vedic Remedies On Dhanteras.

मित्रों, इस दिन माँ लक्ष्मी के समक्ष एक घी का दीपक जलाकर श्री सूक्त का पाठ करें। तथा तिजोरी अथवा धन-स्थान पर लाल वस्त्र में लपेटकर साबुत धनिया एवं कौड़ी रखें। कुबेर देवता को प्रसन्न करने हेतु उत्तर दिशा में उनका पूजन करें। साथ ही “ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये” इस मंत्र का यथाशक्ति और समय के अनुसार जप करें।।

आरोग्य की कामना के लिए भगवान धन्वंतरि के मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वंतरये अमृतकलशहस्ताय सर्वामयविनाशनाय त्रैलोक्यनाथाय श्रीमहाविष्णवे नमः” का जप करें। मेरी आपको यही सलाह है कि इन उपायों को केवल औपचारिकता के लिए नहीं, बल्कि पूर्ण श्रद्धा से करें। तथा अपनी आर्थिक योजना एवं स्वास्थ्य की देखभाल जैसे व्यावहारिक पक्षों पर भी उतना ही ध्यान दें।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, समुद्र-मंथन तथा भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य का वर्णन श्रीमद्भागवत महापुराण तथा विष्णु पुराण जैसे ग्रंथों में प्राप्त होता है। जिनके आधार पर धन्वंतरि को आयुर्वेद का आदि-देवता माना गया है। यम-दीपदान की परंपरा का उल्लेख पद्म पुराण तथा स्कंद पुराण से जोड़कर बताया जाता है। धर्मसिंधु जैसे निर्णय-ग्रंथों में भी कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के पर्व-निर्णय तथा प्रदोष काल में पूजन का विधान बताया गया है।।

परंतु मित्रों, लोक-परंपरा में प्रचलित कथाओं के विवरण क्षेत्र तथा परिवार के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। अतः अपनी कुल-परंपरा तथा विद्वान ब्राह्मणों के मार्गदर्शन के अनुसार ही पूजन-विधि को अपनाना उचित रहता है।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

प्रश्न 1. वर्ष 2026 में धनतेरस कब है।। When Is Dhanteras In 2026.

उत्तर:- वर्ष 2026 में धनतेरस का पर्व 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इसी दिन प्रदोष काल में पूजन तथा यम देवता के लिए दीपदान किया जाएगा।।

प्रश्न 2. धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है।। What Is The Shubh Muhurat For Dhanteras Puja.

उत्तर:- मुंबई-सिलवासा के अनुसार पूजा का शुभ मुहूर्त 6 नवंबर को सायं लगभग 18:02 PM से लेकर 20:34 PM तक रहेगा। इसी बीच वृषभ लग्न होने से यह समय विशेष शुभ माना गया है। अपने नगर के लिए स्थानीय पंचांग देखें।।

प्रश्न 3. यम देवता के लिए दीपदान किस दिशा में तथा कब करना चाहिए।। In Which Direction And When Should Yama Deepdan Be Done.

उत्तर:- यम देवता के लिए दीपदान धनतेरस की सायंकाल प्रदोष काल में, मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक का मुख करके किया जाता है। यह अकाल-मृत्यु के भय के निवारण हेतु किया जाता है।।

प्रश्न 4. धनतेरस पर कौन-सी वस्तुएँ खरीदना शुभ माना जाता है।। Which Things Are Considered Auspicious To Buy On Dhanteras.

उत्तर:- स्वर्ण, रजत, पीतल अथवा तांबे के बर्तन, सोने-चांदी के सिक्के, झाड़ू, साबुत धनिया तथा लक्ष्मी-गणेश की नवीन प्रतिमा की खरीदारी शुभ मानी जाती है। परंतु खरीदारी सामर्थ्य के अनुसार ही करनी चाहिए।।

प्रश्न 5. क्या धनतेरस के दिन धन्वंतरि का पूजन आवश्यक है।। Is Worship Of Dhanvantari Necessary On Dhanteras.

उत्तर:- धनतेरस को धन्वंतरि जयंती भी माना जाता है। अतः आरोग्य की कामना रखने वाले जातकों के लिए इस दिन भगवान धन्वंतरि का पूजन विशेष फलदायी माना गया है।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, वर्ष 2026 में धनतेरस 6 नवंबर शुक्रवार को सायं लगभग 18:02 PM से लेकर 20:34 PM तक के मुहूर्त में मनाया जाएगा। भगवान धन्वंतरि, माँ लक्ष्मी, कुबेर देवता तथा श्रीगणेश जी का विधिवत पूजन, यम देवता के लिए दीपदान तथा सामर्थ्य के अनुसार शुभ खरीदारी, इस पर्व की मुख्य विधियाँ हैं। श्रद्धा तथा शुद्ध भाव से किया गया पूजन ही वास्तविक फल प्रदान करता है।।

और यहाँ मैं यही कहूँगा कि आध्यात्मिक उपायों के साथ-साथ आर्थिक अनुशासन, स्वास्थ्य के प्रति सजगता तथा दान की भावना भी उतनी ही आवश्यक होती है। क्योंकि सच्चा धन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि आरोग्य, संतोष तथा परिवार का सुख भी होता है।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि इस विषय पर किसी भी निर्णायक निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले किसी विद्वान, योग्य, अनुभवी वैदिक ज्योतिषी अथवा श्रेष्ठ ब्राह्मण से अपने नगर के अनुसार सही मुहूर्त तथा अपनी कुंडली के अनुकूल विधि की जानकारी विधिपूर्वक अवश्य प्राप्त करनी चाहिए। ताकि सही एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।।

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