HomeArticlesAstro Articlesकुंडली में प्रेम विवाह के योग समस्या और समाधान।।

कुंडली में प्रेम विवाह के योग समस्या और समाधान।।

कुंडली में प्रेम विवाह के योग समस्या और समाधान।। Love Marriage Yoga in Horoscope.

प्रेम विवाह के योग का परिचय।। Introduction.

मित्रों, प्रेम विवाह आज के समाज का बहुत ही चर्चित विषय है। हमारी परम्परा में गंधर्व विवाह का उल्लेख भी मिलता है। जो परस्पर प्रेम पर आधारित माना गया है। फिर भी आज बहुत से युवा परिवार की सहमति को लेकर चिंतित रहते हैं। ऐसे में वे अपनी कुंडली में प्रेम विवाह के योग को जानना चाहते हैं।।

ज्योतिष शास्त्र में प्रेम और विवाह का विचार कुंडली के अनेक भावों और ग्रहों से किया जाता है। इसमें पंचम, सप्तम, एकादश और द्वितीय भाव मुख्य होता है। शुक्र, मंगल, राहु और चंद्रमा की भूमिका भी विशेष होती है। इन सबको मिलाकर ही सही निष्कर्ष निकलता है।।

इस लेख में हम सरल भाषा में प्रेम विवाह के योग, उसमें आने वाली बाधाएँ और उनके वैदिक समाधान को भी समझेंगे। यह लेख केवल ज्ञान के उद्देश्य से ही लिखा गया है। परन्तु आप अपनी कुंडली का निर्णय किसी योग्य ज्योतिषी से ही करवाएँ।।

प्रेम विवाह के मुख्य भाव।। Key Houses for Love Marriage.

मित्रों, पंचम भाव प्रेम, आकर्षण और भावनाओं का भाव होता है। यहाँ से प्रेम संबंध की शुरुआत और उसकी गहराई देखी जाती है। सप्तम भाव विवाह और जीवनसाथी का भाव होता है। जब इन दोनों भावों में परस्पर संबंध बने, तब प्रेम के विवाह तक पहुँचने की संभावना बढ़ जाती है।।

एकादश भाव इच्छा की पूर्ति का भाव माना जाता है। प्रेम को सामाजिक स्वीकृति और सफलता मिलेगी या नहीं, इसका संकेत भी यहाँ से ही मिलता है। द्वितीय भाव कुटुम्ब का भाव भी होता है। इसलिए परिवार की सहमति भी इसी से देखी जाती है। इन भावों का शुभ होना प्रेम विवाह का मार्ग सरल बनाता है।।

पंचमेश और सप्तमेश का संबंध प्रेम विवाह का सबसे प्रमुख योग माना जाता है। यह संबंध युति, दृष्टि या राशि-परिवर्तन किसी भी रूप में हो सकता है। यदि इस संबंध पर शुभ ग्रहों का प्रभाव हो तो विवाह सुखद होता है। यदि पाप प्रभाव हो तो संबंध में उतार-चढ़ाव आता है।।

प्रेम विवाह कारक ग्रह।। Planets Governing Love Marriage.

मित्रों, शुक्र ग्रह प्रेम और आकर्षण का मुख्य कारक ग्रह होता है। यदि शुक्र पंचम या सप्तम भाव से संबंध बनाए तो प्रेम संबंध की संभावना बनती है। कुंडली में शुक्र ग्रह बलवान हो तो प्रेम में मधुरता और स्थिरता बनी रहती है। शुक्र पीड़ित हो तो भावनात्मक अस्थिरता देखी जाती है।।

मंगल साहस और आवेग का ग्रह होता है। मंगल का पंचम या सप्तम भाव से संबंध प्रेम में उत्साह और निर्णय लेने का साहस देता है। कई जातक इसी बल से परिवार के सामने अपनी बात रख पाते हैं। परन्तु अशुभ मंगल से क्रोध और जल्दबाजी भी आ जाती है।।

राहु को अपरम्परागत और सामाजिक सीमाओं से बाहर के संबंधों का कारक माना जाता है। इसलिए राहु का पंचम या सप्तम पर प्रभाव अंतर्जातीय या भिन्न पृष्ठभूमि के विवाह का संकेत माना जाता है। चंद्रमा मन का कारक ग्रह है और भावनाओं को दिशा देता है। इन ग्रहों का संतुलित होना ही प्रेम को विवाह में बदलने में सहायक होता है।।

प्रेम विवाह के शुभ योग।। Auspicious Yogas for Love Marriage.

मित्रों, जब पंचमेश और सप्तमेश एक साथ बैठे हों तो प्रेम विवाह का प्रबल योग बन जाता है। यदि इन दोनों में दृष्टि संबंध हो तब भी ऐसा ही फल मिलता है। राशि-परिवर्तन का संबंध भी बहुत प्रभावी माना गया है। ऐसी कुंडली में प्रेम सहजता से विवाह की ओर बढ़ता है।।

शुक्र और मंगल का परस्पर संबंध भी प्रेम संबंध का संकेत देता है। यदि शुक्र पंचम या सप्तम भाव में शुभ स्थिति में हो तो जातक को प्रेममय जीवनसाथी मिल सकता है। लग्नेश का पंचम या सप्तम से संबंध भी अनुकूल माना जाता है। एकादशेश का साथ मिले तो इच्छा पूर्ति के योग और मजबूत हो जाते हैं।।

परन्तु केवल योग का होना ही पर्याप्त नहीं होता है। उसके फल का समय भी आना चाहिए, जिसे दशा और गोचर से देखा जाता है। शुभ योग के साथ अनुकूल दशा मिले तो परिणाम शीघ्र मिलता है। इसलिए योग और दशा को सदा साथ मिलाकर देखना चाहिए।।

प्रेम विवाह में बाधा के कारण।। Causes of Obstacles in Love Marriage.

मित्रों, यदि पंचमेश या सप्तमेश छठे, आठवें या बारहवें भाव में चला जाए तो संबंध में बाधा आ सकती है। शनि का पंचम या सप्तम भाव पर प्रभाव विलंब और परिवार की कठोरता का संकेत देता है। राहु-केतु का अशुभ प्रभाव भ्रम और धोखे की स्थिति बना सकता है। ऐसे में निर्णय सोच-समझकर लेना चाहिए।।

मांगलिक स्थिति और सूर्य का पीड़ित होना भी कई बार पारिवारिक विरोध बढ़ा देता है। द्वितीय भाव पीड़ित हो तो परिवार की सहमति मिलने में कठिनाई हो सकती है। शुक्र का नीच या अस्त होना प्रेम संबंध में असंतोष का कारण बन जाता है। इन सभी स्थितियों का विश्लेषण सावधानी से करना चाहिए।।

कई बार बाधा केवल कुंडली की ही नहीं होती। जाति, समाज, आर्थिक स्थिति और माता-पिता की अपेक्षाएँ भी रुकावट बन जाती है। इसलिए ज्योतिष के साथ संवाद और धैर्य भी उतने ही आवश्यक होते हैं। केवल ग्रहों को दोष देना उचित नहीं होता है।।

दशा और गोचर से विवाह का समय।। Timing through Dasha and Transit.

मित्रों, जब पंचमेश, सप्तमेश, शुक्र या सप्तम में बैठे ग्रह की दशा चलती है, तब प्रेम विवाह का योग सक्रिय होता है। राहु की दशा में भी अनेक बार अप्रत्याशित रूप से संबंध बनते हैं। लग्नेश और द्वितीयेश की दशा भी सहायक मानी जाती है। इसलिए दशानाथ का पंचम-सप्तम से संबंध देखना अनिवार्य होता है।।

गोचर में गुरु का विशेष महत्व होता है। जब गुरु पंचम, सप्तम, लग्न या चंद्रमा पर शुभ दृष्टि डालता है, तब परिवार की सहमति और विवाह का वातावरण बनता है। शनि और राहु का गोचर भी संबंध की परीक्षा लेता है। इन सबका सम्मिलित विचार ही सही समय बताता है।।

किसी निश्चित तिथि या वर्ष की घोषणा केवल लेख पढ़कर नहीं की जा सकती। हर कुंडली की स्थिति अलग होती है। इसलिए जन्म कुंडली, नवांश और दशा को मिलाकर ही अनुमान लगाया जा सकता है। इसके लिए किसी अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।।

प्रेम विवाह में बाधा के वैदिक उपाय।। Vedic Remedies for Obstacles.

मित्रों, सबसे पहले जिस ग्रह के कारण बाधा हो उसे पहचानें। शुक्र कमजोर हो तो शुक्रवार को माँ लक्ष्मी और माँ दुर्गा की पूजा करें। गुरु के लिए गुरुवार का व्रत और भगवान विष्णु की उपासना लाभ देती है। मंगल कारण हो तो मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करना उत्तम होता है।।

राधा-कृष्ण और शिव-पार्वती की उपासना को प्रेम और दाम्पत्य के लिए विशेष रूप से शुभ माना गया है। श्रद्धा से इनका पूजन करने से मन में स्थिरता और संबंध में मधुरता की कामना की जाती है। राहु की शांति के लिए किसी योग्य विद्वान से परामर्श लेकर ही कोई उपाय करें। माँ दुर्गा की आराधना भी ज्योतिषीय परम्परा से बाधा शांति के लिए बताई गई है।।

परन्तु सबसे बड़ा उपाय है माता-पिता का आशीर्वाद और उनसे खुला संवाद। धैर्य, सम्मान और सत्य का मार्ग अपनाने से रिश्ते मजबूत होते हैं। रत्न धारण का निर्णय बिना कुंडली देखे कभी न करें। किसी भी तंत्र या ठगी वाले उपाय के चक्कर में न पड़ें।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural Evidence.

मित्रों, बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में पंचम और सप्तम भाव, उनके स्वामी और कारक ग्रहों के आधार पर प्रेम और दाम्पत्य का विचार मिलता है। फलदीपिका और जातक पारिजात में भी जाया भाव और शुक्र आदि के फल बताए गए हैं। इन ग्रंथों में प्रेम विवाह जैसा आधुनिक शब्द नहीं मिलता, पर भाव-संबंधों से उसी भावना का विचार किया जाता है। इसलिए श्लोकों को मूल ग्रंथ देखकर ही उद्धृत करें, क्योंकि पाठ-भेद संभव है।।

मित्रों, धर्मशास्त्रों में विवाह के आठ प्रकार बताए गए हैं। जिनमें गंधर्व विवाह वर और कन्या की परस्पर इच्छा से होने वाला विवाह माना गया है। महाभारत और अन्य पुराणों में शकुंतला-दुष्यंत जैसे प्रसंग इसी परम्परा के उदाहरण के रूप में आते हैं। श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह की कथा भी भारतीय परम्परा में प्रसिद्ध है। इन प्रसंगों का आशय यह है कि प्रेम और संस्कार का संतुलन ही विवाह को पवित्र बनाता है।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

प्रश्न 1. कुंडली में प्रेम विवाह का योग कैसे देखें?।। Question 1. How to see love marriage yoga in a horoscope?

उत्तर:- मित्रों, पंचम और सप्तम भाव तथा उनके स्वामियों का संबंध मुख्य रूप से देखा जाता है। इसके साथ शुक्र, मंगल, राहु और चंद्रमा की स्थिति भी परखी जाती है। एकादश और द्वितीय भाव से सफलता और पारिवारिक सहमति का संकेत मिलता है। पूरा विश्लेषण योग्य ज्योतिषी से करवाना उचित होगा ।।

प्रश्न 2. क्या राहु हमेशा प्रेम विवाह कराता है?।। Question 2. Does Rahu always cause love marriage?

उत्तर:- मित्रों, ऐसा नहीं है। राहु का पंचम या सप्तम से संबंध अपरम्परागत संबंधों का संकेत देता है। पर परिणाम पूरी कुंडली पर निर्भर करता है। शुभ ग्रहों का प्रभाव हो तो फल अच्छा मिलता है। अकेले राहु को देखकर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।।

प्रश्न 3. प्रेम विवाह में परिवार का विरोध क्यों होता है?।। Question 3. Why does the family oppose a love marriage?

उत्तर:- मित्रों, ज्योतिष में द्वितीय भाव और शनि जैसे ग्रहों की पीड़ा इसका संकेत मानी जाती है। परन्तु सामाजिक और आर्थिक कारण भी बड़े होते हैं। संवाद, धैर्य और सम्मान से परिवार को समझाना सबसे अच्छा मार्ग है। उपायों के साथ व्यावहारिक प्रयास भी आवश्यक हैं।।

प्रश्न 4. प्रेम विवाह की सफलता के लिए कौन से उपाय उपयोगी हैं?।। Question 4. Which remedies help in the success of love marriage?

उत्तर:- मित्रों, कमजोर ग्रह के अनुसार व्रत और पूजा लाभ देती है। शुक्र के लिए माँ लक्ष्मी, गुरु के लिए विष्णु और मंगल के लिए हनुमान जी की उपासना परम्परा से बताई गई है। राधा-कृष्ण और शिव-पार्वती की पूजा भी श्रेष्ठ मानी जाती है। रत्न केवल कुंडली देखकर ही धारण करें।।

प्रश्न 5. विवाह के शुभ मुहूर्त कब से शुरू हो रहे हैं?।। Question 5. When do auspicious wedding muhurats start?

उत्तर:- मित्रों, देवउठनी एकादशी नवम्बर महीने के बाद विवाह मुहूर्त आरम्भ हो जाते हैं। दिसम्बर के मध्य में खरमास लगने पर ये रुक जाते हैं। फिर मकर संक्रांति के बाद जनवरी में मुहूर्त लौटते हैं। अंतिम तिथि स्थानीय पंचांग से अवश्य जाँचें।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, प्रेम विवाह के योग को समझने के लिए पंचम, सप्तम, एकादश और द्वितीय भाव के साथ शुक्र, मंगल, राहु और दशा का सम्मिलित विचार आवश्यक होता है। बाधाएँ हों तो घबराइए नहीं, क्योंकि उपाय, संवाद और धैर्य से मार्ग निकलता है। ग्रह संकेत देते हैं, पर निर्णय विवेक से ही लेना चाहिए।।

और यहाँ मैं यही कहूँगा कि प्रेम तभी सफल होता है जब उसमें संस्कार, सम्मान और उत्तरदायित्व जुड़ा हो। माता-पिता का आशीर्वाद सुखद दाम्पत्य की सबसे मजबूत नींव मानी जाती है।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि कुंडली-विश्लेषण, मांगलिक दोष, दशा और मुहूर्त जैसे विषयों के लिए किसी विद्वान, योग्य और अनुभवी ज्योतिषाचार्य से अपनी कुंडली दिखाएँ। उन्हीं के मार्गदर्शन में उपाय करें और अंतिम निर्णय करें।।

#कुण्डली_में_प्रेम_विवाह_के_योग #प्रेम_विवाह_में_समस्या_और_समाधान #लव_मैरिज_के_ज्योतिषीय_उपाय #कुण्डली_में_विवाह_का_विश्लेषण #प्रेम_विवाह_में_बाधा_के_उपाय #Love_Marriage_Yoga_In_Horoscope #Love_Marriage_Problems_And_Solutions #Love_Marriage_Astrological_Remedies #Love_Marriage_Obstacles #Marriage_Analysis_In_Kundli

ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे  YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं – Click Here & Watch My YouTube Channel.

इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज – My facebook Page.

वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।

किसी भी तरह के पूजा-पाठ, विधी-विधान, ग्रह दोष शान्ति आदि के लिए तथा बड़े से बड़े अनुष्ठान हेतु योग्य एवं विद्वान् ब्राह्मण हमारे यहाँ उपलब्ध हैं ।।
 
संपर्क करें:- बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के बाजु में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा ।।
 
WhatsAap & Call: +91 – 8690 522 111.
E-Mail :: balajijyotish11@gmail.com
Balaji Jyotish Kendra
Balaji Jyotish Kendrahttp://balajijyotish.com
Balaji Jyotish Kendra par Vedic Astrology, Kundli Analysis, Horoscope Reading aur Astro Remedies step-by-step. Online astrology classes, practical training aur expert guidance ke saath apni jyotish knowledge ko professional level tak Pahuchaye. Contact Us.
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments