दीपावली पर कुबेर पूजा क्यों की जाती है।। Kubera Puja Diwali Me Kyo Karana.
कुबेर पूजन का परिचय।। Introduction.
मित्रों, हमने पिछले लेख में समझा था कि दीपावली पर व्यापारी वर्ग को कौन-कौन से पूजन करने चाहिए। उसी चर्चा में बार-बार एक नाम आया था, कुबेर। दीपावली की संध्या को हम माता लक्ष्मी के साथ गणेश जी का पूजन तो करते ही हैं। परंतु अनेक घरों तथा दुकानों में इन दोनों के साथ तीसरे देवता के रूप में कुबेर को भी स्थान दिया जाता है। तिजोरी, गल्ले तथा धन-स्थान पर कुबेर का स्मरण विशेष रूप से किया जाता है।।
यहीं पर बहुत से श्रद्धालुओं के मन में प्रश्न उठता है। जब माता लक्ष्मी स्वयं धन की देवी हैं। तो फिर कुबेर की पूजा अलग से क्यों की जाती है। क्या दोनों एक ही हैं अथवा अलग-अलग। और यदि भिन्न हैं, तो दोनों की भूमिका में क्या अंतर है। कई लोग पूजन तो परंपरा के कारण कर लेते हैं। परंतु उसके पीछे का कारण नहीं जानते, और यही जिज्ञासा इस लेख का विषय है।।
परंतु मित्रों, एक बात पहले ही स्पष्ट कर दूँ। कुबेर तथा लक्ष्मी के संबंध को लेकर कथाएँ तथा लोक-मान्यताएँ अनेक रूपों में मिलती हैं। कुछ बातें पुराणों तथा महाकाव्यों से भी स्पष्ट रूप से प्राप्त होती हैं। जबकि कुछ व्याख्याएँ परंपरा तथा आचार्यों की अपनी दृष्टि पर आधारित होती हैं। इसलिए जहाँ भेद संभव है, वहाँ उसे सहज रूप से कहा जाएगा। और अपने कुल की रीति को ही सर्वोपरि माना जाए।।
तो आज हम विस्तार से समझेंगे कि कुबेर देवता कौन हैं तथा उनका स्वरूप क्या है। लक्ष्मी तथा कुबेर की भूमिका में क्या भेद माना गया है। दीपावली पर कुबेर देवता के पूजन का आधार क्या है। पूजन की विधि, दिशा तथा मंत्र क्या हैं। तथा किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।।
कुबेर कौन हैं।। Who Is Kubera.
मित्रों, कुबेर को हिंदू परंपरा में धन के अधिपति तथा देवताओं के कोषाध्यक्ष के रूप में जाना जाता है। उन्हें यक्षों का राजा माना गया है। पौराणिक वर्णनों के अनुसार वे महर्षि विश्रवा के पुत्र हैं। इसी कारण उन्हें वैश्रवण भी कहा जाता है। रामायण की परंपरा में उन्हें रावण का सौतेला भाई बताया गया है। जिन्होंने कभी लंका पर शासन किया था।।
कथाओं में आता है कि कुबेर ने कठोर तपस्या करके ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया। जिसके फलस्वरूप उन्हें धन के स्वामित्व तथा लोकपाल का पद प्राप्त हुआ। उन्हें उत्तर दिशा का दिक्पाल माना जाता है। और इसी कारण वास्तु तथा पूजा-परंपरा में धन-स्थान के लिए उत्तर दिशा को शुभ कहा गया है। उनका निवास अलकापुरी माना जाता है। जो कैलाश के समीप बताई गई है। तथा वे भगवान शिव के मित्र के रूप में भी वर्णित हैं।।
कुबेर का स्वरूप भी परंपरा में विशेष वर्णित है। उन्हें प्रायः स्थूल देह, हाथ में धन की थैली अथवा गदा तथा मुकुट धारण किए हुए दिखाया जाता है। उनका वाहन नर अर्थात मनुष्य माना गया है। और अनेक चित्रणों में उनके साथ नेवला भी दिखाई देता है। जो धन की रक्षा का प्रतीक भी माना जाता है। इन प्रतीकों के पीछे यह भाव है कि धन केवल संग्रह की वस्तु नहीं। अपितु सुरक्षा तथा दायित्व का विषय भी होता है।।
लक्ष्मी तथा कुबेर की भूमिका में अंतर।। Difference Between the Roles of Lakshmi and Kubera.
मित्रों, परंपरा की एक प्रचलित व्याख्या यह है कि माता लक्ष्मी धन की प्रदात्री हैं। जबकि कुबेर उस धन के रक्षक तथा संरक्षक के रुप में बताये गए हैं। अर्थात लक्ष्मी की कृपा से धन आता है। और कुबेर की कृपा से वह धन सुरक्षित, संचित तथा स्थिर रहता है। इसी भाव से कहा जाता है कि केवल धन का आगमन ही पर्याप्त नहीं हिओता। अपितु उसका टिकना तथा सही दिशा में लगना भी उतना ही आवश्यक है।।
एक अन्य लोक-मान्यता के अनुसार लक्ष्मी चंचल प्रवृत्ति की मानी जाती हैं। अर्थात एक स्थान पर स्थिर नहीं रहतीं। इसलिए उन्हें स्थायी रूप से संचित रखने के भाव से कुबेर का पूजन साथ में किया जाता है। यह एक प्रतीकात्मक तथा लोक-प्रचलित व्याख्या है। ऐसी व्याख्याएँ सभी ग्रंथों में एक समान शब्दों में नहीं मिलतीं। परंतु इनका सार यही है कि धन के साथ विवेक तथा संयम भी आवश्यक होता है।।
यहाँ यह भी ध्यान रखें कि लक्ष्मी-पूजन में प्रायः गणेश जी को बुद्धि तथा शुभारंभ के देवता के रूप में सम्मिलित किया जाता है। और कुबेर को धन के प्रबंध तथा रक्षक देवता के रूप में। इस प्रकार तीनों का संयुक्त पूजन धन के आगमन, बुद्धिपूर्ण उपयोग तथा सुरक्षित संचय। तीनों पक्षों की कामना को एक साथ समेट लेता है। यही इस परंपरा का सुंदर भाव माना जा सकता है।।
दीपावली पर कुबेर पूजन का आधार।। Basis of Kubera Worship on Diwali.
मित्रों, दीपावली का पर्व पाँच दिनों का होता है। जिसका आरंभ धनतेरस से माना जाता है। धनतेरस को परंपरा में धन्वंतरि के साथ-साथ कुबेर के पूजन का दिन भी माना जाता है। इस दिन नया सामान, विशेषकर बर्तन अथवा धातु की वस्तुएँ, खरीदने की परंपरा होती है। और अनेक परिवार कुबेर का पूजन करके धन-स्थान की शुद्धि करते हैं। इसके बाद अमावस्या की रात्रि को मुख्य लक्ष्मी पूजन होता है।।
दीपावली की रात को लक्ष्मी पूजन के समय कुबेर का स्मरण इसलिए किया जाता है। क्योंकि यह वर्ष का वह समय माना जाता है। जब व्यापारी नया लेखा-वर्ष आरंभ करते हैं। ऐसे में धन की प्राप्ति की कामना के साथ उसकी रक्षा तथा वृद्धि की प्रार्थना भी स्वाभाविक रूप से जुड़ जाती है। इसीलिए तिजोरी, गल्ले तथा बही-खाते के पूजन में कुबेर का नाम विशेष रूप से लिया जाता है।।
साथ ही यह भी कहना आवश्यक है कि दीपावली पर कुबेर पूजन की परंपरा सभी क्षेत्रों में एक समान नहीं है। कुछ स्थानों पर इसे धनतेरस के दिन प्रमुखता से किया जाता है। जबकि कुछ स्थानों पर दीपावली की रात को ही लक्ष्मी तथा गणेश के साथ। अनेक परिवारों में कुबेर को अलग से न पूजकर लक्ष्मी-पूजन के साथ ही उनका ध्यान कर लिया जाता है। इन सभी रूपों में से किसी को भी अशुद्ध नहीं कहा जा सकता।।
कुबेर पूजन की दिशा तथा स्थान।। Direction and Place for Kubera Worship.
मित्रों, कुबेर उत्तर दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इसलिए उनके पूजन तथा धन-स्थान के लिए उत्तर दिशा को श्रेष्ठ माना गया है। तिजोरी को इस प्रकार रखना कि उसका द्वार उत्तर दिशा की ओर खुले, वास्तु की एक प्रचलित सलाह है। इसका भाव यह बताया जाता है कि उत्तर दिशा धन तथा समृद्धि के आगमन की दिशा है। परंतु यदि घर अथवा दुकान की बनावट के कारण यह संभव न हो, तो घबराने की आवश्यकता नहीं, क्योंकि पूजन का भाव ही प्रमुख होता है।।
पूजन के लिए उत्तर अथवा उत्तर-पूर्व दिशा में स्वच्छ स्थान चुनें। वहाँ चौकी पर लाल अथवा पीला वस्त्र बिछाकर कुबेर की मूर्ति, चित्र अथवा कुबेर यंत्र स्थापित किया जा सकता है। अनेक घरों में लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा के साथ ही एक ओर कुबेर की स्थापना कर दी जाती है। तिजोरी पर स्वस्तिक बनाकर उसके पास भी दीपक जलाना शुभ माना जाता है।।
यहाँ यह भी स्मरण रखें कि वास्तु के कई सुझाव परंपरा से चले आ रहे हैं। जिनकी व्याख्या में विद्वानों के मत अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए इन्हें अपनी सुविधा तथा श्रद्धा के अनुसार ही अपनाया जाना चाहिए। तथा किसी प्रकार के भय अथवा अनावश्यक चिंता का भाव मन में न रखें।।
कुबेर पूजन की विधि तथा मंत्र।। Method and Mantra of Kubera Worship.
मित्रों, कुबेर पूजन भी लक्ष्मी-पूजन की भाँति संकल्प से आरंभ किया जाता है। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा-स्थान को शुद्ध करें तथा सर्वप्रथम गणेश जी का पूजन करें। फिर कुबेर का ध्यान करके उन्हें रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप तथा नैवेद्य अर्पित करें। उन्हें पीले अथवा सफेद पुष्प, मिठाई तथा पान-सुपारी भी अर्पित करना शुभ माना जाता है।।
कुबेर के पूजन में प्रचलित मंत्र है, “ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।” इसका जप श्रद्धा तथा शुद्ध उच्चारण के साथ करना चाहिय। इसके अतिरिक्त “ॐ कुबेराय नमः” जैसा सरल मंत्र भी अनेक श्रद्धालु जपते हैं। जिन्हें संस्कृत उच्चारण में कठिनाई हो, वे सरल मंत्र ही अपनाएँ। क्योंकि भाव की शुद्धता को उच्चारण की जटिलता से अधिक महत्व दिया गया है।।
तिजोरी अथवा धन-स्थान के पूजन में उसके भीतर हल्दी की गाँठ, कौड़ी, कुछ सिक्के तथा अक्षत रखकर पूजन करने की परंपरा है। पूजन के पश्चात आरती करें, क्षमा-प्रार्थना करें तथा प्रसाद वितरित करें। इसी क्रम में माता लक्ष्मी का पूजन करें। ताकि दोनों का पूजन भी एक ही संकल्प में पूर्ण हो जाएगा।।
दीपावली 2026 में पूजन का समय।। Timing of the Worship in Diwali 2026.
मित्रों, इस वर्ष दीपावली का मुख्य लक्ष्मी पूजन 8 नवंबर 2026 दिन रविवार को हो रहा है। सिलवासा, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव की राजधानी, के रेखांश के अनुसार प्रदोष काल सायं लगभग 6:02 बजे से रात्रि 8:33 बजे तक है। साथ ही लक्ष्मी पूजन का शुभ समय सायं लगभग 6:25 से रात्रि 8:24 बजे तक अर्थात वृषभ लग्न में बताया गया है। कुबेर का पूजन भी सामान्यतः इसी लक्ष्मी-पूजन के साथ संपन्न किया जाता है।।
यदि आप धनतेरस के दिन कुबेर का अलग पूजन करना चाहते हैं। तो उसकी सटीक तिथि तथा मुहूर्त के लिए हमारा दूसरा लेख देखें। जिससे आपको स्पष्ट पता चल जायेगा। क्योंकि धनतेरस की तिथि तथा त्रयोदशी की व्याप्ति के अनुसार पंचांगों में भेद मिलता है। चौघड़िया तथा अन्य सूक्ष्म समय भी अपने पंचांग अथवा विद्वान ब्राह्मण से मुहूर्त की पुष्टि कर लेना ही उचित होता है।।
कुबेर पूजन में ध्यान रखने योग्य बातें।। Points to Remember in Kubera Worship.
मित्रों, कुबेर के पूजन का उद्देश्य केवल धन की याचना नहीं, अपितु धन के प्रति सही दृष्टि विकसित करना भी होता है। कुबेर को धन का रक्षक भी कहा गया है। जिसका अर्थ यह भी है कि धन का उपयोग विवेकपूर्ण, नीतिसंगत तथा दान-पुण्य के साथ कैसे किया जाय। जो धन केवल संग्रह में रुका रहे अथवा अनुचित मार्ग से आए। उसकी स्थिरता पर वैदिक परंपरा में संदेह व्यक्त किया गया है।।
इसलिए पूजन के साथ-साथ ईमानदारी, समय पर लेन-देन चुकाने तथा जरूरतमंदों की सहायता का भाव भी रखना चाहिए। दीपावली पर दान देना, गरीबों को भोजन कराना तथा कर्मचारियों का सम्मान करना भी इसी भाव का विस्तारित स्वरुप है। इसी के साथ यह भी स्मरण रखें कि केवल पूजन करने से आर्थिक समस्याएँ स्वतः समाप्त नहीं होतीं। उसके साथ परिश्रम, बजट तथा समझदारी भी आवश्यक होता है।।
यदि कोई व्यक्ति आर्थिक संकट अथवा ऋण की स्थिति में हो, तो पूजन के साथ श्रद्धा और सम्पूर्ण समर्पण का भाव भी रखें। श्रद्धा तथा प्रयास दोनों को साथ लेकर चलना चाहिए। तभी पूजन का संपूर्ण फल प्राप्त होता है। किसी भी पूजन को किसी चमत्कारिक समाधान के रूप में न देखना चाहिए। बल्कि मन को स्थिरता तथा सकारात्मक दिशा देने वाले साधन के रूप में सहज ही अपनाना चाहिए।।
शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.
मित्रों, कुबेर का उल्लेख रामायण, महाभारत तथा अनेक पुराणों में मिलता है। जहाँ उन्हें यक्षराज, धनपति तथा उत्तर दिशा के दिगपाल के रूप में वर्णित किया गया है। रामायण में लंका के प्रसंग के साथ भी उनका संबंध आता है। तथा महाभारत में भी उनके ऐश्वर्य तथा अलकापुरी का वर्णन मिलता है। उन्हें धन के अधिपति मानने की परंपरा अत्यंत प्राचीन माना जाता है।।
दीपावली पर लक्ष्मी-पूजन तथा धनतेरस की परंपराओं का विवेचन विभिन्न पुराणों तथा निबंध-ग्रंथों में भी मिलता है। जबकि कुबेर पूजन की स्थानीय विधियाँ अधिकतर लोक-परंपरा तथा कुल-रीति के रूप में विकसित हुई हैं। इसी कारण विधि के सूक्ष्म विवरण में भी भेद पाए जाते हैं। तथा अपने कुल-गुरु अथवा अनुभवी ब्राह्मणों का मार्गदर्शन लेना सदैव उचित माना गया है।।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)
प्रश्न 1. दीपावली पर कुबेर देवता की पूजा क्यों की जाती है।। Why Is Kubera Worshipped on Diwali.
उत्तर:- कुबेर को धन का रक्षक तथा देवताओं का कोषाध्यक्ष माना जाता है। माता लक्ष्मी से धन की प्राप्ति तथा कुबेर से उसकी रक्षा एवं स्थिरता की कामना से दीपावली पर दोनों का पूजन किया जाता है।।
प्रश्न 2. कुबेर कौन हैं।। Who Is Kubera.
उत्तर:- कुबेर यक्षों के राजा, धन के अधिपति तथा उत्तर दिशा के लोकपाल माने जाते हैं। उन्हें महर्षि विश्रवा का पुत्र तथा वैश्रवण भी कहा जाता है।।
प्रश्न 3. कुबेर पूजन किस दिशा में करना चाहिए।। In Which Direction Should Kubera Worship Be Done.
उत्तर:- कुबेर उत्तर दिशा के स्वामी बताये गए हैं। इसलिए उत्तर अथवा उत्तर-पूर्व दिशा में पूजन तथा धन-स्थान रखना शुभ माना जाता है। परंतु बनावट के कारण यह संभव न हो तो भाव को ही प्रमुख रखें।।
प्रश्न 4. कुबेर का प्रमुख मंत्र कौन-सा है।। What Is the Main Mantra of Kubera.
उत्तर:- ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा, यह प्रचलित मंत्र है। सरल मन्त्र के रूप में “ॐ कुबेराय नमः” का भी जप किया जाता है।।
प्रश्न 5. क्या कुबेर पूजन धनतेरस पर भी किया जाता है।। Is Kubera Worship Also Done on Dhanteras.
उत्तर:- हाँ, अनेक परंपराओं में धनतेरस पर कुबेर का पूजन किया जाता है। तथा कुछ में दीपावली की रात्रि को लक्ष्मी-गणेश के साथ। इसका निर्णय कुल-परंपरा तथा पंचांग के अनुसार ही करना चाहिए।।
लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.
मित्रों, दीपावली पर कुबेर देवता का पूजन इस भाव से किया जाता है कि धन का आगमन, उसका सुरक्षित संचय तथा उसका सही उपयोग। तीनों का संतुलन सदैव बना रहे। माता लक्ष्मी की कृपा से धन आता है। और कुबेर के पूजन में उसे संभालने की सद्बुद्धि की कामना जुड़ी होती है। इसी कारण श्रीगणेश, माता लक्ष्मी तथा कुबेर देवता का संयुक्त पूजन व्यापारी वर्ग में विशेष रूप से प्रचलित होता है।।
इस विषय में मैं यही कहूँगा कि कथाओं तथा व्याख्याओं की सूक्ष्मताओं से अधिक महत्वपूर्ण वह भाव है। जिसके साथ हम पूजन करते हैं। यदि पूजन में धन के प्रति कृतज्ञता, ईमानदारी तथा दूसरों के प्रति उदारता का भाव है। तो वही इस परंपरा की वास्तविक सफलता होती है। केवल मंत्र अथवा विधि से अधिक, हमारा आचरण ही धन को स्थायित्व देता है।।
परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि अपनी कुल-परंपरा, क्षेत्र तथा सटीक मुहूर्त के लिए किसी विद्वान, योग्य एवं अनुभवी ब्राह्मण अथवा अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि अवश्य कर लेनी चाहिए। ताकि पूजन पूर्ण विधि-विधान तथा निश्चिंत मन से संपन्न हो सके। आप सभी सनातनियों को दीपावली के इस पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनायें।।
#दीपावली_पर_कुबेर_पूजा_क्यों #कुबेर_कौन_हैं #लक्ष्मी_और_कुबेर_में_अंतर #कुबेर_पूजन_विधि #कुबेर_मंत्र #Why_Kubera_Puja_On_Diwali #Who_Is_Kubera #Lakshmi_Kubera_Difference #Kubera_Puja_Vidhi #Kubera_Mantra
ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं – Click Here & Watch My YouTube Channel.
इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज – My facebook Page.
वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।
