बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।
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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 06 नवम्बर 2026 दिन शुक्रवार।।
मित्रों, तारीख 06 नवम्बर 2026 दिन शुक्रवार को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है। तो जैसा कि आप सभी जानते हैं, कि तारीख 05 नवम्बर 2026 दिन गुरुवार को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की रम्भा एकादशी तिथि थी। जिसका आरम्भ तारीख 04 नवम्बर को दिन में 11:04 AM बजे हुआ था। और यह एकादशी तिथि 05 नवम्बर को प्रातः 10:36 AM बजे तक थी। तो आज 06 नवम्बर को जया एकादशी का पारण किया जायेगा। तो चलिए रम्भा एकादशी व्रत के पारण का निर्णय देखते हैं। आज 06 नवम्बर 2026 को पारण का समय सुबह 06:42 AM से 08:58 AM बजे तक है। इस समय के भीतर ही सभी रम्भा एकादशी व्रत के व्रतियों को एकादशी व्रत का पारण कर लेना चाहिए। आज प्रदोष व्रत भी है। आज सायंकाल अर्थात प्रदोषकाल में तेरस होने के कारण धनतेरस का पावन व्रत भी आज ही मनाया जायेगा। आज अकालमृत्यु निवारण हेतु सायंकाल में सभी कार्य पूर्ण करके घर के बाहर मुख्य दरवाजे पर एक दीप जलाना चाहिए। आज धनवन्तरी जयन्ती एवं कामेश्वरी जयन्ती भी है। आज धन-ऐश्वर्य की कामना से विधिपूर्वक माता महालक्ष्मी के पूजन हेतु सायं प्रदोषकाल का मुहूर्त ही सर्वोत्तम होगा। इस प्रदोषकाल में ही स्थिर लग्न वृषभ भी रहेगा जिसका सम्पूर्ण मुहूर्त देखने के लिए इस लिंक को क्लिक करें। आज गोत्रिरात्रियमपंचक भी आरम्भ हो रहा है। आप सभी सनातनियों को “धनवन्तरी जयन्ती, कामेश्वरी जयन्ती एवं धनतेरस के महान पर्व” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आप का आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।
वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

आज का पञ्चांग 06 नवम्बर 2026 दिन शुक्रवार।।
Aaj ka Panchang 06 November 2026.
विक्रम संवत् – 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.
शक – 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल – याम्य.
ऋतु – शरद.
मास – कार्तिक.
पक्ष – कृष्ण.
गुजराती पंचांग के अनुसार – अश्विन कृष्ण पक्ष.
#Panchang_06_November_2026
तिथि – द्वादशी 10:31 AM बजे तक उपरान्त त्रयोदशी तिथि है।।
नक्षत्र – उत्तराफाल्गुनी 03:57 AM तक उपरान्त हस्त नक्षत्र है।।
योग – वैधृति 05:10 AM तक उपरान्त विष्कुम्भ योग है।।
करण – तैतिल 10:31 AM तक उपरान्त गर 22:37 PM तक उपरान्त वणिज करण है।।
चन्द्रमा – कन्या राशि पर।।
सूर्य – तुला राशि एवं स्वाति नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:43:38
मुम्बई सूर्यास्त – सायं 17:59:21
वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 06:31:41
वाराणसी सूर्यास्त – सायं 17:29:31
राहुकाल (अशुभ) – सुबह 10:57 बजे से 12:22 बजे तक।।
विजय मुहूर्त (शुभ) – दोपहर 12.10 बजे से 12.34 बजे तक।।
#Panchang_06_November_2026
द्वादशी तिथि विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह मसूर से बना सभी व्यंजन इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण भगवान को बताया गया है।।
मित्रों, आज द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ अवश्य करने चाहिए। नाम के पाठ एवं जप आदि करने से व्यक्ति के जीवन में धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति सहज ही होने लगती है। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है।।
मित्रों, द्वादशी तिथि में जन्म लेनेवाले व्यक्ति का स्वभाव अस्थिर होता है। इनका मन किसी भी विषय में केन्द्रित नहीं हो पाता है। इस व्यक्ति का मन हर पल चंचल बना रहता है। इस तिथि के जातक का शरीर पतला व कमज़ोर होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी स्थिति अच्छी नहीं होती है। ये यात्रा के शौकीन होते हैं और सैर सपाटे का आनन्द लेते रहते हैं।।
#Panchang_06_November_2026
हस्त नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म हस्त नक्षत्र में हुआ है तो आप संसार को जीतने और उसपर शासन करने का पूरा पूरा सामर्थ्य एवं शक्ति रखते हैं। आपकी दृढ़ता और विचारों की स्थिरता आपको एक आम आदमी से भिन्नता और श्रेष्ठता प्रदान करती है। आप एक स्वतंत्र विजेता होंगे जो अपने ज्ञान और समृद्धि के कारण जाने जाते हैं। हस्त नक्षत्र के जातक सहृदयी और दयालु स्वभाव के होते हैं।।
जरुरतमंदों की निस्वार्थ मदद के लिए आप सदैव ही प्रशंसा पाते हैं। आप स्वभाव से थोड़े अध्यात्मिक और संगीत में रूचि रखने वाले होते हैं। आप अपने प्रियजनों के बीच रहना पसंद करते हैं। परन्तु समय-समय पर अपने कठोर निर्णयों के कारण कड़े एवं क्रूर भी हो जाते हैं। हस्त नक्षत्र के जातक अपनी अंदरूनी दृढ शक्ति के कारण बाहर से कठिन व्यक्ति प्रतीत होते हैं परन्तु वास्तविकता कुछ और ही होती है।।
अपने नम्र स्वभाव के कारण आप दूसरों को शीघ्र ही अपनी और आकर्षित कर लेते हैं। आपको जीवन में दया और मानवता के बदले में केवल आलोचना और कभी-कभी विद्रोह का भी सामना करना पड़ सकता है। आपका जीवन बहुत से उतार चढ़ाव से भरा हुआ होता है जो बहुत ही छोटे-छोटे अंतराल के बाद आकर आपकी मानसिक शांति भंग करते रहता हैं। आपका कठोर परिश्रम और कार्य के प्रति इमानदारी भी आपको स्थिरता नहीं दे पाती है।।
हस्त नक्षत्र के जातक जीवन में कभी भी बहुत अधिक धनि या बहुत अधिक निर्धन नहीं रहते हैं। यही स्तिथि उनके जीवन में सुख और दुःख को लेकर भी होता है। इसलिए आपको सदा ही संतुलित रहने का प्रयास करना चाहिए। आप कभी किसी को भूल कर भी धोखा नहीं दे सकते। क्योंकि आप इमानदारी पर विश्वास रखते हैं। यदि आपके साथ कोई विश्वासघात करता है तो आप क्रूरता और कठोरता के साथ उसका उत्तर देते हैं।।
समय के साथ ही आप अपने वास्तविक स्वभाव में आ जाते हैं और बाकि सब इश्वर पर छोड़ देते हैं। अपनी कुशाग्र बुद्धि के कारण आप किसी भी प्रकार के कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के योग्य होते हैं। आपका लक्ष्य कार्य में प्रभावी समाधान खोजना और कार्य को बिना अड़चन के पूर्ण करना होता है। आप अपने जीवन में 17-18 की आयु से ही कमाना आरम्भ कर देते हैं परन्तु अडचने 48 वर्ष की उम्र तक आपका पीछा नहीं छोड़ती।।
आप अपने जीवन में समृद्धि और सुख 48 वें वर्ष के उपरान्त ही देख पाते हैं। हस्त नक्षत्र में जन्मा जातक एक सुखी पारिवारिक जीवन व्यतीत करता है। छोटी-छोटी अडचनों के बावजूद, एक अच्छे जीवन साथी के कारण पारिवारिक जीवन संतोष पूर्वक व्यतीत होता है। सर्वगुण संपन्न पत्नी के कारण आपका दाम्पत्य जीवन सुखी एवं सद्भावनापूर्ण होता है।।
हस्त नक्षत्र में जन्मी जातिकायें कड़े स्वभाव की तथा अधिक इच्छा रखने वाली होती हैं। यह अपनी वित्तीय स्तिथि से सदा नाखुश और असंतुष्ट रहती हैं। दूसरों के धन और संपत्ति में रूचि रखना इनके स्वभाव में होता है। हस्त नक्षत्र में जन्म लेनेवाली जातिकायें कार्य करने में चतुर एवं कुशल होती हैं। हस्त नक्षत्र के जातक सदैव आभार मानने वाले होते हैं। हस्त नक्षत्र के जातकों में विटामिन बी की कमी ज्यादातर देखने को मिलती है। गैस, अपच, अजीर्ण, हाथ तथा कंधे के जोड़ों के दर्द एवं सांस की तकलीफ जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।।
प्रथम चरण:- हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी मंगल होता हैं। इस नक्षत्र चरण में पैदा हुआ जातक शूरवीर एवं तर्कशास्त्र का ज्ञाता होता है। बुध की दशा हस्त के जातक को उत्तम फल देती है। शुक्र की दशा में ऐसे जातकों का भाग्योदय होता है तथा चन्द्रमा भी उत्तम फलदायी समय लेकर आता है।।
द्वितीय चरण:- हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शुक्र होता हैं। इस नक्षत्र चरण में पैदा हुआ जातक आजीवन रोग से जूझता रहता है। जातक के शरीर में स्थायी बीमारी का योग बनता है। बुध की दशा अति उत्तम फल देती है। शुक्र की दशा में जातक का भाग्योदय होता है तथा चन्द्रमा भी उत्तम फलदायी समय लेकर आता है।।
तृतीय चरण:- हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी बुध होता हैं। इस नक्षत्र चरण में पैदा हुआ जातक धनी एवं संपन्न होता है। लग्नेश बुध की दशा अति उत्तम फल देती है। शुक्र की दशा में जातक का भाग्योदय होता है तथा चन्द्रमा भी उत्तम फलदायी समय लेकर आता है।।
चतुर्थ चरण:- हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी चन्द्र होता हैं। इस नक्षत्र चरण में पैदा हुआ जातक धनी एवं संपन्न होगा। लग्नेश बुध की दशा अति उत्तम फल देती है। शुक्र की दशा में जातक का भाग्योदय होता है तथा चन्द्रमा की दशा सामान्य फलदायी समय लेकर आता है।।
#Panchang_06_November_2026
शुक्रवार का विशेष – शुक्रवार के दिन तेल मर्दन अर्थात तेल शरीर में मालिश करने से बिघ्न बाधायें आती हैं – (मुहूर्तगणपति)।।
शुक्रवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से लाभ और यश की प्राप्ति होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खाकर यात्रा कर सकते है।।
शुक्र के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए यह उपाय करना चाहिए। शुक्र की अशुभता दूर करने के लिए अपने सामर्थ्य के अनुसार रुई और दही किसी मंदिर में दान करना चाहिए। किसी भी स्त्री एवं अपनी पत्नी का भी कभी भी अपमान या निरादर नहीं करना चाहिए। उन्हें सदैव आदर और सम्मान देने का प्रयास करना चाहिए।।
शुक्रवार को सफ़ेद वस्त्र धारण करना चाहिए। इत्र एवं परफ्यूम लगाने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। किसी नेत्रहीन व्यक्ति को सफ़ेद वस्त्र या मिठाई दान करने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। दश वर्ष से कम आयु की कुवांरी कन्याओं को गाय के दूध से बने खीर खिलाने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। मछलियों को आटे की गोलियां खिलाने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। चाँदी का कड़ा पहनने एवं श्रीसूक्त का पाठ करने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है।।
शुक्रवार का विशेष टिप्स – मित्रों, आज शुक्रवार को दक्षिणावर्ती शंख से भगवान नारायण (शालिग्राम भगवान) का अभिषेक करें। यथोपचार से पूजन करें और पूजन के उपरान्त अथवा मध्य में ही श्वेत चन्दन में केशर मिलाकर भगवान को श्रद्धापूर्वक तिलक लगायें। शुक्रवार को इस प्रकार किया गया भगवान नारायण का पूजन माता महालक्ष्मी को बलात आपके घर की ओर खिंच लाता है। आज लक्ष्मी घर में आयें इसके लिये घर के ईशान कोण में देशी गाय के घी से रुई के जगह लाल धागे की बत्ती का एक दीपक जलायें।।
#Panchang_06_November_2026
शुक्रवार को भूलकर भी ये काम न करें:- हमारे वैदिक सनातन धर्म में हर दिन किसी न किसी देवी-देवता का होता है। जिसके अनुसार शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी का होता है। शुक्रवार के दिन जो भक्त मां लक्ष्मी की पूजा विधिपूर्वक करते हैं, उन्हें संसार के सभी सुखों की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में लक्ष्मी मां को धन की देवी माना गया है। मान्यता अनुसार शुक्रवार के दिन माँ की पूजा-आराधना करने से उनका आशीर्वाद सदैव बना रहता है।।
लेकिन इस दिन कुछ काम जिसे कभी भूलकर भी नहीं करना चाहिए। दैनिक जीवन में भी कुछ ऐसे काम होते हैं, जैसे भूलकर भी कभी किसी को भी शुक्रवार के दिन धन ना दें और ना ही उधार लें। मान्यता है, कि शुक्रवार के दिन दिया गया धन वापस लौटकर नहीं आता है। इसदिन किसी को कर्ज देने से मां लक्ष्मी नाराज होती हैं और संबंध भी खराब होते हैं।।
वैसे तो आपको कभी किसी का अपमान नहीं करना चाहिए, लेकिन शुक्रवार के दिन इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन भूलकर भी महिलाओं, कन्याओं और किन्नरों का अपमान नहीं करना चाहिए। उनके बारे में अपशब्द नहीं बोलने चाहिए। महिलाओं में मां लक्ष्मी का वास होता है और उनके अपमान करने से मां लक्ष्मी भी नाराज हो जाती हैं।।
शुक्रवार के दिन अगर आप व्रत-पूजन नहीं भी करते हैं तो तामसिक भोजन खासतौर पर मांसाहार और मदिरा के सेवन से परहेज रखना चाहिए। इस दिन पूर्ण सात्विक भोजन करना चाहिए। अगर संभव हो सके तो इसको आप अपनी आदत भी बना लें।।
शुक्रवार के दिन भूलकर भी किसी को भी शक्कर नहीं देनी चाहिए। क्योंकि ज्योतिष में शक्कर का संबंध शुक्र और चंद्र दोनो से हैं। इसलिए शुक्रवार के दिन शक्कर देने से आपका शुक्र कमजोर होता है और शुक्र भौतिक सुखों का स्वामी है। शुक्र के नाराज होने से भौतिक सुख-सुवधिओं में कमी आती है और आर्थिक स्थिति भी खराब होती है।।
शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी के साथ नारायण की भी पूजा करनी चाहिए। लक्ष्मी के साथ नारायण की पूजा करने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और दोनों का आशीर्वाद भी बना रहता है। अगर संभव हो सके तो सुबह या शाम किसी भी एक समय मीठा घर में जरूर बनाना चाहिए और उसको सबसे पहले घर की सबसे बड़ी स्त्री को देना चाहिए।।
शुक्रवार के दिन किसी से अपशब्दन न बोलें। ऐसा करने से माता लक्ष्मी आप से अप्रसन्नम हो जाती हैं और फिर आपके साथ धन संबंधी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। घर में अपव्यमय बढ़ जाता है। लोग बीमार रहने लगते हैं। व्यापार धंधे में नुकसान होने लगता है।
साफ-सुथरे रसोईघर में मां लक्ष्मी का वास होता है। इससे घर में वैभव और सुख-शांति का प्रवाह निरंतर होता रहता है। भूलकर भी रात के समय किचन में गंदे बर्तन छोड़ना चाहिए, इससे लक्ष्मी माता रूठ जाती है और घर में अशांति फैल जाती है। साथ ही स्वास्थ्य के खराब रहने की आशंका बनी रहती है।।
#Panchang_06_November_2026
मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म शुक्रवार को होता है वह व्यक्ति चंचल स्वभाव का होता है। ये सांसारिक सुखों में लिप्त रहने वाले होते हैं तथा तर्क करने में निपुण और नैतिकता में बढ़ चढ कर होते हैं। ऐसे लोग धनवान और कामदेव के गुणों से प्रभावित रहते हैं और इनकी बुद्धि अत्यन्त तीक्ष्ण होती है। ये ईश्वर की सत्ता में अंधविश्वास नहीं रखते हैं तथा कला के प्रति रूचि रखने वाले, सुन्दर एवं आकर्षक व्यक्तित्व के धनी होते हैं।।
ऐसे लोग सौंदर्यप्रेमी, मधुरभाषी, यात्राओं के शौकिन, सुंदर स्थानों पर घुमने वाले एवं कलाकार स्वभाव के होते हैं। इनमें सेक्स की भावना अन्यों के मुकाबले अधिक होती है। सुन्दर कपडे़ पहनने के शौकिन तथा आभूषण अर्थात ज्वेलरी प्रिय होते हैं। इनको अपना कैरियर पर्यटन से जुडे क्षेत्र, फैशन डिजायनर, कलाकार, सेक्स विशेषज्ञ, मनोचिकित्सक अथवा ज्वेलरी से सम्बन्धित व्यदवसायों में आजमाना चाहिये। इनका शुभ अंक 7 होता है तथा इनका शुभ दिन बुधवार और शुक्रवार होता है।।
आज का सुविचार – मित्रों, अगर कोई आपको नीचा दिखाना चाहता हैं तो इसका मतलब हैं आप उससे ऊपर हैं। जिनमें आत्मविश्वास की कमी होती हैं वही दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। मुझे कौन याद करेगा इस भरी दुनिया में, हे प्रभु! बिना मतल़ब के तो लोग तुझे भी याद नही करते।।
#Panchang_06_November_2026
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