Home Ketu Graha केतु का कुण्डली में विशेष प्रभाव और योग।।

केतु का कुण्डली में विशेष प्रभाव और योग।।

Ketu Ka Vishesh Yoga Aur Prabhav
Ketu Ka Vishesh Yoga Aur Prabhav

केतु का कुण्डली में विशेष प्रभाव और योग।। Ketu Ka Vishesh Yoga Aur Prabhav.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, राहु के बारे में जानने के बाद अब हम उसके छाया ग्रह साथी — केतु के विशेष योग और प्रभाव के विषय में विस्तार से चर्चा करेंगे। केतु भी एक छाया ग्रह है जो सदैव राहु के ठीक विपरीत भाव में स्थित रहता है।।

मित्रों, केतु की प्रकृति राहु से बिल्कुल भिन्न है। जहाँ राहु भौतिक इच्छाओं और महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक है, वहीं केतु वैराग्य, मोक्ष, आध्यात्मिकता और पूर्व जन्म के संस्कारों का कारक है। केतु को “मोक्षकारक” भी कहा जाता है।।

केतु का सबसे विशेष और प्रभावशाली योग है — “केतु का पञ्चम भाव में होना।” पञ्चम भाव बुद्धि, विद्या, सन्तान और पूर्व जन्म के पुण्य का भाव है। यहाँ केतु की उपस्थिति जातक को अत्यन्त तीव्र बुद्धि और रहस्यमय ज्ञान देती है। ऐसे जातक प्रायः ज्योतिषी, तान्त्रिक, आध्यात्मिक गुरु अथवा शोधकर्ता होते हैं।।”

मित्रों, केतु जब नवम भाव में होता है तो जातक को पूर्व जन्म के संस्कारों से असाधारण आध्यात्मिक ज्ञान मिलता है। ऐसे जातक धर्म और दर्शन के गहरे जिज्ञासु होते हैं। इन्हें मन्दिर, तीर्थ और सन्तों की संगति में विशेष आनन्द आता है। इनका जीवन दर्शन अत्यन्त गहरा और व्यापक होता है।।”

केतु जब मंगल के साथ युति करता है तो एक अत्यन्त शक्तिशाली योग बनता है। ऐसे जातक तन्त्र-मन्त्र, रहस्य विद्या और गुप्त शक्तियों में पारंगत होते हैं। इनका साहस और पराक्रम असाधारण होता है। सेना और पुलिस में भी ये विशेष प्रतिष्ठा पाते हैं।।”

मित्रों, केतु का एकादश भाव में होना धन और लाभ की दृष्टि से मिश्रित फल देता है। एक ओर जहाँ जातक को अचानक और अप्रत्याशित धन लाभ होता है वहीं दूसरी ओर मित्रों से विश्वासघात और धोखे की आशंका भी रहती है। ऐसे जातकों को व्यावसायिक साझेदारी में अत्यन्त सावधान रहना चाहिए।।”

केतु की महादशा सात वर्षों की होती है। इस दशा में जातक के जीवन में वैराग्य, आध्यात्मिक जागृति और जीवन के गहरे प्रश्नों से साक्षात्कार होता है। यदि केतु शुभ हो तो यह दशा मोक्षदायिनी होती है परन्तु पीड़ित केतु की दशा में जातक को अनेक रहस्यमय कष्टों का सामना करना पड़ता है।।

केतु के उपाय के रूप में प्रतिदिन “ॐ कें केतवे नमः” मन्त्र का जाप करें। गणेश जी की उपासना केतु को सर्वाधिक शान्त करती है। कम्बल, तिल और लहसुनिया रत्न का दान करें। कुत्तों को रोटी खिलाएं — यह केतु का सर्वोत्तम उपाय माना गया है।।

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