पञ्चांग 18 अक्टूबर 2021 दिन सोमवार।।

Panchang 18 October 2021
Panchang 18 October 2021

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।

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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 18 अक्टूबर 2021 दिन सोमवार।।

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।

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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).

पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

Panchang 18 October 2021

आज का पञ्चांग 18 अक्टूबर 2021 दिन सोमवार।।
Aaj ka Panchang 18 October 2021.

विक्रम संवत् – 2078.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – आनन्द.

शक – 1943.

अयन – दक्षिणायन.

गोल – उत्तर.

ऋतु – शरद.

मास – अश्विन.

पक्ष – शुक्ल.

गुजराती पंचांग के अनुसार – अश्विन शुक्ल पक्ष.

Panchang 18 October 2021

तिथि – त्रयोदशी 18:08 PM बजे तक उपरान्त चतुर्दशी तिथि है।।

नक्षत्र – पूर्वाभाद्रपद 10:50 AM तक उपरान्त उत्तराभाद्रपद नक्षत्र है।।

योग – ध्रुव 20:58 PM तक उपरान्त व्याघात योग है।।

करण – कौलव 05:51 AM तक उपरान्त तैतिल 18:08 PM तक उपरान्त गर करण है।।

चन्द्रमा – कुम्भ राशि पर 04:33 AM तक उपरान्त मीन राशि पर।।

सूर्योदय – प्रातः 06:35:21

सूर्यास्त – सायं 18:10:36

राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 07:30 बजे से 09:00 बजे तक।।

विजय (शुभ) मुहूर्त – दोपहर 12.11 बजे से 12.35 बजे तक।।

Panchang 18 October 2021

त्रयोदशी तिथि विशेष – त्रयोदशी तिथि को बैंगन और चतुर्दशी को शहद त्याज्य होता है। त्रयोदशी तिथि जयकारी और सर्वसिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इसके देवता मदन (कामदेव) हैं। जया नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव।।

कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।।

आज की तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।।

त्रयोदशी तिथि ज्योतिषशास्त्र में अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति महापुरूष होता है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है और अनेक विषयों की अच्छी जानकारी रखने वाला होता है। यह व्यक्ति काफी विद्वान होता है तथा अन्यों के प्रति दया भाव रखने वाला एवं किसी की भी भलाई करने हेतु सदैव तत्पर रहने वाला होता है । इस तिथि के जातक समाज में काफी प्रसिद्धि हासिल करते ही हैं।।

Panchang 18 October 2021

पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में हुआ है तो आप मानवता में विश्वास रखते हुए केवल दूसरों के भले के बारे में ही सोचते हैं। आप एक दयालु और नेक दिल होने के साथ-साथ खुले विचारों वाले व्यक्ति होंगे। आप बहुत साहसी होंगे तथा दूसरों की मदद करने में सदा आगे रहेंगे। आप वाणी और विचारों से नम्र अवश्य होते हैं परन्तु व्यक्तित्व से नहीं।।

पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में जन्मे जातक अपने आदर्शो और सिद्धांतों पर ही आजीवन चलना पसंद करते हैं। आप जीवन में कभी पथभ्रष्ट नहीं होते क्योंकि आपका दृष्टिकोण सही और साफ़ होता है। आप एक शांति प्रिय व्यक्ति होंगे परन्तु शीघ्र ही किसी छोटी से छोटी बात पर भी क्रोध कर लेंगे। आपको क्रोध जितनी जल्दी आता है उतनी जल्दी चला भी जाता है।।

दूसरों के साथ आपका व्यवहार स्नेही और प्रेमपूर्ण होता है। आप एक संवेदनशील व्यक्ति होंगे जो शीघ्र ही प्रभावित हो जाते है। परन्तु न तो आप डरपोक हैं और न ही जल्दी हार मानते हैं। पूर्वाभाद्रपद में जन्मे जातक आध्यात्मिक स्वभाव वाले होते हैं। परन्तु बंद आँखों से किसी भी बात को मान लेना और उनका अनुसरण करना इनके स्वभाव में नहीं होता है। आप सही और गलत में निर्णय लेने के बाद ही दूसरों का अनुसरण करते हैं।।

आप धन के मामलों में कंजूस कहे जाते हैं। आप जीवन में कई कठिनाईयों को झेलते हुए समाज में आदर एवं सम्मान प्राप्त करते हैं। अपनी कुशाग्र बुद्धि के कारण आप किसी भी प्रकार के कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के योग्य बन जाते हैं। आप केवल स्वभाव से ही नहीं अपितु सामाजिक और आर्थिक रूप से भी स्वतंत्र जीवन पसंद करते हैं। व्यावसायिक रूप से 24 से 33 वर्ष की आयु में आप अपने जीवन में सर्वाधिक सफलता प्राप्त करेंगे।।

40 से 54 वर्ष के आयु में अपने करियर की ऊँचाईयों को छुएंगे। पूर्वाभाद्रपद के जातकों को सरकारी नौकरी, बैंक, शिक्षा और लेखन, व्यापार, ज्योतिष एवं अभिनय के क्षेत्र में कार्य करते देखा गया है। इस नक्षत्र में जन्मा जातक अपनी माता के स्नेह से वंचित रहता है। कारण जो भी हो पिता का संरक्षण और प्रेम आपको सदा प्राप्त होता है। पिता की उच्च एवं सम्माननीय स्तिथि के कारण आप सदा गौरवान्वित रहेंगे।।

परन्तु कुछ वैचारिक मतभेदों के कारण आपसी तनाव रहेगा। पूर्वाभाद्रपद में जन्मा जातक अक्सर स्त्रियों के वश में रहता है। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में जन्मी जातिकायें जादू टोने में विश्वास रखती हैं। निराशा और शोक मग्न चेहरा पूर्वाभाद्रपद में जन्मे जातकों की निशानी बन जाती है। पैर की हड्डी का दर्द, पैर का टूटना, मधुमेह और लकवा जैसी बीमारियाँ ऐसे जातकों को परेशान करती रहती है।।

प्रथम चरण:- वैदिक ज्योतिष के अनुसार पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी गुरु ग्रह है। इस पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी मंगल हैं। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा जातक शूरवीर होता है। जो वस्तु विनम्रता, प्रार्थना एवं खरीद से प्राप्त नहीं हो पाती उसे हरण करने में रूचि रखता है। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी बृहस्पति शनि का शत्रु है परन्तु मंगल का मित्र है। अतः मंगल की दशा शुभ फल एवं भौतिक सम्पन्नता देती है। परन्तु बृहस्पति की दशा में अपेक्षित शुभ फल नहीं मिल पाएगा। साथ ही शनि की दशा-अन्तर्दशा शुभ फल देती है।।

द्वितीय चरण:- पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी गुरु ग्रह है। इस पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शुक्र हैं। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के द्वितीय चरण में जन्मा जातक अति बुद्धिमान होता है। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी बृहस्पति शुक्र का शत्रु है तथा शुक्र शनि का भी शत्रु है। अतः शुक्र की दशा अपेक्षित शुभ फल नहीं दे पाएगी। बृहस्पति की स्वतंत्र दशा में पराक्रम बढेगा। शनि की दशा में जातक की उन्नत्ति होगी।।

तृतीय चरण:- पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी गुरु ग्रह है। इस पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी बुध हैं। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण में जन्मे जातक का विकास और उन्नत्ति बड़े शहर में रहने के कारण होती है। छोटे गाँव कस्बों में जातक उन्नत्ति नहीं कर पायेगा। बुध की नक्षत्र स्वामी बृहस्पति से शत्रुता है। परन्तु लग्नेश शनि से मित्रता है अतः बुध की दशा शुभ फलदायी होगी। बृहस्पति की स्वतंत्र दशा में पराक्रम बढेगा। शनि की दशा में जातक की उन्नत्ति होगी।।

चतुर्थ चरण:- वैदिक ज्योतिष के अनुसार पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी गुरु ग्रह है। इस पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी चन्द्रमा हैं। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मा जातक भोगी होता है। लग्न नक्षत्र स्वामी और नक्षत्र चरण स्वामी में परस्पर मित्रता है। अतः लग्नेश गुरु की दशा अति उत्तम फल देगी। गुरु की दशा में जातक को रोजगार के शुभ अवसर प्राप्त होंगे। चन्द्रमा की दशा धार्मिक यात्राएं एवं भाग्योदय के उत्तम अवसर प्रदान करेंगी। लग्न बली न होने के कारण जातक के विकास में अडचने आएँगी।।

Panchang 18 October 2021

सामान्यतया सोमवार शॉपिंग के लिए अच्छा दिन माना जाता है।।

सोमवार का विशेष – सोमवार के दिन तेल मर्दन अर्थात् तेल मालिश करने से चहरे और शरीर की कान्ति बढ़ती है – (मुहूर्तगणपति)।।

सोमवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से शिव भक्ति की हानि होती है। पुत्रवान पिता को तो कदापि नहीं करना चाहिये। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।

दिशाशूल – सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई दर्पण देखकर घर से प्रस्थान कर सकते है।।

सोमवार के दिन ये विशेष उपाय करें – सोमवार को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।

Panchang 18 October 2021

मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म सोमवार को होता है, वो जातक शांत प्रवृत्ति के गौर वर्ण लिए हुये होते हैं। सोमवार चन्द्र प्रधान दिन होता है, इसलिये इस जातक में कल्पनाशीलता, दया भाव, नम्रता के गुण परिलक्षित होते हैं। माता के प्रिय एवं सद्गुणों से युक्त ये जातक कवि ह्रदय, सफेद वस्तुओं से लाभ पाने वाला, यात्रा का शौकीन, जलाशयों एवं प्रकृति का प्रेमी होता है।।

सोमवार को जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है। इनकी प्रकृति यानी इनका स्वभाव शान्त होता है। इनकी वाणी मधुर और मोहित करने वाली होती है। ये स्थिर स्वभाव वाले होते हैं सुख हो या दु:ख सभी स्थिति में ये समान रहते हैं। धन के मामले में भी ये भाग्यशाली होते हैं तथा इन्हें सरकार एवं समाज से मान-सम्मान मिलता है।।

इस दिन जन्मै लेने वाले जातक को पर्यावरण के क्षेत्र में, समुद्र विज्ञान के क्षेत्र में, पानी से जुड़े रोजगार जैसे मत्य् क पालन या मछली का व्येवाय, पत्थ रों का व्यसवसाय, कपड़े का व्यंवसाय अधिक फलता है। इनके लिए सफेद रंग सदा शुभकारी होता है इसलिए कैरियर के लिहाज से आप जहां भी जायें सफेद रुमाल अपनी जेब में रखें और उस क्षेत्र को ही चुने जिसमें सफेद रंग की प्रधानता हो, जैसे पानी, कपड़ा, फूल, पत्थयर आदि से जुड़ा व्येवसाय।।

आज का सुविचार – मित्रों, जीना हैं, तो उस दीपक की तरह जियो जो बादशाह के महल में भी उतनी ही रोशनी देता हैं जितनी किसी गरीब की झोपड़ी में। जो भाग्य में हैं वह भाग कर आयेगा और जो भाग्य में नही हैं वह आकर भी भाग जायेगा। हँसते रहो तो दुनिया साथ हैं, वरना आँसुओं को तो आँखो में भी जगह नही मिलती।।

Panchang 18 October 2021

चन्द्रमा द्वारा निर्मित कुछ अतुलनीय धनदायक योग।।…… आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें:  &  ब्लॉग पर पढ़ें:

ॐ अथ शिवप्रातः स्मरणस्तोत्रम् – यहाँ क्लिक करें और पढ़ें:

“केतु की महादशा में केतु अन्तर्दशा फलम्” – My Latest video.

“केतु की महादशा में शुक्र अन्तर्दशा फलम्।।” – My Latest video.

“केतु की महादशा में सूर्य अन्तर्दशा फलम्।।” – My Latest video.

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Panchang 18 October 2021

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