Home Articles Astro Articles कैसे ग्रह योग से पागलपन आता है?

कैसे ग्रह योग से पागलपन आता है?

Mental Disorder Yoga
Mental Disorder Yoga

कैसे ग्रह योग से पागलपन आता है? Mental Disorder Yoga.

# ग्रह योगों से उन्माद एवं मानसिक विकार कैसे उत्पन्न होते हैं?  #How Planetary Combinations Cause Mental Disorders in Astrology.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष में मनुष्य के मन, बुद्धि, स्मृति तथा मानसिक संतुलन का विचार मुख्यतः चन्द्रमा, बुध, पंचम भाव, चतुर्थ भाव तथा लग्न से किया जाता है। जब इन भावों अथवा इनके स्वामियों पर पापग्रहों का तीव्र प्रभाव पड़ता है, तब मानसिक अशान्ति, भ्रम, भय, अवसाद, उन्माद अथवा अन्य मानसिक विकार उत्पन्न होने की संभावना बढ़ जाती है।।

ज्योतिष शास्त्र यह नहीं कहता कि प्रत्येक अशुभ योग निश्चित रूप से मानसिक रोग ही देगा। बल्कि यह संकेत करता है, कि ऐसे योग व्यक्ति की मानसिक स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। फलादेश करते समय सम्पूर्ण जन्मकुण्डली, दशा, गोचर तथा अन्य बलों का विचार भी आवश्यक होता है।।

वैसे तो मानसिक स्थिति के प्रमुख कारक पहला तो “चन्द्रमा (Moon” बताया गया है। क्योंकि चन्द्रमा मन, भावनाओं, कल्पना शक्ति तथा मानसिक स्थिरता का कारक माना गया है। यदि चन्द्रमा निर्बल, नीचस्थ, पापग्रहों से पीड़ित या राहु-केतु के प्रभाव में हो तो मन में अस्थिरता उत्पन्न हो सकती है। दूसरा “बुध (Mercury” है, क्योंकि “बुध” बुद्धि, तर्क, स्मरण शक्ति तथा मानसिक समन्वय का कारक है। बुध के अशुभ होने पर निर्णय क्षमता प्रभावित हो सकती है।।

अब ज्योतिष में चतुर्थ भाव को भी इस विषय के लिए उतना ही आवश्यक माना गया है। क्योंकि कुंडली का चतुर्थ भाव मानसिक शान्ति, सुख तथा आन्तरिक संतुलन का सूचक है। इसकी पीड़ा मानसिक असन्तोष बढ़ा सकती है। पाँचवाँ कुंडली का “पंचम भाव भी एक प्रमुख स्थान होता है। क्योंकि पंचम भाव बुद्धि, विवेक तथा मानसिक परिपक्वता का प्रतिनिधित्व करता है। इसके दूषित होने पर विचार शक्ति प्रभावित हो सकती है।।

शास्त्रों में वर्णित प्रमुख उन्माद योग।। Major “Unmada Yogas” (Combinations Causing Insanity) Described in the Scriptures.

1. चन्द्र-राहु योग।। Grahan Yoga.

मित्रों, जब चन्द्रमा राहु के साथ युति करता है या उसकी प्रबल दृष्टि में आता है, तब मन में भ्रम, भय, असामान्य कल्पनाएँ तथा मानसिक अस्थिरता बढ़ जाती है। “बृहत्पाराशर होरा शास्त्र” में राहु को मन पर भ्रमकारी प्रभाव उत्पन्न करने वाला ग्रह माना गया है। यदि चन्द्रमा अत्यन्त निर्बल हो तो यह प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है।।

2. चन्द्र-शनि योग।। Vish Yoga.

शनि और चन्द्रमा की युति अथवा परस्पर सम्बन्ध को अनेक ज्योतिषाचार्यों ने विषयोग कहा है। इसके प्रभाव से व्यक्ति में अत्यधिक चिन्ता, निराशा, अकेलापन, आकस्मिक भय तथा मानसिक दबाव जैसी प्रवृत्तियाँ देखी जा सकती हैं।।

3. चन्द्रमा पर अनेक पापग्रहों का प्रभाव।। The influence of multiple malefic planets on the Moon.

मित्रों, यदि चन्द्रमा शनि, मंगल, राहु या केतु से एक साथ पीड़ित हो तथा शुभ ग्रहों का संरक्षण न मिले, तो मानसिक असंतुलन की सम्भावना बढ़ सकती है। “जातक पारिजात” तथा “फलदीपिका” में ऐसे योगों को मनो विकार कारी योग माना गया है।।

4. पंचम भाव एवं पंचमेश की पीड़ा।। Affliction of the Fifth House and the Lord of the Fifth House.

यदि पंचम भाव अथवा पंचमेश राहु, केतु, शनि अथवा मंगल से अत्यधिक पीड़ित हो और साथ ही बुध भी निर्बल हो, तो बुद्धि एवं निर्णय क्षमता प्रभावित हो सकती है।।

5. बुध-राहु योग।। Budh Rahu Yoga.

बुध और राहु की अशुभ स्थिति में युति व्यक्ति को अत्यधिक कल्पनाशील, भ्रमित या असामान्य विचारों वाला बना सकती है। यदि यह योग लग्न, पंचम या अष्टम भाव में हो तो इसका प्रभाव अधिक देखा जाता है।।

उन्माद योग के विषय में शास्त्रीय दृष्टिकोण।। The Classical Perspective on Unmada Yoga.

मित्रों, हमारे प्राचीन ज्योतिषीय ग्रंथों में “उन्माद” शब्द का प्रयोग मानसिक असंतुलन, चित्तभ्रम अथवा असामान्य मानसिक अवस्था के लिए किया गया है। परन्तु किसी एक योग के आधार पर मानसिक रोग का निर्णय करना शास्त्रसम्मत नहीं माना गया है। फलादेश के लिए इन बातों का संयुक्त विचार आवश्यक होता है। जैसे लग्न और लग्नेश, चन्द्रमा की स्थिति, बुध की शक्ति, चतुर्थ एवं पंचम भाव, ग्रहों की दशा-अन्तर्दशा, गोचर तथा नवांश एवं अन्य वर्ग कुण्डलियाँ।।

क्या प्रत्येक उन्माद योग मानसिक रोग देता है? Does every *Unmad Yoga* cause mental illness.

क्या यह प्रश्न आपके भी मन में आ रहा है? तो इसका उत्तर मेरे में “नहीं” है। यदि शुभ ग्रह जैसे बृहस्पति या शुक्र+चन्द्रमा अथवा बुध को बल प्रदान कर रहे हों, तो अनेक अशुभ योगों के प्रभाव में कमी आ जाती है। इसी प्रकार शुभ दशाएँ और सकारात्मक वातावरण भी जीवन में संतुलन बनाए रखते हैं।।

ज्योतिष और आधुनिक चिकित्सा।। Astrology and Modern Medicine.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष मानसिक प्रवृत्तियों और संभावनाओं का संकेत देता है, जबकि मानसिक रोग का वास्तविक निदान केवल योग्य मनोचिकित्सक अथवा चिकित्सक ही कर सकता है। अतः यदि किसी व्यक्ति में मानसिक तनाव, अवसाद, भ्रम या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो चिकित्सा परामर्श लेना आवश्यक हो जाता है। ज्योतिष को सहायक मार्गदर्शन के रूप में देखा जाना चाहिए, चिकित्सा के विकल्प के रूप में नहीं।।

अंतिम निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष के अनुसार चन्द्रमा, बुध, चतुर्थ भाव और पंचम भाव मानसिक संतुलन के प्रमुख आधार माने गए हैं। जब ये तत्व राहु, केतु, शनि अथवा अन्य पापग्रहों से अत्यधिक पीड़ित होते हैं, तब मानसिक अस्थिरता या उन्माद जैसे योग निर्मित होते हैं। किन्तु किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पूर्व सम्पूर्ण जन्मकुण्डली, दशा और शुभ-अशुभ बलों का सम्यक् परीक्षण आवश्यक होता है। ज्योतिष का उद्देश्य भय उत्पन्न करना नहीं, बल्कि जीवन की संभावनाओं को समझकर उचित मार्गदर्शन प्रदान करना है।।

ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे  YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं – Click Here & Watch My YouTube Channel.

इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज – My facebook Page.

वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।

किसी भी तरह के पूजा-पाठ, विधी-विधान, ग्रह दोष शान्ति आदि के लिए तथा बड़े से बड़े अनुष्ठान हेतु योग्य एवं विद्वान् ब्राह्मण हमारे यहाँ उपलब्ध हैं ।।
 
संपर्क करें:- बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के बाजु में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा ।।
 
WhatsAap & Call: +91 – 8690 522 111.
E-Mail :: astroclassess@gmail.com

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

error: Content is protected !!
Exit mobile version