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दीवाली पर व्यापारियों को कौन-सी पूजा करनी चाहिए।।

दीवाली पर व्यापारियों को कौन-सी पूजा करनी चाहिए।। Diwali Par Vyapari Kaun Sa Pujan Kare.

दीपावली तथा व्यापारी वर्ग का परिचय।। Introduction.

मित्रों, दीपावली का पर्व सभी के लिए माता लक्ष्मी की उपासना का दिन होता है। परंतु व्यापारी वर्ग के लिए इसका महत्व कुछ अधिक गहरा माना जाता है। परंपरा में दीपावली से नया व्यावसायिक वर्ष आरंभ होता है। पुराने बही-खाते बंद किए जाते हैं तथा नए खाते खोले जाते हैं। इसीलिए व्यापारी इस दिन केवल घर में ही नहीं, अपितु अपनी दुकान, कार्यालय, कारखाने तथा तिजोरी का भी विधिपूर्वक पूजन करते हैं।।

हर वर्ष दीपावली से पूर्व व्यापारी भाइयों के मन में कई प्रश्न उठते हैं। दुकान की पूजा किस में समय करें। चोपड़ा पूजन तथा लक्ष्मी पूजन एक ही हैं अथवा भिन्न। बही-खाते, तराजू तथा तिजोरी का पूजन किस विधि से हो। और पूजन की सामग्री क्या-क्या चाहिए। इन्हीं प्रश्नों के कारण कई बार लोग पूजन तो करते हैं। पर मन में संशय बना रहता है कि कहीं कोई चूक न रह जाए।।

इसलिए आज हम इस विषय को सरल रूप में समझेंगे। यह भी स्पष्ट कर दूँ कि दीपावली के पूजन में क्षेत्र, समाज तथा कुल-परंपरा के अनुसार अनेक भिन्नताएँ मिलती हैं। गुजराती, मारवाड़ी, महाराष्ट्रीयन तथा उत्तर भारतीय व्यापारी समाजों की अपनी-अपनी रीतियाँ होती हैं। जो बातें आज बतायेंगे, वे सामान्य तथा प्रचलित परंपरा पर आधारित हैं। और अपने घर तथा समाज की रीति को सदैव सर्वोपरि रखना ही उचित है।।

तो आज हम विस्तार से समझेंगे कि व्यापारी वर्ग के लिए कौन-कौन से पूजन विशेष माने गए हैं। इस वर्ष दीपावली की तिथि तथा मुंबई-सिलवासा के रेखांश के अनुसार पूजन का समय क्या रहेगा। पूजन की विधि तथा सामग्री क्या है। तथा किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। आज के इस लेख के माध्यम से हम आज सभी विषयों को गहराई से समझेंगे।।

व्यापारी वर्ग के लिए प्रमुख पूजन।। Main Pujas for the Trading Community.

मित्रों, व्यापारी वर्ग के लिए दीपावली पर सबसे प्रमुख पूजन लक्ष्मी-गणेश पूजन होता है। इसमें माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश तथा धन के कोषाध्यक्ष माने जाने वाले कुबेर देवता की मुख्य रूप से पूजन किया जाता है। परंपरा में माता लक्ष्मी को धन-संपदा, गणेश जी को बुद्धि तथा शुभता, और कुबेर को धन के संरक्षण का प्रतीक माना गया है। इन तीनों का संयुक्त पूजन व्यापार की समृद्धि तथा स्थिरता की कामना से किया जाता है।।

दूसरा विशेष पूजन चोपड़ा पूजन होता है। जिसे बही-खाता पूजन अथवा शारदा पूजन भी कहा जाता है। इसमें नए बही-खातों पर स्वस्तिक बनाकर तथा “श्री गणेशाय नमः” एवं “शुभ-लाभ” लिखकर उनका पूजन किया जाता है। गुजरात तथा पश्चिम भारत के व्यापारी समाजों में यह परंपरा विशेष रूप से प्रसिद्ध है। शारदा अर्थात सरस्वती का नाम इसलिए जुड़ा है। क्योंकि लेखा-जोखा तथा बुद्धि का संबंध उन्हीं से माना जाता है।।

तीसरा, दुकान, गद्दी, तिजोरी, तराजू-बाट, कंप्यूटर, रजिस्टर तथा व्यवसाय के औजारों का पूजन भी परंपरा में शामिल है। इसमें इन सभी को आजीविका के साधन मानकर श्रद्धा से तिलक लगाया जाता है। कारखानों तथा उद्योगों में मशीनों के पूजन की भी परंपरा अनेक स्थानों पर देखी जाती है। इसका भाव यह है कि जिन साधनों से धन अर्जित होता है, उनके प्रति भी कृतज्ञता प्रकट की जाए।।

इसके साथ ही अनेक व्यापारी इस पर्व पर श्री सूक्त, कनकधारा स्तोत्र अथवा लक्ष्मी अष्टक का पाठ भी करते हैं। कई परिवारों में धनतेरस के दिन कुबेर तथा धन्वंतरि का पूजन तथा नया सामान खरीदने की परंपरा भी है। यह पूरा क्रम पाँच दिन के दीपोत्सव का अंग माना जाता है। जिसमें प्रत्येक दिन का अपना भाव होता है। परंतु व्यापारी के लिए लक्ष्मी पूजन की रात्रि सर्वप्रमुख मानी गई है।।

दीपावली 2026 की तिथि तथा सिलवासा का मुहूर्त।। Diwali 2026 Date and Muhurat for Silvassa.

मित्रों, इस वर्ष दीपावली अर्थात मुख्य लक्ष्मी पूजन की रात्रि 8 नवंबर 2026, रविवार को कार्तिक अमावस्या पर मानी गई है। लक्ष्मी पूजन के लिए सामान्यतः सूर्यास्त के पश्चात प्रदोष काल को श्रेष्ठ माना जाता है। जब अमावस्या तिथि व्याप्त हो। नीचे दिया गया समय सिलवासा, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव की राजधानी के रेखांश के अनुसार है।।

सिलवासा के लिए प्रदोष काल सायं लगभग 6:00 बजे से रात्रि 8:33 बजे तक माना गया है। तथा लक्ष्मी पूजन का शुभ समय सायं लगभग 6:25 बजे से रात्रि 8:24 बजे तक बताया गया है। इसी अवधि में स्थिर लग्न के संयोग को भी अनेक पंचांगों में विशेष शुभ माना जाता है। क्योंकि दीपावली की संध्या को वृषभ लग्न का उदय होता है, जो शुक्र की राशि है तथा शुक्र को लक्ष्मी का ग्रह माना जाता है।।

यहाँ एक आवश्यक बात और। चोपड़ा पूजन तथा दुकान-पूजन के लिए अनेक व्यापारी समाज चौघड़िया के शुभ मुहूर्त का भी प्रयोग करते हैं। तथा कुछ परंपराओं में महानिशा काल अर्थात मध्यरात्रि के समय भी विशेष पूजन किया जाता है। इन समयों की सटीक गणना प्रत्येक पंचांग में कुछ मिनट भिन्न हो सकती है। इसलिए पूजन से पूर्व अपने स्थानीय पंचांग अथवा अपने किसी ब्राह्मण से सिलवासा के अनुसार इनकी पुष्टि अवश्य कर लें।।

व्यापारी वर्ग के लिए लक्ष्मी पूजन की विधि।। Method of Lakshmi Puja for Traders.

मित्रों, पूजन से पहले दुकान अथवा कार्यालय की पूर्ण सफाई कर लें तथा प्रवेश-द्वार पर रंगोली, तोरण तथा शुभ-लाभ के चिह्न बनाएँ। पूजा-स्थान उत्तर-पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। वहाँ एक स्वच्छ चौकी पर लाल अथवा पीला वस्त्र बिछाकर माता लक्ष्मी, गणेश जी तथा कुबेर की मूर्ति अथवा चित्र स्थापित करें। साथ में कलश, बही-खाते तथा तिजोरी की चाबी भी रखी जाती है।।

पूजन का आरंभ संकल्प से करें। हाथ में जल, अक्षत तथा पुष्प लेकर अपना नाम, गोत्र, व्यवसाय का नाम तथा पूजन का उद्देश्य बोलकर संकल्प लें। सर्वप्रथम गणेश जी का पूजन करें, फिर कलश-पूजन करें, उसके पश्चात माता लक्ष्मी का आवाहन करके उन्हें आसन, स्नान, वस्त्र, पुष्प, धूप, दीप तथा नैवेद्य अर्पित करें। कमल का पुष्प, कमलगट्टा, खील-बताशे तथा मिठाई माता को प्रिय मानी गई हैं।।

इसके पश्चात कुबेर का स्मरण करके तिजोरी अथवा गल्ले पर स्वस्तिक बनाएँ। तथा उसमें हल्दी की गाँठ, कौड़ी, अक्षत तथा कुछ सिक्के रखकर उसका पूजन करें। फिर श्री सूक्त अथवा लक्ष्मी अष्टक का पाठ करें। तथा “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जप करें। अंत में गणेश-लक्ष्मी की आरती करें। क्षमा-प्रार्थना करें तथा प्रसाद सभी में बाँटें। दीपक पूरी रात जलते रहें, यह भी परंपरा में शुभ माना गया है।।

चोपड़ा पूजन अर्थात बही-खाता पूजन की विधि।। Method of Chopda Pujan.

मित्रों, चोपड़ा पूजन के लिए नए बही-खाते अथवा खाता-पुस्तक को पूजा-स्थान पर रखें। प्रत्येक खाते के पहले पृष्ठ पर रोली अथवा सिंदूर से स्वस्तिक बनाएँ। तथा उसके नीचे “श्री गणेशाय नमः” लिखें। कई परंपराओं में प्रथम पृष्ठ पर “शुभ-लाभ” तथा “श्रीयै नमः अथवा महालक्ष्म्यै नमः” भी लिखा जाता है। कुछ परिवार नए खाते में पहली प्रविष्टि के रूप में पूजन का खर्च अथवा कोई शुभ राशि भी लिखते हैं।।

इसके पश्चात बही-खाते पर पुष्प, अक्षत तथा हल्दी-कुमकुम अर्पित करके सरस्वती तथा लक्ष्मी का ध्यान करें। लेखनी अर्थात कलम तथा दवात का भी पूजन किया जाता है। आज के समय में अनेक व्यापारी कंप्यूटर अथवा अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग भी करते हैं। ऐसी स्थिति में कंप्यूटर, लैपटॉप अथवा लेखा-पुस्तक पर भी तिलक लगाकर श्रद्धा से पूजन करना सर्वमान्य रूप से स्वीकार किया जाता है।।

चोपड़ा पूजन का भाव यह है कि आने वाला वर्ष लेन-देन की शुद्धता, ईमानदारी तथा सरस्वती की कृपा के साथ आरंभ हो। इसलिए इस दिन पुराने बकाया तथा हिसाब का स्मरण करके सब स्पष्ट रखने की भावना रखना भी पूजन का एक व्यावहारिक पक्ष माना जाता है। जिन समाजों में इसका अलग मुहूर्त निर्धारित किया जाता है, वहाँ अपने समाज के पंचांग का ही पालन करें।।

दुकान, तिजोरी तथा औजारों का पूजन।। Worship of Shop, Safe and Tools.

मित्रों, दुकान में प्रवेश करने से पूर्व मुख्य द्वार पर जल छिड़कें तथा दीपक जलाएँ। गद्दी अथवा काउंटर को स्वच्छ करके उस पर स्वस्तिक बनाएँ। तराजू तथा बाट-माप पर तिलक लगाकर पुष्प चढ़ाएँ। क्योंकि यह व्यापार में न्याय तथा सही तौल का प्रतीक होता है। इसके साथ ही ताले, चाबी तथा गल्ले का भी पूजन किया जाता है।।

तिजोरी का पूजन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उसे स्वच्छ करके उसके भीतर लाल अथवा पीला वस्त्र बिछाएँ, तथा पूजन के पश्चात उसमें कुछ धन, आभूषण अथवा सिक्के रखें। परंपरा में यह भी कहा जाता है कि तिजोरी को कभी पूर्णतः खाली नहीं रखना चाहिए। इसके अतिरिक्त कारखानों तथा औद्योगिक इकाइयों में मशीनों, वाहनों तथा औजारों पर भी स्वस्तिक अथवा तिलक लगाकर पूजन किया जाता है।।

यहाँ यह भी ध्यान रखें कि पूजन में अग्नि, दीपक तथा पटाखों का प्रयोग करते समय सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए। विशेषकर दुकानों, गोदामों तथा कारखानों में जहाँ ज्वलनशील पदार्थ जहाँ हों, वहाँ दीपक को सुरक्षित दूरी पर रखें तथा बिजली के उपकरणों की भी जाँच कर लें। सुरक्षा भी पूजन का ही अंग माना जाता है। क्योंकि सुरक्षा पहले होता है, फिर चाहे जीवन की हो या धन की।

पूजन की सामग्री।। Puja Samagri.

मित्रों, पूजन से पह्ल्के पूजन सामग्री तैयार रखना अत्यंत आवश्यक होता है। ताकि मुहूर्त के समय की कोई कमी न रहे। सामान्य रूप से लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति अथवा चित्र, कलश, आम के पत्ते, नारियल, रोली, मौली, अक्षत, हल्दी, कुमकुम, चंदन, पुष्प तथा कमल का फूल आवश्यक माने जाते हैं। साथ ही धूपबत्ती, घी के दीपक, कपूर, खील-बताशे, मिठाई, फल तथा पान-सुपारी भी रखें।।

इसके अतिरिक्त नए बही-खाते, कलम-दवात, तराजू, तिजोरी की चाबी, सिक्के, कौड़ी, हल्दी की गाँठ तथा गंगाजल की भी आवश्यकता होती है। गल्ले अथवा तिजोरी में रखने के लिए कुछ चाँदी के सिक्के अथवा नकद धन भी शुभ माना गया है। इन सबकी सूची पहले से बनाकर, दीपावली से एक-दो दिन पहले ही सामग्री एकत्र कर लेना समझदारी होता है।।

व्यापारी वर्ग के लिए ध्यान रखने योग्य बातें।। Points to Remember for Traders.

मित्रों, पूजन से पहले दुकान की सफाई, पुराने तथा अनुपयोगी सामान की व्यवस्था तथा हिसाब की स्पष्टता का ध्यान रखें। परंपरा में कहा गया है कि स्वच्छ तथा सुव्यवस्थित स्थान में ही लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए इसे केवल कर्मकांड नहीं, अपितु व्यवसाय की व्यवस्था का भी एक अवसर मानना चाहिए। क्योंकि यही अनुशासन वर्ष भर समृद्धि का आधार बनता है।।

पूजन के समय मन को शांत तथा श्रद्धा से भरा रखें। कर्मचारियों तथा परिवार के सदस्यों को भी सम्मिलित करें। तथा पूजन के पश्चात उन्हें मिठाई, उपहार अथवा बोनस देकर उनका उत्साह बढ़ाना भी शुभ तथा सद्भावपूर्ण माना जाता है। जरूरतमंदों को दान देना तथा गरीबों को भोजन कराना भी लक्ष्मी की कृपा पाने का सरल मार्ग होता है।।

साथ ही यह भी स्मरण रखें कि माता लक्ष्मी की सच्ची कृपा ईमानदारी तथा नीतिपूर्ण व्यवहार से ही स्थायी रहती है। कर चोरी, मिलावट अथवा किसी को धोखा देकर किया गया व्यापार दीर्घकाल तक टिकता नहीं। ऐसा सनातन धर्मशास्त्रों का भाव भी है और माना भी जाता है। इसलिए पूजन के साथ-साथ व्यवसाय में ग्राहक तथा सहयोगियों के प्रति सत्यनिष्ठा का संकल्प भी लेना चाहिए।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, माता लक्ष्मी की उपासना के लिए श्री सूक्त का पाठ वैदिक परंपरा में अत्यंत प्राचीन माना जाता है। तथा इसे ऋग्वेद के खिल भाग से जोड़ा जाता है। कनकधारा स्तोत्र को आदि शंकराचार्य की रचना माना जाता है। जो लक्ष्मी की स्तुति में प्रसिद्ध है। इन दोनों का पाठ व्यापारी समाजों में विशेष रूप से प्रचलित है।।

कार्तिक अमावस्या की प्रदोष-व्यापिनी तिथि में लक्ष्मी पूजन का विधान धर्मसिंधु तथा निर्णयसिंधु जैसे निबंध-ग्रंथों में तिथि-निर्णय के रूप में मिलता है। परंतु मुहूर्त तथा चोपड़ा पूजन की सूक्ष्म विधि में समाज तथा क्षेत्र के अनुसार कुछ भेद पाए जाते हैं। इसलिए अपने कुल-गुरु अथवा किसी अनुभवी ब्राह्मण का मार्गदर्शन सदैव श्रेयस्कर होता है।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

प्रश्न 1. दीपावली पर व्यापारी वर्ग को कौन-सी पूजा करनी चाहिए।। Which Puja Should the Trading Community Perform on Diwali.

उत्तर:- व्यापारी वर्ग को लक्ष्मी-गणेश-कुबेर पूजन, चोपड़ा अर्थात बही-खाता पूजन तथा दुकान, तिजोरी एवं तराजू का पूजन करना चाहिए। साथ ही श्री सूक्त अथवा कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना भी अत्यन्त शुभ माना जाता है।।

प्रश्न 2. इस वर्ष दीपावली कब है तथा सिलवासा-मुंबई में लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त क्या है।। When Is Diwali This Year and What Is the Lakshmi Puja Muhurat in Silvassa-Mumbai.

उत्तर:- दीपावली 8 नवंबर 2026 दिन रविवार को है। सिलवासा-मुंबई के लिए लक्ष्मी पूजन का शुभ समय सायं लगभग 6:25 से रात्रि 8:24 बजे तक बताया गया है। तथा प्रदोष काल लगभग 6:00 से 8:33 बजे तक है।।

प्रश्न 3. चोपड़ा पूजन क्या होता है।। What Is Chopda Pujan.

उत्तर:- नए बही-खातों पर स्वस्तिक बनाकर तथा श्री गणेशाय नमः एवं शुभ-लाभ लिखकर उनका पूजन करना चोपड़ा पूजन कहलाता है। जिसे शारदा पूजन भी कहा जाता है।।

प्रश्न 4. क्या कंप्यूटर अथवा अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर का भी पूजन किया जा सकता है।। Can Computers or Accounting Software Also Be Worshipped.

उत्तर:- हाँ, आज के समय में कंप्यूटर, लैपटॉप तथा लेखा-पुस्तक पर भी तिलक लगाकर श्रद्धा से पूजन करना सर्वमान्य रूप से स्वीकार किया जाता है।।

प्रश्न 5. तिजोरी के पूजन में क्या ध्यान रखना चाहिए।। What Should Be Kept in Mind While Worshipping the Safe.

उत्तर:- तिजोरी को स्वच्छ करके उसमें लाल अथवा पीला वस्त्र बिछाएँ। स्वस्तिक बनाकर पूजन करें तथा उसमें कुछ धन, सिक्के अथवा आभूषण रखें। परंपरा में उसे पूर्णतः खाली न रखने की सलाह दी जाती है।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, व्यापारी वर्ग के लिए दीपावली केवल एक त्योहार नहीं, अपितु नए व्यावसायिक वर्ष का शुभारंभ भी होता है। माता लक्ष्मी-गणेश-कुबेर का पूजन, चोपड़ा अर्थात बही-खाता पूजन। साथ ही दुकान, तिजोरी एवं तराजू का पूजन, ये सभी मिलकर इस वर्ष को श्रद्धा तथा शुभता के साथ आरंभ करने का माध्यम हैं। सिलवासा-मुंबई के रेखांश के अनुसार इस वर्ष 8 नवंबर की सायंकाल का प्रदोष काल इसके लिए प्रमुख माना गया है।।

इस विषय में मैं यही कहूँगा कि पूजन की विधि तथा मुहूर्त का पालन अवश्य करें। परंतु उसे अपने ऊपर बोझ न बनने दें। यदि किसी कारण से सब कुछ विधि के अनुसार संभव न हो पाए, तो श्रद्धा से किया गया सरल पूजन भी माता को स्वीकार होता है। माता लक्ष्मी का वास वहीं स्थायी होता है, जहाँ परिश्रम, ईमानदारी तथा सद्भाव बना रहता है।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि अपने समाज की परंपरा, कुल-रीति तथा सटीक मुहूर्त के लिए किसी विद्वान, योग्य एवं अनुभवी ब्राह्मण अथवा अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि अवश्य कर लेनी चाहिए। ताकि पूजन पूर्ण विधि-विधान तथा निश्चिंत मन से संपन्न हो सके। आप सभी व्यापारी भाइयों तथा सनातनियों को दीपावली के इस पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनायें।।

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