राशि के अनुसार लक्ष्मी प्राप्ति के अचूक टोटके।।

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Rashi Anusar Dhan Prapti Ke totake
Rashi Anusar Dhan Prapti Ke totake

राशि के अनुसार लक्ष्मी प्राप्ति के अचूक टोटके।। Rashi Anusar Dhan Prapti Ke totake.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, आज प्रत्येक व्यक्ति धनवान बनने के लिए क्या कुछ नहीं करता । प्रसिद्धि तथा धन की इच्छा तो रोगी, भोगी, योगी सभी में आज प्रबलता से विद्यमान है । परंतु सभी व्यक्ति अपने पूर्ण प्रयासों के बाद भी करोड़पति नहीं बन पाते ।।

ऐसे में वे लोग जिन्हें सफलता नहीं मिलती वे अपने भाग्य को कोसते रहते हैं । दिवाली का त्योहार या फिर शुक्रवार का दिन व्यक्ति के तन (स्वास्थ्य), मन (मनोकामनायें) व धन (पैसा) प्राप्त करने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है ।।

इस दिन को मनोरथ पूर्ण करने का दिन कहा गया है । इस दिन यंत्र-मंत्र, पूजन एवं साधना द्वारा देवताओं से मनोकामनाएं पूरी की जा सकती हैं । इस दिन सभी देवता प्रसन्न मुद्रा में होते हैं, अतः जो चाहिये हम मांग सकते हैं ।।

दिवाली अथवा शुक्रवार के दिन जातक अपने “प्रसिद्ध नाम” के पहले अक्षर से अपनी राशि के अनुसार कुछ उपायों को करके धन धान्य, भाग्य, सुख एवं समृद्धि प्राप्त कर सकता है । जन्म कुण्डली के धनदायक ग्रह द्वितीयेश एवं एकादशेश ग्रह के यंत्र को अपने पूजा कक्ष में स्थापित करें ।।

फिर उन यन्त्रों का यदि नित्य दर्शन एवं पूजन किया जाए तो माता लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त होती है । यह उपाय किसी भी महीने के शुक्रवार को शुक्र की होरा से भी आरम्भ करके कर सकते हैं ।।

मंगल, कारक, लग्नेश एवं नवमेश के रत्न यदि चांदी के “श्री:” के चारों ओर लगवाकर माता लक्ष्मी के मंत्रों से अभिमंत्रित कर गले में धारण करें तो निश्चित ही अतुलनीय धनलाभ और सौभाग्यलाभ प्राप्त किया जा सकता है ।।

इन उपयोगी उपायों को दिवाली तथा सामान्य रूप से शुक्रवार के शुभ दिन को भी करने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है । अब आप अपने नाम के प्रथम अक्षर से अपनी राशि के अनुसार इन उपायों को कर सकते हैं ।।

सर्वप्रथम हम मेष राशि जिनका अक्षर (चू चे चो ला ली लू ले लो आ) होता है । यह लोग शुक्र एवं शनिः के लिए सफेद जरकन जड़ा शुक्र यंत्र एवं नीली जड़ा शनि यंत्र और मंगल एवं गुरुः के लिए लाल एवं पीले जरकन को दिवाली या शुक्रवार की रात चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर गेंहू से स्वास्तिक बनाकर उसके ऊपर एक थाली रखें ।।

थाली में कुमकुम से “गं” लिखकर श्वेतार्क गणपति, श्रीफल एवं 7 कौडियां रखें । चंदन की माला से 5 माला इस मंत्र का जप करें । “ऊं सर्व सिद्धि प्रदायसि त्वं सिद्धि बुद्धिप्रदो भवः श्रीं” ।।

वृष राशि (ई उ ए ओ वा वी वू वे वो) अक्षर वाले बुध एवं गुरु के लिए ओनेक्स जड़ा बुध यंत्र एवं सुनहला जड़ा गुरु यंत्र और शुक्र एवं शनि के लिए सफेद जरकन एवं नीली दिवाली अथवा शुक्रवार की रात्रि से आरंभ कर लगातार 7 दिन तक करें ।।

करना ये है, कि इन सबको महालक्ष्मी यंत्र के सम्मुख, कमल गटटे की माला से “ऊं महालक्ष्म्यै नमः” इस मंत्र की 11 माला जप करें । अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद अंतिम दिन किसी ब्राहमण को भोजन कराएं ।।

मिथुन राशि (का की कू घ ड छ के के हा) वाले चन्द्रमा एवं मंगल का मोती जड़ा चन्द्र यंत्र एवं मूंगा जड़ा मंगल यंत्र और बुध एवं शनि का नीले एवं हरे जरकन को दिवाली अथवा शुक्रवार के दिन श्वेतार्क की जड की पूजा स्थल पर प्राण प्रतिष्ठा करें ।।

फिर प्रतिदिन माता महालक्ष्मी के इन मन्त्रों के साथ पूजा करें । “ऊं ह्रीं अष्टलक्ष्म्यै दारिद्रय विनाशिन्यै सर्व सुखं समृद्धिं देहि देहि ह्रीं ऊं नमः” । इसी मन्त्र से पूजन करें और पूजन के बाद इसी मन्त्र की पाँच माला जप करें ।।

कर्क राशि (ही हू हे हो डा डी डू डे डा) वाले सूर्य एवं शुक्र के लिए माणिक जड़ा सूर्य यंत्र एवं सफेद जरकन जड़ा शुक्र यन्त्र और चन्द्र एवं गुरु का पीले जरकन एवं मोती को दिवाली अथवा शुक्रवार के बाद पहली बार जब चंद्रमा दिखे ।।

तब उस दिन से अगली पूर्णिमा तक हर रोज रात को केले के पते पर दही-भात रख कर चंदमा को दिखाएं । फिर जब ये अनुष्ठान पूरा हो जाय तब इन सबको किसी मन्दिर में पंडितजी को दान दे दें ।।

सिंह राशि (मा मी मू मी टा टी टू ट) वाले बुध के लिए ओनेक्स जड़ा बुध यंत्र और सूर्य एवं मंगल के लिए लाल जरकन को “ऊं ह्रीं क्लीं महालक्ष्मयै नमः” इस मंत्र का श्री लक्ष्मी की तस्वीर या यंत्र के सम्मुख दीपावली या शुक्रवार से शुरु कर नित्य 5 माला जप करें ।।

कन्या राशि (टो पा पी पू ष ण ठ पे पा) वाले शुक्र एवं चन्द्र के लिए मोती जड़ा चंद्र यंत्र एवं सफेद जरकन जड़ा शुक्र यंत्र और बुध एवं शुक्र के लिए नीले एवं हरे जरकन को देवी दुर्गा के सम्मुख “देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि में परम सुखम । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि जयं देहि द्विशो जहि.’ मंत्र का जप दीपावली या शुक्रवार से शुरु करके रोजाना करें ।।

तुला राशि (रा री रू रे रो ता ती तू त) वाले मंगल एवं सूर्य के लिए माणिक जड़ा सूर्य यंत्र एवं मूंगा जड़ा मंगल यंत्र और शुक्र एवं बुध का नीले एवं हरे जरकन को दीवाली या शुक्रवार के दिन श्रीयंत्र के साथ प्राण प्रतिष्ठा करें ।।

फिर प्रतिदिन इस मंत्र से इन सबकी पूजा करें । “श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” । इसी मन्त्र से पूजन करें फिर इसी मन्त्र की जप पाँच माला जप करें ।।

वृश्चिक राशि (तो ना नी नू ने नो या यी यू) वाले गुरु एवं बुध के लिए सुनहला जड़ा गुरु यंत्र एवं ओनेक्स जड़ा बुध यंत्र और मंगल एवं चन्द्र के लिए मोती एवं लाल जरकन को मंगल यंत्र के सम्मुख दीपावली अथवा शुक्रवार से शुरु कर नित्य “ऋणहर्ता मंगल स्तोत्र” का पाठ करें ।।

धनु राशि (ये यो भा भी भू धा फा ढा भे) वाले मंगल एवं शुक्र के लिए नीली जड़ा शनि यंत्र एवं सफेद जरकन जड़ा शुक्र यंत्र और गुरु एवं सूर्य के लिए पीले एवं लाल जरकन को दिवाली अथवा शुक्रवार के दिन इस मन्त्र की 21 माला जप करें ।।

फिर अगले दिन एक ब्राहमण को भोजन करायें । तत्पश्चात रोजाना इसी मंत्र का एक माला जप करें । मन्त्र – “ऊं श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौं ऊं ह्रीं सकल ह्रीं सौं ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं ऊं” इस मन्त्र की इक्कीस माला का जप करें ।।

मकर राशि (भे जा जी खी खू खे खो गा गी) वाले शनि एवं मंगल के लिए नीली जड़ा शनि एवं मूंगा जड़ा मंगल यंत्र और शनि एवं बुध के लिए नीली एवं हरे जरकन को दीपावली अथवा शुक्रवार की शाम को एक सुपारी एवं एक तांबें का सिक्का लेकर किसी पीपल के पेड के नीचे रख दें ।।

रविवार को उसी पीपल के पेड़ का पत्ता लाकर अपने दुकान अथवा व्यापार स्थल पर गददी के नीचे रख दें । इसके बाद आप स्वयं अनुभव करेंगे कि इससे ग्राहक बने रहते हैं और धन आने लगता है ।।

कुम्भ राशि (गू गे गो सा सी सू से सो दा) वाले गुरु का एक सुनहला जड़ा गुरु यंत्र और शनि एवं शुक के लिए एक नीली एवं सफेद जरकन को दिवाली अथवा शुक्रवार के दिन अपने गल्ले के नीचे काली गुंजा के दाने डाल दें ।।

फिर इस मन्त्र की 5 माला का जप करें साथ ही प्रतिदिन माता महालक्ष्मी के सामने एक घी का दिया जलाएं । फिर इस मन्त्र “ऊं ऐं ह्रीं विजय वरदाय देवी ममः” का जप करें ।।

मीन राशि (दी दू थ झ दे दे चा ची) वाले मंगल एवं शनि के लिए एक नीली जड़ा शनि यन्त्र एवं एक मूंगा जड़ा मंगल यंत्र और गुरु एवं मंगल के लिए पीले एवं लाल जरकन को दिवाली अथवा शुक्रवार के दिन 11 हल्दी की गांठों को पीले कपड़े में रखें ।।

फिर इन सभी सामग्रियों को एक साथ रखकर गणेश जी की तस्वीर के सम्मुख गणेश मन्त्र की 11 माला का जप करें और तिजोरी में रखें । फिर प्रतिदिन वहां एक घी का दिया जलाएं । अथ मन्त्रः “ऊं वक्रतुण्डाय हुं” ।।

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