अक्षय तृतीया को बरसेगी लक्ष्मी करें यह उपाय।।

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Akshay Tritiya Ko Karen Yah Upay
akshaya tritiya

अक्षय तृतीया को बरसेगी लक्ष्मी करें यह सामान्य उपाय।। Akshay Tritiya Ko Karen Yah Upay.

वैदिक सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का दिन बेहद ही शुभ माना जाता है। इस दिन का बहुत ही अधिक महत्व होता है। हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया का पावन पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष 14 एवं 15 मई 2021 को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाएगा। इस पावन दिन को स्नान-दान, धर्म-कर्म का बहुत अधिक महत्व होता है।।

इस दिन मां लक्ष्मी और विष्णु भगवान की पूजा का भी विशेष महत्व होता है। अक्षय तृतीया के दिन विधि-विधान से माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। अक्षय तृतीया को आखातीज भी कहा जाता है। शास्त्रानुसार आज से ही सत्ययुग और त्रेतायुग का आरम्भ माना जाता है। आज किया हुआ तप और दान अक्षय फलदायक होता है।।

इसलिए इसे अक्षय तृतीया कहते हैं। खासकर यदि यह व्रत रोहिणी नक्षत्र में पड़ता हो तो महान शुभ फलदायक माना जाता है। इस दिन प्रातः काल पंखा, चावल, नमक, घी, चीनी, सब्जी, फल, इमली एवं वस्त्रादि के दान का बहुत महत्व माना जाता है। अक्षय तृतीया को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की शांत चित्त होकर विधि विधान से पूजा करने का प्रावधान है।।

नैवेद्य में जौ या गेहूँ का सत्तू, ककड़ी और चने की दाल अर्पित की जाती है। इसके बाद फल, फूल, बरतन तथा वस्त्र आदि ब्राह्मणों को दान के रूप में देना चाहिये। इस दिन ब्राह्मण को भोजन करवाना कल्याणकारी माना जाता है। इस दिन लक्ष्मी नारायण की पूजा सफेद कमल अथवा सफेद गुलाब या पीले गुलाब से करना चाहिये।।

अक्षय तृतीया को भगवान देते हैं दर्शन।। Akshay Tritiya Ko Hota Hai Bhagvan Ka Darshan.

शास्त्रों के अनुसार आज ही भगवान श्री बद्रीनारायण जी के पट खुलते हैं। वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी जी मन्दिर में भी केवल इसी दिन श्री विग्रह के चरण दर्शन होते हैं। बाकि दिनों वे पूरे वर्ष वस्त्रों से ढके रहते हैं। इस दिन ठाकुर द्वारे जाकर या बद्रीनारायण जी का चित्र सिंहासन पर रखकर उन्हें भीगी हुई चने की दाल और मिश्री का भोग लगाना चाहिये। भगवान परशुराम जी का अवतरण भी इसी दिन हुआ था। इस दिन कुछ विशेष उपायों को करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।।

अक्षय तृतीया को दान का महत्त्व।। Akshay Tritiya Ko Daan Ka Mahatva.

यह पर्व दान प्रधान माना गया है। इसी दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था। द्वापर युग का समापन भी इसी दिन हुआ था। इस दिन सत्तू अवश्य खाना चाहिए तथा नए वस्त्र और आभूषण पहनने चाहिए। अक्षय तृतीया के दिन गौ, भूमि, स्वर्ण पात्र इत्यादि का दान भी बेहद पुण्यदायी माना गया है। पंचांग के मुताबिक यह तिथि वसंत ऋतु के अंत और ग्रीष्म ऋतु का प्रारंभ का दिन भी माना जाता है।।

अक्षय तृतीया को मांगलिक कार्य।। Mangalik Karya.

इस पर्व के महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि इस दिन बिना कोई मुहूर्त देखे कोई भी शुभ एवं मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह−प्रवेश, वस्त्र−आभूषणों की खरीददारी या घर, वाहन आदि की खरीददारी आदि कार्य किये जा सकते हैं। पुराणों में इस बात का उल्लेख मिलता है, कि इस दिन अपने पितरों को किया गया तर्पण भी अक्षय फल प्रदान करता है। लोग इस दिन गंगा स्नान करते हैं। क्योंकि मान्यता है, कि इससे तथा भगवत पूजन से उनके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। मान्यता यह भी है, कि इस दिन यदि अपनी गलतियों के लिए भगवान से क्षमा मांगी जाए तो वह क्षमा कर दिए जाते हैं।।

अक्षय तृतीया को स्वर्ण खरीदना अत्यंत शुभ।। Gold Kharidana Shubh Hota Hai.

यह माना जाता है, कि इस दिन ख़रीदा गया सोना कभी समाप्त नहीं होता। क्योंकि भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी स्वयं उसकी रक्षा करते हैं। वैदिक सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार यह दिन सौभाग्य और सफलता का सूचक माना जाता है।।

अक्षय तृतीया की कथा।। Akshay Tritiya Ki Katha.

अक्षय तृतीया का महत्व युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा था। तब भगवान श्रीकृष्ण बोले, ‘राजन! यह तिथि परम पुण्यमयी है। इस दिन दोपहर से पूर्व स्नान, जप, तप, होम तथा दान आदि करने वाला महाभाग अक्षय पुण्यफल का भागी होता है। इसी दिन से सतयुग का प्रारम्भ होता है। इस पर्व से जुड़ी एक प्रचलित कथा भी है। प्राचीन काल में सदाचारी तथा देव ब्राह्म्णों में श्रद्धा रखने वाला धर्मदास नामक एक वैश्य था। उसका परिवार बहुत बड़ा था। इसलिए वह सदैव व्याकुल रहता था।।

उसने किसी से व्रत के माहात्म्य को सुना। कालान्तर में जब यह पर्व आया तो उसने गंगा स्नान किया। विधिपूर्वक देवी देवताओं की पूजा की। गोले के लड्डू, पंखा, जल से भरे घड़े, जौ, गेहूं, नमक, सत्तू, दही, चावल, गुड़, सोना तथा वस्त्र आदि दिव्य वस्तुएं ब्राह्मणों को दान कीं। स्त्री के बार−बार मना करने, कुटुम्बजनों से चिंतित रहने तथा बुढ़ापे के कारण अनेक रोगों से पीड़ित होने पर भी वह अपने धर्म कर्म और दान पुण्य से विमुख न हुआ। यही वैश्य दूसरे जन्म में कुशावती नगरी का राजा बना। अक्षय तृतीया के दान के प्रभाव से ही वह बहुत धनी तथा प्रतापी बना। वैभव संपन्न होने पर भी उसकी बुद्धि कभी धर्म से विचलित नहीं हुई।।

घर में साफ-सफाई रखें।। Saf-Safai Rakhen.

अक्षय तृतीया के पावन दिन घर में साफ- सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन घर की अच्छी तरह सफाई करें। अगर आपके घर में गंगा जल है तो पूरे घर में गंगा जल का छिड़काव कर लें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी का वास उसी घर में होता है जहां साफ- सफाई का ध्यान रखा जाता है।।

लड़ाई- झगड़े से दूर रहें।। Ladai-Jhagde Se Dur Rahen.

इस पावन दिन घर में किसी भी तरह का क्लेश या लड़ाई- झगड़ा न होने दें। जिस घर में अशांति रहती है वहां मां लक्ष्मी का वास नहीं होता है। जिस घर का वातावरण अच्छा होता है, जहां परिवार के सदस्य प्यार से रहते हैं वहां कभी भी धन की कमी नहीं होती है।।

सात्विक भोजन करें।। Satvik Bhojan Karen.

अक्षय तृतीया के पावन दिन सात्विक भोजन करें। भोजन करने से पहले भगवान को भोग जरूर लगाएं। इस दिन तामसिक भोजन और मांस-मदिरा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन अधिक से अधिक भगवान का ध्यान करें।।

गलत कार्यों से दूर रहें।। Galat Karyon Se Dur Rahen.

व्यक्ति को गलत कार्यों से हमेशा दूर रहना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन गलत कार्य करने वाला व्यक्ति को जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस दिन जरूरतमंद लोगों की मदद करें। अपनी क्षमता के अनुसार दान- पुण्य करें।।

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