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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 31 अक्टूबर 2026 दिन शनिवार।।
मित्रों, तारीख 31 अक्टूबर 2026 दिन शनिवार को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि है। आप सभी सनातनी बंधुओं को बता दूँ, कि आज श्रीशुक्र देवता का बालत्व निवृत्त (प्रातः:- 07:36 AM बजे) हो जाता है। आज यायिजययोग है। आज त्रिपुष्कर योग भी है। आज रवियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “श्रीशुक्र देवता के बालत्व निवृत्त” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आप का आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।
वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

आज का पञ्चांग 31 अक्टूबर 2026 दिन शनिवार।।
Aaj ka Panchang 31 October 2026.
विक्रम संवत् – 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.
शक – 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल – याम्य.
ऋतु – वर्षा.
मास – कार्तिक.
पक्ष – कृष्ण.
गुजराती पंचांग के अनुसार – अश्विन कृष्ण पक्ष.
#Panchang_31_October_2026
तिथि – षष्ठी 16:58 PM बजे तक उपरान्त सप्तमी तिथि है।।
नक्षत्र – आर्द्रा 07:12 AM तक उपरान्त पुनर्वसु नक्षत्र है।।
योग – सिद्ध 17:32 PM तक उपरान्त साध्य योग है।।
करण – गर 06:09 AM तक उपरान्त वणिज 16:58 PM तक उपरान्त विष्टि करण है।।
चन्द्रमा – मिथुन राशि पर।।
सूर्य – तुला राशि एवं स्वाति नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:40:39
मुम्बई सूर्यास्त – सायं 18:02:18
वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 06:27:35
वाराणसी सूर्यास्त – सायं 17:33:52
राहुकाल (अशुभ) – सुबह 09:31 बजे से 10:57 बजे तक।।
विजय मुहूर्त (शुभ) – दोपहर 12.10 बजे से 12.34 बजे तक।।
#Panchang_31_October_2026
षष्ठी तिथि विशेष – मित्रों, षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।।
आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय स्वामी का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी भी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि को सायंकाल के समय में किसी भी शिवमन्दिर में षण्मुख के नाम से छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं। साथ ही सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।।
मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म षष्ठी तिथि को होता है, वह व्यक्ति सैर-सपाटा पसंद करने वाला होता है। इन्हें देश-विदेश घुमने का कुछ ज्यादा ही शौक होता है अत: ये काफी यात्राएं करते रहते हैं। इनकी यात्रायें मनोरंजन और व्यवसाय दोनों से ही प्रेरित होती हैं। इनका स्वभाव कुछ रूखा जैसा होता है। परन्तु ऐसे जातक छोटी छोटी बातों पर भी लड़ने को तैयार हो जाता हैं।।
#Panchang_31_October_2026
आर्द्रा नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म आर्द्रा नक्षत्र में हुआ है तो आपकी रूचि अध्ययन में बहुत अधिक होगी। आप सदैव ही अपने आस-पास की घटनाओं के बारे में जागरूक रहते हैं। किताबों से विशेष लगाव आपकी पहचान है। एक और विशेषता जो की आर्दा नक्षत्र में पैदा हुए जातकों में अक्सर देखी गयी है वह है उनकी व्यापार करने की समझ। अपनी तीक्ष्ण व्यापारिक बुद्धि के कारण आप व्यापार क्षेत्र में शीघ्र ही सफलता की उचाईयों को छू लेने में सक्षम होते है।।
आपमें भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं का पूर्वाभास करने की अजब क्षमता होती है। दूसरों की मन की बात भी आप आसानी से भांप लेते हैं। इसलिए जीवन में धोखा खाने की संभावनाएं कम ही रहती है। मीठी और रसीली बातें आपके व्यवहार में होती हैं। इसलिए व्यापारिक संस्थाओं में अधिकतर जनसंपर्क के पद के लिए आपको चुना जाता है। परन्तु कड़े अनुशासन में रहना आप के बस की बात नहीं होती है।।
जहाँ आपसे किसी के दिल की बात छुपी नहीं रहती वहीँ आप अपने दिल की बात की किसी की भनक भी नहीं लगने देते। आप एक अन्तर्मुखी व्यक्ति होंगे जो शीघ्र ही किसी के सामने आपने दिल की बात नहीं रखते। कभी-कभी आप रहस्यवादी बन जाते हैं जिसके मन की थाह पाना बहुत कठिन होता है। आप दिमाग से अधिक दिल की सुनने वाले व्यक्ति हैं।।
आप अक्सर सुनते सभी की हैं परन्तु करते केवल अपने मन की हैं। इस कारण आपको कभी-कभी नुकसान भी उठाना पड़ जाता है। आप धन खर्च करने से पहले सोच विचार नहीं करते इस कारण जीवन में अधिकतर आप धन की कमी महसूस करते हैं। आर्द्रा नक्षत्र में जन्मे जातक स्वभाव से क्रोधी एवं अभिमानी होते हैं। आर्द्रा नक्षत्र में जन्मे जातकों को अस्थमा, दमा एवं डिप्थेरिया जैसी बीमारियों के शिकार होते हैं।।
प्रथम चरण:- आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहू को माना जाता है। राहू की दशा 18 वर्ष की होती हैं। इसके प्रथम चरण का स्वामी ग्रह बृहस्पति हैं। राहु और बृहस्पति की युति के कारण गुरु चंडाल योग बनता है। अतः इस योग में जन्मा जातक बहुत धन खर्च करने वाला व्ययी होता है। लग्नेश बुध की दशा अति उत्तम फल देगी तथा आपका भाग्योदय बृहस्पति की दशा में होगा।।
द्वितीय चरण:- आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहू को माना जाता है। राहू की दशा 18 वर्ष की होती हैं। इसके द्वितीय चरण का स्वामी ग्रह शनि हैं। जो स्वल्प धनि है, राहु भी स्वलप धनि है अतः दोनों के योग के कारण जातक अपने जीवन काल में दरिद्रता का शिकार हो जाता है। लग्नेश बुध की दशा अति उत्तम फल देगी तथा आपका भाग्योदय बृहस्पति और शनि की दशा में होगा।।
तृतीय चरण:- आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहू को माना जाता है। राहू की दशा 18 वर्ष की होती हैं। इसके तृतीय चरण का स्वामी ग्रह भी शनि हैं। शास्त्रों के अनुसार आर्दा नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मे जातकों की आयु सामान्यतः कम होती है। लग्नेश बुध की दशा अति उत्तम फल देगी। राहु भी शुभ फल देगा। तथा शनि की दशा में जातक का भाग्योदय होगा।।
चतुर्थ चरण:- आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहू को माना जाता है। राहू की दशा 18 वर्ष की होती हैं। इसके चतुर्थ चरण का स्वामी ग्रह बृहस्पति हैं। राहु और बृहस्पति की युति के कारण गुरु चंडाल योग बनता है। अतः इस योग में जन्मे जातक में चोरी करने की आदत पड़ जाती है। लग्नेश बुध की दशा अति उत्तम फल देगी। राहु भी शुभ फल देगा।।
#Panchang_31_October_2026
शनिवार को जूते-चप्पल, लोहे की बनी वस्तुयें, नया अथवा पुराना भी वाहन नहीं खरीदना चाहिये एवं नए कपड़े न खरीदना और ना ही पहली बार पहनना चाहिये।।
शनिवार का विशेष – शनिवार के दिन तेल मर्दन “मालिश” करने से हर प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती हैं – (मुहूर्तगणपति)।।
शनिवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से आयुष्य की हानि होती है। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है।।
दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो अदरख एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।।
#Panchang_31_October_2026
जिस व्यक्ति का जन्म शनिवार को होता है उस व्यक्ति का स्वभाव कठोर होता है। ये पराक्रमी एवं परिश्रमी होते हैं तथा इनके ऊपर दु:ख भी आये तो ये उसे भी सह लेना जानते हैं। ये न्यायी एवं गंभीर स्वभाव के होते हैं तथा सेवा करना इन्हें काफी पसंद होता है।।
शनिवार को जन्म लेनेवाले जातक कुछ सांवले रंग के, साहसी, मैकेनिक अथवा चिकित्सक होते हैं। इनमें से कुछ अपने कार्य में सुस्त भी होते हैं, जैसे देर से जागना, देर तक सोना भी इनकी आदतों में शुमार होता है। पारिवारिक जिम्मेदारियां भी शुद्ध रहती है इसलिये ये एक मेहनतकश इंसान होते हैं। सफलता के मार्ग में रूकावटों का भी सामना करना पड़ता है।।
शनिवार को जन्मलेनेवाले जातकों के स्वभाव में साहस लक्षित होता है। सफलता के मार्ग में लाख रुकावटें आए, लेकिन ये इसे पार करके ही रहते हैं। ऐसे लोग अधिकांशतः सांवले रंग के होते हैं। इन जातकों को अपने कैरियर के लिये डॉक्टपर, इंजीनियर तथा मैकेनिक के क्षेत्र का चयन करना चाहिये। इनका शुभ अंक 3, 6 और 9 तथा इनका शुभ दिन शनिवार और मंगलवार होता है।।
आज का सुविचार – मित्रों, रात लम्बी और काली हो सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं होता कि सुबह होगी ही नहीं। ठीक उसी तरह असफलता का दौर लम्बा हो सकता है, लेकिन इसका यह मतलब ये कतई नहीं होता कि आपको अब कभी सफलता मिलेगी ही नहीं।।
#Panchang_31_October_2026
शनि देव मेहरबान हों तो इंजीनियर और चार्टर्ड एकाउंटेंट बनाते है।।…. आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें:
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