बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।
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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 24 अगस्त 2026 दिन सोमवार।।
मित्रों, तारीख 24 अगस्त 2026 दिन सोमवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है। आज श्रावण सोमारी व्रत भी है। आज के सोमवार का व्रत करने से प्रदोष व्रत के समान फल मिलता है। आज उड़ीसा के लोग श्रीविष्णुपवित्रारोपण व्रत मनाते हैं। आज दामोदर द्वादशी भी है। आज कही-कही वैष्णव एकादशी का व्रत भी मनाया जायेगा। परन्तु जैसा कि आप सभी जानते हैं, कि तारीख 23 अगस्त 2026 दिन रविवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि थी। जिसका आरम्भ 23 अगस्त को रात्रि में अर्द्धरात्रि के पश्चात् 02:01 AM बजे को हुआ था। और यह एकादशी तिथि 25 अगस्त अर्द्धरात्रि के पश्चात् 04:19 AM बजे तक थी। तो आज 24 अगस्त को श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण किया जायेगा। तो चलिए श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत के पारण का निर्णय देखते हैं। आज 24 अगस्त 2026 को पारण का समय सुबह 06:23 AM से 08:54 AM बजे तक है। इस समय के भीतर ही सभी श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रतियों को एकादशी व्रत का पारण कर लेना चाहिए। आज से शाक का दान और दही का त्याग करना आरम्भ हो जाता है। आप सभी सनातनियों को “श्रावण सोमवार व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आपका आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।
वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

आज का पञ्चांग 24 अगस्त 2026 दिन सोमवार।।
Aaj ka Panchang 24 August 2026.
विक्रम संवत् – 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.
शक – 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल – याम्य.
ऋतु – वर्षा.
मास – श्रावण.
पक्ष – शुक्ल.
गुजराती पंचांग के अनुसार – श्रावण शुक्ल पक्ष.
#Panchang_24_August_2026
तिथि – एकादशी 04:19 AM बजे तक उपरान्त द्वादशी तिथि है।।
नक्षत्र – पूर्वाषाढ़ा 20:28 PM तक उपरान्त उत्तराषाढ़ा नक्षत्र है।।
योग – प्रीति 07:05 AM तक उपरान्त आयुष्मान योग है।।
करण – विष्टि 04:19 AM तक उपरान्त बव 17:23 PM तक उपरान्त बालव करण है।।
चन्द्रमा – धनु राशि पर।।
सूर्य – सिंह राशि एवं मघा नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:21:33
मुम्बई सूर्यास्त – सायं 18:59:00
वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 05:38:41
वाराणसी सूर्यास्त – सायं 06:22:37
राहुकाल (अशुभ) – सुबह 07:56 बजे से 09:31 बजे तक।।
विजय (शुभ) मुहूर्त – दोपहर 12.29 बजे से 12.53 बजे तक।।
#Panchang_24_August_2026
द्वादशी तिथि विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह मसूर से बना सभी व्यंजन इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण भगवान को बताया गया है। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ अवश्य करने चाहिए। नाम के पाठ एवं जप आदि करने से व्यक्ति के जीवन में धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति सहज ही होने लगती है।।
आज द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ फलदायिनी मानी जाती है।।
द्वादशी तिथि में जन्म लेनेवाले व्यक्ति का स्वभाव अस्थिर होता है। इनका मन किसी भी विषय में केन्द्रित नहीं हो पाता है। इस व्यक्ति का मन हर पल चंचल बना रहता है। इस तिथि के जातक का शरीर पतला व कमज़ोर होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी स्थिति अच्छी नहीं होती है। ये यात्रा के शौकीन होते हैं और सैर सपाटे का आनन्द लेते रहते हैं।।
#Panchang_24_August_2026
पूर्वाषाढा नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- पूर्वाषाढा में जन्म लेने वाला जातक थोडा नकचढ़ा और उग्र स्वभाव के होने बावजूद कोमल हृदयी और दूसरों से स्नेह रखने वाला होता है। आप जीवन में सकारत्मक विचारधारा से आगे बढ़ते हुए अपने लक्ष्य प्राप्त करते हैं। आपका व्यक्तित्व दूसरों पर हावी रहता है परन्तु आप एक संवेदनशील व्यक्ति हैं जो दूसरों की मदद के लिए सदैव तैयार रहतें है।।
अपने इन्ही गुणों के कारण आप को बहुत अधिक प्रेम एवं सम्मान भी मिलता है। परन्तु अपनी चंचल बुद्धि के कारण आप अधिक वफादार नहीं होते हैं। और कभी कभी अनैतिक कार्यों में भी लिप्त हो जाते हैं। कुल मिलकर आप एक जटिल व्यक्ति हैं जिसे समझाना मुश्किल है। इस नक्षत्र में जन्मे जातक बुद्धिजीवी होते हैं और अपनी मेहनत और सत्यनिष्ठा के कारण आगे बढ़ते हैं। जीवन में कई बार जहाँ आपको असंभावित व्यक्तियों से मदद मिलती है वहीँ करीबी और मित्रों से धोखा।।
आप बेहद हिम्मती व्यक्ति होंगे परन्तु कभी कभी निर्णायक स्तिथि में पहुँचने के लिए किसी दूसरे का मार्गदर्शन आपके लिए आवश्यक हो जाता है। किसी निर्णय पर पहुंचकर आपको हिलाना संभव नहीं है। इसी कारण आप कभी कभी जिद्दी भी समझे जाते हैं। आपको अपने कार्यों में किसी का हस्तक्षेप कतई पसंद नहीं है। फिर चाहे आप कितने भी गलत क्यों न हों।।
यदि पूर्वाषाढा में जन्मे जातक व्यवसाय में हो तो अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के चुनाव में अधिक सतर्क रहें। क्योंकि उनकी सफलता इन्ही करमचारियों पर निर्भर करती है। वैसे आपके लिए मेडिकल, कला, दर्शन शास्त्र और विज्ञान से सम्बंधित क्षेत्र सर्वोत्तम होता हैं। आपका जिद्दी और कठोर स्वभाव ही आपके लिए जीवन में रुकावटें लेकर आता है। 32 वर्ष तक आप संघर्षरत रहेंगे और 50 वर्ष तक आते-आते आप अपने करियर में चमकते हैं।।
जीवन में माता-पिता का सहयोग ना के बराबर रहता है। परन्तु भाई बहनों के प्रेम और सहयोग के कारण आप सफलता प्राप्त करते हैं। व्यवसायिक दाईत्व के कारण आपको अपने जन्म स्थल से दूर जाना पड़ सकता है। आपका विवाह थोडा विलम्ब से होता है। परन्तु एक अच्छे जीवन साथी के कारण आपका दांपत्य जीवन सुखमय एवं आनंददायक हो जाता है। आपका अपनी पत्नी और ससुराल पक्ष से बेहद लगाव रहेगा।।
आपकी संतान बुद्धिमान एवं आपका नाम रोशन करने वाली होगी। पूर्वाषाढा में जन्मी जातिकायें धार्मिक, शीलवान और बहुत ही नम्र स्वभाव की होती हैं। झूठ से नफरत करने वाली एवं ईश्वर में पूर्ण आस्था रखने वाली होती है। दया भाव एवं दान पुण्य करना इनके स्वभाव में ही होता है। पूर्वाषाढा में जन्मे जातकों की ऊँचाई औसतन सामान्य व्यक्ति से अधिक होती है। इसीलिए इन्हें कमर और कुल्हे का दर्द, टी बी, मधुमेह, रक्त विकार और कैंसर जैसी बीमारियाँ हो सकती है।।
प्रथम चरण:- पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी ग्रह शुक्र है। इसीलिए इस नक्षत्र पर शुक्र का प्रभाव रहता है। इसी वजह से जातक प्रेम करने वाला तथा जीवन को जीने की कला जानने वाला होता है। पूर्वाषाढा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी सूर्य हैं। दोनों ग्रह परस्पर शत्रु होते हुए भी तेजस्वी हैं। इसलिए इस चरण में जन्मा जातक अपनी जाती का तेजस्वी एवं श्रेष्ठ व्यक्ति होता है। गुरु की दशा शुभ फल देती है। सूर्य की दशा में जातक का सम्पूर्ण भाग्योदय होता है तथा शुक्र की दशा सामान्य जाती है।।
द्वितीय चरण:- पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी ग्रह शुक्र है। इसके द्वितीय चरण का स्वामी बुध हैं। गुरु एवं शुक्र दोनों आचार्य एवं बुद्धि प्रधान ग्रह हैं। परस्पर शत्रु होते हुए भी तेजस्वी हैं। बुध और शुक्र की मित्रता के कारण व्यक्ति राजा तुल्य पराक्रमी एवं बुद्धिशाली होता है। गुरु की दशा उत्तम फल देती है। सूर्य की दशा में जातक का सम्पूर्ण भाग्योदय होता है। बुध की दशा भी श्रेष्ठ फल देती है तथा शुक्र की दशा सामान्य जाती है।।
तृतीय चरण:- पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी ग्रह शुक्र है। इसके तृतीय चरण का स्वामी भी शुक्र हैं। शुक्र के वजह से जातक तेजस्वी होता हैं। इसलिए इस चरण में जन्मा जातक प्रिय, मीठी एवं हितकर वाणी बोलने वाला होता है। गुरु की दशा शुभ फल देती है। शुक्र की दशा में जातक का सम्पूर्ण भाग्योदय होता है। शुक्र की दशा कभी भी अशुभ फल नहीं देती है।।
चतुर्थ चरण:- पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी ग्रह शुक्र है। इसके चतुर्थ चरण का स्वामी मंगल हैं। दोनों ग्रह गुरु और शुक्र परस्पर शत्रु ग्रह हैं। मंगल से भी शुक्र की शत्रुता होती है। इसलिए इस चरण में जन्मा जातक संघर्ष करता हुआ धनी होगा। गुरु की दशा शुभ फल देती है। सूर्य की दशा में जातक का सम्पूर्ण भाग्योदय होता है। मंगल की दशा विदेशों की यात्रा या तीर्थ यात्रा कराएगी शुक्र की दशा सामान्य जाती है।।
#Panchang_24_August_2026
सामान्यतया सोमवार शॉपिंग के लिए अच्छा दिन माना जाता है।।
सोमवार का विशेष – सोमवार के दिन तेल मर्दन अर्थात् तेल मालिश करने से चहरे और शरीर की कान्ति बढ़ती है – (मुहूर्तगणपति)।।
सोमवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से शिव भक्ति की हानि होती है। पुत्रवान पिता को तो कदापि नहीं करना चाहिये। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
दिशाशूल – सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई दर्पण देखकर घर से प्रस्थान कर सकते है।।
सोमवार के दिन ये विशेष उपाय करें – सोमवार को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।
#Panchang_24_August_2026
मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म सोमवार को होता है, वो जातक शांत प्रवृत्ति के गौर वर्ण लिए हुये होते हैं। सोमवार चन्द्र प्रधान दिन होता है, इसलिये इस जातक में कल्पनाशीलता, दया भाव, नम्रता के गुण परिलक्षित होते हैं। माता के प्रिय एवं सद्गुणों से युक्त ये जातक कवि ह्रदय, सफेद वस्तुओं से लाभ पाने वाला, यात्रा का शौकीन, जलाशयों एवं प्रकृति का प्रेमी होता है।।
सोमवार को जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है। इनकी प्रकृति यानी इनका स्वभाव शान्त होता है। इनकी वाणी मधुर और मोहित करने वाली होती है। ये स्थिर स्वभाव वाले होते हैं सुख हो या दु:ख सभी स्थिति में ये समान रहते हैं। धन के मामले में भी ये भाग्यशाली होते हैं तथा इन्हें सरकार एवं समाज से मान-सम्मान मिलता है।।
इस दिन जन्म लेने वाले जातक को पर्यावरण के क्षेत्र में, समुद्र विज्ञान के क्षेत्र में, पानी से जुड़े रोजगार जैसे मत्य् क पालन या मछली का व्यवसाय, पत्थरों का व्यवसाय, कपड़े का व्यंवसाय शुद्ध फलता है। इनके लिए सफेद रंग सदा शुभकारी होता है इसलिए कैरियर के लिहाज से आप जहां भी जायें सफेद रुमाल अपनी जेब में रखें और उस क्षेत्र को ही चुने जिसमें सफेद रंग की प्रधानता हो, जैसे पानी, कपड़ा, फूल, पत्थयर आदि से जुड़ा व्यवसाय।।
आज का सुविचार – मित्रों, जीना हैं, तो उस दीपक की तरह जियो जो बादशाह के महल में भी उतनी ही रोशनी देता हैं जितनी किसी गरीब की झोपड़ी में। जो भाग्य में हैं वह भाग कर आयेगा और जो भाग्य में नही हैं वह आकर भी भाग जायेगा। हँसते रहो तो दुनिया साथ हैं, वरना आँसुओं को तो आँखो में भी जगह नही मिलती।।
#Panchang_24_August_2026
चन्द्रमा द्वारा निर्मित कुछ अतुलनीय धनदायक योग।।…… आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें:
ॐ अथ शिवप्रातः स्मरणस्तोत्रम् – यहाँ क्लिक करें और पढ़ें: