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वर्ष 2026 में दीपावली पूजा का शुभ मुहूर्त एवं विधि।।

वर्ष 2026 में दीपावली पूजा का शुभ मुहूर्त एवं विधि।। Diwali Puja Shubh Muhurat And Vidhi In 2026.

दीपावली का परिचय।। Introduction.

मित्रों, कार्तिक मास की अमावस्या की रात्रि को मनाया जाने वाला दीपावली का पर्व अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान तथा निर्धनता पर समृद्धि की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस रात्रि माँ लक्ष्मी, भगवान गणेश तथा कुबेर देवता के पूजन का विशेष विधान बताया गया है। मान्यता है कि दीपावली की रात्रि माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। और जिस घर में स्वच्छता, दीप-प्रकाश तथा श्रद्धापूर्ण पूजन होता है, वहाँ वे स्थायी रूप से निवास करती हैं।।

परंतु मित्रों, प्रत्येक वर्ष दीपावली की तिथि, लक्ष्मी-पूजन के शुभ मुहूर्त तथा पूजन की सही विधि को लेकर अनेक प्रश्न उठते हैं। इसका कारण यह है कि अमावस्या तिथि प्रायः दो दिनों में फैली होती है। साथ ही लक्ष्मी-पूजन के लिए केवल तिथि ही नहीं, बल्कि प्रदोष काल तथा स्थिर लग्न अर्थात वृषभ लग्न का संयोग भी देखा जाता है। इसीलिए सही मुहूर्त का निर्धारण अत्यंत आवश्यक हो जाता है।।

परन्तु आप बिलकुल घबराएँ नहीं। आज हम इसी विषय पर विस्तार से समझेंगे कि वर्ष 2026 में दीपावली कब है। लक्ष्मी-पूजन का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, तथा पूजन की सम्पूर्ण शास्त्रोक्त विधि क्या है। इतना ही नहीं आज हम इस पावन रात्रि के कुछ सरल वैदिक उपाय भी आपलोगों को बताएँगे। ताकि आप माँ लक्ष्मी की कृपा को अपने जीवन में सहजता से प्राप्त कर सकें।।

वर्ष 2026 में दीपावली की तिथि।। Date Of Diwali In 2026.

मित्रों, इस वर्ष 2026 में दीपावली का पर्व 8 नवंबर रविवार को मनाया जाएगा। हृषीकेश पंचांग के अनुसार कार्तिक अमावस्या तिथि का आरंभ 8 नवंबर को प्रातः 10:51 AM मिनट पर हो रहा है। तथा इसका समापन 9 नवंबर को दोपहर लगभग 11:31 AM मिनट पर होगा।।

लक्ष्मी-पूजन का विधान प्रदोष काल अर्थात सूर्यास्त के पश्चात के समय में होता है। साथ ही अमावस्या तिथि 8 नवंबर की संध्या को प्रदोष काल में विद्यमान है। इसी कारण दीपावली का लक्ष्मी-पूजन 8 नवंबर रविवार की संध्या को ही किया जाएगा। साथ ही यही तिथि इस वर्ष के लिए मान्य होगी।।

लक्ष्मी-पूजन का शुभ मुहूर्त।। Shubh Muhurat For Lakshmi Puja.

मित्रों, मुंबई-सिलवासा के रेखांश के अनुसार लक्ष्मी-पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त 8 नवंबर को सायं लगभग 18:02 PM से लेकर 20:34 PM तक रहेगा। इस प्रदोष काल के मुहूर्त की कुल अवधि लगभग 02 घंटा 14 मिनट की है। इसी अवधि में वृषभ लग्न भी (19:16 से 21:16 PM) रहेगा। जिसे स्थिर लग्न माना जाता है। और स्थिर लग्न में किया गया पूजन माँ लक्ष्मी के स्थायी वास का कारक माना जाता है।।

प्रदोष काल सायं लगभग 06:02 मिनट से रात्रि 08:34 PM मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त निशीथ काल का मुहूर्त रात्रि लगभग 11 बजकर 39 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक बताया गया है। जो विशेष रूप से तांत्रिक साधकों तथा पंडितों के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है। सामान्य गृहस्थों के लिए प्रदोष काल तथा वृषभ लग्न का मुहूर्त ही श्रेष्ठ है।।

इसके अलावे और भी बहुत सारे सामान्य मुहूर्त होते हैं, जैसे चौघडियाँ देखकर भी किया जाता है। उसका लिस्ट इस इमेज में है, आप देखकर निश्चित कर सकते हैं। परन्तु गृहस्थों और व्यापारियों के लिए वृषभ लग्न सर्वश्रेष्ठ होता है। इसके साथ ही कुछ लोग सिंह लग्न में भी लक्ष्मी पूजन करना श्रेष्ठ माना जाता है।।

दीपावली का महत्व तथा पौराणिक मान्यता।। Significance And Mythological Belief Of Diwali.

मित्रों, एक पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र-मंथन के समय माँ लक्ष्मी क्षीरसागर से प्रकट हुई थीं। तथा उन्होंने भगवान विष्णु को अपना वर चुना था। इसी कारण कार्तिक अमावस्या की रात्रि को माँ लक्ष्मी की विशेष आराधना का काल माना गया है। लक्ष्मी के साथ बुद्धि-विवेक के दाता श्रीगणेश का पूजन इसलिए किया जाता है कि धन के साथ विवेक भी बना रहे।।

एक अन्य व्यापक रूप से प्रचलित मान्यता के अनुसार चौदह वर्ष के वनवास तथा रावण-वध के पश्चात भगवान श्रीराम इसी दिन अयोध्या लौटे थे। और अयोध्यावासियों ने घर-घर दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। तभी से दीप-प्रज्वलन की यह परंपरा दीपावली के रूप में चली आ रही है। कथाओं के विवरण क्षेत्र तथा परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। किंतु सभी का मूल संदेश प्रकाश, शुभता तथा समृद्धि का ही है।।

पूजन की पूर्व-तैयारी।। Preparation Before The Puja.

मित्रों, दीपावली से पूर्व घर की भली-भाँति सफाई कर लेनी चाहिए। क्योंकि स्वच्छ स्थान पर ही माँ लक्ष्मी का वास माना जाता है। मुख्य द्वार पर तोरण, रंगोली तथा शुभ-लाभ एवं स्वस्तिक का चिह्न बनाना चाहिए। पूजन-स्थल को उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करना श्रेष्ठ माना जाता है।।

सायंकाल स्नान कर नवीन अथवा स्वच्छ वस्त्र धारण करें। स्त्रियाँ शृंगार करें तथा परिवार के सभी सदस्य मिलकर पूजन में सम्मिलित हों। पूजन से पहले सभी को शांत मन से संकल्प करना चाहिए। वह इस प्रकार कि हम अपने परिवार की सुख-समृद्धि तथा सभी के कल्याण की कामना से यह पूजन कर रहे हैं।।

लक्ष्मी-पूजन की सामग्री।। Puja Samagri For Lakshmi Puja.

मित्रों, इसके लिए माँ लक्ष्मी, श्रीगणेश तथा कुबेर देव की प्रतिमा अथवा चित्र। लाल वस्त्र, चौकी, कलश, नारियल, सुपारी, पान, आम के पत्ते, रोली, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, मौली, पुष्प, कमल अथवा गुलाब के पुष्प।।

साथ ही धूप, दीप, घी, कपूर, मिष्ठान्न, फल, खील-बताशे, सिक्के तथा गंगाजल की आवश्यकता होती है। साथ ही हल्दी की गाँठ, कमलगट्टा, साबुत धनिया तथा बही-खाता, कलम एवं तिजोरी भी पूजन के लिए रखे जाते हैं।।

लक्ष्मी-पूजन की सम्पूर्ण विधि।। Complete Vidhi Of Lakshmi Puja.

मित्रों, मुहूर्त आरंभ होने पर पूजन-स्थल पर चौकी बिछाकर उस पर लाल वस्त्र रखें। तथा दाईं ओर गणेश जी एवं बाईं ओर माँ लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। एक कलश में जल, सिक्का, अक्षत तथा हल्दी डालकर उसके मुख पर आम के पत्ते रखें। और नारियल को लाल वस्त्र में लपेटकर कलश पर स्थापित करें। यह कलश वरुण देव का प्रतीक माना जाता है।।

सर्वप्रथम घी का दीपक प्रज्वलित कर आचमन करके पवित्रीकरण करें। और हाथ में जल, अक्षत तथा पुष्प लेकर पूर्ण संकल्प लें। संकल्प में अपना नाम, गोत्र, स्थान तथा पूजन का उद्देश्य बोला जाता है। इसके पश्चात सबसे पहले श्रीगणेश जी का पूजन करें। क्योंकि किसी भी शुभ कार्य का आरंभ उन्हीं के स्मरण से होता है।।

गणेश-पूजन के बाद कलश-पूजन करें। तत्पश्चात माँ लक्ष्मी का आह्वान कर उन्हें आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, आभूषण, रोली, कुमकुम, पुष्प, कमल, धूप, दीप तथा नैवेद्य अर्पित करें। माँ लक्ष्मी को कमल का पुष्प अथवा लाल गुलाब का पुष्प अर्पित करें। तथा खीर, मिष्ठान्न, खील-बताशे का भोग विशेष प्रिय माना जाता है।।

इसके बाद कुबेर देवता का पूजन कर तिजोरी, धन-स्थान तथा बही-खाते का भी पूजन करें। व्यापारी वर्ग अपने बही-खाते तथा कलम-दवात का पूजन इसी रात्रि को करता है। पूजन के समय श्री सूक्त, लक्ष्मी स्तोत्र, कनकधारा स्तोत्र अथवा “ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” इस मंत्र का यथाशक्ति जप करना अत्यंत शुभ माना गया है।।

अंत में सपरिवार माँ लक्ष्मी की आरती उतारें। तथा क्षमा-प्रार्थना करें कि पूजन में हुई किसी भी भूल के लिए हमें क्षमा करें। पूजन के पश्चात प्रसाद वितरित करें। तथा घर के प्रत्येक कमरे, आँगन, छत, तुलसी-चौरा तथा मुख्य द्वार पर दीपक जलाएँ। दीपों की यह पंक्ति ही दीप-अवली अर्थात दीपावली का मूल स्वरूप होता है।।

दीपदान तथा रात्रि-जागरण।। Deepdan And Night Vigil.

मित्रों, दीपावली की रात्रि को घर में कम से कम एक घी का दीपक सारी रात जलता रहना शुभ माना जाता है। इस रात्रि को जागरण कर माँ लक्ष्मी के मंत्र का जप, श्री सूक्त का पाठ अथवा भजन-कीर्तन करना श्रेष्ठ माना गया है।।

यहाँ यह भी ध्यान रखने, की जो साधक मंत्र-साधना करना चाहते हैं। उनके लिए सबसे सर्वोत्तम काल “निशीथ काल” का समय विशेष माना जाता है। और इस काल में की गयी साधना निश्चित रूप से पूर्ण रूपेण सफल मानी जाती है।।

दीपावली पर क्या करें।। Dos On Diwali.

मित्रों, इस दिन घर को स्वच्छ तथा प्रकाशित रखें। मुख्य द्वार खुला एवं सजा हुआ रखें। तथा सभी के साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार करें। साथ ही बड़ों का आशीर्वाद लेना न भूलें। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र तथा मिष्ठान्न का दान करें।।

घर का प्रकाशमय होना तथा गरीब-लाचार लोगों की मदद करना ही वास्तविक पूजन माना जाता है। पूजन के बाद परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें। पशु-पक्षियों तथा गाय को भोजन कराना भी शुभ माना गया है।।

दीपावली पर क्या न करें।। Don’ts On Diwali.

मित्रों, इस दिन क्रोध, कलह तथा कटु-वाणी से बचना चाहिए। घर के किसी भी कोने को अंधकारमय न छोड़ें। मांसाहार, मदिरा तथा जुए जैसे तामसिक कार्यों से दूर रहें, क्योंकि ये लक्ष्मी की कृपा के विपरीत माने जाते हैं।।

पूजन-स्थल पर गंदगी तथा बासी पुष्पों को न रहने दें। क्योंकि सफाई और प्रकाश ही इस त्यौहार को प्रभावी बनाते हैं। साथ ही पटाखों का प्रयोग सदैव सावधानीपूर्वक तथा पर्यावरण का ध्यान रखकर ही करें।।

दीपावली की रात्रि के वैदिक उपाय।। Vedic Remedies For The Night Of Diwali.

मित्रों, इस रात्रि को माँ लक्ष्मी के समक्ष घी का दीपक जलाकर श्री सूक्त का पाठ करें। तथा पूजन के बाद चाँदी का सिक्का, कमलगट्टा, साबुत धनिया एवं हल्दी की गाँठ को लाल वस्त्र में बाँधकर तिजोरी में रखें। मुख्य द्वार पर दोनों ओर दीपक जलाकर लक्ष्मी जी के स्वागत की भावना रखें। साथ ही माँ को कमल अथवा लाल पुष्प अर्पित करना भी शुभ माना गया है।।

आर्थिक उन्नति हेतु कनकधारा स्तोत्र का पाठ। ऋण-मुक्ति की कामना से गणेश जी को दूर्वा अर्पण। तथा कुबेर मंत्र का जप भी लाभकारी माना जाता है। जिन जातकों की कुंडली में शुक्र निर्बल हो, उन्हें इस रात्रि श्वेत मिष्ठान्न का भोग लगाना तथा श्वेत वस्त्र का दान करना उचित रहता है। मेरी आपको यही सलाह है कि इन उपायों के साथ-साथ ईमानदारी एवं परिश्रम भी सही दिशा में करें। क्योंकि माँ लक्ष्मी की स्थायी कृपा इन्हीं से बनी रहती है।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, माँ लक्ष्मी की आराधना का वर्णन ऋग्वेद के श्री सूक्त, विष्णु पुराण, पद्म पुराण तथा स्कंद पुराण जैसे ग्रंथों में प्राप्त होता है। कार्तिक अमावस्या के लक्ष्मी-पूजन तथा दीप-प्रज्वलन के निर्णय एवं नियम धर्मसिंधु तथा निर्णयसिंधु जैसे निर्णय-ग्रंथों में प्रदोष काल की प्रधानता के साथ बताए गए हैं।।

परंपराओं तथा क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार पूजन-विधि में सामान्य रूप से थोड़े-बहुत भेद हो सकते हैं। अतः अपनी कुल-परंपरा तथा किसी विद्वान पंडित के मार्गदर्शन के अनुसार ही विधि को अपनाना उचित होता है।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

प्रश्न 1. वर्ष 2026 में दीपावली कब है।। When Is Diwali In 2026.

उत्तर:- वर्ष 2026 में दीपावली का पर्व 8 नवंबर रविवार को मनाया जाएगा। इसी दिन संध्या को प्रदोष काल में लक्ष्मी-पूजन किया जाएगा।।

प्रश्न 2. लक्ष्मी-पूजन का शुभ मुहूर्त क्या है।। What Is The Shubh Muhurat For Lakshmi Puja.

उत्तर:- नई दिल्ली के अनुसार 8 नवंबर को सायं लगभग 06:02 PM से रात्रि 08:34 PM तक का समय सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। जिसमें प्रदोष काल तथा वृषभ लग्न का संयोग होता है। अपने नगर के लिए स्थानीय पंचांग देखें।।

प्रश्न 3. निशीथ काल में पूजन करना चाहिए अथवा प्रदोष काल में।। Should Puja Be Done In Nishita Kaal Or Pradosh Kaal.

उत्तर:- सामान्य गृहस्थों के लिए प्रदोष काल तथा स्थिर लग्न का मुहूर्त श्रेष्ठ माना गया है। निशीथ काल का मुहूर्त विशेष रूप से तांत्रिक साधकों एवं पंडितों के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है।।

प्रश्न 4. लक्ष्मी-पूजन में किन-किन देवताओं का पूजन किया जाता है।। Which Deities Are Worshipped In Lakshmi Puja.

उत्तर:- मुख्य रूप से माँ लक्ष्मी, श्रीगणेश तथा कुबेर देवता का पूजन किया जाता है। साथ में कलश के रूप में वरुण देव का भी पूजन होता है। व्यापारी वर्ग बही-खाते का भी पूजन करता है।।

प्रश्न 5. दीपावली पर दीपक कहाँ-कहाँ जलाने चाहिए।। Where Should Diyas Be Lit On Diwali.

उत्तर:- घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर, पूजन-स्थल, रसोई, आँगन, छत, तुलसी-चौरा तथा घर के सभी कोनों में दीपक जलाना शुभ माना जाता है। ताकि कोई भी स्थान अंधकारमय न रहे।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, वर्ष 2026 में दीपावली 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। और लक्ष्मी-पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त सायं लगभग 06:02 PM से रात्रि 08:34 PM तक रहेगा। गणेश, लक्ष्मी तथा कुबेर का विधिवत पूजन, कलश-स्थापना, बही-खाता तथा तिजोरी-पूजन एवं दीपदान, इस पर्व की प्रमुख विधियाँ हैं। श्रद्धा, स्वच्छता तथा सत्य-निष्ठा के साथ किया गया पूजन ही माँ लक्ष्मी को प्रिय है।।

और यहाँ मैं यही कहूँगा कि दीपावली केवल धन-प्राप्ति का पर्व नहीं। बल्कि परिवार के साथ आनंद, परस्पर प्रेम तथा समाज के दीन-दुखियों के साथ अपनी खुशियाँ बाँटने का भी पर्व है। जहाँ ऐसा भाव होता है, वहाँ माता लक्ष्मी का वास स्थायी रहता है।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि इस विषय पर किसी भी निर्णायक निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले किसी विद्वान, योग्य, अनुभवी वैदिक ज्योतिषी अथवा पंडित से अपने नगर के अनुसार सही मुहूर्त जान लेना चाहिए। साथ ही अपनी कुंडली के अनुकूल विधि की जानकारी विधिपूर्वक अवश्य प्राप्त करनी चाहिए। ताकि सही एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।।

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