HomePanchangपञ्चांग 30 अक्टूबर 2026 दिन शुक्रवार।।

पञ्चांग 30 अक्टूबर 2026 दिन शुक्रवार।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।

पञ्चांग, Panchang, आज का पञ्चांग, Aaj ka Panchang, Panchang 2026,
आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 30 अक्टूबर 2026 दिन शुक्रवार।।

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।

मेरे प्रियात्मनों, यह वेबसाईट बिलकुल नि:शुल्क है। यदि आपको इस साईट से कुछ भी लाभ प्राप्त हुआ हो, आपको हमारे लेख पसंद आते हो तो मदद स्वरुप आप स्वयं हमारे साईट पर विजिट करें एवं अपने सभी सम्पर्कियों को भी इस साईट के बारे में अवश्य बताएं ।।

।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आप का आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।

वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).

पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

पञ्चांग 30 अक्टूबर 2026 दिन शुक्रवार।। Panchang 30 October 2026

आज का पञ्चांग 30 अक्टूबर 2026 दिन शुक्रवार।।
Aaj ka Panchang 30 October 2026.

विक्रम संवत् – 2083.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.

शक – 1948.

अयन – सौम्यायनम्.

गोल – याम्य.

ऋतु – शरद.

मास – कार्तिक.

पक्ष – कृष्ण.

गुजराती पंचांग के अनुसार – अश्विन कृष्ण पक्ष.

#Panchang_30_October_2026

तिथि – पञ्चमी 19:26 PM बजे तक उपरान्त षष्ठी तिथि है।।

नक्षत्र – मृगशिरा 09:05 AM तक उपरान्त आर्द्रा नक्षत्र है।।

योग – शिव 20:42 PM तक उपरान्त सिद्ध योग है।।

करण – मृगशिरा 08:46 AM तक उपरान्त तैतिल 19:26 PM तक उपरान्त गर करण है।।

चन्द्रमा – मिथुन राशि पर।।

सूर्य – तुला राशि एवं चित्रा नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।

मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:40:12

मुम्बई सूर्यास्त – सायं 18:02:52

वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 06:26:41

वाराणसी सूर्यास्त – सायं 17:34:31

राहुकाल (अशुभ) – सुबह 10:57 बजे से 12:22 बजे तक।।

विजय मुहूर्त (शुभ) – दोपहर 12.10 बजे से 12.34 बजे तक।।

#Panchang_30_October_2026

पञ्चमी तिथि विशेष:- पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। पञ्चमी तिथि को पूर्णा संज्ञक तिथियों में स्थान प्राप्त है। नन्दा, भद्रा, जया, रिक्ता और पूर्णा—इन पाँच संज्ञाओं में पूर्णा संज्ञा की तिथि सभी प्रकार की सिद्धि, पूर्णता तथा समृद्धि प्रदान करने वाली मानी गई है। इस कारण इस पञ्चमी तिथि में प्रारम्भ किए गए कार्य प्रायः सफलता को प्राप्त होते हैं। शास्त्रों में पञ्चमी तिथि को विद्या, ज्ञान, औषधि, नागोपासना तथा ऋषि-पूजन के लिए विशेष प्रशस्त बताया गया है। विशेषतः यदि यह पञ्चमी तिथि शुभ नक्षत्र के साथ संयोग करे तो अध्ययन, दीक्षा, मन्त्र ग्रहण, शास्त्र अध्ययन तथा विद्यारम्भ के लिए अत्यन्त उत्तम मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।।

यद्यपि पञ्चमी शुभ तिथि मानी जाती है, तथापि अनावश्यक हिंसा, वृक्षों का विनाश, सर्प अथवा अन्य जीवों को कष्ट देना, कटु वचन बोलना, ऋषि, गुरु तथा माता-पिता का अपमान, इनसे विशेष रूप से बचना चाहिए। नागों के अधिपत्य वाली इस पञ्चमी तिथि में जीवों के प्रति दया का विशेष महत्व बताया गया है। आयुर्वेद और लोकपरम्परा में पञ्चमी को शरीर की शुद्धि तथा औषधि सेवन प्रारम्भ करने के लिए भी शुभ माना गया है। अनेक वैद्य आज भी औषधि सिद्धि एवं नई चिकित्सा के प्रारम्भ के लिए शुभ तिथि का विचार करते हैं।।

पञ्चमी तिथि में जिनका जन्म होता है:- पञ्चमी तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति गुणवान होता है। इस तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह माता पिता की सेवा को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म समझता है। इनके व्यवहार में उत्तम श्रेणी का एक सामाजिक व्यक्ति दिखाई देता है। इनके स्वभाव में उदारता और दानशीलता स्पष्ट दिखाई देती है। ये हर प्रकार के सांसारिक भोग का आनन्द लेते हैं और धन धान्य से परिपूर्ण जीवन का आनंद उठाते हैं। पञ्चमी तिथि में जन्म लेने वाला जातक सामान्यतः बुद्धिमान, मधुरभाषी, दयालु, धर्मप्रिय, माता-पिता का सेवक, गुरुजन का सम्मान करने वाला, आर्थिक दृष्टि से उन्नति करने वाला, उत्तम सलाहकार, समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखते हैं तथा जीवन में धीरे-धीरे उत्तम सफलता प्राप्त करते हैं। इनमें धार्मिक प्रवृत्ति, तीर्थाटन तथा देवपूजन के प्रति विशेष श्रद्धा देखने को मिलती है।।

#Panchang_30_October_2026

मृगशिरा नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म मृगशिरा नक्षत्र में हुआ है तो आप स्वभाव से चतुर एवं चंचल होते हैं। आप अध्ययन में अधिक रूचि रखते हैं। माता पिता के आज्ञाकारी और सदैव साफ़ सुथरे आकर्षक वस्त्र पहनने वाले होते हैं। आपको श्वेत रंग अत्यधिक प्रिय है। मृगशिरा नक्षत्र में पैदा हुए जातकों का चेहरा बहुत ही आकर्षक एवं सुन्दर होता है।।

आपका झुकाव विपरीत लिंग की ओर सामान्यतः अधिक होता है। आपका मन सौम्य परन्तु कामातुर होता है। भ्रमण करना आपको प्रिय है। आपका अधिकतर जीवन विलासितापूर्ण एवं ऐश्वर्यशाली होता है। आप आर्धिक रूप से धनि होने के साथ-साथ बहुत ही सोच समझ कर धन खर्च करने वाले होते हैं। अपने इसी स्वभाव के कारण मित्रों में आप कन्जूस भी कहलाते हैं।।

आपकी प्रगति में निरंतर बाधाएं आती रहती हैं तथा जीवन परिवर्तनशील रहता है। आप भी इस परिवर्तन को झेलते हुए जीवन में कई बार कार्य क्षेत्र बदलते हैं। आप किसी भी निर्णय पर पहुँचने से पहले उसके हर एक पहलु पर अच्छी तरह सोच विचार कर लेते हैं। स्वभाव से अक्सर गंभीर और शांत रहने वाले होते हैं। मृगशिरा नक्षत्र में जन्मे जातक क्रोध कम करते हैं।।

मृगशिरा नक्षत्र में जन्मे जातक यदि क्रोधित हो भी जाएँ तो शांत होने पर पश्चाताप भी करते हैं। इस नक्षत्र में जन्मे जातकों का गायन वाद्य आदि कलाओं में अधिक रूचि होती है। मृगशिरा नक्षत्र में जन्मे जातकों का जीवन बाधा रहित वैभव शाली होता है। पेट और पाचन से सम्बन्धी रोग, कन्धों में दर्द और जीवन में कोई विशेष दुर्घटना की संभावना सदैव बनी रहती है।।

प्रथम चरण:- मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह है। इसके प्रथम चरण का स्वामी ग्रह सूर्य है। सूर्य और मंगल, दोनों ग्रहों का संयोग राजयोग देता है। फलस्वरूप ऐसा जातक राजतुल्य बनता है। उसके पास राजा के समान ठाट-बाट की सभी वस्तुएं रहती हैं। मंगल और सूर्य में मित्रता के कारण सूर्य और मंगल दोनों की दशाएं शुभ जायेंगी और शुक्र की दशा-अन्तर्दशा में जातक की विशेष उन्नति होगी।।

द्वितीय चरण:- मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह है। इसके द्वितीय चरण का स्वामी ग्रह बुध हैं। अतः बुध और मंगल में शत्रुता के कारण जातक में झूठ बोलने एवं स्वर्ण चोरी के लक्षण देखे जाते हैं अर्थात जातक स्वर्णकार होगा। कुछ छिपाने की, चोरी की आदत स्वभाव में ही होती है। शुक्र की दशा-अन्तर्दशा में जातक की उन्नति तो होगी परन्तु विशेष भाग्योदय करने में सहायक नहीं होगी।।

तृतीय चरण:- मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह है। इसके तृतीय चरण का स्वामी ग्रह शुक्र हैं। जो विलासप्रिय एवं भोगी होते हैं। अतः मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण में पैदा होने वाला जातक ऐश्वर्य प्रिय, भोगी एवं कुटिल बुद्धि वाला होगा। लग्नेश की दशा शुभ फल देगी।।

चतुर्थ चरण:- मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह है। इसके चतुर्थ चरण का स्वामी ग्रह मंगल हैं। अतः मृगशिरा नक्षत्र के चौथे चरण में पैदा होने वाले जातक पर मंगल का प्रभाव अधिक रहेगा। जातक का जीवन धन-धान्य से युक्त रहेगा एवं सदा लक्ष्मियुक्त रहेगा। लग्नेश बुध और मंगल की दशा उत्तम फल देगी।।

#Panchang_30_October_2026

शुक्रवार का विशेष – शुक्रवार के दिन तेल मर्दन अर्थात तेल शरीर में मालिश करने से बिघ्न बाधायें आती हैं – (मुहूर्तगणपति)।।

शुक्रवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से लाभ और यश की प्राप्ति होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व)।।

दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खाकर यात्रा कर सकते है।।

शुक्र के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए यह उपाय करना चाहिए। शुक्र की अशुभता दूर करने के लिए अपने सामर्थ्य के अनुसार रुई और दही किसी मंदिर में दान करना चाहिए। किसी भी स्त्री एवं अपनी पत्नी का भी कभी भी अपमान या निरादर नहीं करना चाहिए। उन्हें सदैव आदर और सम्मान देने का प्रयास करना चाहिए।।

शुक्रवार को सफ़ेद वस्त्र धारण करना चाहिए। इत्र एवं परफ्यूम लगाने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। किसी नेत्रहीन व्यक्ति को सफ़ेद वस्त्र या मिठाई दान करने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। दश वर्ष से कम आयु की कुवांरी कन्याओं को गाय के दूध से बने खीर खिलाने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। मछलियों को आटे की गोलियां खिलाने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। चाँदी का कड़ा पहनने एवं श्रीसूक्त का पाठ करने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है।।

शुक्रवार का विशेष टिप्स – मित्रों, आज शुक्रवार को दक्षिणावर्ती शंख से भगवान नारायण (शालिग्राम भगवान) का अभिषेक करें। यथोपचार से पूजन करें और पूजन के उपरान्त अथवा मध्य में ही श्वेत चन्दन में केशर मिलाकर भगवान को श्रद्धापूर्वक तिलक लगायें। शुक्रवार को इस प्रकार किया गया भगवान नारायण का पूजन माता महालक्ष्मी को बलात आपके घर की ओर खिंच लाता है। आज लक्ष्मी घर में आयें इसके लिये घर के ईशान कोण में देशी गाय के घी से रुई के जगह लाल धागे की बत्ती का एक दीपक जलायें।।

#Panchang_30_October_2026

शुक्रवार को भूलकर भी ये काम न करें:- हमारे वैदिक सनातन धर्म में हर दिन किसी न किसी देवी-देवता का होता है। जिसके अनुसार शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी का होता है। शुक्रवार के दिन जो भक्त मां लक्ष्मी की पूजा विधिपूर्वक करते हैं, उन्हें संसार के सभी सुखों की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में लक्ष्मी मां को धन की देवी माना गया है। मान्यता अनुसार शुक्रवार के दिन माँ की पूजा-आराधना करने से उनका आशीर्वाद सदैव बना रहता है।।

लेकिन इस दिन कुछ काम जिसे कभी भूलकर भी नहीं करना चाहिए। दैनिक जीवन में भी कुछ ऐसे काम होते हैं, जैसे भूलकर भी कभी किसी को भी शुक्रवार के दिन धन ना दें और ना ही उधार लें। मान्यता है, कि शुक्रवार के दिन दिया गया धन वापस लौटकर नहीं आता है। इसदिन किसी को कर्ज देने से मां लक्ष्मी नाराज होती हैं और संबंध भी खराब होते हैं।।

वैसे तो आपको कभी किसी का अपमान नहीं करना चाहिए, लेकिन शुक्रवार के दिन इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन भूलकर भी महिलाओं, कन्याओं और किन्नरों का अपमान नहीं करना चाहिए। उनके बारे में अपशब्द नहीं बोलने चाहिए। महिलाओं में मां लक्ष्मी का वास होता है और उनके अपमान करने से मां लक्ष्मी भी नाराज हो जाती हैं।।

शुक्रवार के दिन अगर आप व्रत-पूजन नहीं भी करते हैं तो तामसिक भोजन खासतौर पर मांसाहार और मदिरा के सेवन से परहेज रखना चाहिए। इस दिन पूर्ण सात्विक भोजन करना चाहिए। अगर संभव हो सके तो इसको आप अपनी आदत भी बना लें।।

शुक्रवार के दिन भूलकर भी किसी को भी शक्कर नहीं देनी चाहिए। क्योंकि ज्योतिष में शक्कर का संबंध शुक्र और चंद्र दोनो से हैं। इसलिए शुक्रवार के दिन शक्कर देने से आपका शुक्र कमजोर होता है और शुक्र भौतिक सुखों का स्वामी है। शुक्र के नाराज होने से भौतिक सुख-सुवधिओं में कमी आती है और आर्थिक स्थिति भी खराब होती है।।

शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी के साथ नारायण की भी पूजा करनी चाहिए। लक्ष्मी के साथ नारायण की पूजा करने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और दोनों का आशीर्वाद भी बना रहता है। अगर संभव हो सके तो सुबह या शाम किसी भी एक समय मीठा घर में जरूर बनाना चाहिए और उसको सबसे पहले घर की सबसे बड़ी स्त्री को देना चाहिए।।

शुक्रवार के दिन किसी से अपशब्दन न बोलें। ऐसा करने से माता लक्ष्मी आप से अप्रसन्नम हो जाती हैं और फिर आपके साथ धन संबंधी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। घर में अपव्यमय बढ़ जाता है। लोग बीमार रहने लगते हैं। व्यापार धंधे में नुकसान होने लगता है।

साफ-सुथरे रसोईघर में मां लक्ष्मी का वास होता है। इससे घर में वैभव और सुख-शांति का प्रवाह निरंतर होता रहता है। भूलकर भी रात के समय किचन में गंदे बर्तन छोड़ना चाहिए, इससे लक्ष्मी माता रूठ जाती है और घर में अशांति फैल जाती है। साथ ही स्वास्थ्य के खराब रहने की आशंका बनी रहती है।।

#Panchang_30_October_2026

मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म शुक्रवार को होता है वह व्यक्ति चंचल स्वभाव का होता है। ये सांसारिक सुखों में लिप्त रहने वाले होते हैं तथा तर्क करने में निपुण और नैतिकता में बढ़ चढ कर होते हैं। ऐसे लोग धनवान और कामदेव के गुणों से प्रभावित रहते हैं और इनकी बुद्धि अत्यन्त तीक्ष्ण होती है। ये ईश्वर की सत्ता में अंधविश्वास नहीं रखते हैं तथा कला के प्रति रूचि रखने वाले, सुन्दर एवं आकर्षक व्यक्तित्व के धनी होते हैं।।

ऐसे लोग सौंदर्यप्रेमी, मधुरभाषी, यात्राओं के शौकिन, सुंदर स्थानों पर घुमने वाले एवं कलाकार स्वभाव के होते हैं। इनमें सेक्स की भावना अन्यों के मुकाबले अधिक होती है। सुन्दर कपडे़ पहनने के शौकिन तथा आभूषण अर्थात ज्वेलरी प्रिय होते हैं। इनको अपना कैरियर पर्यटन से जुडे क्षेत्र, फैशन डिजायनर, कलाकार, सेक्स विशेषज्ञ, मनोचिकित्सक अथवा ज्वेलरी से सम्बन्धित व्यदवसायों में आजमाना चाहिये। इनका शुभ अंक 7 होता है तथा इनका शुभ दिन बुधवार और शुक्रवार होता है।।

आज का सुविचार – मित्रों, अगर कोई आपको नीचा दिखाना चाहता हैं तो इसका मतलब हैं आप उससे ऊपर हैं। जिनमें आत्मविश्वास की कमी होती हैं वही दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। मुझे कौन याद करेगा इस भरी दुनिया में, हे प्रभु! बिना मतल़ब के तो लोग तुझे भी याद नही करते।।

#Panchang_30_October_2026

विवाह में हो रहे विलम्ब के लिये इन साधारण उपायों से अपने जीवन को रसमय बनायें।।…. आज के इस लेख को पूरा पढने के लिये इस लिंक को क्लिक करें….. वेबसाईट पर पढ़ें:  &  ब्लॉग पर पढ़ें:

लक्ष्मी योग क्या है और कुंडली में कैसे बनता है।। Read More. वेबसाईट पर पढ़ें:  And ब्लॉग पर पढ़ें:

कुंडली में धन के योग को मजबूत कैसे बनाये रखें।। Read More. वेबसाईट पर पढ़ें:  And ब्लॉग पर पढ़ें:

कुंडली में अतुलनीय धन का योग कैसे बनता है।। Read More. वेबसाईट पर पढ़ें:  And ब्लॉग पर पढ़ें:

धन क्यों नहीं टिकता और कैसे टिकेगा।। Read More. वेबसाईट पर पढ़ें:  And ब्लॉग पर पढ़ें:

स्मरण शक्ति कमजोर होने के ज्योतिषीय कारण एवं उपाय।। Read More. वेबसाईट पर पढ़ें:  And ब्लॉग पर पढ़ें:

कुंडली से बुद्धि एवं निर्णय क्षमता कैसे देखें।। Read More. वेबसाईट पर पढ़ें:  And ब्लॉग पर पढ़ें:

पढ़ाई में मन क्यों नहीं लगता कारण एवं उपाय।। Read More. वेबसाईट पर पढ़ें:  And  ब्लॉग पर पढ़ें:

शिक्षा में बार-बार बाधा आने का मुख्य कारण और उपाय।। Read More.   And   Read My Blog

“क्या बाबा के सर सज रही है, UP का ताज? क्या बाबा फिर CM बन सकते हैं।।” – My Latest video.
“क्या कहती है अखिलेश यादव की कुंडली? क्या मिलेगी सत्ता?।।” – My Latest video.
“शुक्र की महादशा में सूर्य अन्तर्दशा फलम्” – My Latest video.
ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं – Watch YouTube Video’s.
इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज – My facebook Page.

#Panchang_30_October_2026

वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें।।
किसी भी तरह के पूजा-पाठ, विधी-विधान, ग्रह दोष शान्ति आदि के लिए तथा बड़े से बड़े अनुष्ठान हेतु योग्य एवं विद्वान् ब्राह्मण हमारे यहाँ उपलब्ध हैं।।

सिलवासा ऑफिस:- बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के बाजू में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा।।

सिलवासा ऑफिस में प्रतिदिन मिलने का समय:-
10:00 AM to 02:00 PM And 04:30 PM to 08:30 PM.
WhatsAap & Call: +91 – 8690 522 111.
E-Mail :: balajijyotish11@gmail.com
Balaji Jyotish Kendra
Balaji Jyotish Kendrahttp://balajijyotish.com
Balaji Jyotish Kendra par Vedic Astrology, Kundli Analysis, Horoscope Reading aur Astro Remedies step-by-step. Online astrology classes, practical training aur expert guidance ke saath apni jyotish knowledge ko professional level tak Pahuchaye. Contact Us.
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments