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पञ्चांग 10 नवम्बर 2026 दिन मंगलवार।।

पञ्चांग 10 नवम्बर 2026 दिन मंगलवार।। Panchang 10 November 2026

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।

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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 10 नवम्बर 2026 दिन मंगलवार।।

मित्रों, तारीख 10 नवम्बर 2026 दिन मंगलवार को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। आज यमद्वितीया (भईया दूज) का पावन व्रत है। आज ही काशी में गोवर्धन पूजा का त्यौहार भी मनाया जायेगा। आज भाइयों को अपनी बहन के घर उपहार आदि लेकर जाना चाहिए। साथ ही बहनों को चाहिए की अपने भाई को स्वादिष्ट भोजन करवाना चाहिए। चित्रगुप्त सहित यम देवता का पूजन भी करना चाहिए। अपरान्ह में संभव हो तो यमुना स्नान करना चाहिए। आज दवात पूजन (चित्रगुप्त पूजा) लालाजी लोग अधिकांश बिहार प्रदेश में किया जाता है। आज यमपंचक की निवृति हो जाएगी। आज कही-कही लोग मात्र मनोरंजन हेतु द्युत क्रीड़ा भी करते हैं। आप सभी सनातनियों को “यमद्वितीया (भईया दूज) के पावन व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ।।

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।

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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आप का आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।

वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).

पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

पञ्चांग 10 नवम्बर 2026 दिन मंगलवार।। Panchang 10 November 2026

आज का पञ्चांग 10 नवम्बर 2026 दिन मंगलवार।।
Aaj ka Panchang 10 November 2026.

विक्रम संवत् – 2083.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.

शक – 1948.

अयन – सौम्यायनम्.

गोल – याम्य.

ऋतु – शरद.

मास – कार्तिक.

पक्ष – शुक्ल.

गुजराती पंचांग के अनुसार – कार्तिक शुक्ल पक्ष.

#Panchang_10_November_2026

तिथि – प्रतिपदा 14:01 PM बजे तक उपरान्त द्वितीया तिथि है।।

नक्षत्र – विशाखा 09:20 AM तक उपरान्त अनुराधा नक्षत्र है।।

योग – सौभाग्य 02:57 AM तक उपरान्त शोभन योग है।।

करण – किन्स्तुघ्न 01:13 AM तक उपरान्त बव 14:01 PM तक उपरान्त बालव करण है।।

चन्द्रमा – तुला राशि पर 02:59 AM तक उपरान्त वृश्चिक राशि पर।।

सूर्य – तुला राशि एवं स्वाति नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।

मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:45:47

मुम्बई सूर्यास्त – सायं 17:57:46

वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 06:33:41

वाराणसी सूर्यास्त – सायं 17:27:38

राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:11 बजे से 16:35 बजे तक।।

शुभ मुहूर्त – दोपहर 12.10 बजे से 12.34 बजे तक।।

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प्रतिपदा तिथि विशेष – प्रतिपदा तिथि को कद्दू एवं कूष्माण्ड का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। प्रतिपदा तिथि वृद्धि देनेवाली अर्थात किसी भी कार्य को अथवा कार्यक्षेत्र को बढ़ाने वाली तिथि मानी जाती है। साथ ही प्रतिपदा तिथि सिद्धिप्रद अर्थात कोई भी कार्य को निर्विघ्नता पूर्वक चरम तक पहुंचाने अर्थात सिद्धि तक पहुंचाने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देवता को बताया गया है। इसके लिए आज अग्नि घर पर ही प्रज्ज्वलित करके गाय के शुद्ध देशी घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये। आज प्रतिपदा तिथि को इस अनुष्ठान से अग्निदेव से अद्भुत तेज प्राप्त करने के लिए भी आज का यह उपाय कर सकते हैं। साथ ही आज किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति भी इस अनुष्ठान के माध्यम से अग्निदेव से करवायी जा सकती हैं। यह प्रतिपदा तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह प्रतिपदा तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी मानी जाती है।।

मित्रों, यदि प्रतिपदा तिथि रविवार या मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित होता है। इसके अलावा प्रतिपदा तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय शुभ कार्य करने की सलाह दी जाती है। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा में भगवान शिव का पूजन नहीं करना चाहिए क्योंकि शिव का वास श्मशान में होता है। परन्तु कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा में भगवान शिव का पूजन करना चाहिए। शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि में विवाह, यात्रा, उपनयन, चौल कर्म, वास्तु कर्म व गृह प्रवेश आदि मॉगलिक कार्य नहीं करने चाहिए।।

मित्रों, ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म प्रतिपदा तिथि में होता है वह व्यक्ति अनैतिक कार्यों में संलग्न रहने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति कानून के विरूद्ध जाकर काम करने वाला भी होता है। ऐसे लोगों को मांस मदिरा काफी पसंद होता है अर्थात ये तामसी भोजन के बहुत शौकीन होते हैं। आम तौर पर इनकी दोस्ती ऐसे लोगों से होती है जिन्हें समाज में सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता अर्थात बदमाश और ग़लत काम करने वाले लोग। कृष्ण पक्ष प्रतिपदा को जन्मा जातक धनी एवं बुद्धिमान होगा। उन पर माता की विशेष कृपा दृष्टि बनी रहती है। जातक चंद्रमा के बलवान होने के कारण मानसिक रूप से भी बलवान होते हैं। वहीं दूसरी ओर शुक्ल पक्ष प्रतिपदा में जन्मा जातक बुरी लोगों की संगति में पड़कर बुरी आदतों के शिकार हो सकते हैं। उनके द्वारा किए गए कार्य कभी कभार उनके परिवार को ही हानि पहुंचाते हैं। इसके विपरीत कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा में आप शुभ कार्य कर सकते हैं।।

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विशाखा नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म विशाखा नक्षत्र में हुआ है तो आप शारीरिक श्रम के स्थान पर मानसिक कार्यों को अधिक वरियता देते हैं। शारीरिक श्रम करना आपके बस की बात नहीं होगा और इससे आपका भाग्योदय भी नहीं होगा। मानसिक रूप से आप सक्षम व्यक्ति होंगे और कठिन से कठिन कार्य को भी अपनी सूझ-बूझ से शीघ्र ही निपटा लेते हैं।।

ऐसे लोग स्वभाव से ईर्ष्यालु परन्तु बोल चाल से अपना काम निकलवाने का गुण अपमें स्वाभाविक रूप से ही होगी। वाक् पटुता आपका सहज गुण होगा। मार्केटिंग और सेल्स मैन शिप का कार्य आपके लिए विशेष लाभप्रद होगा। ब्लैक मार्केटिंग से भी आपका सम्बन्ध हो सकता है। आपका व्यक्तित्व सुंदर एवं आकर्षक होगा इसलिए लड़के/लड़कियां हमेश ही आपकी और खिचे चले आयेंगे। जिसका आप लाभ उठाने से नहीं चुकेंगे।।

विशाखा नक्षत्र में जन्मे जातक सेक्स के मामले में बहुत ही रंगीले व्यक्ति होते हैं। ऐसे जातक को क्रोध शीघ्र ही आ जाता है। विपरीत बात आपसे सहन नहीं होती है और बिना सोचे समझे या परिणाम की चिंता किये बिना आप सामने वाले से टकरा जाते हैं। हालाँकि मन ही मन घबराते भी हैं। परन्तु अपनी घबराहट बाहर प्रकट नहीं होने देते हैं। क्रोधित होने पर अपशब्द कहना और बाद में पछताना आपके व्यवहार में होगा।।

यदि आपका जन्म 17 अक्टूबर से 13 नवम्बर के बीच हुआ है तो आपका आत्मबल बेहद कमज़ोर होगा। हालाँकि दिमाग में रात दिन कुछ न कुछ चलता रहता है या यूँ कहे ख्याली पुलाव पकते रहते हैं। आप कला और विज्ञान के क्षेत्र में भी रूचि रखते हैं। बचपन से ही पिता के साथ आपका मन मुटाव चलता रहता है। किशोरावस्था तक जीवन में लापरवाही रहती है। एवं उद्देश्य की कमी के कारण भटकाव भी होते हैं।।

विशाखा नक्षत्र में जन्मी स्त्रियाँ धार्मिक प्रवृत्ति की होती हैं। विशाखा नक्षत्र की जातिका उद्यमी परन्तु स्वभाव की कोमल एवं नम्र ह्रदय की होती हैं। धन, ऐश्वर्ययुक्त एवं सत्य का साथ देने वाली होती हैं। अपने इन्ही गुणों के कारण विशाखा नक्षत्र में जन्मी स्त्रियाँ समाज में मान सम्मान तथा पूजनीय स्थान प्राप्त करती हैं।।

विशाखा नक्षत्र में जन्मे जातक ज्यादातर ईर्ष्यालु प्रवृत्ति के होते हैं। ऐसे लोग चमड़ी के रोग, मधुमेह, पेशाब और स्त्रियों में गर्भाशय से सम्बंधित रोग, टी. बी. इत्यादि जैसे रोगों से ग्रसित होते हैं।।

प्रथम चरण:- विशाखा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी मंगल होता है। इस नक्षत्र चरण में जन्मा जातक तर्कशील एवं नीतिशास्त्र में निपुण होता है। लग्न नक्षत्र स्वामी गुरु एवं नक्षत्र चरण स्वामी मंगल में परस्पर शत्रुता होने से गुरु एवं धनेश मंगल दोनों की दशाएं अशुभ फल ही देंगी।।

द्वितीय चरण:- विशाखा नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शुक्र होता है। गुरु व् शुक्र के प्रभाव से जातक धार्मिक शास्त्रों का ज्ञाता, दार्शनिक एवं शास्त्रवेत्ता होता है। गुरु एवं शुक्र की परस्पर शत्रुता के कारण गुरु की दशा अशुभ फल देती है। गुरु में शुक्र या शुक्र में गुरु का अन्तर भी अशुभ फल ही देगा।।

तृतीय चरण:- विशाखा नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी बुध होता है। गुरु ज्ञान एवं बुध तर्क का प्रतीक ग्रह माना जाता है। ऐसे जातक में वाद-विवाद और तर्क करने की प्रखरता देखी जा सकती है। शुक्र की दशा माध्यम फल देगी। गुरु एवं बुध में शत्रुता होने से गुरु एवं बुध दोनों की ही दशा अशुभ फल देती है।।

चतुर्थ चरण:- विशाखा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी चन्द्र होता है। चन्द्र, मंगल तथा बृहस्पति दोनों का ही मित्र है। फलतः चन्द्रमा की दशा में जातक का भाग्योदय होगा। मंगल की दशा भी शुभ फल देगी। जातक लग्न बलि एवं चेष्टावान होगा। विशाखा नक्षत्र के चौथे चरण में जन्म लेने वाला जातक लम्बी आयु भोगने वाला होता है।।

#Panchang_10_November_2026

मंगलवार को नए कपड़े न ही खरीदना चाहिये और न ही पहली बार पहनना चाहिए। मंगलवार वाहन एवं भूमि-भवन आदि भी नहीं खरीदना चाहिये।।

मंगलवार का विशेष – मंगलवार के दिन तेल मर्दन (शरीर में तेल मालिश) करने से आयु घटती है – (मुहूर्तगणपति)।।

मंगलवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से भी आयु की हानि होती है।। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।

दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।।

मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात दाढ़ी या बाल काटने या कटवाने से उम्र कम होती है। अत: मंगलवार को बाल या दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए। मंगलवार को बजरंगबली की पूजा का विशेष महत्व है।।

मंगलवार को यथासंभव कोशिश करके मंदिर में जाकर हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी/लाल पेड़े या गुड़ और चने का प्रसाद चढ़ाएं। हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत एवं नज़र की बाधा से बचाव होता है साथ ही आपके समस्त शत्रु परास्त होते है।।

मंगलवार के व्रत से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है। मंगलवार को धरती पुत्र मंगलदेव की आराधना करने से जातक को मुक़दमे, राजद्वार में सफलता मिलती है, उत्तम भूमि, भवन का सुख मिलता है, मांगलिक दोष दूर होता है।।

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मंगलवार को जिनका जन्म होता है, वो जातक स्वभाव से उग्र, साहसी, प्रयत्नशील एवं महत्वाकांक्षी होते हैं। इनमें नेतृत्व की क्षमता अन्यों के मुकाबले बहुत शुद्ध होती है। ऐसे लोग जिम्मेदारियों के कार्य में सफल भी होते हैं। खिलाड़ी, पहलवान, सेना तथा पुलिस विभाग में सफल रहते हैं। यह जातक अधिकांशतः रक्तवर्ण या गेहूंआ रंग होता है।।

मंगलवार को जन्म लेनेवाला जातक जटिल बुद्धि वाला होता है। ये किसी भी बात को आसानी से नहीं मानते हैं। ऐसे लोग शक्की किस्म के होते हैं इसलिये सभी बातों में इन्हें कुछ न कुछ खोट दिखाई देता है। ये युद्ध प्रेमी और पराक्रमी होते हैं तथा अपनी बातों पर कायम रहने वाले होते हैं। जरूरत पड़ने पर ऐसे जातक हिंसा पर भी उतर आते हैं। इनके स्वभाव की एक बड़ी विशेषता है कि ये अपने कुटुम्ब का पूरा ख्याल रखते हैं।।

मंगलवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति स्वभावानुसार क्रोधी, उग्र, पराक्रमी, जुझारू, अदम्य साहसी, आलोचना सहन न करने वाले और सांगठनिक क्षमता वाले होते हैं। नेतागिरी, पुलिस, सेना, नौकरशाह तथा खिलाड़ी के रूप में इनका कैरियर सफल रहता है। इनका शुभ अंक 3, 6, 9 तथा शुभ रंग लाल एवं मैरुन और इनका शुभ दिन मंगलवार एवं शुक्रवार होता है।।

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मंगलवार का विशेष टिप्स – यदि आपके जीवन में कभी अचानक ज्यादा खर्च की स्थिति बन जाय, तो किसी भी मंगलवार के दिन हनुमानजी के मंदिर में गुड़-चने का भोग श्रद्धापूर्वक लगाएं। भोग लगाने के बाद वहीँ बैठकर 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ भी अवश्य करें।।

मंगलवार के दिन ये विशेष उपाय करें – मंगलवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्त्व होता है। आज हनुमान जी को चमेली का तेल चढ़ाना, चमेली के तेल का ही दीपक जलाना तथा माखन का भोग लगाना चाहिये, इससे हर प्रकार की मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।।

आज का सुविचार – मित्रों, दुनिया में भगवान का संतुलन कितना अद्भुत हैं, 50 कि.ग्रा. अनाज का बोरा जो उठा सकता हैं वो खरीद नही सकता और जो खरीद सकता हैं वो उठा नही सकता। जब आप गुस्सें में हो तब कोई फैसला न लेना और जब आप खुश हो तब कोई वादा न करना, अगर ये याद रखेंगे तो कभी नीचा नही देखना पड़ेगा।।

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अरिष्ट अर्थात एक्सिडेन्ट एवं चोट आदि लगने के योग ।।….. आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें:  & ब्लॉग पर पढ़ें:

कुंडली में पैतृक धन प्राप्ति का योग।। Read More. वेबसाईट पर पढ़ें:  And ब्लॉग पर पढ़ें:

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वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें।।
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सिलवासा ऑफिस:- बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के बाजू में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा।।

सिलवासा ऑफिस में प्रतिदिन मिलने का समय:-
10:00 AM to 02:00 PM And 04:30 PM to 08:30 PM.
WhatsAap & Call: +91 – 8690 522 111.
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