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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 07 सितम्बर 2026 दिन सोमवार।।
मित्रों, तारीख 07 सितम्बर 2026 दिन सोमवार को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष कि एकादशी तिथि है। आज की एकादशी को “जया अथवा अजा एकादशी व्रत” के नाम से जाना जाता है। आज की यह जया एकादशी व्रत स्मार्त और वैष्णव सभी भक्तों के लिए है। शास्त्रानुसार एकादशी का व्रत सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वाधिक पुण्यदायी व्रत होता है। इसे हर एक सनातनी व्यक्ति को जीवन में अवश्य करना चाहिये। आज यायिजययोग है। आज सर्वार्थसिद्धियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “जया अथवा अजा एकादशी व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आपका आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।
वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

आज का पञ्चांग 07 सितम्बर 2026 दिन सोमवार।।
Aaj ka Panchang 07 September 2026.
विक्रम संवत् – 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.
शक – 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल – याम्य.
ऋतु – वर्षा.
मास – भाद्रपद.
पक्ष – कृष्ण.
गुजराती पंचांग के अनुसार – श्रावण कृष्ण पक्ष.
#Panchang_07_September_2026
तिथि – एकादशी 17:05 PM बजे तक उपरान्त द्वादशी तिथि है।।
नक्षत्र – पुनर्वसु 18:15 PM तक उपरान्त पुष्य नक्षत्र है।।
योग – व्यतिपात 06:41 AM तक उपरान्त वरियान योग है।।
करण – बव 06:17 AM तक उपरान्त बालव 17:05 PM तक उपरान्त कौलव करण है।।
चन्द्रमा – मिथुन राशि पर 12:39 PM तक उपरान्त कर्क राशि पर।।
सूर्य – सिंह राशि एवं पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:24:51
मुम्बई सूर्यास्त – सायं 18:47:01
वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 05:48:41
वाराणसी सूर्यास्त – सायं 18:12:37
राहुकाल (अशुभ) – सुबह 07:58 बजे से 09:31 बजे तक।।
विजय (शुभ) मुहूर्त – दोपहर 12.24 बजे से 12.48 बजे तक।।
#Panchang_07_September_2026
मित्रों, तारीख 07 सितम्बर 2026 दिन सोमवार को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष कि एकादशी तिथि है। आज की एकादशी को “जया अथवा अजा एकादशी व्रत” के नाम से जाना जाता है। आज की यह जया एकादशी व्रत स्मार्त और वैष्णव सभी भक्तों के लिए है। शास्त्रानुसार एकादशी का व्रत सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वाधिक पुण्यदायी व्रत होता है। इसे हर एक सनातनी व्यक्ति को जीवन में अवश्य करना चाहिये। आज यायिजययोग है। आज सर्वार्थसिद्धियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “जया अथवा अजा एकादशी व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
एकादशी तिथि विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये। चावल खाना इस एकादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। ऐसा करने से पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।।
एकादशी तिथि के देवता विश्वदेवताओं को बताया गया है। यह एकादशी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी गयी है। यह एकादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।।
एकादशी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वो धार्मिक तथा सौभाग्यशाली होता है। मन, बुद्धि और हृदय से ऐसे लोग पवित्र होते हैं। इनकी बुद्धि तीक्ष्ण होती और लोगों में बुद्धिमानी के लिए जाने जाते है। इनकी संतान गुणवान और अच्छे संस्कारों वाली होती है, इन्हें अपने बच्चों से सुख एवं सहयोग भी प्राप्त होता है। समाज के प्रतिष्ठित लोगों से इन्हें मान सम्मान मिलता है।।
जया एकादशी व्रत कथा एवं पूजा विधि:: Read more.
एकादशी व्रत विधि एवं कामहात्म्य कथा:: Read more.
#Panchang_07_September_2026
वैदिक सनातन धर्म में एकादशी तिथि बहुत ही पुण्य फलदायी तिथि मानी जाती है। प्रत्येक मास में एकादशी तिथि दो बार आती है। इसके अनुसार प्रत्येक वर्ष में 24 एकादशी तिथियां आती हैं। लेकिन अधिक मास की एकादशियों के साथ इनकी संख्या 26 हो जाती है। वैदिक पञ्चांग की ग्यारहवीं तिथि एकादशी कहलाती है। इस तिथि का नाम ग्यारस या ग्यास भी है। यह तिथि चंद्रमा की ग्यारहवीं कला है, इस कला में अमृत का पान उमा देवी करती हैं।।
एकादशी तिथि का निर्माण शुक्ल पक्ष में तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा का अंतर 121 डिग्री से 132 डिग्री तक होता है। वहीं कृष्ण पक्ष में एकादशी तिथि का निर्माण सूर्य और चंद्रमा का अंतर 301 से 312 डिग्री तक होता है। एकादशी तिथि के स्वामी विश्वेदेवा को माना गया है। संतान, धन-धान्य और घर की प्राप्ति के लिए इस तिथि में जन्मे जातकों को विश्वेदेवा की पूजा अवश्य करनी चाहिए।।
यदि एकादशी तिथि रविवार और मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा एकादशी तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किसी भी कार्य की सिद्धि प्राप्ति का योग निर्मित होता है। यदि किसी भी पक्ष में एकादशी सोमवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, जो अशुभ होता है। इसमें शुभ कार्य निषिद्ध बताये गये हैं। एकादशी तिथि नंदा तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं किसी भी पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।।
#Panchang_07_September_2026
पुनर्वसु नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- पुनर्वसु नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति बेहद मिलनसार और दूसरों से प्रेमपूर्वक व्यवहार रखने वाले होते हैं। परन्तु बहुत कम लोग आपके स्नेहपूर्वक व्यवहार को समझ पाते हैं और प्रायः आपके व्यवहार को कायरता से जोड़ देतें हैं। आपके गुप्त शत्रुओं की संख्या अधिक होती है। आपको अधिक संतान की प्राप्ति भी होती है परन्तु उनका आपस में या आप के साथ व्यवहार सौहार्दपूर्ण नहीं होता है।।
सहयोगी, पडोसी या ससुराल पक्ष में आप के प्रति षड़यंत्र बनते रहते हैं। पुनर्वसु नक्षत्र में जन्मे जातकों को सबसे अधिक भय अपने निकटतम मित्रों से होता है। क्योंकि जीवन में कभी न कभी आप अपने मित्रों द्वारा ही विश्वासघात के शिकार होते हैं। आप स्वभाव से शांत प्रकृति के व्यक्ति होंगे। परन्तु आप देखने में सुन्दर और सुशील होते हैं। अपने दानी स्वभाव के कारण मित्रों और समाज में अधिक लोकप्रिय होते हैं।।
आजीवन धन और बल से युक्त रहते हैं। आपको समाज में मान-प्रतिष्ठा की कमी नहीं रहती। आप सहनशील एवं अपने भाई-बहनों से प्रेम करने वाले होते हैं। ईश्वर में पूर्ण आस्था एवं लोक-परलोक का विचार सदैव आपके मन में रहता है। इसलिए आप सदा ही सात्विक आचरण का समर्थन करते हैं। आप स्वभाव से सुन्दर एवं सात्विक आचरण वाले होंगे। आप खांसी, निमोनिया, सुजन, फेफड़ों में दर्द एवं कान से सम्बंधित रोग होने की संभावनायें होती है।।
प्रथम चरण:- पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इसके प्रथम चरण का स्वामी मंगल हैं। मंगल और बृहस्पति दोनों मित्र ग्रह हैं। फलस्वरूप ऐसा जातक अपने जीवन में अनेकों सुख भोगता है। लग्नेश बुध की दशा शुभ फल देगी। शनि की दशा में भाग्योदय होगा। बृहस्पति की दशा में गृहस्थ एवं नौकरी का सुख मिलेगा।।
द्वितीय चरण:- पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इसके द्वितीय चरण का स्वामी शुक्र हैं। बृहस्पति देवगुरु हैं तथा शुक्राचार्य दैत्यों के आचार्य हैं। अतः दोनों आचार्यों, बृहस्पति एवं शुक्र से सम्बन्ध रखने वाला जातक विद्वान् होगा। लग्नेश बुध की दशा माध्यम फल देगी। बृहस्पति की दशा में जातक का भाग्योदय होगा।।
तृतीय चरण:- पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इसके तृतीय चरण का स्वामी बुध हैं। जो परस्पर विरोधी हैं। अतः पुनर्वसु नक्षत्र के तृतीय चरण में पैदा होने वाला जातक आजीवन रोगी होगा और कोई न कोई बीमारी उसे जीवन भर परेशान करेगी। बृहस्पति एवं बुध की दशाएं नेष्ट फल देंगी।।
चतुर्थ चरण:- पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इसके चतुर्थ चरण का स्वामी चन्द्र हैं। पुनर्वसु नक्षत्र के चौथे चरण में पैदा होने वाला जातक धन बल से युक्त, कवी ह्रदय, संगीत प्रेमी, कम प्रयत्न से अधिक लाभ कमाने वाला परन्तु स्वभाव से कामुक होता है। इस नक्षत्र पर मंगल का होना जातक को स्वार्थी बना देता है और गुरु की उपस्तिथि में जातक समाज के सम्मानजनक पदों पर आसीन होता है।।
#Panchang_07_September_2026
सामान्यतया सोमवार शॉपिंग के लिए अच्छा दिन माना जाता है।।
सोमवार का विशेष – सोमवार के दिन तेल मर्दन अर्थात् तेल मालिश करने से चहरे और शरीर की कान्ति बढ़ती है – (मुहूर्तगणपति)।।
सोमवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से शिव भक्ति की हानि होती है। पुत्रवान पिता को तो कदापि नहीं करना चाहिये। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
दिशाशूल – सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई दर्पण देखकर घर से प्रस्थान कर सकते है।।
सोमवार के दिन ये विशेष उपाय करें – सोमवार को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।
#Panchang_07_September_2026
मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म सोमवार को होता है, वो जातक शांत प्रवृत्ति के गौर वर्ण लिए हुये होते हैं। सोमवार चन्द्र प्रधान दिन होता है, इसलिये इस जातक में कल्पनाशीलता, दया भाव, नम्रता के गुण परिलक्षित होते हैं। माता के प्रिय एवं सद्गुणों से युक्त ये जातक कवि ह्रदय, सफेद वस्तुओं से लाभ पाने वाला, यात्रा का शौकीन, जलाशयों एवं प्रकृति का प्रेमी होता है।।
सोमवार को जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है। इनकी प्रकृति यानी इनका स्वभाव शान्त होता है। इनकी वाणी मधुर और मोहित करने वाली होती है। ये स्थिर स्वभाव वाले होते हैं सुख हो या दु:ख सभी स्थिति में ये समान रहते हैं। धन के मामले में भी ये भाग्यशाली होते हैं तथा इन्हें सरकार एवं समाज से मान-सम्मान मिलता है।।
इस दिन जन्म लेने वाले जातक को पर्यावरण के क्षेत्र में, समुद्र विज्ञान के क्षेत्र में, पानी से जुड़े रोजगार जैसे मत्य् क पालन या मछली का व्यवसाय, पत्थरों का व्यवसाय, कपड़े का व्यंवसाय शुद्ध फलता है। इनके लिए सफेद रंग सदा शुभकारी होता है इसलिए कैरियर के लिहाज से आप जहां भी जायें सफेद रुमाल अपनी जेब में रखें और उस क्षेत्र को ही चुने जिसमें सफेद रंग की प्रधानता हो, जैसे पानी, कपड़ा, फूल, पत्थयर आदि से जुड़ा व्यवसाय।।
आज का सुविचार – मित्रों, जीना हैं, तो उस दीपक की तरह जियो जो बादशाह के महल में भी उतनी ही रोशनी देता हैं जितनी किसी गरीब की झोपड़ी में। जो भाग्य में हैं वह भाग कर आयेगा और जो भाग्य में नही हैं वह आकर भी भाग जायेगा। हँसते रहो तो दुनिया साथ हैं, वरना आँसुओं को तो आँखो में भी जगह नही मिलती।।
#Panchang_07_September_2026
चन्द्रमा द्वारा निर्मित कुछ अतुलनीय धनदायक योग।।…… आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें:
जया एकादशी व्रत कथा एवं पूजा विधि:: Read more.
एकादशी व्रत विधि एवं कामहात्म्य कथा:: Read more.
ॐ अथ शिवप्रातः स्मरणस्तोत्रम् – यहाँ क्लिक करें और पढ़ें: