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द्वितीय भाव में राहु का फल एवं उपाय।।

द्वितीय भाव में राहु का फल एवं उपाय।। Rahu in 2nd House Effects & Remedies.

लेख की भूमिका।। Introduction.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष में द्वितीय भाव धन, वाणी, परिवार तथा संचित संपत्ति का प्रतिनिधित्व करता है। जब भ्रम, महत्वाकांक्षा तथा असामान्य फल देने वाला छाया ग्रह राहु इसी द्वितीय भाव में स्थित होता है, तब जातक के धन, वाणी तथा पारिवारिक जीवन पर विशेष व असामान्य प्रभाव पड़ता है। राहु का स्वभाव अन्य ग्रहों से भिन्न होने के कारण इसके फल भी प्रायः अप्रत्याशित तथा तीव्र होते हैं।।

राहु की स्थिति यदि अन्य ग्रहों की दृष्टि, राशि स्वामी तथा भाव-संबंध के अनुसार अनुकूल हो तो यह जातक को अचानक धन लाभ तथा असाधारण समृद्धि भी दिला सकता है। परन्तु यदि यह पीड़ित अथवा अशुभ स्थिति में हो तो जातक के धन तथा पारिवारिक जीवन में अस्थिरता व उलझनें भी उत्पन्न कर सकता है। वास्तविक फल का निर्णय तो सदैव संपूर्ण जन्मकुंडली, दशा और गोचर के आधार पर ही किया जाता है।।

द्वितीय भाव में राहु का सामान्य स्वभाव।। General Nature of Rahu in the Second House.

द्वितीय भाव में राहु जातक को धन कमाने के असामान्य तथा नवीन तरीकों के प्रति आकर्षण प्रदान करता है। ऐसे जातक परंपरागत आय के साधनों से हटकर विदेशी व्यापार, तकनीकी क्षेत्र अथवा असामान्य व्यवसायों में रुचि रखते हैं। इनकी वाणी में भी एक विशेष प्रकार की तीक्ष्णता अथवा असामान्यता देखी जा सकती है। धन संचय के प्रति महत्वाकांक्षा भी इसी भाव-स्थिति की विशेषता मानी जाती है।।

ऐसे जातकों की सोच धन के मामले में भी जोखिम उठाने वाली होती है, जिसके कारण ये असामान्य निवेश अथवा व्यवसाय में भी हाथ आजमाते हैं। परिवार के साथ इनका संबंध कभी-कभी जटिल अथवा असामान्य भी हो सकता है। इनकी वाणी में स्पष्टवादिता के साथ-साथ कभी-कभी कठोरता भी झलक सकती है, जिसके कारण संबंधों में गलतफहमी की संभावना बनी रहती है।।

शुभ राहु का द्वितीय भाव में फल।। Effects of an Auspicious Rahu in the Second House.

यदि द्वितीय भाव का राहु शुभ ग्रहों की दृष्टि से युक्त होकर अनुकूल स्थिति में हो तो जातक को विदेशी स्रोतों से धन लाभ, अप्रत्याशित समृद्धि तथा असामान्य व्यवसायों में सफलता प्राप्त होती है। ऐसे जातकों को विदेश व्यापार, आयात-निर्यात, तकनीकी क्षेत्र अथवा वित्तीय बाजार जैसे असामान्य क्षेत्रों में विशेष लाभ मिलता है। इनकी नवीन सोच धन कमाने के नए मार्ग खोलती है।।

शुभ राहु से जातक को वाणी में विशेष प्रभावशीलता प्राप्त होती है, जिसके कारण ये अपनी बात मनवाने में सफल होते हैं। परिवार में भी अचानक धन लाभ के कारण सुख-समृद्धि आती है। संचित संपत्ति में अप्रत्याशित वृद्धि की संभावना बनी रहती है। विदेश से जुड़े व्यावसायिक अवसर तथा साझेदारी में भी विशेष सफलता मिलती है।।

अशुभ राहु का द्वितीय भाव में फल।। Effects of a Malefic Rahu in the Second House.

यदि द्वितीय भाव का राहु पापग्रहों से पीड़ित अथवा निर्बल हो तो जातक को धन संबंधी अस्थिरता, अनावश्यक व्यय अथवा वाणी दोष का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे जातकों की वाणी में कठोरता अथवा असत्यता की प्रवृत्ति देखी जा सकती है, जिसके कारण संबंधों में तनाव उत्पन्न होता है। धन संचय में कठिनाई तथा अचानक आर्थिक हानि की संभावना भी बढ़ जाती है।।

अशुभ राहु से जातक के परिवार में कलह अथवा गलतफहमी की स्थिति बन सकती है। गलत निवेश अथवा जोखिम भरे व्यवसाय में धन की हानि हो सकती है। समाज में वाणी के कारण गलत छवि बनने की संभावना भी रहती है। कई बार असत्य बोलने अथवा छल-कपट की प्रवृत्ति भी इसी भाव-स्थिति के अशुभ प्रभाव से जुड़ी देखी जाती है।।

स्वास्थ्य पर प्रभाव।। Health Effects.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष के अनुसार द्वितीय भाव का संबंध मुख, वाणी तथा गले से भी होता है, और राहु का संबंध तंत्रिका तंत्र तथा मानसिक स्वास्थ्य से माना जाता है। द्वितीय भाव में राहु यदि अशुभ हो तो जातक को वाणी दोष, गले संबंधी समस्याएँ अथवा मानसिक अस्थिरता जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।।

इसके विपरीत यदि राहु अनुकूल स्थिति में हो तो जातक की वाणी में विशेष प्रभावशीलता तथा आकर्षण बना रहता है। परन्तु स्वास्थ्य संबंधी किसी भी गंभीर लक्षण के लिए ज्योतिषीय उपाय के साथ-साथ योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना भी अत्यंत आवश्यक है।।

द्वितीय भाव के राहु को संतुलित करने के वैदिक उपाय।। Vedic Remedies to Balance Rahu in the Second House.

मित्रों, द्वितीय भाव के राहु को शांत अथवा संतुलित रखने के लिए आप राहु देवता के मंत्र का जप “ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः” का श्रद्धापूर्वक जप करें। मां दुर्गा की उपासना तथा दुर्गा सप्तशती का पाठ राहु की पीड़ा को शांत करने में अत्यन्त शुभ फलदायी माना गया है।।

एक विकल्प शनिवार को राहु से संबंधित वस्तुओं का दान जैसे काला उड़द, सरसों का तेल अथवा नीले-काले वस्त्र का दान करना भी शुभ माना जाता है। सत्य तथा मधुर वाणी बोलने का अभ्यास करना चाहिए, क्योंकि यही आचरण राहु के अशुभ प्रभाव को नियंत्रित करने वाला माना जाता है।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में राहु को छाया ग्रह मानते हुए भ्रम, महत्वाकांक्षा तथा असामान्य फल देने वाला ग्रह बताया गया है। फलदीपिका के अनुसार धन भाव में स्थित राहु यदि शुभ प्रभाव में हो तो अप्रत्याशित धन लाभ प्रदान करता है, जबकि पीड़ित राहु धन तथा वाणी संबंधी बाधाएँ उत्पन्न कर सकता है।।

बृहज्जातक में राहु को गूढ़ तथा असामान्य फल देने वाला ग्रह माना गया है, जिसकी शुभता अथवा अशुभता का निर्णय अन्य ग्रहों के संबंध तथा भाव-स्वामित्व के आधार पर ही किया जाना उचित बताया गया है।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

1. द्वितीय भाव में शुभ राहु क्या फल देता है? What Effects Does an Auspicious Rahu Give in the Second House.

उत्तर:- द्वितीय भाव का शुभ राहु विदेशी स्रोतों से धन लाभ, अप्रत्याशित समृद्धि तथा प्रभावशाली वाणी जैसे उत्तम फल प्रदान करता है।।

2. द्वितीय भाव में अशुभ राहु क्या नुकसान देता है? What Problems Can a Malefic Rahu Cause in the Second House.

उत्तर:- द्वितीय भाव का अशुभ राहु धन संबंधी अस्थिरता, वाणी दोष तथा पारिवारिक कलह जैसी बाधाएँ उत्पन्न कर सकता है।।

3. द्वितीय भाव के राहु को संतुलित करने का सबसे प्रभावी वैदिक उपाय क्या है? What Is the Most Effective Vedic Remedy to Balance Rahu in the Second House.

उत्तर:- ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः मंत्र का जप, मां दुर्गा की उपासना और शनिवार का दान ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, कुंडली के द्वितीय भाव में स्थित राहु शुभ हो तो जातक को अप्रत्याशित धन लाभ, विदेशी स्रोतों से आय तथा प्रभावशाली वाणी प्रदान करता है, वहीं अशुभ होने पर धन हानि, वाणी दोष तथा पारिवारिक कलह जैसी चुनौतियाँ भी उत्पन्न कर सकता है। वैदिक परंपरा के अनुसार राहु मंत्र जप, मां दुर्गा की उपासना, दान और सत्य वाणी इसे संतुलित रखने में सहायक माना गया है।।

परन्तु चूँकि राहु एक छाया ग्रह है और इसका फल अन्य ग्रहों के संबंध पर अत्यधिक निर्भर करता है, इसलिए किसी भी विशेष उपाय को अपनाने से पूर्व योग्य वैदिक ज्योतिषी से संपूर्ण जन्मकुंडली का विश्लेषण अवश्य कराना चाहिए।।

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