HomeVedic Articlesमाँ स्कंदमाता की विशेष भोग-पूजन विधि एवं विशिष्ट मंत्र।।

माँ स्कंदमाता की विशेष भोग-पूजन विधि एवं विशिष्ट मंत्र।।

माँ स्कंदमाता की विशेष भोग-पूजन विधि एवं विशिष्ट मंत्र।। Ma Skandamata Special Bhog And Mantras.

माँ स्कंदमाता के पूजन का परिचय।। Introduction.

मित्रों, नवरात्रि के पंचम दिवस माँ दुर्गा के पंचम स्वरूप, माँ स्कंदमाता की उपासना की जाती है। भगवान कार्तिकेय, जिन्हें “स्कंद” के नाम से भी जाना जाता है। उनकी माता होने के कारण ही इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। माता की गोद में बाल-स्वरूप भगवान स्कंद विराजमान रहते हैं। तथा माता कमल के पुष्प पर विराजमान होने के कारण इन्हें “पद्मासना” भी कहा जाता है। माता सिंह पर आरूढ़ होकर, अपने चार हाथों में कमल-पुष्प, भगवान स्कंद तथा वर-मुद्रा धारण करती हैं। जो वात्सल्य, ममता तथा संतान-सुख की प्रतीक मानी जाती हैं।।

वैदिक शास्त्रों में माँ स्कंदमाता को बुध ग्रह का भी अधिष्ठाता माना गया है। अतः इनकी उपासना से साधक के भीतर बुद्धि, विवेक तथा ममता के भाव का संचार होता है। जो साधक संतान-सुख, पारिवारिक सौहार्द तथा मातृ-कृपा की कामना रखते हैं। उनके लिए नवरात्र के पंचम दिवस का यह स्कंदमाता का पूजन अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।।

परन्तु आप बिलकुल घबराएँ नहीं। आज हम इसी विषय पर विस्तार से समझेंगे कि माँ स्कंदमाता का पूजन किस प्रकार करना चाहिए। साथ ही इन्हें कौन सा भोग सर्वाधिक प्रिय है। तथा किस विशिष्ट श्रृंगार एवं विशिष्ट मंत्र के जप से माता की शीघ्र प्रसन्नता प्राप्त होती है। आज के इस लेख में इस विषय पर हम विस्तार से चर्चा करते हुए समझेंगे।।

माँ स्कंदमाता की पूजन-विधि।। Puja Vidhi Of Maa Skandamata.

मित्रों, नवरात्रि के पंचम दिवस प्रातःकाल ब्रह्म-मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके पश्चात पूजा-स्थान को शुद्ध करके, माँ स्कंदमाता की प्रतिमा अथवा चित्र को एक स्वच्छ चौकी पर स्थापित करना चाहिए।।

सर्वप्रथम श्रीगणेश जी तथा कलश पर देवताओं का स्मरण करके पूजन आरंभ करना चाहिए। तत्पश्चात माँ स्कंदमाता का आवाहन करना चाहिए। माता को रोली-अक्षत अर्पित करने के पश्चात कमल अथवा सफेद रंग के पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है। क्योंकि माता स्वयं पद्मासना अर्थात कमल पर विराजमान रहती हैं। इसके पश्चात धूप-दीप प्रज्वलित करके माता की आरती करनी चाहिए। तथा अंत में क्षमा-प्रार्थना के साथ पूजन संपन्न करना चाहिए।।

माता को सर्वाधिक प्रिय भोग, केले तथा उससे निर्मित वस्तुओं का योग।। The Bhog Most Dear To The Mother, The Offering Of Banana And Its Preparations.

मित्रों, शास्त्रों के अनुसार माँ स्कंदमाता को केले का भोग सर्वाधिक प्रिय माना जाता है। जिसे माता को अर्पित करने के पश्चात ब्राह्मणों को दान करने से साधक को आरोग्य तथा दीर्घायु की प्राप्ति होती है। केला माता के पुत्र-वात्सल्य तथा पोषण-शक्ति का भी प्रतीक माना जाता है।।

इसके साथ ही माता को दूध तथा दूध से निर्मित खीर अथवा अन्य मिठाई का भोग लगाना भी अत्यंत प्रिय माना जाता है। क्योंकि माता स्वयं संतान का भरण-पोषण करने वाली वात्सल्यमयी देवी हैं। कुछ विद्वानों के अनुसार माता को शहद का भोग अर्पित करना भी विशेष फलदायी सिद्ध होता है। जिससे साधक के पारिवारिक जीवन में मधुरता तथा सौहार्द बना रहता है।।

माता का विशिष्ट श्रृंगार, श्वेत वस्त्र तथा मोती के आभूषण का योग।। Special Adornment Of The Mother, White Attire And Pearl Ornaments.

मित्रों, माँ स्कंदमाता को अपनी वात्सल्यमयी तथा सौम्य प्रकृति के अनुरूप श्वेत अथवा हल्के रंग के वस्त्र अर्पित करना अत्यंत प्रिय माना जाता है। जो ममता तथा पवित्रता के प्रतीक मानी जाती हैं। इनके श्रृंगार में मोती अर्थात मुक्ता के आभूषण धारण कराना विशेष शुभ माना जाता है। क्योंकि मोती को भी माता की शीतलता तथा वात्सल्य-भाव का प्रतीक माना गया है।।

इसके साथ ही माता को सफेद अथवा कमल के पुष्पों की माला पहनाना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। जो इनके पद्मासना स्वरूप को और भी अधिक सुशोभित करता है। इस प्रकार के सौम्य तथा वात्सल्यपूर्ण श्रृंगार से माता शीघ्र प्रसन्न होकर साधक को संतान-सुख तथा पारिवारिक समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।।

माँ स्कंदमाता के विशिष्ट मंत्र, जप से शीघ्र प्रसन्नता का योग।। Special Mantras Of Maa Skandamata, The Yoga Of Swift Grace Through Chanting.

मित्रों, माँ स्कंदमाता की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए अग्रलिखित मूल-मंत्र का श्रद्धापूर्वक नियमित जप करना चाहिए। “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं दैव्यै नमः।।” इसके साथ ही इस निम्नलिखित ध्यान-मंत्र के रूप में इस श्लोक का भी पाठ करना चाहिए।।

“सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।”

मित्रों, इस मंत्र का अर्थ है कि सिंहासन पर नित्य विराजमान, अपने दोनों हाथों में कमल धारण करने वाली यशस्विनी देवी स्कंदमाता सदैव मुझे शुभ फल प्रदान करें। प्रातः तथा सायं दोनों समय इस मंत्र का कम से कम एक माला अर्थात एक सौ आठ बार जप करने से माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं।।

मित्रों, मंत्र-जप के समय सावधानियाँ भी रखनी चाहिए। जैसे मंत्र-जप सदैव स्वच्छ आसन पर बैठकर, पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए। जप के समय स्फटिक अथवा मोती की माला का प्रयोग विशेष रूप से शुभ माना जाता है। चूँकि माता स्कंदमाता वात्सल्य तथा ममता की देवी हैं। अतः इस दिन साधक को विशेष रूप से कोमल तथा शांत भाव से, मन में प्रेम तथा समर्पण का भाव रखते हुए ही जप करना चाहिए।।

इस पूजन से प्राप्त होने वाले फल।। Benefits Obtained From This Worship.

मित्रों, जो साधक नवरात्रि के पंचम दिवस विधिपूर्वक माँ स्कंदमाता का पूजन, निर्धारित भोग-अर्पण तथा मंत्र-जप करता है। उसे संतान-सुख, पारिवारिक सौहार्द तथा मातृ-कृपा की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही विशुद्ध-चक्र के जागृत होने से साधक की वाणी में भी स्पष्टता तथा मधुरता उत्पन्न होती है। जिससे उसके पारिवारिक तथा सामाजिक संबंध और भी अधिक सुदृढ़ होते हैं।।

और मेरी सलाह तो यही रहेगी कि इन उपायों को केवल औपचारिकता के लिए नहीं। बल्कि पूर्ण श्रद्धा तथा निरंतरता के साथ करें। माता का पूजन शुद्ध मन, वात्सल्य-भाव तथा सच्ची भक्ति-भावना के साथ ही करना चाहिए। क्योंकि बाह्य आडंबर की अपेक्षा आंतरिक ममता तथा समर्पण ही माता की वास्तविक प्रसन्नता का कारण बनता है।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, देवी भागवत पुराण तथा दुर्गा-सप्तशती में माँ स्कंदमाता को नवदुर्गाओं में पंचम तथा विशुद्ध-चक्र की अधिष्ठात्री देवी बताया गया है। स्कंद पुराण में भी यह उल्लेख मिलता है कि पंचम नवरात्रि में इनकी विधिपूर्वक उपासना करने से साधक को संतान-सुख तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

प्रश्न 1. माँ स्कंदमाता को कौन सा भोग सर्वाधिक प्रिय है।। Which Bhog Is Most Dear To Maa Skandamata.

उत्तर:- केले का भोग, तथा दूध से निर्मित खीर अथवा मिठाई माता को सर्वाधिक प्रिय मानी जाती है।।

प्रश्न 2. माँ स्कंदमाता का मूल-मंत्र क्या है।। What Is The Primary Mantra Of Maa Skandamata.

उत्तर:- “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं दैव्यै नमः।।” यह माता का मूल-मंत्र माना जाता है। जिसका नियमित जप माता की शीघ्र प्रसन्नता प्रदान करता है।।

प्रश्न 3. माता को किस रंग के वस्त्र अथवा श्रृंगार अर्पित करने चाहिए।। Which Colour Clothes Or Adornment Should Be Offered To The Mother.

उत्तर:- माता को श्वेत अथवा हल्के रंग के वस्त्र तथा मोती के आभूषण अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है।।

प्रश्न 4. माँ स्कंदमाता किस चक्र की अधिष्ठात्री देवी हैं।। Which Chakra Is Maa Skandamata The Presiding Deity Of.

उत्तर:- माँ स्कंदमाता को विशुद्ध-चक्र की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। जो वाणी में स्पष्टता तथा ममता के भाव का संचार करती हैं।।

प्रश्न 5. मंत्र-जप कितनी बार तथा किस समय करना चाहिए।। How Many Times And At What Time Should The Mantra Be Chanted.

उत्तर:- प्रातः तथा सायं दोनों समय कम से कम एक माला अर्थात एक सौ आठ बार मंत्र-जप करना चाहिए। जिससे माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, नवरात्रि के पंचम दिवस माँ स्कंदमाता की विधिपूर्वक उपासना, केले तथा दूध के भोग का अर्पण, वात्सल्यपूर्ण श्रृंगार तथा “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं दैव्यै नमः” इस मंत्र के नियमित जप से साधक को माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह पूजन न केवल आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। बल्कि साधक के भीतर संतान-सुख, पारिवारिक सौहार्द तथा ममता-भाव भी उत्पन्न करता है। जो आगामी नवरात्रि-साधना के लिए अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि इस पूजन को विधिपूर्वक संपन्न करने हेतु किसी विद्वान तथा अनुभवी ब्राह्मण अथवा आचार्य से विस्तृत मार्गदर्शन अवश्य प्राप्त करना चाहिए। ताकि पूजन में किसी प्रकार की त्रुटि न रह जाए तथा माता की पूर्ण कृपा प्राप्त हो सके।।

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