शारदीय नवरात्रि 2026 कलश स्थापना मुहूर्त एवं पूजा विधि।। Shardiya Navratri 2026 Kalash Sthapana Muhurat And Puja Vidhi.
शारदीय नवरात्रि का परिचय।। Introduction.
मित्रों, हमने पिछले लेखों में पितृ पक्ष तथा सर्वपितृ अमावस्या जैसे पावन पर्वों का विस्तार से अध्ययन किया था। परंतु सर्वपितृ अमावस्या की समाप्ति के ठीक अगले ही दिन से आरंभ होने वाला पर्व, संपूर्ण वर्ष के सबसे बड़े तथा सबसे अधिक प्रतीक्षित धार्मिक अनुष्ठानों में गिना जाता है। अर्थात शारदीय नवरात्रि। यह नौ दिवसीय पर्व माँ आदिशक्ति के नौ स्वरूपों की उपासना का महापर्व है। जिसके लिए सही मुहूर्त, सही विधि तथा शुद्ध संकल्प का विशेष महत्व माना जाता है।।
वैदिक ज्योतिष में शारदीय नवरात्रि के आरंभ का निर्धारण मुख्य रूप से अश्विन मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि, तथा उस तिथि पर पड़ने वाले उदया-तिथि के सिद्धांत के आधार पर किया जाता है। जब यह तिथि सूर्योदय के समय विद्यमान हो, तभी उस दिन को घटस्थापना तथा नवरात्रि-आरंभ के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसी सिद्धांत के आधार पर प्रत्येक वर्ष इस पर्व की तिथि निर्धारित की जाती है।।
मित्रों, यहाँ यह समझना भी अत्यंत आवश्यक है कि कलश-स्थापना अर्थात घटस्थापना। इस संपूर्ण नौ दिवसीय साधना की सबसे प्रथम तथा सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है। क्योंकि यही वह क्षण है, जब साधक अपनी समस्त शक्ति, श्रद्धा तथा संकल्प को माँ दुर्गा के चरणों में समर्पित करता है। और माँ की दिव्य ऊर्जा को अपने घर में आमंत्रित करता है। इसीलिए इस कलश-स्थापना का शुभ मुहूर्त पर ही होना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।।
परन्तु आप बिलकुल घबराएँ नहीं। आज हम इसी विषय पर विस्तार से समझेंगे कि इस वर्ष कलश-स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है। घटस्थापना की संपूर्ण विधि क्या है। तथा इन नौ पावन दिनों में और क्या-क्या करना चाहिए। जिससे माँ दुर्गा की कृपा तथा आशीर्वाद दोनों ही प्राप्त हो सकें। आइये आज हम इसी विषय पर विस्तार से समझने का प्रयास इस लेख के माध्यम से करते हैं।।
शारदीय नवरात्रि 2026 की सही तिथि।। Correct Date Of Shardiya Navratri 2026.
मित्रों, पंचांग की गणना के अनुसार इस वर्ष अश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर 2026 के दिन रात्रि लगभग 9 बजकर 19 मिनट पर आरंभ होगी। तथा यह तिथि अगले दिन अर्थात 11 अक्टूबर 2026 की रात्रि लगभग 9 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। चूंकि शास्त्रों में उदया-तिथि को ही सर्वमान्य माना जाता है। अतः शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ तथा कलश-स्थापना दोनों ही 11 अक्टूबर 2026, रविवार के दिन ही की जाएगी।।
रोचक बात यह है कि इस वर्ष नवरात्रि का प्रथम दिन रविवार को पड़ रहा है। और रविवार को स्वयं सूर्यदेव का दिन माना जाता है। जो तेज तथा शक्ति के प्रतीक हैं। यह संयोग इस वर्ष की नवरात्रि-साधना को और भी अधिक ऊर्जावान तथा फलदायी बनाने वाला माना जा रहा है।।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त।। Auspicious Muhurat For Kalash Sthapana.
मित्रों, इस वर्ष 11 अक्टूबर 2026 के दिन कलश-स्थापना हेतु दो अत्यंत शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। पहला तथा सर्वाधिक प्रशस्त मुहूर्त प्रातःकाल लगभग 6 बजकर 20 मिनट से आरंभ होकर प्रातः 10 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। और इसे घटस्थापना के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है। यदि किसी कारणवश इस प्रातःकालीन मुहूर्त में कलश-स्थापना संभव न हो सके। तो दूसरा मुहूर्त अर्थात अभिजित मुहूर्त, जो लगभग प्रातः 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। उसमें भी कलश-स्थापना की जा सकती है।।
इन दोनों में से किसी भी मुहूर्त में कलश-स्थापना करना शास्त्रसम्मत तथा शुभ फलदायी माना जाता है। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि चित्रा नक्षत्र तथा वैधृति योग की अंतिम घड़ियों में कलश-स्थापना करने से बचना चाहिए। इसीलिए उपरोक्त दोनों मुहूर्त ही इस दृष्टि से भी सर्वाधिक सुरक्षित तथा अनुकूल माने गए हैं।।
घटस्थापना की संपूर्ण विधि।। Complete Method Of Ghatasthapana.
मित्रों, घटस्थापना के लिए सर्वप्रथम एक स्वच्छ मिट्टी के पात्र में जौ का बीज डालकर। उसके ऊपर जल से भरा हुआ कलश स्थापित किया जाता है। इस कलश में स्वच्छ जल के साथ-साथ गंगाजल, सुपारी, सिक्का तथा अक्षत भी डाला जाता है। कलश के ऊपर आम अथवा अशोक के पत्तों से सजावट करके। उसके मुख पर नारियल रखा जाता है। जिसे लाल चुनरी अथवा मौली से लपेटा जाता है।।
इसके पश्चात कलश के समीप ही माँ दुर्गा की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करके। विधिवत पूजन किया जाता है। संकल्प लेते समय अपने गोत्र, नाम तथा मनोकामना का उच्चारण करते हुए। माँ दुर्गा से नौ दिनों तक अखंड साधना में सहायता की प्रार्थना की जाती है। घटस्थापना के साथ-साथ ही अखंड ज्योति प्रज्वलित करने की भी परंपरा है। जिसे संपूर्ण नौ दिनों तक निरंतर जलाए रखा जाता है।।
नवरात्रि के नौ दिनों में और क्या-क्या करना चाहिए।। What Else Should Be Done During The Nine Days Of Navratri.
मित्रों, केवल कलश-स्थापना मात्र से ही यह साधना पूर्ण नहीं होती। अपितु इन नौ दिनों में अनेक अन्य महत्वपूर्ण अनुष्ठान भी किए जाने चाहिए। प्रतिदिन माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों में से उस दिन के निर्धारित स्वरूप की विधिवत पूजा करनी चाहिए। तथा दुर्गा सप्तशती अथवा दुर्गा चालीसा का नियमित पाठ करना चाहिए। जो साधक व्रत रखने में सक्षम हों, उन्हें नौ दिनों का अथवा कम से कम प्रथम तथा अंतिम दिन का उपवास अवश्य रखना चाहिए।।
इन नौ दिनों में सात्विक जीवनशैली अपनानी चाहिए। अर्थात मांस, मदिरा तथा तामसिक भोजन से पूर्ण रूप से दूरी बनानी चाहिए। घर में प्रतिदिन स्वच्छता रखनी चाहिए। तथा संभव हो तो नौ दिनों तक रात्रि में सोने से पूर्व भूमि पर शयन करना भी तपस्या के रूप में किया जाता है। अष्टमी अथवा नवमी तिथि के दिन कन्या-पूजन करना इस साधना का सबसे महत्वपूर्ण तथा अनिवार्य अंग माना जाता है। जिसमें छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर भोजन करवाया जाता है। तथा उन्हें यथाशक्ति उपहार एवं दक्षिणा दी जाती है।।
इसके साथ ही नवमी तिथि के पश्चात हवन करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। जिसमें नौ दिनों की साधना की पूर्णाहुति की जाती है। दशमी तिथि को अर्थात विजयदशमी के दिन कलश-विसर्जन करके, माँ दुर्गा से पुनः अगले वर्ष पधारने की प्रार्थना के साथ इस संपूर्ण अनुष्ठान का समापन किया जाता है।।
अखंड ज्योति के नियम।। Rules Of Akhand Jyoti.
मित्रों, जो साधक अखंड ज्योति प्रज्वलित करने का संकल्प लेते हैं। उन्हें कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। इस ज्योति को नौ दिनों तक एक पल के लिए भी बुझने नहीं देना चाहिए। तथा इसके लिए पर्याप्त मात्रा में शुद्ध घी अथवा तेल की व्यवस्था पहले से ही कर लेनी चाहिए। इन नौ दिनों में घर को कभी भी पूर्णतः सूना नहीं छोड़ना चाहिए। अर्थात परिवार में से कोई न कोई सदस्य सदैव घर में उपस्थित रहना चाहिए।।
यदि किसी कारणवश अखंड ज्योति प्रज्वलित करना संभव न हो, तो प्रतिदिन नियमित समय पर दीपक जलाना भी उतना ही शुभ फलदायी माना जाता है। महत्वपूर्ण यह होता है कि साधक अपनी क्षमता के अनुसार ही संकल्प ले। तथा जो भी संकल्प लिया जाए, उसका पूर्ण निष्ठा के साथ पालन करे।।
नवरात्रि को शुभ बनाने के वैदिक उपाय।। Vedic Remedies To Make Navratri Auspicious.
मित्रों, इन नौ दिनों में प्रतिदिन “ॐ दुं दुर्गायै नमः” इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करना चाहिए। तथा नियमित रूप से दुर्गा सप्तशती के किसी एक अध्याय का पाठ अवश्य करना चाहिए। घर के मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण लगाना। तथा प्रतिदिन लाल पुष्पों से माँ दुर्गा का श्रृंगार करना भी विशेष शुभ फलदायी माना जाता है।।
इसके साथ ही इन नौ दिनों में यथाशक्ति दान-पुण्य करना चाहिए। तथा क्रोध, निंदा एवं नकारात्मक विचारों से दूर रहकर पूर्ण सात्विकता के साथ साधना में लीन रहना चाहिए। जो साधक संतान-सुख, विवाह अथवा किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति चाहते हैं। उन्हें इन नौ दिनों में विशेष रूप से कात्यायनी मंत्र का भी जप करना चाहिए।।
और मेरी सलाह तो यही रहेगी कि इन उपायों को केवल औपचारिकता के लिए नहीं। बल्कि पूर्ण श्रद्धा तथा सच्चे मन से करना चाहिए। क्योंकि माँ दुर्गा की कृपा केवल बाह्य आडंबर से नहीं, अपितु भीतर के सच्चे भक्ति-भाव तथा समर्पण से ही प्राप्त होती है।।
शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.
मित्रों, देवी भागवत पुराण में शारदीय नवरात्रि को माँ आदिशक्ति की सर्वाधिक प्रमुख तथा सर्वाधिक फलदायी उपासना-अवधि बताया गया है। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि उदया-तिथि में पड़ने वाली प्रतिपदा पर किया गया घटस्थापना ही शास्त्रसम्मत तथा पूर्ण फलदायी माना जाता है।।
दुर्गा सप्तशती में भी यह वर्णन मिलता है कि जो साधक पूर्ण श्रद्धा, संयम तथा सात्विकता के साथ इन नौ दिनों की साधना संपन्न करता है। उसे माँ दुर्गा से समस्त इच्छित फलों की प्राप्ति होती है। अतः किसी भी विशेष विधि अथवा व्यक्तिगत परिस्थिति के अनुसार इस साधना को संपन्न करवाने के लिए किसी योग्य तथा अनुभवी ब्राह्मण का मार्गदर्शन अवश्य लेना चाहिए।।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)
प्रश्न 1. शारदीय नवरात्रि 2026 कब से आरंभ होगी।। When Will Shardiya Navratri 2026 Begin.
उत्तर:- शारदीय नवरात्रि 2026 का शुभारंभ 11 अक्टूबर 2026, रविवार के दिन उदया-तिथि के अनुसार होगा।।
प्रश्न 2. कलश स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त क्या है।। What Is The Most Auspicious Muhurat For Kalash Sthapana.
उत्तर:- प्रातः लगभग 6 बजकर 20 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक का समय सर्वाधिक शुभ मुहूर्त माना जाता है। तथा वैकल्पिक रूप से अभिजित मुहूर्त अर्थात प्रातः 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक भी कलश-स्थापना की जा सकती है।।
प्रश्न 3. घटस्थापना के लिए किन वस्तुओं की आवश्यकता होती है।। What Items Are Required For Ghatasthapana.
उत्तर:- मिट्टी का पात्र, जौ, कलश, गंगाजल, सुपारी, सिक्का, अक्षत, आम अथवा अशोक के पत्ते, नारियल तथा लाल मौली इस विधि के लिए आवश्यक सामग्री मानी जाती है।।
प्रश्न 4. अखंड ज्योति के क्या नियम होते हैं।। What Are The Rules Of Akhand Jyoti.
उत्तर:- अखंड ज्योति को नौ दिनों तक एक पल के लिए भी बुझने नहीं देना चाहिए। तथा इन नौ दिनों में घर को कभी भी पूर्णतः सूना नहीं छोड़ना चाहिए।।
प्रश्न 5. नवरात्रि में सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान कौन-सा माना जाता है।। Which Ritual Is Considered Most Important During Navratri.
उत्तर:- कलश-स्थापना के साथ-साथ अष्टमी अथवा नवमी तिथि को किया जाने वाला कन्या-पूजन इस साधना का सबसे महत्वपूर्ण तथा अनिवार्य अंग माना जाता है।।
लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.
मित्रों, शारदीय नवरात्रि 2026 इस वर्ष 11 अक्टूबर, रविवार के दिन से आरंभ हो रही है। तथा कलश-स्थापना के लिए प्रातःकालीन मुहूर्त अथवा अभिजित मुहूर्त, दोनों ही अत्यंत शुभ तथा फलदायी माने गए हैं। घटस्थापना के साथ-साथ नियमित पूजा-पाठ, व्रत, कन्या-पूजन तथा हवन, यह सभी अनुष्ठान मिलकर इस संपूर्ण साधना को पूर्णता प्रदान करते हैं।।
वैदिक परंपरा के अनुसार श्रद्धापूर्वक किया गया यह संपूर्ण अनुष्ठान जातक के जीवन में शक्ति, समृद्धि तथा सकारात्मकता का संचार करने में सहायक माना गया है। और यहाँ मैं यही कहूँगा कि जो साधक पूर्ण संयम, सात्विकता तथा सच्ची भक्ति के साथ इन नौ दिनों को व्यतीत करता है। उसे माँ दुर्गा का विशेष आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होता है।।
परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि घटस्थापना अथवा किसी भी विशेष अनुष्ठान से जुड़ी व्यक्तिगत परिस्थिति के समाधान के लिए किसी अनुभवी तथा विद्वान ब्राह्मण से परामर्श अवश्य लें। ताकि यह पावन अनुष्ठान पूर्ण श्रद्धा तथा सही विधि के साथ संपन्न हो सके।।
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