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पञ्चांग 20 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार।।

पञ्चांग 20 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार।। Panchang 20 October 2026

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।

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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 20 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार।।

मित्रों, तारीख 20 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार को अश्विन मास के शुक्ल पक्ष कि नवमी उपरान्त दशमी तिथि है। आज नवमी में सूर्योदय हो रहा है, इसका अर्थ है, की उदयातिथि के अनुसार नवमी तिथि है। परन्तु यह नवमी प्रातः 09: 35 AM बजे तक ही है। इसलिए नवमी में हवन आदि सम्पन्न करना चाहिए। परन्तु नवरात्री व्रत का पारण इसके बाद ही करना चाहिए। उसके उपरान्त विजयादशमी का पावन व्रत भी आज ही मनाया जायेगा। क्योंकि आज अपरान्ह के बाद श्रवण नक्षत्र भी रहेगा। श्रवण नक्षत्र से युक्त दशमी में दशहरा का पर्व मनाया जायेगा। आज देवी की अंतिम पूजा-आराधना के उपरान्त नारियल एवं नींबु आदि की बलि अवश्य चढ़ाना चाहिए। आज नवमी तिथि के अंदर ही होमादी कर-करा लेना चाहिए। क्योंकि आज ही विजया दशमी अर्थात दशहरा का पावन पर्व भी मनाया जाएगा। आज शमी एवं अपराजिता के पौधों की पूजा एवं नीलकंठ दर्शन भी अवश्य करना चाहिए। आज श्रवण नक्षत्र में सरस्वती विसर्जन एवं शस्त्र पूजन आदि क्रिया भी सम्पन्न की जाएगी। राजाओं के यहाँ आज ही पट्टाभिषेक का कार्यक्रम भी सम्पन्न किया जाएगा। आज महिष पर सवार माताजी की विदाई शोक देने वाला है। अतः सभी कार्यक्रम सावधानी पूर्वक शुभ मुहूर्त में ही सम्पन्न करना चाहिए। आप सभी सनातनियों को “विजया दशमी अर्थात दशहरा के पावन पर्व ” की हार्दिक शुभकामनायें।।

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।

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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).

पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

पञ्चांग 20 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार।। Panchang 20 October 2026

आज का पञ्चांग 20 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार।।
Aaj ka Panchang 20 October 2026.

विक्रम संवत् – 2083.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.

शक – 1948.

अयन – सौम्यायनम्.

गोल – याम्य.

ऋतु – शरद.

मास – अश्विन.

पक्ष – शुक्ल.

गुजराती पंचांग के अनुसार – अश्विन शुक्ल पक्ष.

#Panchang_20_October_2026

तिथि – नवमी 09:33 AM बजे तक उपरान्त दशमी तिथि है।।

नक्षत्र – श्रवण 18:02 PM तक उपरान्त धनिष्ठा नक्षत्र है।।

योग – धृति 00:35 AM तक उपरान्त शूल योग है।।

करण – कौलव 12:51 PM तक उपरान्त तैतिल करण है।।

चन्द्रमा – मकर राशि पर।।

सूर्य – तुला राशि एवं चित्रा नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।

मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:36:02

मुम्बई सूर्यास्त – सायं 18:09:19

वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 06:19:41

वाराणसी सूर्यास्त – सायं 17:41:38

राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:17 बजे से 16:43 बजे तक।।

शुभ मुहूर्त – दोपहर 12.11 बजे से 12.35 बजे तक।।

#Panchang_20_October_2026

नवमी तिथि विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है।।

नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।।

आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।।

नवमी तिथि को जन्म लेने वाला व्यक्ति भाग्यशाली एवं धर्मात्मा होता है। इस तिथि का जातक धर्मशास्त्रों का अध्ययन कर शास्त्रों में विद्वता हासिल करता है। ये ईश्वर में पूर्ण भक्ति एवं श्रद्धा रखते हैं। धनी स्त्रियों से इनकी संगत रहती है तथा इसके पुत्र गुणवान होते हैं।।

#Panchang_20_October_2026

मित्रों, अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व ये आठ सिद्धियां हैं। जिनका उल्लेख भागवत पुराण में भी मिलता है। इसके अलावा मार्कंडेय पुराण एवं ब्रह्ववैवर्त पुराण में भी वर्णित है। इसके अलावा इस दोनों पुराणों में और भी अनेक प्रकार की सिद्धियों का वर्णन है मिलता है।।

ये सिद्धियाँ जिन्होंने भी इस संसार में पायी है, वो इस संसार में भगवान की तरह पूजे गये हैं। परन्तु इस सिद्धियों की प्राप्ति हेतु लगभग इन्सान का सबकुछ खो गया है तब इन सिद्धियों की प्राप्ति हुई है। लेकिन कुछ लोगों को इन सिद्धियों से साक्षात्कार सहज ही हो गया है। जिन्हें सहज ही इन सिद्धियों की प्राप्ति हुई है वो माता दुर्गा के नवम रूप माता सिद्धिदात्री के उपासक रहे हैं।।

जी हाँ आज शारदीय नवरात्रा की नवमी तिथि है और माता सिद्धिदात्री का दिन है। यही माता सभी सिद्धियों की स्वामिनी हैं और इनकी पूजा से ही भक्तों को इन सिद्धियों की प्राप्ति सहज ही हो जाती है। माता दुर्गा की नवम शक्ति का ही नाम सिद्धिदात्री है और यही माता अपने उपासकों को सहज ही सम्पूर्ण सिद्धियों को देनेवाली हैं। सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली माता इन्हीं को माना गया है।।

मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व इन आठ सिद्धियों को भगवान शिव ने इन्हीं माता की कृपा से प्राप्त किया था। इन्हीं की अनुकम्पा से भगवान शिव अर्द्धनारीश्वर बने थे। इसी कारण भगवान शिव संसार में अर्द्धनारीश्वर के नाम से प्रसिद्ध हुए। माता सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं और इनका वाहन सिंह है। ये कमल पुष्प पर आसीन होती हैं।।

इनकी दाहिनी नीचे वाली भुजा में चक्र, ऊपर वाली भुजा में गदा और बांयी तरफ नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल पुष्प शोभायमान होता है। नवरात्रि पूजन के नवें दिन इनकी पूजा की जाती है। आज के दिन भगवती माता सिद्धिदात्री का ध्यान-पूजन-अर्चन और बन्दन करने से भक्त का “निर्वाण चक्र” जाग्रत हो जाता है।।

मां दुर्गा शेरावाली मईया जगत के कल्याण हेतु नव रूपों में प्रकट हुई और इन नव रूपों में अंतिम रूप है देवी सिद्धिदात्री का। यह देवी प्रसन्न होने पर सम्पूर्ण जगत की रिद्धि-सिद्धि अपने भक्तों को प्रदान करती हैं। देवी सिद्धिदात्री का रूप अत्यंत सौम्य है देवी ने सिद्धिदात्री का यह रूप भक्तों पर अपनी कृपा बरसाने के लिए धारण किया था। देवता, ऋषि-मुनि, असुर, नाग और मनुष्य सभी मां के भक्त हैं।।

इनकी भक्ति जो भी हृदय से करता है मां उसी पर अपना नेह लुटाती हैं। सिद्धियां हासिल करने के उद्देश्य से जो साधक भगवती सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं उन्हें नवमी के दिन निर्वाण चक्र का भेदन करना चाहिए। दुर्गा पूजा में इस तिथि को विशेष रूप से नवरात्री उपवास और पूजन के सम्पूर्ण फल की प्राप्ति के उद्देश्य से हवन किया जाता है। हवन से पूर्व सभी देवी दवाताओं एवं माता की पूजा करनी चाहिए।।

हवन करते समय सभी देवी दवताओं के नाम से हवि अर्थात आहुति देनी चाहिए। सभी आवाहित देवी-देवताओं की आहुति के बाद माता के नाम अथवा नवार्ण मन्त्र से आहुति देनी चाहिए। दुर्गा सप्तशती के सभी श्लोक मंत्र रूप हैं अत: आप सप्तशती के सभी श्लोकों से आहुति दे सकते हैं। समयाभाव में आप देवी के बीज मंत्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” से कम से कम 108 बार हवन कर सकते हैं।।

जिस प्रकार पूजा के क्रम में भगवान शंकर और ब्रह्मा जी की पूजा सबसे अंत में होती है उसी प्रकार अंत में इनके नाम से आहुति देकर सपरिवार आरती एवं क्षमा प्रार्थना करें। हवन में जो भी प्रसाद आपने चढ़ाया है उसे बाटें और जब हवन की अग्नि ठंढ़ी हो जाए तो इसे पवित्र जल में विसर्जित कर दें। यह भष्म रोग, संताप एवं ग्रह बाधा से आपकी रक्षा करता है एवं मन से सभी भयों को दूर कर देता है।।

जैसा कि पहले भी हमने बताया है, कि नवरात्रि के इन दिनों में माँ दुर्गा, माँ शारदा एवं माता महालक्ष्मी जी की पूजा बड़े धूम-धाम से पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इन दिनों में लगभग सभी सनातनी लोग देवी माँ का उपवास रखते हैं और विधिपूर्वक ढंग से आराधना एवं पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि देवी माँ कि प्रशन्नता प्राप्त करने के लिए उपवास रखें जाते हैं।।

इससे देवी माँ की कृपा सदा ही बनी रहती है और आदि शक्ति की कृपा से ही इस संसार रूपी भव सागर को पार किया जा सकता है। सात दिनों तक उपवास रख कर आठवें दिन अष्टमी को कन्याओं का भोज करवाया जाता है। कई लोग नवमी पर भी कन्याओं को भोजन करवाते हैं क्योंकि दुर्गा का नवम रूप सिद्धिदात्री है। जिन्हें शतावरी या नारायणी भी कहा जाता है और नव दिनों की तपस्या का सम्पूर्ण फल भी यही देती हैं।।

शतावरी बल बुद्धि एवं वीर्य के लिए उत्तम औषधि मानी जाती है और इस औषधि को हृदय की गति तेज करने के लिए भी प्रयोग किया जाता है। सभी प्रकार की सिद्धियों को प्रदान कर माता भक्तों को को निहाल कर देती हैं। आज के पहले माता के अन्य अष्ट स्वरूपों की पूजा उपासना शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार करते हुए भक्त दुर्गा पूजा के नौवें दिन इनकी उपासना करते हैं।।

इन सिद्धिदात्री माँ की उपासना पूर्ण कर लेने के बाद भक्तों और साधकों की लौकिक-पारलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है। माता सिद्धिदात्री की सेवा जो मनुष्य नियमपूर्वक करता है, उसके सभी कष्ट स्वयं ही दूर हो जाते हैं। संसार के दु:खों से पीड़ित व्यक्ति को आज माता सिद्धिदात्री देवी की आराधना अवश्य करनी चाहिए।।

“समृद्धि तथा सिद्धियों को देनेवाली माता सिद्धिदात्री का विशिष्ट भोग।।” आज के इस लेख को पूरा पढ़ने के लिए इस लिंक को क्लिक करें:

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मित्रों, हमारे वैदिक सनातन धर्म के हमारे पर्व, हमारी संस्कृति तथा हमारी सभ्यता ही पहचान है। देश में वर्ष भर में अनेकों त्योहार आते हैं और इन सभी त्योहारों को मनाने की एक अपनी-अपनी अलग परंपरा एवं विधि है। सभी त्योहार मानवता के लिए कोई न कोई संदेश लेकर आते हैं। हमारे त्योहार लोगों में परस्पर प्रेम व सद्‌भावना का संदेश देते हैं तथा मानव जीवन में नवीन खुशियाँ एवं नये उल्लास का संचार करते हैं।।

होली, रक्षाबंधन, दीपावली एवं विजयादशमी हमारे प्रमुख त्योहार हैं। विजयादशमी अथवा दशहरा हमारे लिये कुछ ख़ास एवं सबसे कुछ विशेष महत्व रखता है। प्रतिवर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाने वाला यह त्योहार जनमानस में खुशी, उत्साह एवं नवीनता का संचार करता है। पौराणिक मान्यता यह है, कि इसी दिन अयोध्या के राजा राम ने लंका के आततायी राक्षस राजा रावण का वध किया था।।

तब से लोग भगवान राम की इस विजय स्मृति को विजयादशमी के पर्व के रूप में मनाते चले आ रहे हैं। विजयादशमी का यह पर्व अच्छाई की बुराई पर एवं सत्य की असत्य पर विजय का प्रतीक है। विजयादशमी हमें यह संदेश देता है, कि बुराई चाहे कितना ही बलवान व प्रभावशाली क्यों न हो उसका अंत सुनिश्चित है। मृत्यु पर भी विजय पाने वाले रावण का अंत कर मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने अधर्म पर धर्म के मार्ग से विजय प्राप्त की।।

विजयादशमी के पर्व को मनाने के लिए उपरोक्त मान्यता के अतिरिक्त भी अनेक मत प्रचलित हैं। बंगाल में उत्तर-पूर्वी भारत की मान्यताओं से भिन्न यह त्योहार शक्ति की प्रतिक माँ दुर्गा को सम्मान एवं उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए मनाया जाता है। इस अवसर पर व्रत, पूजा, उपासना, दुर्गा-पाठ आदि के कार्यक्रम होते हैं। इसके अतिरिक्त जगह-जगह पर माँ की सुंदर-सुसज्जित झाँकियाँ भी निकाली जाती हैं।।

मानव मूल्यों एवं आदर्शो का सन्देश देती एवं वैदिक सनातन व्यवस्था का प्रतिक त्यौहार विजयादशमी।। इस लेख को पूरा पढ़ने के लिए यहाँ इस लिंक पर क्लिक करें:

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श्रवण नक्षत्र के जन्में जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म श्रवण नक्षत्र में हुआ है तो आप एक माध्यम कद काठी परन्तु प्रभावी और आकर्षक व्यक्तित्व के स्वामी होंगे। आपमें बचपन से ही सीखने की लालसा होने के कारण आप आजीवन ज्ञान प्राप्त करते रहेंगे। साथ ही समाज के बुद्धिजीवियों में आप की गिनती होती है। आप एक स्थिर सोच वाले निश्छल और पवित्र व्यक्ति होंगे।।

मानवता ही आपकी प्राथमिकता होगी और आपका दृष्टिकोण सदा ही सकारात्मक रहेगा। आप दूसरों के प्रति बहुत अधिक स्नेह की भावना रखेंगे। इसलिए औरों से भी उतना ही स्नेह एवं सम्मान प्राप्त करेंगे। श्रवण नक्षत्र के जातक एक अच्छे वक्ता होते हैं। एकान्तप्रिय होते हुए भी आपके मित्र अधिक होते हैं। आपके शत्रुओं की संख्या भी कुछ कम नहीं होती परन्तु अंत में शत्रुओं पर विजय आपकी ही होती हैं।।

आप एक इमानदार और सच्चाई के रास्ते पर चलने वाले व्यक्ति होंगे। झूठ और कपट न तो आपको आता है और न ही जीवन में कभी आप इसका सहारा लेते हैं। आप अपने जीवन में कई बार दूसरों द्वारा किये गये धोखे का शिकार होते हैं। फिर भी आप अपने आदर्शों पर ही चलना पसंद करेंगे। आप बहुत मृदुभाषी और कोमल हृदयी व्यक्ति होंगे और अपनी हर चीज़ सुव्यवस्थित और साफ़ ही पसंद करेंगे।।

गन्दगी और अवव्स्था के कारण ही आपको बहुत अधिक क्रोध आ जाता है। साथ ही आप अपने मूल स्वभाव को भी भूल जाते हैं। आप दिखने में सीधे-सादे परन्तु आकर्षक व्यक्ति होंगे। आप प्राकृतिक रूप से सुंदर होते हैं। आप अपना सारा जीवन ज्ञान प्राप्ति में ही व्यतीत करते हैं। अतः आप एक अच्छे सलाहकार भी होते हैं। किसी भी विवाद या समस्या को न्यायिक दृष्टि से देखने की क्षमता आपमें होती है।।

जीवन में अनेक समस्याओं से जूझते हुए और अपना दायित्व निभाते हुए आप आगे बढ़ते रहेंगे और संतुलित एवं संतुष्ट जीवन व्यतीत करेंगे। श्रवण नक्षत्र के जातक अधिक ज्ञान अर्जन के कारण अपने जीवन में करियर के चुनाव में परेशानी नहीं झेलते हैं। 30 वर्ष तक कुछ उथल पुथल सहते हुए 45वें वर्ष तक अपने कार्यक्षेत्र में चमकने लगते हैं।।

65 वर्ष के बाद भी यदि कार्यरत हों तो अपने करियर की ऊंचाईयों को छूते हैं। वैसे तो सभी प्रकार के कार्यों के लिए सक्षम होंगे। परन्तु तकनीकी और मशीनरी कार्य, , इंजीनियरिंग, तेल और पेट्रोलियम सम्बंधित क्षेत्र आपके लिए विशेष लाभदायक होगा। आपके वैवाहिक जीवन द्वारा आपके जीवन की शरुआती मुश्किलों और अस्थिरता समाप्त होगी। एक आज्ञाकारी और आपसे बहुत प्रेम करने वाली पत्नी के कारण आप सुखमय दाम्पत्य जीवन का अनुभव करेगे।।

श्रवण नक्षत्र में जन्मी स्त्रियाँ भी विनम्र और सदाचारी होती हैं। अपने इन्ही गुणों के कारण श्रवण नक्षत्र की जातिकाएं परिवार और समाज में आदर प्राप्त करती हैं। श्रवण नक्षत्र के जातक विनम्र व्यक्ति के रूप में ख्याति प्राप्त करते हैं। इन जातकों को चमड़ी के रोग तथा अपच आदि की बीमारियाँ होने की संभावनायें बनी रहती है।।

प्रथम चरण:- श्रवण नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता भगवान विष्णु है और स्वामी ग्रह चंद्रमा हैं। इस नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी मंगल हैं। श्रवण नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा जातक मान सम्मान का इच्छुक एवं आशावादी होता है। श्रवण नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी मंगल, शनि का शत्रु है परन्तु चन्द्र का मित्र अतः चन्द्र और मंगल की दशा शुभ फलदायी होती है। शनि की दशा उन्नतिदायक और धन के मामले में सहायक होती है।।

द्वितीय चरण:- श्रवण नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता भगवान विष्णु है और स्वामी ग्रह चंद्रमा हैं। इस नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शुक्र हैं। श्रवण नक्षत्र के द्वितीय चरण में जन्मा जातक गुणी एवं सकारात्मक सोच वाला होता है। श्रवण नक्षत्र के दूसरे चरण का स्वामी शुक्र, शनि और चन्द्र दोनों का शत्रु है। अतः शुक्र को जितना शुभ फल देना चाहिए उतना नहीं दे पायेगा। शनि की दशा-अन्तर्दशा में जातक उन्नति करेगा। धन अर्जित करेगा एवं स्वस्थ रहेगा।।

तृतीय चरण:- श्रवण नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता भगवान विष्णु है और स्वामी ग्रह चंद्रमा हैं। इस नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी बुध हैं। श्रवण नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मा जातक समाज के विद्वान् व्यक्तियों में गिना जाता है। श्रवण नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी बुध, शनि और चन्द्रमा दोनों का शत्रु है। अतः बुध को जितना शुभ फल देना चाहिए उतना नहीं दे पायेगा। शनि की दशा-अन्तर्दशा में जातक को मान सम्मान मिलेगा एवं प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होगी।।

चतुर्थ चरण:- श्रवण नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता भगवान विष्णु है और स्वामी ग्रह चंद्रमा हैं। इस नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी चन्द्र हैं। श्रवण नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मा जातक धार्मिक एवं आध्यात्मिक प्रवृत्ति का होता है। श्रवण नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी और नक्षत्र स्वामी भी चन्द्र है। अतः चन्द्रमा की दशा अशुभ फल नहीं देती है। शनि की दशा-अन्तर्दशा में जातक उन्नति करेगा एवं धन अर्जित करेगा तथा स्वस्थ रहेगा।।

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मंगलवार को नए कपड़े न ही खरीदना चाहिये और न ही पहली बार पहनना चाहिए। मंगलवार वाहन एवं भूमि-भवन आदि भी नहीं खरीदना चाहिये।।

मंगलवार का विशेष – मंगलवार के दिन तेल मर्दन (शरीर में तेल मालिश) करने से आयु घटती है – (मुहूर्तगणपति)।।

मंगलवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से भी आयु की हानि होती है।। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।

दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।।

मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात दाढ़ी या बाल काटने या कटवाने से उम्र कम होती है। अत: मंगलवार को बाल या दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए। मंगलवार को बजरंगबली की पूजा का विशेष महत्व है।।

मंगलवार को यथासंभव कोशिश करके मंदिर में जाकर हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी/लाल पेड़े या गुड़ और चने का प्रसाद चढ़ाएं। हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत एवं नज़र की बाधा से बचाव होता है साथ ही आपके समस्त शत्रु परास्त होते है।।

मंगलवार के व्रत से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है। मंगलवार को धरती पुत्र मंगलदेव की आराधना करने से जातक को मुक़दमे, राजद्वार में सफलता मिलती है, उत्तम भूमि, भवन का सुख मिलता है, मांगलिक दोष दूर होता है।।

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मंगलवार को जिनका जन्म होता है, वो जातक स्वभाव से उग्र, साहसी, प्रयत्नशील एवं महत्वाकांक्षी होते हैं। इनमें नेतृत्व की क्षमता अन्यों के मुकाबले बहुत शुद्ध होती है। ऐसे लोग जिम्मेदारियों के कार्य में सफल भी होते हैं। खिलाड़ी, पहलवान, सेना तथा पुलिस विभाग में सफल रहते हैं। यह जातक अधिकांशतः रक्तवर्ण या गेहूंआ रंग होता है।।

मंगलवार को जन्म लेनेवाला जातक जटिल बुद्धि वाला होता है। ये किसी भी बात को आसानी से नहीं मानते हैं। ऐसे लोग शक्की किस्म के होते हैं इसलिये सभी बातों में इन्हें कुछ न कुछ खोट दिखाई देता है। ये युद्ध प्रेमी और पराक्रमी होते हैं तथा अपनी बातों पर कायम रहने वाले होते हैं। जरूरत पड़ने पर ऐसे जातक हिंसा पर भी उतर आते हैं। इनके स्वभाव की एक बड़ी विशेषता है कि ये अपने कुटुम्ब का पूरा ख्याल रखते हैं।।

मंगलवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति स्वभावानुसार क्रोधी, उग्र, पराक्रमी, जुझारू, अदम्य साहसी, आलोचना सहन न करने वाले और सांगठनिक क्षमता वाले होते हैं। नेतागिरी, पुलिस, सेना, नौकरशाह तथा खिलाड़ी के रूप में इनका कैरियर सफल रहता है। इनका शुभ अंक 3, 6, 9 तथा शुभ रंग लाल एवं मैरुन और इनका शुभ दिन मंगलवार एवं शुक्रवार होता है।।

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मंगलवार का विशेष टिप्स – यदि आपके जीवन में कभी अचानक ज्यादा खर्च की स्थिति बन जाय, तो किसी भी मंगलवार के दिन हनुमानजी के मंदिर में गुड़-चने का भोग श्रद्धापूर्वक लगाएं। भोग लगाने के बाद वहीँ बैठकर 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ भी अवश्य करें।।

मंगलवार के दिन ये विशेष उपाय करें – मंगलवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्त्व होता है। आज हनुमान जी को चमेली का तेल चढ़ाना, चमेली के तेल का ही दीपक जलाना तथा माखन का भोग लगाना चाहिये, इससे हर प्रकार की मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।।

आज का सुविचार – मित्रों, दुनिया में भगवान का संतुलन कितना अद्भुत हैं, 50 कि.ग्रा. अनाज का बोरा जो उठा सकता हैं वो खरीद नही सकता और जो खरीद सकता हैं वो उठा नही सकता। जब आप गुस्सें में हो तब कोई फैसला न लेना और जब आप खुश हो तब कोई वादा न करना, अगर ये याद रखेंगे तो कभी नीचा नही देखना पड़ेगा।।

#Panchang_20_October_2026

अरिष्ट अर्थात एक्सिडेन्ट एवं चोट आदि लगने के योग ।।….. आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें:  & ब्लॉग पर पढ़ें: 

कुंडली में पैतृक धन प्राप्ति का योग।। Read More. वेबसाईट पर पढ़ें:  And ब्लॉग पर पढ़ें:

कुंडली में विरासत से धन मिलने का योग।। Read More. वेबसाईट पर पढ़ें:  And ब्लॉग पर पढ़ें:

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सिलवासा ऑफिस में प्रतिदिन मिलने का समय:-
10:00 AM to 02:00 PM And 04:30 PM to 08:30 PM.
WhatsAap & Call: +91 – 8690 522 111.
E-Mail :: balajijyotish11@gmail.com

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