
हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,
मित्रों, आज हम बात करेंगे किसी भी जन्म कुंडली के दूसरे भाव में बैठे हुए राहु के शुभ-अशुभ फल के विषय में । वैसे तो राहु एक छाया ग्रह माना जाता है । परंतु जन्म कुंडली में यह जिस स्थान या जिस राशि पर बैठता है उसी भावेश या राशिश के अनुसार या उसके स्वभाव के अनुसार राहू भी शुभाशुभ फल जातक को प्रदान करता है ।।
परंतु प्राकृतिक रूप से राहु अगर कुंडली के तीसरे भाव में बैठा हो तो किस प्रकार का फल देगा इस विषय में आज हम विस्तृत चर्चा करेंगे । तीसरे भाव में बैठा राहु जातक के लिये समाज में अच्छा मान-सम्मान दिलानेवाला होगा । बहुत जल्दी उसकी बराबरी में कोई खड़ा रहनेवाला नहीं होता है ।।
यहाँ बैठा राहू स्वयं के लिये तो बहुत अच्छा होगा, परंतु अपने भाइयों के लिए बहुत लाभदायक साबित नहीं होता है । ऐसे जातकों के सभी स्वप्न साकार होते हैं । ऐसे लोग जोरदार दूरदर्शिता रखने वाले होते हैं । तलवार से भी अधिक उसकी कलम धारदार होती है । ऐसा जातक दीर्धजीवी और धनवान होता है ।।
ऐसे राहु का कुछ शुभ एवं अशुभ प्रभाव भी होते हैं जैसे बाईस वर्ष की आयु में जातक का भाग्योदय होता है । उसके बालक सुखी और समृद्ध होते हैं । ऐसा जातक एक प्रभावी लेखक होने की क्षमता रखता है । परन्तु चन्द्रमा यदि नीच का हो तो जातक के लिए कष्टदायक परिस्थितियाँ निर्मित हो जाती है । शुक्र यदि शुभ स्थान में बैठा हो तो ससुराल पक्ष में धन संपत्ति में वृद्धि होती हुई देखी जा सकती है ।।
यदि ऐसी स्थिति हो तो शभ फल की प्राप्ति हेतु यह उपाय कर सकते हैं । शरीर पर चाँदी का कोई आभूषण पहनना चाहिये । 400 ग्राम हरा धनिया बहते जल में प्रवाहित करें । 400 ग्राम बादाम बहते जल में प्रवाहित करना चाहिये । इससे शुभ फल के प्राप्ति की सम्भावना बढ़ जाती है ।।

