पञ्चांग 15 जनवरी 2022 दिन शनिवार।।

Panchang 15 January 2022
Panchang 15 January 2022

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।

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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 15 जनवरी 2022 दिन शनिवार।।

मित्रों, तारीख 15 जनवरी 2022 दिन शनिवार को पौष मास के शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत है। इसलिए आज शनिवार का प्रदोष व्रत हो रहा है। इस वर्ष 2022 में सूर्यदेवता धनु राशि से मकर राशि में 14 जनवरी की रात और 15 जनवरी के सुबह में जा रहे हैं। सूर्य के संक्रमण का समय काशी विश्वनाथ पाञ्चांग के अनुसार रात्रि 08:49 मिनट पर हो रहा है। साथ ही मुम्बई एवं सिलवासा के रेखांश के अनुसार रात्री 12 बजे के आसपास सूर्य का धनु से मकर राशि में संक्रामण हो रहा है। आप सभी सनातनी भाइयों को शनि प्रदोष व्रत एवं मकर संक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनायें।।

संक्रान्ति निर्णय:: जब भी कभी सूर्य का राशि परिवर्तन सूर्यास्त अथवा अर्द्ध रात्रि के बाद होता है तब पुण्यकाल और मकर संक्रांति उसके अगले दिन होता है और उसी के अनुसार दान पुण्य किया जाना चाहिए।।

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।

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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).

पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

Panchang 15 January 2022

आज का पञ्चांग 15 जनवरी 2022 दिन शनिवार।।
Aaj ka Panchang 15 January 2022.

विक्रम संवत् – 2078.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – आनन्द.

शक – 1943.

अयन – दक्षिणायन.

गोल – उत्तर.

ऋतु – हेमन्त.

मास – पौष.

पक्ष – शुक्ल.

गुजराती पंचांग के अनुसार – पौष शुक्ल पक्ष.

Panchang 15 January 2022

तिथि – त्रयोदशी 24:58 PM बजे तक उपरान्त चतुर्दशी तिथि है।।

नक्षत्र – मृगशिरा 23:21 PM तक उपरान्त आर्द्रा नक्षत्र है।।

योग – ब्रह्मा 14:33 PM तक उपरान्त ऐन्द्र योग है।।

करण – कौलव 11:41 AM तक उपरान्त तैतिल करण है।।

चन्द्रमा – वृषभ राशि पर 09:51 AM तक उपरान्त मिथुन राशि पर।।

सूर्योदय – प्रातः 07:17:57

सूर्यास्त – सायं 18:16:51

राहुकाल (अशुभ) – सुबह 09:00 बजे से 10:30 बजे तक।।

विजय मुहूर्त (शुभ) – दोपहर 12.36 बजे से 13.00 बजे तक।।

Panchang 15 January 2022

त्रयोदशी तिथि विशेष – त्रयोदशी तिथि को बैंगन और चतुर्दशी को शहद त्याज्य होता है। त्रयोदशी तिथि जयकारी और सर्वसिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इसके देवता मदन (कामदेव) हैं। जया नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव।।

कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।।

आज की तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।।

त्रयोदशी तिथि ज्योतिषशास्त्र में अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति महापुरूष होता है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है और अनेक विषयों की अच्छी जानकारी रखने वाला होता है। यह व्यक्ति काफी विद्वान होता है तथा अन्यों के प्रति दया भाव रखने वाला एवं किसी की भी भलाई करने हेतु सदैव तत्पर रहने वाला होता है । इस तिथि के जातक समाज में काफी प्रसिद्धि हासिल करते ही हैं।।

Panchang 15 January 2022

मित्रों, आज 29 वर्षों बाद मकर संक्रांति पर सूर्य-शनि की युति का दुर्लभ संयोग बन रहा है। आज ब्रह्म और आनंदादि योग भी है। ब्रह्म योग शांति का प्रतीक है तो आनंदादि योग मनुष्य की असुविधाओं को दूर करता है। संक्रांति के समय ब्रह्म योग के साथ ही रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र का योग है। मेदिनीय संहिता के अनुसार यदि मेष, वृषभ, कर्क, मकर और मीन राशि में संक्रांतियां होती हैं तो वे सुखदायी होती हैं।।

इस वर्ष मकर संक्रांति वृषभ राशि में घटित होने से सुखदायक रहेगी। फलप्रदीप में कहा गया है, कि यदि संक्रांति बैठे अवस्था में प्रवेश करती है तो धन-धान्य की वृद्धि एवं आरोग्य की प्राप्ति होती है। संक्रांति का प्रवेश रात में हो रहा है इसलिए उत्तम माहौल रहेगा। मृगशिरा नक्षत्र में होने से ‘मंदाकिनी संज्ञा रहेगी। शनिवार दिन होने से यह संक्रांति सुख प्रदान करने वाली होगी।।

सूर्यदेव के एक माह बाद धनु से 14 जनवरी की रात में मकर राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास की समाप्ति हो जाएगी। अगले दिन 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। सूर्य के उत्तरायण होते ही विवाहादि मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाएंगे। विवाह का प्रथम मुहूर्त 15 जनवरी को है। सूर्य जब धनु से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे मकर संक्रांति कहते हैं।।

इस वर्ष सूर्य का धनु से मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात 8.49 बजे हो रहा है। परंतु स्नान-दान समेत पर्व के विधान 15 जनवरी को पूरे किए जाएंगे। कारण यह है, कि शास्त्रों के अनुसार सूर्यास्त के बाद सूर्य की मकर राशि में संक्रांति होने पर पुण्यकाल अगले दिन ही मान्य होता है। इसलिए इस वर्ष संक्रान्ति का पुण्यकाल 15 जनवरी को प्रात: से दोपहर 12.49 बजे तक रहेगी।।

आज के दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर जाते हैं। इसलिए ही इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। बहुत सी जगहों पर इसे ‘खिचड़ी’ और ‘उत्तरायण’ भी कहते हैं। दक्षिण भारत में इसे पोंगल कहा जाता है, जिसका अर्थ भी खिचड़ी ही होता है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही खरमास का समापन हो जाता है। इसके बाद शुभ और मांगलिक कार्य एक बार फिर से शुरू हो जाते हैं।।

मकर संक्रांति का पुण्यकाल मुहूर्त सूर्य के संक्रांति समय से 16 घटी पहले और 16 घटी बाद का पुण्यकाल होता है। परंतु सूर्यास्त के बाद संक्रांति होने पर पुण्यकाल अगले दिन ही मान्य होता है। इसलिए इस वर्ष संक्रान्ति का पुण्यकाल 15 जनवरी को प्रात: से दोपहर 12.49 बजे तक होगी। संक्रांति पर तिलदान करने से संकट दूर होते हैं और पापों का शमन होता है। सूर्य की राशि परिवर्तन से रात्रि छोटी एवं दिन बड़े होने लगते हैं और मौसम में भी बदलाव नजर आता है।।

Panchang 15 January 2022

मृगशिरा नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म मृगशिरा नक्षत्र में हुआ है तो आप स्वभाव से चतुर एवं चंचल होते हैं। आप अध्ययन में अधिक रूचि रखते हैं। माता पिता के आज्ञाकारी और सदैव साफ़ सुथरे आकर्षक वस्त्र पहनने वाले होते हैं। आपको श्वेत रंग अत्यधिक प्रिय है। मृगशिरा नक्षत्र में पैदा हुए जातकों का चेहरा बहुत ही आकर्षक एवं सुन्दर होता है।।

आपका झुकाव विपरीत लिंग की ओर सामान्यतः अधिक होता है। आपका मन सौम्य परन्तु कामातुर होता है। भ्रमण करना आपको प्रिय है। आपका अधिकतर जीवन विलासितापूर्ण एवं ऐश्वर्यशाली होता है। आप आर्धिक रूप से धनि होने के साथ-साथ बहुत ही सोच समझ कर धन खर्च करने वाले होते हैं। अपने इसी स्वभाव के कारण मित्रों में आप कन्जूस भी कहलाते हैं।।

आपकी प्रगति में निरंतर बाधाएं आती रहती हैं तथा जीवन परिवर्तनशील रहता है। आप भी इस परिवर्तन को झेलते हुए जीवन में कई बार कार्य क्षेत्र बदलते हैं। आप किसी भी निर्णय पर पहुँचने से पहले उसके हर एक पहलु पर अच्छी तरह सोच विचार कर लेते हैं। स्वभाव से अक्सर गंभीर और शांत रहने वाले होते हैं। मृगशिरा नक्षत्र में जन्मे जातक क्रोध कम करते हैं।।

मृगशिरा नक्षत्र में जन्मे जातक यदि क्रोधित हो भी जाएँ तो शांत होने पर पश्चाताप भी करते हैं। इस नक्षत्र में जन्मे जातकों का गायन वाद्य आदि कलाओं में अधिक रूचि होती है। मृगशिरा नक्षत्र में जन्मे जातकों का जीवन बाधा रहित वैभव शाली होता है। पेट और पाचन से सम्बन्धी रोग, कन्धों में दर्द और जीवन में कोई विशेष दुर्घटना की संभावना सदैव बनी रहती है।।

प्रथम चरण:- मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह है। इसके प्रथम चरण का स्वामी ग्रह सूर्य है। सूर्य और मंगल, दोनों ग्रहों का संयोग राजयोग देता है। फलस्वरूप ऐसा जातक राजतुल्य बनता है। उसके पास राजा के समान ठाट-बाट की सभी वस्तुएं रहती हैं। मंगल और सूर्य में मित्रता के कारण सूर्य और मंगल दोनों की दशाएं शुभ जायेंगी और शुक्र की दशा-अन्तर्दशा में जातक की विशेष उन्नति होगी।।

द्वितीय चरण:- मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह है। इसके द्वितीय चरण का स्वामी ग्रह बुध हैं। अतः बुध और मंगल में शत्रुता के कारण जातक में झूठ बोलने एवं स्वर्ण चोरी के लक्षण देखे जाते हैं अर्थात जातक स्वर्णकार होगा। कुछ छिपाने की, चोरी की आदत स्वभाव में ही होती है। शुक्र की दशा-अन्तर्दशा में जातक की उन्नति तो होगी परन्तु विशेष भाग्योदय करने में सहायक नहीं होगी।।

तृतीय चरण:- मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह है। इसके तृतीय चरण का स्वामी ग्रह शुक्र हैं। जो विलासप्रिय एवं भोगी होते हैं। अतः मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण में पैदा होने वाला जातक ऐश्वर्य प्रिय, भोगी एवं कुटिल बुद्धि वाला होगा। लग्नेश की दशा शुभ फल देगी।।

चतुर्थ चरण:- मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह है। इसके चतुर्थ चरण का स्वामी ग्रह मंगल हैं। अतः मृगशिरा नक्षत्र के चौथे चरण में पैदा होने वाले जातक पर मंगल का प्रभाव अधिक रहेगा। जातक का जीवन धन-धान्य से युक्त रहेगा एवं सदा लक्ष्मियुक्त रहेगा। लग्नेश बुध और मंगल की दशा उत्तम फल देगी।।

Panchang 15 January 2022

मित्रों, हमारे भारत के सभी त्योहारों के पीछे सिर्फ परंपरा या रूढिवादी बातें ही नहीं होती है। हर त्यौहार के पीछे छुपी होती है ज्ञान, विज्ञान, कुदरत, स्वास्थ्य और आयुर्वेद से जुड़ी अनेकों प्रकार के कारण होते हैं। प्रति वर्ष 14 या 15 जनवरी को सनातन धर्म में मनाया जाने वाला त्यौहार मकर संक्रांति की बात करें तो यह पौष मास में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है।।

वैसे तो संक्राति साल में 12 बार सूर्य के राशि परिवर्तन करने पर होती है। परंतु मकर और कर्क राशि में इनके प्रवेश करने का विशेष महत्व होता है। जिसके साथ बढती गति के चलते मकर में सूर्य के प्रवेश से दिन बड़ा तो रात छोटी हो जाती है। जबकि कर्क में सूर्य के प्रवेश से रात बड़ी और दिन छोटा हो जाता है।।

संक्रामण का अर्थ होता है चलना या पार करना अथवा एक जगह से दूसरे जगह पर जाना। इस वर्ष 2022 में सूर्यदेवता धनु राशि से मकर राशि में 14 जनवरी की रात और 15 जनवरी के सुबह में जा रहे हैं। सूर्य के संक्रमण का समय काशी विश्वनाथ पाञ्चांग के अनुसार रात्रि 08:49 मिनट पर हो रहा है। साथ ही मुम्बई एवं सिलवासा के रेखांश के अनुसार रात्री 12 बजे के आसपास सूर्य का धनु से मकर राशि में संक्रामण हो रहा है।।

ऐसे में सूर्य के संक्रामण का जो दोष लगता है। जिसके लिए पुण्यकाल में स्नान किया जाता है। वह तो तभी होगा न जब संक्रामण हो जाएगा। कुछ 17 सितंबर विश्वकर्मा पुजा की तरह ही मकर संक्रांति को भी 14 जनवरी को मनाने का रिवाज बनाने पर लगे हुये हैं। सूर्यदेव के मकर राशि में प्रवेश करने का पर्व मकर संक्रांति इस बार 15 जनवरी को मनाई जाएगी। मकर राशि में आकर सूर्य देव का मिलन अपने पुत्र शनिदेव और बुध ग्रह से होगा जहां वह एक महीने तक रहेंगे। शनिवदेव भी इस वक्त मकर राशि में ही विराजमान हैं।।

सूर्य और शनि विपरीत विचार धारा के ग्रह माने जाते हैं। सूर्य जहां यश, अधिकार और शक्ति के प्रतीक हैं, वहीं शनि मेहनत, कर्म और संघर्ष के प्रतीक हैं। इसका असर राशियों पर भी देखा जा सकता है। सूर्य का राशि परिवर्तन 14 जनवरी को रात्री 12 बजे के आसपास हो रहा है। इसलिए अगले दिन 15 जनवरी को मकर संक्रांति पर्व मनाया जाएगा। अगले दिन सूर्योदय से शाम तक पुण्यकाल रहेगा।।

मकर संक्रांति को स्नान, सूर्य पूजा एवं दान करने का कई गुना फल मिलता है। शनिवार के अधिपति शनिदेव हैं। जिन्हें मेहनत, कर्म और संघर्ष का अधिपति माना गया है। संक्रांति के शुभ फल से महतन और संघर्ष से तरक्की मिलेगी। अनेकों प्रकार के सुख, अन्न एवं धन-धान की वृद्धि होने का योग बनेगा।।

मकर संक्रांति पर सूर्य की पूजा, नदियों में स्नान, देव दर्शन और दान से विशेष पुण्य फल मिलेगा। इस संक्रांति का वाहन बाघ एवं उप वाहन घोड़ा होने से देश के पराक्रम में वृद्धि होगी। विद्वान एवं शिक्षित लोगों के लिए ये संक्रांति शुभ रहेगी। अनाज बढ़ेगा और महंगाई पर नियंत्रण भी रहेगा। चीजों की कीमतें सामान्य रहेंगी।।

इस बार संक्रांति देवी के हाथ में कंगन, जटी फूल, गदा और खीर रहेगी। ये भोग की अवस्था में रहेगी। इससे संकेत मिलता है, कि देवी आराधना से सुख एवं अनेकों प्रकार का फायदा होगा। इस वर्ष राजनीतिक हलचल तेज होगी। तिल, गुड़ और कपड़ों का दान करने से अशुभ ग्रहों का बुरा असर कम होगा।।

शनिवार को जूते-चप्पल, लोहे की बनी वस्तुयें, नया अथवा पुराना भी वाहन नहीं खरीदना चाहिये एवं नए कपड़े न खरीदना और ना ही पहली बार पहनना चाहिये।।

Panchang 15 January 2022

शनिवार का विशेष – शनिवार के दिन तेल मर्दन “मालिश” करने से हर प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती हैं – (मुहूर्तगणपति)।।

शनिवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से आयुष्य की हानि होती है। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।

शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है।।

दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो अदरख एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।।

Panchang 15 January 2022

जिस व्यक्ति का जन्म शनिवार को होता है उस व्यक्ति का स्वभाव कठोर होता है। ये पराक्रमी एवं परिश्रमी होते हैं तथा इनके ऊपर दु:ख भी आये तो ये उसे भी सह लेना जानते हैं। ये न्यायी एवं गंभीर स्वभाव के होते हैं तथा सेवा करना इन्हें काफी पसंद होता है।।

शनिवार को जन्म लेनेवाले जातक कुछ सांवले रंग के, साहसी, मैकेनिक अथवा चिकित्सक होते हैं। इनमें से कुछ अपने कार्य में सुस्त भी होते हैं, जैसे देर से जागना, देर तक सोना भी इनकी आदतों में शुमार होता है। पारिवारिक जिम्मेदारियां भी अधिक रहती है इसलिये ये एक मेहनतकश इंसान होते हैं। सफलता के मार्ग में रूकावटों का भी सामना करना पड़ता है।।

शनिवार को जन्मलेनेवाले जातकों के स्वाभाव में साहस लक्षित होता है। सफलता के मार्ग में लाख रुकावटें आए, लेकिन ये इसे पार करके ही रहते हैं। ऐसे लोग अधिकांशतः सांवले रंग के होते हैं। इन जातकों को अपने कैरियर के लिये डॉक्टपर, इंजीनियर तथा मैकेनिक के क्षेत्र का चयन करना चाहिये। इनका शुभ अंक 3, 6 और 9 तथा इनका शुभ दिन शनिवार और मंगलवार होता है।।

आज का सुविचार – मित्रों, रात लम्बी और काली हो सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं होता कि सुबह होगी ही नहीं। ठीक उसी तरह असफलता का दौर लम्बा हो सकता है, लेकिन इसका यह मतलब ये कतई नहीं होता कि आपको अब कभी सफलता मिलेगी ही नहीं।।

Panchang 15 January 2022

शनि देव मेहरबान हों तो इंजीनियर और चार्टर्ड एकाउंटेंट बनाते है।।…. आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें:  & ब्लॉग पर पढ़ें:

“शुक्र की महादशा में सूर्य अन्तर्दशा फलम्” – My Latest video.

“शुक्र की महादशा में चंद्रमा अन्तर्दशा फलम्” – My Latest video.

“शुक्र की महादशा में मंगल अन्तर्दशा फलम्।।” – My Latest video.

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Panchang 15 January 2022

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