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राशि अनुसार माँ दुर्गा की उपासना।।

राशि अनुसार माँ दुर्गा की उपासना।। Rashi Anusar Ma Durga Ki Upasana.

राशि और देवी-उपासना के संबंध का परिचय। Introduction.

मित्रों, नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। प्रत्येक स्वरूप का अपना विशिष्ट ध्यान, मंत्र तथा भाव होता है। अनेक श्रद्धालु यह जानना चाहते हैं कि नौ रूपों में से किस रूप की उपासना उनके लिए विशेष रूप से अनुकूल मानी जाती है। इसी जिज्ञासा से ज्योतिष तथा देवी-उपासना की परंपरा में राशि के अनुसार देवी-स्वरूप की उपासना का एक क्रम प्रचलित हुआ है। इसमें राशि के स्वामी ग्रह को आधार बनाकर, उस ग्रह से संबंधित देवी-स्वरूप की विशेष उपासना की सलाह दी जाती है। यह एक लोकप्रिय तथा श्रद्धापूर्ण परंपरा है। जिसे साधक अपनी भक्ति को एक दिशा देने के लिए अपनाते हैं।।

परन्तु यहाँ यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि यह कोई अनिवार्य नियम अथवा किसी एक ग्रंथ का एकमात्र विधान नहीं है। नवरात्रि में प्रत्येक साधक नौ दिनों में नौ रूपों की पूजा कर सकता है। तथा किसी भी स्वरूप की भक्ति सभी के लिए समान रूप से कल्याणकारी मानी गई है। राशि-आधारित उपासना केवल एक अतिरिक्त मार्गदर्शन है। जिससे साधक अपनी श्रद्धा को किसी एक स्वरूप पर विशेष केंद्रित कर सके। इसलिए यदि किसी को अपनी राशि के अनुसार बताया गया स्वरूप प्रिय न लगे। तथा किसी अन्य स्वरूप में अधिक श्रद्धा हो, तो उसी की उपासना श्रेष्ठ मानी जाएगी।।

परन्तु आप बिलकुल घबराएँ नहीं। आज हम इसी विषय पर विस्तार से समझेंगे कि राशि, स्वामी ग्रह तथा देवी-स्वरूप का यह संबंध किस आधार पर बताया जाता है। मेष से मीन तक प्रत्येक राशि के लिए किस देवी की उपासना, किस मंत्र तथा किस भोग के साथ करने की परंपरा है। महागौरी तथा सिद्धिदात्री की उपासना किनके लिए विशेष मानी जाती है। तथा उपासना के सामान्य नियम क्या हैं। आज के इस लेख में हम इसी विषय को सरल भाषा में समझेंगे।।

राशि, ग्रह और देवी-स्वरूप का संबंध।। Relation Between Zodiac Sign, Planet And Goddess Form.

मित्रों, ज्योतिषीय परंपरा में नवदुर्गा के नौ स्वरूपों को नवग्रहों से जोड़कर देखने की मान्यता प्रचलित है। इस मान्यता के अनुसार माँ शैलपुत्री का संबंध चंद्रमा से, माँ ब्रह्मचारिणी का मंगल से, माँ चंद्रघंटा का शुक्र से, माँ कूष्मांडा का सूर्य से, माँ स्कंदमाता का बुध से, माँ कात्यायनी का गुरु से तथा माँ कालरात्रि का शनि से माना जाता है। माँ महागौरी का संबंध राहु से तथा माँ सिद्धिदात्री का संबंध केतु से जोड़ा जाता है। यह संबंध भक्तों की श्रद्धा तथा परंपरा पर आधारित है।।

चूँकि प्रत्येक राशि का एक स्वामी ग्रह होता है, इसलिए उस ग्रह से संबंधित देवी-स्वरूप को उस राशि के जातकों के लिए विशेष उपासना का स्वरूप माना जाता है। राहु तथा केतु किसी राशि के स्वामी नहीं माने जाते। इसलिए माँ महागौरी तथा माँ सिद्धिदात्री की उपासना को सभी राशियों के लिए सामान्य रूप से शुभ बताया जाता है। यहाँ यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अलग-अलग क्षेत्रों तथा विद्वानों में इस संबंध के विषय में कुछ भिन्नता मिल सकती है। इसलिए इसे एक सामान्य परंपरा के रूप में ही समझना उचित है।।

मेष तथा वृश्चिक राशि, माँ ब्रह्मचारिणी की उपासना।। Aries And Scorpio, Worship Of Maa Brahmacharini.

मित्रों, मेष तथा वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल ग्रह माना जाता है। इसीलिए इन राशियों के जातकों के लिए परंपरा में माँ ब्रह्मचारिणी की उपासना का सुझाव दिया गया है। माँ ब्रह्मचारिणी तप, संयम तथा दृढ़ निश्चय की देवी मानी जाती हैं। मंगल ग्रह स्वभाव से तीव्र तथा आवेगशील माना गया है। इसीलिए संयम तथा तपस्या की प्रतीक देवी की उपासना को इन राशियों के लिए संतुलन प्रदान करने वाला माना जाता है। इनका मंत्र है, “ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः”। तथा परंपरा में इन्हें शक्कर अथवा मिश्री का भोग अर्पित करने का विधान बताया गया है।।

इन राशियों के जातक नवरात्रि के दूसरे दिन, जो माँ ब्रह्मचारिणी का दिन माना जाता है, विशेष श्रद्धा से उनकी पूजा कर सकते हैं। साथ ही मंगलवार के दिन देवी का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है। उपासना के दौरान क्रोध तथा उतावलेपन पर नियंत्रण रखने का संकल्प लेना इस भक्ति को और सार्थक बनाता है। क्योंकि देवी की वास्तविक उपासना केवल मंत्र-जप में नहीं, अपितु उनके गुणों को अपने जीवन में उतारने में भी निहित है।।

वृषभ तथा तुला राशि, माँ चंद्रघंटा की उपासना।। Taurus And Libra, Worship Of Maa Chandraghanta.

मित्रों, वृषभ तथा तुला राशि का स्वामी शुक्र ग्रह माना जाता है। इसीलिए इन राशियों के जातकों के लिए माँ चंद्रघंटा की उपासना का सुझाव दिया जाता है। माँ चंद्रघंटा सौम्यता, शांति तथा साहस का संतुलित रूप माना जाता है। जिनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित रहता है। शुक्र ग्रह सौंदर्य, सुख तथा सामंजस्य का कारक माना गया है। इसीलिए इस ग्रह से जुड़ी राशियों के लिए इन देवी की उपासना को विशेष मानते हैं। इनका मंत्र है, “ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः”। तथा परंपरा में दूध अथवा खीर का भोग अर्पित किया जाता है।।

जातक नवरात्रि के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा विशेष श्रद्धा से कर सकते हैं। साथ ही शुक्रवार के दिन देवी माँ का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है। इस उपासना के साथ परिवार तथा संबंधों में मधुरता बनाए रखने की भावना रखना भी लाभकारी माना जाता है। क्योंकि देवी का स्वरूप स्वयं शांति तथा संतुलन का संदेश देता है।।

मिथुन तथा कन्या राशि, माँ स्कंदमाता की उपासना।। Gemini And Virgo, Worship Of Maa Skandamata.

मित्रों, मिथुन तथा कन्या राशि का स्वामी बुध ग्रह माना जाता है। इसीलिए इन राशियों के जातकों के लिए माँ स्कंदमाता की उपासना का सुझाव दिया गया है। माँ स्कंदमाता कार्तिकेय स्वामी की माता तथा ज्ञान एवं मातृत्व की प्रतीक मानी जाती हैं। बुध ग्रह बुद्धि, विद्या तथा संवाद का कारक मानी जाती हैं। इसीलिए ज्ञान की प्रतीक इन देवी की उपासना इन राशियों के लिए विशेष मानी जाती है। इनका मंत्र है, “ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः”। तथा परंपरा में केले का भोग अर्पित किया जाता है।।

जातक नवरात्रि के पाँचवें दिन माँ स्कंदमाता की पूजा श्रद्धा से कर सकते हैं। साथ ही बुधवार के दिन देवी का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है। विद्यार्थियों तथा बौद्धिक कार्यों से जुड़े जातकों के लिए यह उपासना विशेष रूप से प्रिय मानी जाती है। परंतु यह स्मरण रहे कि विद्या की प्राप्ति में परिश्रम का स्थान सर्वोपरि होता है। तथा देवी की उपासना उस परिश्रम को शक्ति तथा दिशा देने का साधन माना गया है।।

कर्क राशि, माँ शैलपुत्री की उपासना।। Cancer, Worship Of Maa Shailputri.

मित्रों, कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा को माना जाता है। इसीलिए इस राशि के जातकों के लिए माँ शैलपुत्री की उपासना का सुझाव दिया जाता है। माँ शैलपुत्री हिमालय की पुत्री तथा नवदुर्गा का प्रथम स्वरूप हैं। जिन्हें स्थिरता, पवित्रता तथा मातृ-शक्ति का प्रतीक माना जाता है। चंद्रमा मन का कारक है, इसीलिए मन को स्थिर तथा शांत रखने वाली देवी की उपासना कर्क राशि के जातकों के लिए विशेष मानी जाती है। इनका मंत्र है, “ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः”। तथा परंपरा में शुद्ध घी का भोग अर्पित करने का विधान है।।

जातक नवरात्रि के प्रथम दिन, जो घटस्थापना का दिन होता है, माँ शैलपुत्री की पूजा विशेष श्रद्धा से कर सकते हैं। साथ ही सोमवार के दिन देवी का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है। नवरात्रि का आरंभ इन्हीं देवी की पूजा से होता है। इसलिए इस राशि के साधक इस दिन अपने संकल्प को भी विशेष रूप से दृढ़ बना सकते हैं।।

सिंह राशि, माँ कूष्मांडा की उपासना।। Leo, Worship Of Maa Kushmanda.

मित्रों, सिंह राशि का स्वामी सूर्य ग्रह माना जाता है। इसीलिए इस राशि के जातकों के लिए माँ कूष्मांडा की उपासना का सुझाव दिया जाता है। मान्यता है कि माँ कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। तथा वे सूर्य-लोक में निवास करती हैं। सूर्य तेज, आत्मविश्वास तथा नेतृत्व का कारक ग्रह बताया गया है। इसीलिए तेज की प्रतीक इन देवी की उपासना सिंह राशि के जातकों के लिए विशेष मानी जाती है। इनका मंत्र है, “ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः”। तथा परंपरा में मालपुए अथवा कुम्हड़े का भोग अर्पित किया जाता है।।

जातक नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा की पूजा श्रद्धा से कर सकते हैं। साथ ही वैसे भी रविवार के दिन भी देवी माता कुष्मांडा का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है। इस उपासना के साथ अहंकार से दूर रहकर विनम्रता बनाए रखने का संकल्प लेना चाहिए। क्योंकि सच्चा तेज वही होता है, जो दूसरों को प्रकाश देता है, उन्हें दबाता नहीं।।

धनु तथा मीन राशि, माँ कात्यायनी की उपासना।। Sagittarius And Pisces, Worship Of Maa Katyayani.

मित्रों, धनु तथा मीन राशि का स्वामी गुरु ग्रह माना जाता है। इसीलिए इन राशियों के जातकों के लिए माँ कात्यायनी की उपासना का सुझाव दिया जाता है। माँ कात्यायनी ऋषि कात्यायन की पुत्री मानी जाती हैं। तथा उन्हें धर्म, विवेक एवं विजय की देवी कहा गया है। गुरु ग्रह ज्ञान, धर्म तथा शुभता का कारक माना गया है। इसीलिए विवेक की प्रतीक इन देवी की उपासना इन राशियों के लिए विशेष मानी जाती है। इनका मंत्र है, “ॐ देवी कात्यायन्यै नमः”। तथा परंपरा में शहद का भोग अर्पित किया जाता है।।

ये जातक नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा श्रद्धा से कर सकते हैं। साथ ही गुरुवार के दिन देवी का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है। परंपरा में विवाह की कामना रखने वाली कन्याओं द्वारा भी इन देवी की उपासना की जाती है। यह सनातन धर्म पर पूर्ण श्रद्धा और समर्पण की परंपरा है। तथा किसी भी मनोकामना की पूर्ति के लिए यह श्रद्धा पूर्ण प्रयास तथा धैर्य भी उतना ही आवश्यक है।।

मकर तथा कुंभ राशि, माँ कालरात्रि की उपासना।। Capricorn And Aquarius, Worship Of Maa Kalaratri.

मित्रों, मकर तथा कुंभ राशि का स्वामी शनि ग्रह माना जाता है। इसीलिए इन राशियों के जातकों के लिए माँ कालरात्रि की उपासना का सुझाव दिया जाता है। माँ कालरात्रि का स्वरुप भयंकर दिखाई देता है। परंतु वे सदैव शुभ फल देने वाली तथा भय का नाश करने वाली मानी जाती हैं। इसीलिए उन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है। शनि को अनुशासन तथा कठिन परिश्रम का कारक माना गया है। इसीलिए भय-नाशक इन देवी की उपासना इन राशियों के लिए विशेष मानी जाती है। इनका मंत्र है, “ॐ देवी कालरात्र्यै नमः”। तथा परंपरा में गुड़ का भोग अर्पित किया जाता है।।

ये जातक नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा श्रद्धा से कर सकते हैं। साथ ही शनिवार के दिन देवी का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है। इस उपासना के साथ धैर्य तथा परिश्रम का संकल्प लेना उचित माना जाता है। क्योंकि देवी का यह स्वरूप हमें यह सिखाता है कि भय को पार करने का मार्ग साहस तथा अनुशासन से होकर जाता है।।

महागौरी तथा सिद्धिदात्री, सभी राशियों के लिए।। Mahagauri And Siddhidatri, For All Zodiac Signs.

मित्रों, माँ महागौरी नवदुर्गा का आठवाँ स्वरूप हैं, जिन्हें शुद्धता, शांति तथा पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिषीय परंपरा में इनका संबंध राहु से जोड़ा जाता है। तथा सभी राशियों के लिए इनकी उपासना शुभ मानी जाती है। इनका मंत्र है, “ॐ देवी महागौर्यै नमः”। तथा परंपरा में नारियल का भोग अर्पित किया जाता है। नवरात्रि का आठवाँ दिन, अर्थात अष्टमी, इन्हीं देवी की पूजा तथा कन्या-पूजन का दिन माना जाता है।।

माँ सिद्धिदात्री नवदुर्गा का नौवाँ तथा अंतिम स्वरूप हैं। जिन्हें सिद्धियों को प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। परंपरा में इनका संबंध केतु से जोड़ा जाता है। तथा सभी राशियों के लिए इनकी उपासना शुभ मानी जाती है। इनका मंत्र है, “ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः”। तथा परंपरा में तिल का भोग अर्पित किया जाता है। नवमी के दिन इन्हीं देवी की पूजा के साथ नवरात्रि की साधना का समापन होता है। इसलिए सभी साधकों को इस दिन अवश्य ही श्रद्धा से इनका पूजन करना चाहिए।।

उपासना के सामान्य नियम।। General Rules Of Worship.

मित्रों, राशि के अनुसार देवी की उपासना करते समय भी वही सामान्य नियम लागू होते हैं। जो नवरात्रि की किसी भी पूजा में माने जाते हैं। साधक को प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा-स्थान को शुद्ध रखना चाहिए तथा सात्विक आहार का पालन करना चाहिए। देवी के समक्ष दीपक जलाकर, संकल्प लेकर, उनके मंत्र का श्रद्धा से जप करना चाहिए। मंत्र की संख्या अपनी क्षमता के अनुसार निर्धारित करनी चाहिए। तथा जो संख्या तय की जाए, उसे नौ दिनों तक निभाना चाहिए।।

यदि कोई साधक अपनी राशि का निर्धारण नहीं जानता अथवा उसके विषय में असमंजस में है। तो उसे अपने जन्म-कुंडली के चंद्र राशि के आधार पर ही निर्णय लेना चाहिए। क्योंकि परंपरा में नाम-राशि अथवा चंद्र-राशि को ही सामान्यतः प्रमुखता दी जाती है।।

किसी भी प्रकार के संशय की स्थिति में किसी विद्वान ज्योतिषी अथवा आचार्य से परामर्श लेना उचित है। परंतु जिन्हें किसी विशेष स्वरूप में अधिक श्रद्धा हो, वे निःसंकोच उसी की उपासना कर सकते हैं।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, नवदुर्गा के नौ स्वरूपों का वर्णन देवी-परंपरा के ग्रंथों तथा दुर्गा-सप्तशती से जुड़ी उपासना-पद्धति में मिलता है। इन्हीं नौ स्वरूपों की क्रमशः पूजा नवरात्रि के नौ दिनों में की जाती है। यह परंपरा देवी भागवत पुराण तथा सप्तशती-आधारित अनुष्ठानों में श्रद्धा के साथ निभाई जाती रही है।।

नवदुर्गा तथा नवग्रहों के बीच संबंध, तथा राशि के अनुसार देवी-स्वरूप की उपासना का क्रम, मुख्यतः ज्योतिषीय एवं लोक-परंपरा में विकसित हुई मान्यता है। इसके विषय में विभिन्न विद्वानों तथा क्षेत्रों में कुछ भिन्नता भी मिलती है। इसलिए इसे एक सहायक मार्गदर्शन के रूप में अपनाना उचित है। तथा अंतिम निर्णय अपनी श्रद्धा, कुल-परंपरा तथा आचार्य के परामर्श के अनुसार लेना चाहिए।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

प्रश्न 1. राशि के अनुसार माँ दुर्गा के स्वरूप का चयन किस आधार पर किया जाता है।। On What Basis Is The Form Of Maa Durga Chosen According To Zodiac Sign.

उत्तर:- राशि के स्वामी ग्रह को आधार बनाकर, उस ग्रह से संबंधित नवदुर्गा-स्वरूप की उपासना का सुझाव परंपरा में दिया जाता है।।

प्रश्न 2. मेष राशि वालों को किस देवी की उपासना करनी चाहिए।। Which Goddess Should Aries Natives Worship.

उत्तर:- मेष तथा वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए परंपरा में इनके लिए माँ ब्रह्मचारिणी की उपासना का सुझाव दिया जाता है।।

प्रश्न 3. सभी राशियों के लिए कौन-से देवी-स्वरूप की उपासना शुभ मानी जाती है।। Which Goddess Forms Are Considered Auspicious For All Signs.

उत्तर:- माँ महागौरी तथा माँ सिद्धिदात्री की उपासना सभी राशियों के लिए सामान्य रूप से शुभ मानी जाती है।।

प्रश्न 4. क्या अपनी राशि के अनुसार बताई गई देवी की ही उपासना करना आवश्यक है।। Is It Necessary To Worship Only The Goddess Mentioned For One’s Zodiac Sign.

उत्तर:- नहीं, यह कोई अनिवार्य नियम नहीं है। नवरात्रि में सभी स्वरूपों की उपासना कल्याणकारी मानी जाती है। तथा जिस स्वरूप में अधिक श्रद्धा हो, उसकी भी उपासना की जा सकती है।।

प्रश्न 5. राशि का निर्धारण किस आधार पर करना चाहिए।। On What Basis Should The Zodiac Sign Be Determined.

उत्तर:- सामान्यतः जन्म-कुंडली की चंद्र राशि अथवा नाम-राशि को आधार माना जाता है। संशय होने पर किसी विद्वान ज्योतिषी से परामर्श लेना उचित है।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, राशि के अनुसार माँ दुर्गा की उपासना की परंपरा श्रद्धा को एक दिशा देने का सुंदर माध्यम है। मेष-वृश्चिक के लिए माँ ब्रह्मचारिणी, वृषभ-तुला के लिए माँ चंद्रघंटा, मिथुन-कन्या के लिए माँ स्कंदमाता, कर्क के लिए माँ शैलपुत्री, सिंह के लिए माँ कूष्मांडा, धनु-मीन के लिए माँ कात्यायनी तथा मकर-कुंभ के लिए माँ कालरात्रि, तथा सभी के लिए माँ महागौरी एवं माँ सिद्धिदात्री। इस प्रकार यह क्रम साधक को उसके स्वभाव से जुड़ी देवी-शक्ति की ओर उन्मुख करता है।।

और यहाँ मैं यही कहूँगा कि राशि कोई भी हो, माँ का आशीर्वाद सभी संतानों के लिए समान रूप से उपलब्ध है। परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि अपनी राशि, कुंडली तथा कुल-परंपरा के अनुसार विशेष उपासना-विधि के निर्धारण हेतु किसी विद्वान, योग्य, अनुभवी ज्योतिषी अथवा आचार्य से परामर्श अवश्य लें। ताकि यह पावन साधना पूर्ण श्रद्धा तथा सही मार्गदर्शन के साथ संपन्न हो सके।।

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