जन्माष्टमी व्रत कब एवं कैसे मनाएँ।।

Janmashtami Vrat Ka Muhurt
Janmashtami Vrat Ka Muhurt

जन्माष्टमी व्रत कब एवं कैसे मनाएँ।। Janmashtami Vrat Ka Muhurt And Pooja Vidhi.

भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। कृष्ण जन्म के समय रोहिणी नक्षत्र था। सूर्य सिंह राशि में तो चंद्रमा वृषभ राशि में था। इसलिए जब रात में अष्टमी तिथि हो उसी दिन जन्माष्टमी का व्रत करना चाहिए। जन्माष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी, गोकुलाष्टमी आदि नामों से भी जाना जाता है।।

आज मंदिरों में मनाई जाएंगी जन्माष्टमी।। Janmashtami Vrat.

मथुरा, गोकुल और श्री कृष्ण से जुड़े बड़े-बड़े स्थल 30 अगस्त की अर्द्धरात्री को जन्माष्टमी मनाया जाएगा। वैष्णव संस्थानों में गोकुलोत्सव या नन्दोत्सव मनाया जाता हैं। यानी नंद के घर लल्ला के होने की सूचना तो अगले दिन ही मिली थी। परंतु जब लल्ला अष्टमी की रात को ही पैदा हो चुके थे तो अगले दिन जन्माष्टमी मनाने का कोई औचित्य नहीं है। फिर भी वैष्णव मंदिर या भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े मंदिर 31 अगस्त को ही जन्माष्टमी मनायेंगे। परंतु गृहस्थों को जन्माष्टमी का व्रत 30 अगस्त को ही करना चाहिए। व्रत का पारण 31 को करना चाहिए।

जन्माष्टमी व्रत – 30 अगस्त 2021 को है।।

Janmashtami Vrat Ka Muhurt

अष्टमी तिथि का आरंभ: 29 अगस्त रात 11 बजकर 25 मिनट से शुरू होता है। अष्टमी तिथि का समापन 30 अगस्त देर रात 2 बजे। रोहिणी नक्षत्र: 30 अगस्त को पूरा दिन पूरी रात पार कर 31 अगस्त सुबह 9 बजकर 44 मिनट तक है। यहाँ 30 अगस्त को अष्टमी एवं रोहिणी नक्षत्र दोनों का ही पूर्णतः मिलन हो रहा है।।

जन्माष्टमी व्रत का महत्व।। Janmashtami Vrat Ka Mahatva.

जन्माष्टमी का त्यौहार सनातनियों द्वारा दुनिया भर में बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाता है। भागवत कथा के मुताबिक भगवान श्रीकृष्ण भगवान नारायण के सबसे शक्तिशाली मानव अवतारों में से एक है। भगवान श्रीकृष्ण पौराणिक कथाओं में एक ऐसे भगवान है, जिनके जन्म और मृत्यु के बारे में काफी कुछ लिखा गया है। जब से भगवान श्रीकृष्ण ने मानव रूप में धरती पर जन्म लिया। तब से लोगों द्वारा भगवान के रूप में पूजा की जाने लगी।।

भगवत गीता में एक लोकप्रिय कथन है- “जब भी बुराई का उत्थान और धर्म की हानि होगी, मैं बुराई को खत्म करने और अच्छाई को बचाने के लिए अवतार लूंगा।” जन्माष्टमी का त्यौहार सद्भावना को बढ़ाने और दुर्भावना को दूर करने को प्रोत्साहित करता है। यह दिन एक पवित्र अवसर के रूप में मनाया जाता है जो एकता और विश्वास का पर्व है।।

जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा विधि।। Janmashtami Par Krishna Poojan Vidhi.

Janmashtami Vrat Ka Muhurt

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। जिसके कारण यह व्रत सुबह से ही शुरु हो जाता है। दिनभर भगवान श्रीहरि की पूजा मंत्रों से करके रोहिणी नक्षत्र के अंत में पारण करने का विधान है। अर्द्ध रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करना चाहिए। इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नान करें। स्नान करते वक्त इस मंत्र का ध्यान करें-
“ऊं यज्ञाय योगपतये योगेश्रराय योग सम्भावय गोविंदाय नमो नम:”।।

इसके बाद श्रीहरि की पूजा इस मंत्र के साथ करनी चाहिए- “ऊं यज्ञाय यज्ञेराय यज्ञपतये यज्ञ सम्भवाय गोविंददाय नमों नम:”। अब भगवान श्रीकृष्ण के बालरूप को पालने में विराजमान करा कर इस मंत्र के साथ सुलाना चाहिए- “विश्राय विश्रेक्षाय विश्रपले विश्र सम्भावाय गोविंदाय नमों नम:”।।

जब आप श्रीहरि को शयन करा चुके हो इसके बाद एक पूजा का चौक और मंडप बनाए। श्रीकृष्ण के साथ रोहिणी और चंद्रमा की भी पूजा करें। उसके बाद शंख में चंदन युक्त जल लेकर अपने घुटनों के बल बैठकर चंद्रमा को अर्घ्य चंद्रमा के मंत्र के द्वारा प्रदान करें।।

इसके बाद महा लक्ष्मी, वसुदेव, नंद, बलराम तथा यशोदा को फल के साथ अर्द्ध दे और प्रार्थना करें कि हे देव जो अनन्त, वामन. शौरि बैकुंठ नाथ पुरुषोत्म, वासुदेव, हृषिकेश, माघव, वराह, नरसिंह, दैत्यसूदन, गोविंद, नारायण, अच्युत, त्रिलोकेश, पीताम्बरधारी, नारायण चतुर्भुज, शंख चक्र गदाधर, वनमाता से विभूषित आदि नाम लेकर कहे कि जिसे देवकी से बासुदेव ने उत्पन्न किया है जो संसार, ब्राह्मणो की रक्षा क् लिए अवतरित हुए है। उस ब्रह्मरूप भगवान श्रीकृष्ण को मै नमन करता हूं। इस तरह भगवान की पूजा के बाद घी-धूप से उनकी आरती करते हुए जयकारा लगाना चाहिए और प्रसाद ग्रहण करने के बाद अपने व्रत को खोल ले।।

जन्माष्टमी पर खीरे के पूजन का महत्व।। Janmashtami Par Khire Ka Poojan.

Janmashtami Vrat Ka Muhurt

जन्माष्टमी पर लोग भगवान श्रीकृष्ण को खीरा चढ़ाते हैं। माना जाता है, कि नंदलाल खीरे से काफी प्रसन्न होते हैं। भक्तों के सारे संकट हर लेते हैं। इस दिन ऐसा खीरा लाया जाता है जिसमें थोड़ा डंठल और पत्तियां भी होनी चाहिए।।

मान्यताओं के अनुसार, जन्मोत्सव के समय इसे काटना शुभ माना जाता है। अब आपके दिमाग में घूम रहा होगा कि आखिर खीरे को काटना क्यों शुभ माना जाता है। हम आपको बता दें कि जिस तरह एक मां की कोख से बच्चे के जन्म के बाद मां से अलग करने के लिए ‘गर्भनाल’ को काटा जाता है। उसी तरह खीरे और उससे जुड़े डंठल को ‘गर्भनाल’ मानकर काटा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण को मां देवकी से अलग करने के लिए काटे जाने का प्रतीक है।।

ऐसे करें भगवान का नाल छेदन।। Janmashtami Par Bhagvan Ka Nal Chhedan.

खीरे को काटने की प्रकिया को नाल छेदन के नाम से जाना है। इस दिन खीरा लाकर कान्हा के झूले या फिर भगवान श्रीकृष्ण के पास रख दें। जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हो, उसके तुरंत बाद एक सिक्के की मदद से खीरा औऱ डंठल को बीच से काट दें। इसके बाद शंख जरूर बजाएं।।

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