विश्वकर्मा पूजा 2021 की मुहूर्त एवं विधि।।

Vishwakarma Puja 2021
Vishwakarma Puja 2021

विश्वकर्मा पूजा 2021 की मुहूर्त एवं विधि।। Vishwakarma Puja 2021.

मित्रों, समान्यतः विश्वकर्मा पूजा हर वर्ष कन्या राशि में सूर्य के प्रवेश करने के साथ अर्थात कन्या संक्रांति के दिन मनाई जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। इसलिए इसे विश्वकर्मा जयंती भी कहा जाता है। मान्‍यता है कि इस दिन विधि विधान से भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना करने से व्यापार में बढ़ोत्तरी और मुनाफा होता है। भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है। जिन्होंने ब्रह्मा जी के साथ मिलकर इस सृष्टि का निर्माण किया था। आइये बताते हैं इस वर्ष 2021 में कब है विश्वकर्मा पूजा का पावन पर्व और इसका महत्व।।

विश्वकर्मा पूजा 2021 की तारीख एवं मुहूर्त।। Vishwakarma Puja 2021 date and muhurat.

विश्वकर्मा पूजा का पावन पर्व हर वर्ष अँग्रेजी तारीख के अनुसार 17 सितंबर को मनाया जाता है। परन्तु वैदिक पंचांग के अनुसार विश्वकर्मा पुजा तब मनाया जाता है, जब सूर्यदेव सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करते हैं। यह अलग बात है, कि ऐसा संयोग हर वर्ष अँग्रेजी कि 17 सितम्बर कि तारीख ही पड़ती है। हमारे पंचांग के अनुसार इस दिन को कन्या संक्रांति के रूप में भी जाना जाता है। इस वर्ष भी विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर 2021 दिन शुक्रवार को ही मनाया जाएगा। अब हम आपको पूजा का शुभ मुहूर्त बताते हैं।।

कहा जाता है कि प्राचीन काल में जितनी राजधानियां थी उनका निर्माण ब्रह्मा जी के पुत्र भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था, उन्होंने ही श्रीहरि भगवान विष्णु के लिए सुदर्शन चक्र और भोलेनाथ के लिए त्रिशूल बनाया। यहां तक कि सतयुग का स्वर्गलोक, त्रेता की लंका और द्वापर युग की द्वारका की रचना भी भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था। इस दिन सभी कारखानों और औद्योगिक संस्थानों में विश्वकर्मा की पूजा की जाती है।

विश्वकर्मा पूजा का इतिहास और महत्व, Vishwakarma Puja history and significance.

सनातन हिंदु धर्म में विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व है। भगवान विश्वकर्मा को वास्तुकला और शिल्पकला के क्षेत्र में गुरू की उपाधि दी गई है, उनके कार्यों का उल्लेख ऋग्वेद और स्थापत्य वेद में भी मिलता है। कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा अस्त्र शस्त्र, घर और महल बनाने में भी निपुण थे, उनके इसी कुशलता के कारण उन्हें पूजनीय माना जाता है। श्रमिक समुदाय से जुड़े लोगों के लिए यह दिन बेहद खास होता है।

इस दिन कारखानों और औद्योगिक संस्थानों में लोग मशीनों और औजारों के साथ भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना करते हैं। लोग भगवान विश्वकर्मा से अपनी रक्षा तथा आजीविका की सुरक्षा और उन्नति की प्रार्थना करते हैं। यह पर्व वैसे तो पूरे भारत देश में मनाया जाता है, लेकिन इस दिन उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, असम, त्रिपुरा में अधिक धूम देखने को मिलती है।

विश्वकर्मा पूजा विधि, Vishwakarma Puja vidhi in hindi

विश्वकर्मा पूजा आमतौर पर कारखानों, कार्यस्थलों और दुकानों में आयोजित की जाती है। इस दिन कार्यस्थल को फूलों से सजाएं तथा एक सुंदर पंडाल बनाएं और मंत्रोच्चार करते हुए भगवान विश्वकर्मा की मूर्ती स्थापित करें। इसके बाद अपने परिवार के साथ भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना करें। भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना के बाद सभी औजारों पर तिलक लगाएं और धूप दीप करें। पूजा के बाद लोगों द्वारा प्रसाद वितरित किया जाता है। आमतौर पर इस दिन सभी कार्यस्थल बंद रहते हैं और विशेष दावत का आयोजन भी किया जाता है। वहीं कई जगहों पर इस दिन पतंगबाजी की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं। तथा पूजा के अगले दिन किसी पवित्र नदी में भगवान विश्वकर्मा की मूर्ती विसर्जित करें।

विश्‍वकर्मा पूजा का महत्‍व।।

भगवान विश्‍वकर्मा के जन्‍मदिन को विश्‍वकर्मा पूजा, विश्‍वकर्मा दिवस या विश्‍वकर्मा जयंती के नाम से जाना जाता है। मान्‍यता है कि इस दिन भगवान विश्‍वकर्मा ने सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा के सातवें धर्मपुत्र के रूप में जन्‍म लिया था। भगवान विश्‍वकर्मा को ‘देवताओं का शिल्‍पकार’, ‘वास्‍तुशास्‍त्र का देवता’, ‘प्रथम इंजीनियर’, ‘देवताओं का इंजीनियर’ और ‘मशीन का देवता’ कहा जाता है। विष्‍णु पुराण में विश्‍वकर्मा जी को को ‘देव बढ़ई’ कहा गया है।।

कैसे मनाई जाती है विश्‍वकर्मा जयंती?

विश्‍वकर्मा पूजा घरों, दफ्तरों और कारखानों में की जाती है। जो लोग इंजीनियरिंग, आर्किटेक्‍चर, चित्रकारी, वेल्डिंग और मशीनों के काम से जुड़े हुए हैं वे खास तौर से इस दिन को बड़े ही उत्‍साह के साथ मनाते हैं। इस दिन मशीनों, दफ्तरों और कारखानों की अच्छे से साफ सफाई की जाती है। साथ ही भगवान विश्‍वकर्मा की मूर्ति की स्थापना की जाती है। घरों में लोग अपनी गाड़‍ियों, कंम्‍प्‍यूटर, लैपटॉप व अन्‍य मशीनों की पूजा करते हैं तो मंदिर में विश्‍वकर्मा भगवान की मूर्ति या फोटो की विधिवत पूजा करने के बाद आरती की जाती है।।

भगवान विश्वकर्मा द्वारा निर्मित की गई चीजें।।

भगवान विश्‍वकर्मा को निर्माण का देवता माना जाता है। मान्‍यता है कि उन्‍होंने देवताओं के लिए भव्‍य महलों, हथियारों और सिंघासनों का निर्माण किया था। विश्‍वकर्मा ने एक से बढ़कर एक भवन बनाए। मान्‍यता है कि उन्‍होंने रावण की लंका, कृष्‍ण नगरी द्वारिका, पांडवों के लिए इंद्रप्रस्‍थ नगरी और हस्तिनापुर का निर्माण किया। माना जाता है कि उन्‍होंने उड़ीसा स्थित जगन्नाथ मंदिर के लिए भगवान जगन्नाथ सहित, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्ति का निर्माण अपने हाथों से किया था।।

विश्वकर्मा पूजा की सरल विधि।।

विश्वकर्मा की पूजा अगर आप मूर्ति बैठाकर या उनकी मूर्ति रखकर करते हैं तो उनके सामने फल, मिठाई, चंदन, अक्षत, रोली, कुमकुम, धूप, बत्ती के अलावे घर में जो भी औजार मौजूद हो उन्हें भी साफ करके जिन्हें पानी से नहीं धो सकते उन्हें साफ कपड़े से पोछकर पूजा स्थान पर रखें। इस दिन हो सके तो औजार का प्रयोग ना करें।।

विश्वकर्मा पूजा के दिन हवन करने का है विधान।।

विश्‍वकर्मा पूजा के दिन औजारों और मशीनों की पूजा करने के बाद हवन करने का विधान है। इसके बाद प्रसाद वितरण किया जाना चाहिए। मान्‍यता है कि विधि-विधान से पूजा करने से देवशिल्पी विश्‍वकर्मा की कृपा बरसती है। जिससे व्यापार में लाभ मिलता है।।

विश्वकर्मा पूजा विधि विस्तार से।।

भगवान विश्वकर्मा की पूजा विशेष विधि-विधान से की जाती है। इस दिन यज्ञकर्ता पत्नी सहित पूजा स्थान में बैठे। इसके बाद विष्णु भगवान का ध्यान करे। इसके उपरान्त हाथ में पुष्प, अक्षत लेकर मंत्र पढ़े और चारों ओर अक्षत छिड़के और अपने हाथ में रक्षासूत्र बांधे और अपनी पत्नी को भी बांधे। फूल जलपात्र में छोड़ दें। फिर भगवान विश्वकर्मा का मन से ध्यान करें। भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति के समक्ष दीप जलायें, जल के साथ पुष्प एवं सुपारी लेकर संकल्प करें।।

शुद्ध भूमि पर अष्टदल कमल बनाकर उस पर जल डालें। अब शुद्ध भूमि पर अष्टदल कमल बनाएं। उस पर जल डालें। इसके बाद पंचपल्लव, सप्त मृन्तिका, सुपारी, दक्षिणा कलश में डालकर कपड़े से कलश की तरफ अक्षत चढ़ाएं। चावल से भरा पात्र समर्पित कर विश्वकर्मा भगवान की मूर्ति की स्थापना करें और वरुण देव का आह्वान करें। पुष्प चढ़ाकर कहना चाहिए- ‘हे विश्वकर्माजी, इस मूर्ति में विराजिए और मेरी पूजा स्वीकार कीजिए’। इस प्रकार पूजा करने के बाद औजारों और यंत्रों आदि की पूजा कर हवन यज्ञ करें।।

भगवान विश्वकर्मा के बारे में जानिए।।

भगवान विश्वकर्मा को भगवान शिव का अवतार भी माना जाता है। शास्त्रों में इनके 5 स्वरुपों और अवतारों का वर्णन प्राप्त होता है। विराट विश्वकर्मा : सृष्टि के रचयिता धर्मवंशी विश्वकर्मा : महान शिल्प विज्ञान विधाता प्रभात पुत्र अंगिरावंशी विश्वकर्मा : आदि विज्ञान विधाता वसु पुत्र सुधन्वा विश्वकर्मा : महान शिल्पाचार्य, विज्ञान जन्मदाता ऋषि अथर्वा के पौत्र भृंगुवंशी विश्वकर्मा : उत्कृष्ट शिल्प विज्ञानाचार्य (शुक्राचार्य के पौत्र)।।

विश्वकर्मा पूजा के दिन ये काम न करें।।

विश्वकर्मा भगवान की पूजा के दिन अगर कोई भी आपसे टूल्स, औजार या कोई उपकरण मांगने आए तो उसे टाल देना चाहिए। इससे आप अपने घर विश्वकर्मा जी को सम्मान देंगे। यह आपकी समृद्धि में भी सहायक होगा।।

विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त।।

इस वर्ष 17 सितंबर दिन शुक्रवार को पूरे देश में विश्वकर्मा जयंति मनाई जा रही है। संक्रांति का पुण्य काल सुबह 7 बजकर 2 मिनट से शुरु हो जाएगा। सुबह 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक यमघंट रहेगा। उसके बाद 12 बजे से 1 बजकर 30 मिनट तक गुलिक काल है और शाम 3 बजे से 4 बजकर 30 मिनट तक राहुकाल रहेगा। ये अशुभ मुहूर्त माने जाते हैं। इन समयों को छोड़कर दिन में किसी भी समय विश्वकर्मा पूजा कर सकते हैं।।

घर पर भी करें विश्वकर्मा पूजा।।

घर में जितने भी बिजली के उपकरण हैं या वाहन हैं उन सभी की इस अवसर पर अच्छे से सफाई करनी चाहिए। घर में अगर कल-पूर्जों वाले संसाधन हैं तो उनकी ऑयलिंग और ग्रीसिंग करें। ऐसे समझना चाहिए, कि ऐसा करके आप विश्वकर्मा भगवान को स्नान और तिलक कर रहे हैं। इससे आपके उपकरण लंबे समय तक चलेंगे।।

विश्वकर्मा पूजा करते समय इस बात का रखें ध्यान।।

शास्त्रों के अनुसार विश्‍वकर्मा जयंती के दिन औजारों की पूजा करते समय उनपर टीका जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विश्‍वकर्मा प्रसन्‍न होते हैं। टीका करने से तात्पर्य यह भी है, कि आपने उनकी सुरक्षा का वादा किया है। इसलिए टीका लगाकर खुद से वचन लें, कि आप अपने उपकरणों और औजारों की देखरेख करेंगे और उन्हें इधर-उधर रखकर उनका अपमान नहीं करेंगे।।

सही मायने में ये होती है विश्वकर्मा पूजा।।

विश्‍वकर्मा जयंती के मौके पर घरों और कार्यालयों में इस्‍तेमाल होने वाले सभी औजारों और उपकरणों की पूजा की जानी चाहिए। पूजा का मतलब यह नहीं कि धूप-दीप, जल और फूल चढ़ाएं। इनकी साफ-सफाई और इनकी अच्छी देखरेख करें यह है असली विश्वकर्मा भगवान की पूजा।।

औजारों की पूजा और टीका करना क्यों है जरूरी।।

पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार भगवान विश्‍वकर्मा ने ही इस सृष्टि के हर तकनीकी चीजों का सृजन किया है। इसलिए वे सभी उनके प्रिय हैं। ऐसे में सभी औजारों की पूजा और उनका टीका करना जरूरी माना गया है। भगवान विश्‍वकर्मा दुनियाँ के समस्त तकनीकी औजारों की पूजा से प्रसन्‍न होते हैं। टीका करने का आशय इस चीज से है, कि आपने उन उपकरणों की सुरक्षा का वादा और उसे सहेज के रखने का संकल्प किया। टीका लगाकर हम खुद से वचन लेते हैं, कि अपने उपकरणों और औजारों की देखरेख करेंगे, उनका अपमान कतई नहीं करेंगे।।

भगवान विश्‍वकर्मा के दामाद हैं सूर्य देव।। Vishwakarma Puja, Katha in Hindi.

मित्रों, भगवान विश्‍वकर्मा को वैसे तो दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर कहा जाता है। परंतु इनके बारे में पौराणिक विचार ये है, कि इन्होंने इस सृष्टि का सृजन किया। इनके बारे में स्‍कंद पुराण के प्रभात खंड में कहा गया है, कि विश्वकर्मा जी बृहस्पति की बहन भुवना के पुत्र हैं। भुवना महर्षि प्रभास की पत्‍नी थीं।।

पुराणों के अनुसार भगवान विश्‍वकर्मा की मां भुवना सभी विद्याओं में कुशल थीं। भुवना देवी महर्षि धर्म की पुत्रवधू और महर्षि प्रभास की पत्नी थी। महर्षि अंगिरा के ज्येष्ठ पुत्र बृहस्पति की बहन भुवना ब्रह्मविद्या की जानकार थीं। इनके अलावा उनकी 3 पत्नियां थीं जिनका नाम था रति, प्राप्ति और नंदी। कथा मिलती है, कि भगवान विश्‍वकर्मा की पत्‍नी आकृति हैं। इनके अलावा उनकी अन्‍य 3 और पत्नियां थीं रति, प्राप्ति और नंदी। विश्‍वकर्मा के मनु, चाक्षुष, शम, काम, हर्ष, विश्‍वरूप और वृत्रासुर नाम के 6 पुत्र हुए। इनके अलावा बर्हीष्मती और संज्ञा नाम की 2 पुत्रियां हुईं। कहा जाता है, कि संज्ञा का विवाह सूर्यदेव से हुआ था। इसलिए भगवान सूर्य विश्‍वकर्मा के दामाद हैं।।

विश्वकर्मा पूजा शुभ मुहूर्त 2019. Vishvakarma Pooja Shubh Muhurta.

इस वर्ष कन्या संक्रांति के दिन विश्वकर्मा पूजा का आयोजन हो रहा है। यह एक शुभ स्थिति है। संक्रांति का पुण्य काल सुबह 7 बजकर 2 मिनट से है। इस समय से पूजा आरंभ करके सुबह 9 बजे तक शुभ मुहूर्त माना गया है। 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक यमघंट योग रहेगा। 12 बजे से 1 बजकर 30 मिनट तक गुलिक काल है और शाम 3 बजे से 4 बजकर 30 मिनट तक राहुकाल रहेगा। इन समयों को छोड़कर दिन में कभी भी पूजा कर सकते हैं।।

विश्वकर्मा पूजा मंत्र।।

पूजा के समय इन मंत्रों का करें उच्चारण: ।। “ॐ आधार शक्तये नम:।। ।। ॐ कुर्माय नम:।। ।। ॐ अनन्ताय नम:।। ।। ऊँ पृथिव्यै नम:।। ऊँ मंत्र का जप भी श्रेयस्कर माना गया है। जप के लिए रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करें।।

विश्‍वकर्मा पूजा कब होती है?

मान्‍यता है, कि भगवान विश्‍वकर्मा का जन्‍म भादो माह में हुआ था। हर साल 17 सितंबर को उनके जन्‍मदिवस को विश्‍वकर्मा जयंती के रूप में मनाया जाता है।।

विश्वकर्मा पूजा का महत्व।।

ऐसी मान्यता है, कि विश्वकर्मा जयंती के दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा सभी लोगों को करनी चाहिए। क्योंकि इस सृष्टि में जो भी सृजन और निर्माण हो रहा है, उसके मूल में भगवान विश्वकर्मा ही हैं। माना जाता है, कि उनकी पूजा करने से बिगड़े काम बनने लगते हैं।।

स्कंद पुराण में भगवान विश्वकर्मा के बारे में वर्णन मिलता है।।

स्कंद पुराण के अंतर्गत विश्वकर्मा भगवान का परिचय ‘बृहस्पते भगिनी भुवना ब्रह्मवादिनी। प्रभासस्य तस्य भार्या बसूनामष्टमस्य च। विश्वकर्मा सुतस्तस्यशिल्पकर्ता प्रजापति’ श्लोक के जरिए मिलता है। इस श्लोक का अर्थ है महर्षि अंगिरा के ज्येष्ठ पुत्र बृहस्पति की बहन भुवना ब्रह्मविद्या की जानकार थीं। उनका विवाह आठवें वसु महर्षि प्रभास के साथ संपन्न हुआ था। विश्वकर्मा इन दोनों की ही संतान थे। विश्वकर्मा भगवान को सभी शिल्पकारों और रचनाकारों का भी ईष्ट देव माना जाता है।।

विश्वकर्मा के द्वारा निर्मित की गई चीजें।।

ऋगवेद में भगवान विश्वकर्मा के बारे में वर्णन मिलता है। भगवान विश्वकर्मा ने स्वर्गलोक और सोने की लंका का भी किया निर्माण था। भगवान विश्वकर्मा को देव शिल्पी कहा जाता है। उन्होंने सतयुग में स्वर्गलोक, त्रेतायुग में सोने की लंका, द्वापर में द्वारिका और कलियुग में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा की विशाल मूर्तियों का निर्माण करने के साथ ही यमपुरी, वरुणपुरी, पांडवपुरी, कुबेरपुरी, शिवमंडलपुरी तथा सुदामापुरी आदि का भी निर्माण किया था।।

विवाहित लोगों को अपनी पत्नी के साथ करनी चाहिए विश्वकर्मा पूजा।। Patni Sahit Pooja Karen.

मित्रों, इस दिन भगवान विश्वकर्मा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। वैवाहिक व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ इस पूजन को करें। हाथ में फूल, चावल लेकर भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करे। पूजा में दीप, धूप, फूल, गंध, सुपारी, रोली इत्यादि चीजों का प्रयोग करें। हाथ में पुष्प, अक्षत लेकर इस मंत्र का उच्चारण करें। “ॐ आधार शक्तये नम: और ॐ कुर्माय नम:; ॐ अनन्ताय नम:, ॐ पृथिव्यै नम: कहकर चारो ओर अक्षत छिड़के और पीली सरसों लेकर चारो दिशाओं को डिगबंधन मंत्र द्वारा रक्षित करें। दीप जलाये, जल के साथ पुष्प एवं सुपारी लेकर संकल्प करे।।

शुद्ध भूमि पर अष्टदल कमल बनाकर उस स्थान पर सप्त धान्य रखें और उस पर मिट्टी और तांबे के कलश रखकर उसमें जल डालें। इसके बाद पंचपल्लव, सप्त मृन्तिका, सुपारी, दक्षिणा कलश में डालकर कपड़े से कलश का आच्छादन करे। अब चावल से भरा पात्र समर्पित कर ऊपर विश्वकर्मा भगवान की मूर्ति स्थापित करें और वरुण देव का आह्वान करें। भगवान विश्वकर्मा को पुष्प अर्पित करें और प्रार्थना करें कि ‘हे विश्वकर्मा जी, इस मूर्ति में विराजिए और मेरी पूजा स्वीकार कीजिए। इस प्रकार पूजन के बाद विविध प्रकार के औजारों और यंत्रों आदि की पूजा कर हवन यज्ञ करना होता है।।

भगवान विश्वकर्मा ने किया था इन चीजों का निर्माण।।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल की सभी राजधानियों का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था। जिनमें स्वर्ग लोक, रावण कि लंका, द्वारिका और हस्तिनापुर भी विश्वकर्मा द्वारा ही रचित हैं। यहां तक कि स्वर्ग के राजा इंद्र का अस्त्र वज्र, उड़ीसा में भगवान जगन्नाथ का मंदिर, भगवान श्रीकृष्ण के आदेश पर द्वारका नगरी का निर्माण, कर्ण का कुण्डल, विष्णु भगवान का सुदर्शन चक्र, शंकर भगवान का त्रिशूल और यमराज का कालदण्ड भी इनके द्वारा ही निर्मित किया गया माना जाता है।।

विश्वकर्मा भगवान की आरती।। Vishvakarma Ji Ki Aarati.

ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा। सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा ॥1॥

आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया। शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया ॥2॥

ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नही पाई। ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥3॥

रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना। संकट मोचन बनकर, दूर दुख कीना॥4॥

जब रथकार दम्पती, तुमरी टेर करी। सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी॥5॥

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे। द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे॥6॥

ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे। मन दुविधा मिट जावे, अटल शांति पावे॥7॥

श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे। कहत गजानन स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥8॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा । सकल सृष्टि के करता, रक्षक स्तुति धर्मा॥

विश्वकर्मा जी की पूजा का महत्व।। Importance of Vishwakarma Pooja.

विश्वकर्मा पूजा को लेकर कारीगरों की मान्यता है, कि इनकी पूजा करने से काम में प्रयोग किये जाने वाली मशीनें जल्दी खराब नहीं होती और अच्छे से काम करती हैं। इसलिए इस दिन सभी काम रोककर मशीनों और औजारों की साफ-सफाई की जाती है और भगवान विश्वकर्मा की पूरी श्रद्धा के साथ पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल की सभी राजधानियों का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था। जिनमें स्वर्ग लोक, रावण कि लंका, द्वारिका और हस्तिनापुर भी विश्वकर्मा द्वारा ही रचित हैं।।

भगवान विश्वकर्मा की पूजा विधि।। Vishvakarma Bhagwan Ki Pooja Vidhi.

पूजा के लिए सबसे पहले अक्षत अर्थात साबुत चावल, फूल, मिठाई, कुछ फल, रोली, सुपारी, धूप, दीपक, रक्षा सूत्र, पटरा, दही और भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर इत्यादी जरूरी चीजों की पहले से ही व्यवस्था कर लें। इसके बाद अष्टदल की बनी रंगोली पर सतनजा बनाएं। उसके बाद विश्वकर्मा भगवान का आवाहन करें। इस प्रकार – उनकी प्रतिमा पर फूल चढ़ाकर कहें- कि हे भगवान विश्वकर्मा जी आइए, मेरी पूजा स्वीकार कीजिए।।

इसके बाद अपने काम से जुड़े सभी मौजूद औजारों पर तिलक लगाकर अक्षत और फूल चढ़ाएं। साथ ही एक पाटले पर कपड़ा बांधकर सतनजा रखें और उसपर कलश रख दें। इसके बाद कलश को रोली-अक्षत लगाएं फिर उसे हाथों से स्पर्श करते हुए “ॐ पृथिव्यै नमः ॐ अनंताय नमः ॐ कुर्माय नमः ॐ श्री सृष्टतनयाय सर्वसिद्धयाय विश्वकर्मणे नमो नमः” इन मंत्रों को पढ़कर अपनी सभी मशीनों, विश्वकर्मा जी की फोटो और कलश पर चारों तरफ छिड़क दें, साथ ही फूल भी चढ़ाएं। इसके बाद धूप-दीप आदि दिखाकर भगवान को मिठाई का भोग लगाएं। जहां भी आप पूजा कर रहे हों तो अपने कर्मचारियों और दोस्तों के साथ भगवान विश्वकर्मा की आरती करें। तदुपरान्त सभी में प्रसाद बांट दें।।

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