Home Panchang पञ्चांग 19 अक्टूबर 2026 दिन सोमवार।।

पञ्चांग 19 अक्टूबर 2026 दिन सोमवार।।

पञ्चांग 19 अक्टूबर 2026 दिन सोमवार।। Panchang 19 October 2026

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।

पञ्चांग, Panchang, आज का पञ्चांग, Aaj ka Panchang, Panchang 2026,
आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 19 अक्टूबर 2026 दिन सोमवार।।

मित्रों, तारीख 22 अक्टूबर 2023 दिन रविवार को अश्विन मास के शुक्ल पक्ष कि अष्टमी उपरान्त नवमी तिथि है। आज दुर्गानवमी का पावन व्रत है। आज माता महागौरी के दर्शन और पूजन अवश्य करने चाहिए। माता अन्नपूर्णा माता की परिक्रमा सुबह 07:53 AM तक की जाएगी। आज नवमी तिथि लगने पर उग्रचंडी की पूजा भी की जाएगी। आज श्रवण नक्षत्र में माता सरस्वती का विसर्जन किया जाएगा। मित्रों अष्टमी-नवमी की सन्धि पूजा भी प्रातः 07 बजे से 09 बजे तक आज ही की जाएगी। सप्तशती का पाठ आज ही पूर्ण करके हवन की पूर्णाहुति भी किया जायेगा। आज यायिजययोग है। आज सर्वार्थसिद्धियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “महानवमी या दुर्गानवमी के पावन व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।

मेरे प्रियात्मनों, यह वेबसाईट बिलकुल नि:शुल्क है। यदि आपको इस साईट से कुछ भी लाभ प्राप्त हुआ हो, आपको हमारे लेख पसंद आते हो तो मदद स्वरुप आप स्वयं हमारे साईट पर विजिट करें एवं अपने सभी सम्पर्कियों को भी इस साईट के बारे में अवश्य बताएं।।

।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आपका आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375198850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।

वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).

पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

पञ्चांग 19 अक्टूबर 2026 दिन सोमवार।। Panchang 19 October 2026

आज का पञ्चांग 19 अक्टूबर 2026 दिन सोमवार।।
Aaj ka Panchang 19 October 2026.

विक्रम संवत् – 2083.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.

शक – 1948.

अयन – सौम्यायनम्.

गोल – याम्य.

ऋतु – शरद.

मास – अश्विन.

पक्ष – शुक्ल.

गुजराती पंचांग के अनुसार – अश्विन शुक्ल पक्ष.

#Panchang_19_October_2026

तिथि – अष्टमी 07:53 AM बजे तक उपरान्त नवमी तिथि है।।

नक्षत्र – उत्तराषाढ़ा 15:39 PM तक उपरान्त श्रवण नक्षत्र है।।

योग – धृति 24:35 PM तक उपरान्त शूल योग है।।

करण – बव 10:52 AM तक उपरान्त बालव 23:55 PM तक उपरान्त कौलव करण है।।

चन्द्रमा – मकर राशि पर।।

सूर्य – तुला राशि एवं चित्रा नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।

मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:35:39

मुम्बई सूर्यास्त – सायं 18:10:03

वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 06:19:41

वाराणसी सूर्यास्त – सायं 17:41:37

राहुकाल (अशुभ) – सुबह 08:03 बजे से 09:30 बजे तक।।

विजय (शुभ) मुहूर्त – दोपहर 12.11 बजे से 12.35 बजे तक।।

#Panchang_19_October_2026

अष्टमी तिथि विशेष:- अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि शुक्ल पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।।

इस अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।

मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।।

मित्रों, अष्टमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति धर्मात्मा होता है। मनुष्यों पर दया करने वाला तथा हरेक प्रकार के गुणों से युक्त गुणवान होता है। ये कठिन से कठिन कार्य को भी अपनी निपुणता से पूरा कर लेते हैं। इस तिथि के जातक सत्य का पालन करने वाले होते हैं यानी सदा सच बोलने की चेष्टा करते हैं। इनके मुख से असत्य तभी निकलता है जबकि किसी मज़बूर को लाभ मिले।।

#Panchang_19_October_2026

मित्रों, जगतजननी, जगदम्बा, माता दुर्गा की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। दुर्गापूजा के आठवें दिन महागौरी की पूजा-उपासना का विधान है। इनकी शक्ति अमोघ और तत्काल फलदायिनी एवं सिद्धिदायिनी है। इनकी उपासना से भक्तों के सभी पापों का क्षय हो जाता है और पूर्वकृत पाप भी विनष्ट हो जाते हैं। माता के भक्तों को भविष्य में पाप-संताप, दैन्य-दुःख उसके पास कभी नहीं आते। वह सभी प्रकार से पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी हो जाता है।।

मित्रों, माता महागौरी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए देवी ने कठोर तपस्या की थी। जिससे इनका शरीर काला पड़ गया था। देवी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इन्हें स्वीकार किया। कहा जाता है, कि स्वयं शिव जी ने इनके शरीर को गंगा-जल से धोया था। कहते हैं, कि तब माता का स्वरुप विद्युत के समान अत्यंत कांतिमान गौर वर्ण का हो गया था और तभी से इनका नाम गौरी पड़ा।।

माता महागौरी रूप में देवी करूणामयी, स्नेहमयी, शांत और मृदुल दिखती हैं। देवता, ऋषि तथा मनुष्य सभी देवी के इसी रूप की प्रार्थना इस मन्त्र से करते हैं। “सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते।” माता महागौरी से संबंधित एक अन्य कथा भी प्रचलित है, कथा के अनुसार एक बार की बात है, कि एक शेर काफी भूखा था। वह भोजन की तलाश में वहां पहुंचा जहां माता देवी उमा शिव को पति रूप में प्राप्ति हेतु तपस्या कर रही थीं।।

देवी को देखकर सिंह की भूख बढ़ गयी परंतु वह देवी के तपस्या से उठने का इंतजार करते हुए वहीं बैठ गया। इस इंतजार में वह काफी कमज़ोर हो गया और देवी जब तपस्या से उठी तो सिंह की दशा देखकर उन्हें उस पर बहुत दया आ गयी। तब माता ने उसे अपना सवारी बना लिया क्योंकि एक प्रकार से उसने भी तपस्या की थी। इसलिए माता गौरी का वाहन बैल और सिंह दोनों ही हैं।।

अष्टमी के दिन सुहागिनी महिलाओं को अपने सुहाग की दीर्घायु एवं सफलता के लिए देवी मां को चुनरी भेंट करना चाहिये। सबसे पहले लकड़ी की चौकी पर या मंदिर में माता महागौरी की मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद चौकी पर सफेद वस्त्र बिछाकर उस पर माता महागौरी के यंत्र की स्थापना करें। मां सौंदर्य प्रदान करने वाली देवी हैं। हाथ में श्वेत पुष्प लेकर मां का ध्यान करें। मां का गौर वर्ण है, इस गौर वर्ण की तुलना शंख, चन्द्रमा और कुंद के पुष्प से की गयी है।।

इनकी आयु आठ वर्ष की मानी जाती है यथा – ‘अष्टवर्षा भवेद् गौरी।’ इनके समस्त वस्त्र एवं आभूषण आदि भी श्वेत हैं। महागौरी की चार भुजाएं हैं तथा इनका वाहन वृषभ है। इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल विराजमान है। ऊपरवाले बाएं हाथ में डमरू और नीचे के बाएं हाथ में वर-मुद्रा है। नवरात्रि के आठवें दिन माता महागौरी की पूजा की जाती है।।

माता अपने भक्तों के भीतर पल रही बुराइयों को मिटाकर उनको सद्बुद्धि एवं ज्ञान प्रदान करती है। मां महागौरी की आराधना करने से व्यक्ति को आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है और उसके भीतर श्रद्धा, विश्वास एवं निष्ठा की भावनायें प्रबल होती है। अष्टमी के दिन कन्या पूजन करना श्रेष्ठ माना जाता है। कन्याओं की संख्या 9 होनी चाहिए अथवा अभाव में 2 कन्याओं की भी पूजा की जा सकती है। कन्याओं की आयु 2 साल से ऊपर और 10 साल से कम होनी चाहिये।।

भोजन कराने के बाद कन्याओं को दक्षिणा एवं उपहार भी देनी चाहिए। माता महागौरी की आराधना करने से भक्तजनों को जीवन की सही राह का ज्ञान होता है। जिस राह पर चलने से जीव का कल्याण होना निश्चित हो जाता है। तथा व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बना लेता है। जो भी साधक नवरात्रि में माता के इस रूप की आराधना करते हैं माँ उनके समस्त पापों का नाश करती है। अष्टमी के दिन व्रत रहकर मां की पूजा करने और उन्हें भोग लगाकर मां का प्रसाद ग्रहण करने से व्यक्ति के अन्दर के सारे दुष्प्रभाव नष्ट हो जाते हैं।।

आठवें दिन का भोग – जैसा की आप जानते हैं, आठवां दिन या अष्टमी देवी महागौरी को समर्पित होता है। इस दिन भक्तजन श्रद्धा से देवी माँ को नारियल प्रसाद के रूप में चढ़ाते हैं। आठवीं शक्ति “माँ महागौरी” हैं भगवान शिव के कहने पर माँ महाकाली ने तपस्या कर ब्रह्मदेव सें अपने लिए गौर वर्ण का वरदान माँगा था। माँ महागौरी को नारियल, खिचड़ी एवं खीर का भोग भी बहुत ही प्रिय है।।

आज माता महागौरी को कहीं-कहीं नारियल के आलावा हलवे का भोग भी लगाया जाता है। बाद में उस नारियल को किसी श्रेष्ठ ब्राह्मण को दक्षिणा सहित दान कर दिया जाता है। नवरात्र के आठवें दिन हवन करना चाहिये जिसमें कंडे (गाय के गोबर के उपले) जलाकर उसमें घी, हवन सामग्री, बताशा, लौंग का जोड़ा, पान, सुपारी, कपूर, गूगल, इलायची, किसमिस, कमलगट्टा आदि से हवन करना चाहिये। हो सके तो नवरात्रे के दसों दिन कुँवारी कन्याओं को भोजन करायें।।

संभव न हो तो कम-से-कम अष्टमी के दिन तो अवश्य ही करवाना चाहिये क्योंकि इस दिन इसका विशेष महत्व होता है। कन्या भोजन के बिना नवरात्रि का उपवास एवं पूजन सब अधुरा माना जाता है। अन्य ग्रंथों में नवरात्रि के अवसर पर कन्या पूजन एवं कन्या भोज को अत्यंत ही महत्वपूर्ण बताया गया है। नवरात्रियों में देवी मां के सभी साधक कन्याओं को मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं। सनातन धर्म के लोगों में सदियों से ही कन्या पूजन और कन्या भोज कराने की परंपरा चली आ रही है।।

अखण्ड सौभाग्य एवं सफलता हेतु आज माता महागौरी की पूजा एवं विशिष्ट भोग।। इस लिंक पर पूरा पढ़ें:

#Panchang_19_October_2026

मित्रों, अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व ये आठ सिद्धियां हैं। जिनका उल्लेख भागवत पुराण में भी मिलता है। इसके अलावा मार्कंडेय पुराण एवं ब्रह्ववैवर्त पुराण में भी वर्णित है। इसके अलावा इस दोनों पुराणों में और भी अनेक प्रकार की सिद्धियों का वर्णन है मिलता है।।

ये सिद्धियाँ जिन्होंने भी इस संसार में पायी है, वो इस संसार में भगवान की तरह पूजे गये हैं। परन्तु इस सिद्धियों की प्राप्ति हेतु लगभग इन्सान का सबकुछ खो गया है तब इन सिद्धियों की प्राप्ति हुई है। लेकिन कुछ लोगों को इन सिद्धियों से साक्षात्कार सहज ही हो गया है। जिन्हें सहज ही इन सिद्धियों की प्राप्ति हुई है वो माता दुर्गा के नवम रूप माता सिद्धिदात्री के उपासक रहे हैं।।

जी हाँ आज शारदीय नवरात्रा की नवमी तिथि है और माता सिद्धिदात्री का दिन है। यही माता सभी सिद्धियों की स्वामिनी हैं और इनकी पूजा से ही भक्तों को इन सिद्धियों की प्राप्ति सहज ही हो जाती है। माता दुर्गा की नवम शक्ति का ही नाम सिद्धिदात्री है और यही माता अपने उपासकों को सहज ही सम्पूर्ण सिद्धियों को देनेवाली हैं। सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली माता इन्हीं को माना गया है।।

मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व इन आठ सिद्धियों को भगवान शिव ने इन्हीं माता की कृपा से प्राप्त किया था। इन्हीं की अनुकम्पा से भगवान शिव अर्द्धनारीश्वर बने थे। इसी कारण भगवान शिव संसार में अर्द्धनारीश्वर के नाम से प्रसिद्ध हुए। माता सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं और इनका वाहन सिंह है। ये कमल पुष्प पर आसीन होती हैं।।

इनकी दाहिनी नीचे वाली भुजा में चक्र, ऊपर वाली भुजा में गदा और बांयी तरफ नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल पुष्प शोभायमान होता है। नवरात्रि पूजन के नवें दिन इनकी पूजा की जाती है। आज के दिन भगवती माता सिद्धिदात्री का ध्यान-पूजन-अर्चन और बन्दन करने से भक्त का “निर्वाण चक्र” जाग्रत हो जाता है।।

मां दुर्गा शेरावाली मईया जगत के कल्याण हेतु नव रूपों में प्रकट हुई और इन नव रूपों में अंतिम रूप है देवी सिद्धिदात्री का। यह देवी प्रसन्न होने पर सम्पूर्ण जगत की रिद्धि-सिद्धि अपने भक्तों को प्रदान करती हैं। देवी सिद्धिदात्री का रूप अत्यंत सौम्य है देवी ने सिद्धिदात्री का यह रूप भक्तों पर अपनी कृपा बरसाने के लिए धारण किया था। देवता, ऋषि-मुनि, असुर, नाग और मनुष्य सभी मां के भक्त हैं।।

इनकी भक्ति जो भी हृदय से करता है मां उसी पर अपना नेह लुटाती हैं। सिद्धियां हासिल करने के उद्देश्य से जो साधक भगवती सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं उन्हें नवमी के दिन निर्वाण चक्र का भेदन करना चाहिए। दुर्गा पूजा में इस तिथि को विशेष रूप से नवरात्री उपवास और पूजन के सम्पूर्ण फल की प्राप्ति के उद्देश्य से हवन किया जाता है। हवन से पूर्व सभी देवी दवाताओं एवं माता की पूजा करनी चाहिए।।

हवन करते समय सभी देवी दवताओं के नाम से हवि अर्थात आहुति देनी चाहिए। सभी आवाहित देवी-देवताओं की आहुति के बाद माता के नाम अथवा नवार्ण मन्त्र से आहुति देनी चाहिए। दुर्गा सप्तशती के सभी श्लोक मंत्र रूप हैं अत: आप सप्तशती के सभी श्लोकों से आहुति दे सकते हैं। समयाभाव में आप देवी के बीज मंत्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” से कम से कम 108 बार हवन कर सकते हैं।।

जिस प्रकार पूजा के क्रम में भगवान शंकर और ब्रह्मा जी की पूजा सबसे अंत में होती है उसी प्रकार अंत में इनके नाम से आहुति देकर सपरिवार आरती एवं क्षमा प्रार्थना करें। हवन में जो भी प्रसाद आपने चढ़ाया है उसे बाटें और जब हवन की अग्नि ठंढ़ी हो जाए तो इसे पवित्र जल में विसर्जित कर दें। यह भष्म रोग, संताप एवं ग्रह बाधा से आपकी रक्षा करता है एवं मन से सभी भयों को दूर कर देता है।।

जैसा कि पहले भी हमने बताया है, कि नवरात्रि के इन दिनों में माँ दुर्गा, माँ शारदा एवं माता महालक्ष्मी जी की पूजा बड़े धूम-धाम से पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इन दिनों में लगभग सभी सनातनी लोग देवी माँ का उपवास रखते हैं और विधिपूर्वक ढंग से आराधना एवं पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि देवी माँ कि प्रशन्नता प्राप्त करने के लिए उपवास रखें जाते हैं।।

इससे देवी माँ की कृपा सदा ही बनी रहती है और आदि शक्ति की कृपा से ही इस संसार रूपी भव सागर को पार किया जा सकता है। सात दिनों तक उपवास रख कर आठवें दिन अष्टमी को कन्याओं का भोज करवाया जाता है। कई लोग नवमी पर भी कन्याओं को भोजन करवाते हैं क्योंकि दुर्गा का नवम रूप सिद्धिदात्री है। जिन्हें शतावरी या नारायणी भी कहा जाता है और नव दिनों की तपस्या का सम्पूर्ण फल भी यही देती हैं।।

शतावरी बल बुद्धि एवं वीर्य के लिए उत्तम औषधि मानी जाती है और इस औषधि को हृदय की गति तेज करने के लिए भी प्रयोग किया जाता है। सभी प्रकार की सिद्धियों को प्रदान कर माता भक्तों को को निहाल कर देती हैं। आज के पहले माता के अन्य अष्ट स्वरूपों की पूजा उपासना शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार करते हुए भक्त दुर्गा पूजा के नौवें दिन इनकी उपासना करते हैं।।

इन सिद्धिदात्री माँ की उपासना पूर्ण कर लेने के बाद भक्तों और साधकों की लौकिक-पारलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है। माता सिद्धिदात्री की सेवा जो मनुष्य नियमपूर्वक करता है, उसके सभी कष्ट स्वयं ही दूर हो जाते हैं। संसार के दु:खों से पीड़ित व्यक्ति को आज माता सिद्धिदात्री देवी की आराधना अवश्य करनी चाहिए।।

“समृद्धि तथा सिद्धियों को देनेवाली माता सिद्धिदात्री का विशिष्ट भोग।।” आज के इस लेख को पूरा पढ़ने के लिए इस लिंक को क्लिक करें:

#Panchang_19_October_2026

उत्तराषाढा नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म उत्तराषाढा नक्षत्र में हुआ है तो आप एक सफल एवं स्वतंत्र व्यक्ति हैं। आप ईश्वर में आस्था रखते हुए जीवन में प्रसन्नता और मैत्री के साथ आगे बढ़ने में विश्वास रखते हैं। विवाह के उपरान्त आपके जीवन में और अधिक सफलता एवं प्रसन्नता आती है। उत्तराषाढा में जन्मा जातक ऊँचे कद और गठीले शरीर के मालिक होते हैं।।

चमकदार आँखे और चौड़ा माथा आपके व्यक्तित्व में चार चाँद लगाते हैं। गौर वर्ण के साथ आपकी आंखे थोड़ी लालिमा लिए हुए होती हैं। आप मृदुभाषी होंगे और सभी से प्रेम पूर्वक व्यवहार आपमें स्वाभाविक ही रहेगी। आप सादी जीवन शैली में विश्वास रखते हैं और अधिक ताम-झाम से दूरी बनाये रखना पसंद करेंगे। धन की अधिकता भी आपके इन विचारों को प्रभावित नहीं करेगी।।

कोमल हृदयी होने के कारण आप कभी भी किसी को हानि पहुंचाने के बारे में नहीं सोच सकते। क्योंकि दूसरों की भलाई करना आपके स्वभाव में ही होगा। नम्र स्वभाव होते हुए भी आप किसी के सामने घुटने नहीं टेकते हैं। और न ही किसी भी प्रकार की कठिनाई आपको हिला सकती है। आपको जीवन में किसी पर भी निर्भरता पसंद नहीं होगा। सकारात्मक और स्थिर सोच के कारण आप अपने जीवन से सम्बंधित अधिकतर निर्णय स्वयं लेंगे।।

आपके लिए हुए निर्णय सही भी होंगे। जलदबाज़ी में निर्णय लेना आपके स्वभाव में नहीं होगा। आप सभी को आदर और सम्मान देना पसंद करेंगे विशेषतः स्त्रियों को। आप अपने विचारों को व्यक्त करने से कभी नहीं हिचकिचायेंगे। किसी के विरोध में भी यदि आपको बोलना हो तो आप अवश्य बोलेंगे परन्तु बेहद विनम्रता के साथ। अपने इसी स्वभाव के कारण आप माफ़ी मांगने से भी नहीं झिझकते।।

बहुत ही कम आयु से अपने ऊपर सभी जिम्मेदारियों के आ जाने के कारण आप कभी-कभी मानसिक अशांति भी महसूस करेंगे। जीवन को हर पहलु से और अधिक सफल बनाने के लिए आप सदैव प्रयासरत रहेंगे। इन्ही प्रयासों में विफल होने पर आप अपने आपको असहाय समझने लगेंगे। परन्तु वास्तविकता में ऐसा नहीं होगा। आप एक सक्षम और जुझारू व्यक्ति होंगे और कठिन से कठिन परिस्तिथियों में से भी निकलने में सक्षम होंगे।।

अपने बौधिक विचारों और सकारात्मक सोच के कारण आप सृजनात्मक और कलात्मक या यूँ कहें विज्ञान और कला दोनों ही क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करेंगे। आपकी इमानदारी, अथक परिश्रम और मजबूत इरादे जीवन में आपको सदैव सफलता दिलायेंगे। रुकावटों के कारण थक कर बैठ जाना आपके स्वभाव में नहीं होगा। अपने कार्यक्षेत्र में आप अपने करीबी सहयोगियों के सन्दर्भ में अति कुशलता एवं सजगता के साथ रहेंगे।।

जीवन के 38वें वर्ष के उपरान्त आप स्थिरता और समृद्धि प्राप्त करेंगे। वैवाहिक जीवन सुखमय और प्रसन्नता से भरा रहेगा। यद्यपि जीवन साथी के स्वास्थ्य के कारण आप परेशान हो सकते हैं। संतान पक्ष से सुख संतोषजनक रहेगा। उत्तराषाढा नक्षत्र में जन्मी स्त्री पतिव्रता एवं मधुर वाणी वाली होती हैं। अतिथियों की आवभगत और सेवा करना इनके स्वभाव में ही होता है।।

उत्तराषाढा नक्षत्र में जन्मा जातक जहाँ रहता है वहां का प्रख्यात व्यक्ति होता है। ऐसे जातकों को घुटने या कूल्हों के जोड़ों से सम्बंधित रोग, सूजन, छाती या फेफड़े का दर्द, अक्समात चोट या जलने की संभावना भी प्रबल होती है।।

प्रथम चरण:- उत्तराषाढ़ा नक्षत्र इक्कीसवाँ नक्षत्र है और इसका स्वामी ग्रह सूर्य है। इस नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी गुरु हैं। दोनों ग्रह परस्पर मित्र हैं। लग्नेश भी गुरु होने के कारण गुरु ग्रह का प्रभाव अधिक है। इस नक्षत्र में जन्मा जातक राजा तुल्य ऐश्वर्यशाली एवं पराक्रमी होगा। गुरु की दशा में जातक का सर्वांगीण विकास होगा और सूर्य की दशा अन्तर्दशा में जातक का प्रबल भाग्योदय होगा।।

द्वितीय चरण:- उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी ग्रह सूर्य है। इस द्वितीय चरण का स्वामी शनि हैं। उत्तराषाढा के दुसरे चरण में जन्मा जातक आजीवन अपने मित्रों का विरोध सहता है। लग्नेश शनि सूर्य का शत्रु है अतः शनि की दशा धनदायक होगी। परन्तु सूर्य की दशा अशुभ फलदायक होगी। लग्नेश शनि की दशा भी अपेक्षित लाभ नहीं देगी।।

तृतीय चरण:- उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी ग्रह सूर्य है। इस तृतीय चरण का स्वामी भी शनि हैं। उत्तराषाढा के तीसरे चरण में जन्मा जातक अपने जीवन में सदैव मान सम्मान चाहने वाला होता है। शनि लग्नेश भी है अतः लग्नेश शनि की दशा उत्तम फल देगी। शनि की दशा आपके लिए उन्नतिदायक एवं धनदायक होगी। परन्तु सूर्य की दशा अशुभ फलदायक होगी।।

चतुर्थ चरण:- उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी ग्रह सूर्य है। इसके चतुर्थ चरण का स्वामी बृहस्पति हैं। उत्तराषाढा के चौथे चरण में जन्मा जातक स्वभाव से धार्मिक एवं आध्यात्मिकता में रूचि रखने वाला होता है। उत्तराषाढा के चौथे चरण का स्वामी बृहस्पति है जो लग्नेश शनि का शत्रु है। परन्तु लग्न नक्षत्र स्वामी सूर्य का मित्र है। अतः सूर्य और बृहस्पति की दशा समान्य रहेगी और शनि की दशा लाभप्रद रहेगी।।

#Panchang_19_October_2026

सामान्यतया सोमवार शॉपिंग के लिए अच्छा दिन माना जाता है।।

सोमवार का विशेष – सोमवार के दिन तेल मर्दन अर्थात् तेल मालिश करने से चहरे और शरीर की कान्ति बढ़ती है – (मुहूर्तगणपति)।।

सोमवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से शिव भक्ति की हानि होती है। पुत्रवान पिता को तो कदापि नहीं करना चाहिये। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।

दिशाशूल – सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई दर्पण देखकर घर से प्रस्थान कर सकते है।।

सोमवार के दिन ये विशेष उपाय करें – सोमवार को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।

#Panchang_19_October_2026

मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म सोमवार को होता है, वो जातक शांत प्रवृत्ति के गौर वर्ण लिए हुये होते हैं। सोमवार चन्द्र प्रधान दिन होता है, इसलिये इस जातक में कल्पनाशीलता, दया भाव, नम्रता के गुण परिलक्षित होते हैं। माता के प्रिय एवं सद्गुणों से युक्त ये जातक कवि ह्रदय, सफेद वस्तुओं से लाभ पाने वाला, यात्रा का शौकीन, जलाशयों एवं प्रकृति का प्रेमी होता है।।

सोमवार को जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है। इनकी प्रकृति यानी इनका स्वभाव शान्त होता है। इनकी वाणी मधुर और मोहित करने वाली होती है। ये स्थिर स्वभाव वाले होते हैं सुख हो या दु:ख सभी स्थिति में ये समान रहते हैं। धन के मामले में भी ये भाग्यशाली होते हैं तथा इन्हें सरकार एवं समाज से मान-सम्मान मिलता है।।

इस दिन जन्म लेने वाले जातक को पर्यावरण के क्षेत्र में, समुद्र विज्ञान के क्षेत्र में, पानी से जुड़े रोजगार जैसे मत्य् क पालन या मछली का व्यवसाय, पत्थरों का व्यवसाय, कपड़े का व्यंवसाय शुद्ध फलता है। इनके लिए सफेद रंग सदा शुभकारी होता है इसलिए कैरियर के लिहाज से आप जहां भी जायें सफेद रुमाल अपनी जेब में रखें और उस क्षेत्र को ही चुने जिसमें सफेद रंग की प्रधानता हो, जैसे पानी, कपड़ा, फूल, पत्थयर आदि से जुड़ा व्यवसाय।।

आज का सुविचार – मित्रों, जीना हैं, तो उस दीपक की तरह जियो जो बादशाह के महल में भी उतनी ही रोशनी देता हैं जितनी किसी गरीब की झोपड़ी में। जो भाग्य में हैं वह भाग कर आयेगा और जो भाग्य में नही हैं वह आकर भी भाग जायेगा। हँसते रहो तो दुनिया साथ हैं, वरना आँसुओं को तो आँखो में भी जगह नही मिलती।।

#Panchang_19_October_2026

चन्द्रमा द्वारा निर्मित कुछ अतुलनीय धनदायक योग।।…… आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें:  & ब्लॉग पर पढ़ें:

कुंडली से जानें आपका विवाह कब होगा।। Read More. वेबसाईट पर पढ़ें:  And ब्लॉग पर पढ़ें:

कुंडली से जानें विवाह में देरी का कारण और उपाय।। Read More. वेबसाईट पर पढ़ें:  And  ब्लॉग पर पढ़ें:

ॐ अथ शिवप्रातः स्मरणस्तोत्रम् – यहाँ क्लिक करें और पढ़ें:

माता महागौरी की विशेष भोग-पूजन विधि एवं विशिष्ट मंत्र।।

माता सिद्धिदात्री की विशेष भोग-पूजन विधि एवं विशिष्ट मंत्र।।

“क्या बाबा के सर सज रही है, UP का ताज? क्या बाबा फिर CM बन सकते हैं।।” – My Latest video.
“क्या कहती है अखिलेश यादव की कुंडली? क्या मिलेगी सत्ता?।।” – My Latest video.
“शुक्र की महादशा में सूर्य अन्तर्दशा फलम्” – My Latest video.
ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं – Watch YouTube Video’s.
इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज – My facebook Page.

#Panchang_19_October_2026

वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें।।
किसी भी तरह के पूजा-पाठ, विधी-विधान, ग्रह दोष शान्ति आदि के लिए तथा बड़े से बड़े अनुष्ठान हेतु योग्य एवं विद्वान् ब्राह्मण हमारे यहाँ उपलब्ध हैं।।

सिलवासा ऑफिस:- बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के बाजू में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा।।

सिलवासा ऑफिस में प्रतिदिन मिलने का समय:-
10:00 AM to 02:00 PM And 04:30 PM to 08:30 PM.
WhatsAap & Call: +91 – 8690 522 111.
E-Mail :: balajijyotish11@gmail.com

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

error: Content is protected !!
Exit mobile version