बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।
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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 13 अगस्त 2026 दिन गुरुवार।।
मित्रों, तारीख 13 अगस्त 2026 दिन गुरुवार को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। आज से समस्त [अर्थात गुजरात औ महाराष्ट्र तथा दक्षिण भारत में भी] सनातनियों का अभीष्ट श्रावण मास आरम्भ होता है। लिखा है:- श्रीविष्णुशिवात्मिकाभिषेकारम्भः अर्थात आज से एक साथ भगवान श्रीविष्णु और भगवान श्रीशिव दोनों का अभिषेक करना आरम्भ हो जाता है। आज से गुरु देवता अर्थात बृहस्पति ग्रह का बालत्व निवृत्त हो जायेगा। आज यायीजययोग भी है। आप सभी सनातनियों को “श्रीविष्णु+श्रीशिव के अभिषेक” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आप का आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।
वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

आज का पञ्चांग 13 अगस्त 2026 दिन गुरुवार।।
Aaj ka Panchang 13 August 2026.
विक्रम संवत् – 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.
शक – 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल – याम्य.
ऋतु – ग्रीष्म.
मास – श्रावण.
पक्ष – कृष्ण.
गुजराती पंचांग के अनुसार – आषाढ़ कृष्ण पक्ष.
Panchang 13 August 2026
तिथि – प्रतिपदा 20:43 PM बजे तक उपरान्त द्वितीया तिथि है।।
नक्षत्र – आश्लेषा 06:07 AM तक उपरान्त मघा नक्षत्र है।।
योग – वरियान 12:17 PM तक उपरान्त परिघ योग है।।
करण – किन्स्तुघ्न 09:52 AM तक उपरान्त बव 20:43 PM तक उपरान्त बालव करण है।।
चन्द्रमा – कर्क राशि पर 06:07 AM तक उपरान्त सिंह राशि पर।।
सूर्य – कर्क राशि एवं आश्लेषा नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:18:27
मुम्बई सूर्यास्त – सायं 19:07:06
वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 05:31:39
वाराणसी सूर्यास्त – सायं 18:29:45
राहुकाल (अशुभ) – सुबह 14:19 बजे से 15:56 बजे तक।।
विजय मुहूर्त (शुभ) – दोपहर 12.31 बजे से 12.55 बजे तक।।
Panchang 13 August 2026
प्रतिपदा तिथि विशेष – प्रतिपदा तिथि को कद्दू एवं कूष्माण्ड का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। प्रतिपदा तिथि वृद्धि देनेवाली अर्थात किसी भी कार्य को अथवा कार्यक्षेत्र को बढ़ाने वाली तिथि मानी जाती है। साथ ही प्रतिपदा तिथि सिद्धिप्रद अर्थात कोई भी कार्य को निर्विघ्नता पूर्वक चरम तक पहुंचाने अर्थात सिद्धि तक पहुंचाने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देवता को बताया गया है। यह प्रतिपदा तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। आज प्रतिपदा तिथि को इस अनुष्ठान से अग्निदेव से अद्भुत तेज प्राप्त करने के लिए भी आज का यह उपाय कर सकते हैं। साथ ही आज किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति भी इस अनुष्ठान के माध्यम से अग्निदेव से करवायी जा सकती हैं। इसके लिए आज अग्नि घर पर ही प्रज्ज्वलित करके गाय के शुद्ध देशी घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये।।
मित्रों, यह प्रतिपदा तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी मानी जाती है। आज अग्निदेव से धन एवं तेज प्राप्त करने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति करवायी जा सकती हैं। इसके लिए आज अग्नि घर पर ही प्रज्ज्वलित करके घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये। यदि प्रतिपदा तिथि रविवार या मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा प्रतिपदा तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय शुभ कार्य करने की सलाह दी जाती है। सनातनी पञ्चांगों के अनुसार भाद्रपद माह की प्रतिपदा शून्य होती है। वहीं शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा में भगवान शिव का पूजन नहीं करना चाहिए क्योंकि शिव का वास श्मशान में होता है। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा में भगवान शिव का पूजन नहीं करना चाहिए क्योंकि शिव का वास श्मशान में होता है। परन्तु कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा में भगवान शिव का पूजन करना चाहिए। शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि में विवाह, यात्रा, उपनयन, चौल कर्म, वास्तु कर्म व गृह प्रवेश आदि मॉगलिक कार्य नहीं करने चाहिए।।
मित्रों, ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म प्रतिपदा तिथि में होता है वह व्यक्ति अनैतिक कार्यों में संलग्न रहने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति कानून के विरूद्ध जाकर काम करने वाला भी होता है। ऐसे लोगों को मांस मदिरा काफी पसंद होता है अर्थात ये तामसी भोजन के शौकीन होते हैं। आम तौर पर इनकी दोस्ती ऐसे लोगों से होती है जिन्हें समाज में सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता अर्थात बदमाश और ग़लत काम करने वाले लोग। कृष्ण पक्ष प्रतिपदा को जन्मा जातक धनी एवं बुद्धिमान होगा। उन पर माता की विशेष कृपा दृष्टि बनी रहती है। जातक चंद्रमा के बलवान होने के कारण मानसिक रूप से भी बलवान होते हैं। वहीं दूसरी ओर शुक्ल पक्ष प्रतिपदा में जन्मा जातक बुरी लोगों की संगति में पड़कर बुरी आदतों के शिकार हो सकते हैं। उनके द्वारा किए गए कार्य कभी कभार उनके परिवार को ही हानि पहुंचा सकते हैं। इसके विपरीत कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा में आप शुभ कार्य कर सकते हैं।।
Panchang 13 August 2026
मघा नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म मघा नक्षत्र में हुआ है तो आप ठिगने कद के साथ सुदृढ वक्षस्थल और मजबूत जंघाओं के मालिक हैं। आपकी वाणी थोड़ी कर्कश एवं गर्दन थोड़ी मोटी हो सकती है। मघा नक्षत्र में जन्म लेने वालों की आँखें विशेष चमक लिए हुए होती हैं। चेहरा शेर के समान भरा हुआ एवं रौबीला होता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति प्रायः अपने पौरुष और परुशार्थ के प्रदर्शन के लिए सदा ललायित रहते हैं। मघा नक्षत्र के जातकों को अपने रौबिलेपन को बढाने के लिए शानदार मूंछे रखने का शौक होता है।।
ऐसे लोग थोडा अभिमानी भी होते है और इसीलिए किसी की छोटी से छोटी बात पर भी शीघ्र ही नाराज़ भी हो जाते हैं। नाराज़गी में सामने वाले को नीचा दिखाने के लिए अपनी बलशाली शक्ति और मर्दानगी का दुरूपयोग करने से भी नहीं हिचकिचाते। मघा नक्षत्र में जन्मा व्यक्ति परम तेजस्वी होता है। आप स्वभाव से बहुत धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं। देवताओं और पितरों को पूजे बिना कोई कार्य आरम्भ नहीं करते हैं।।
मघा नक्षत्र में जन्मी कन्याएं बहुमूल्य पकवान बनाना पसंद करती हैं। स्वादिष्ट पकवान एवं सुंदर और आकर्षक वस्त्रों की शौक़ीन होती हैं। मघा नक्षत्र की महिलाएं हर प्रकार के सुख सुविधा का भोग करती हैं। माता पिता और बड़ों का आदर सम्मान प्राकृतिक रूप से आपके व्यवहार में ही होता है। परन्तु ऐसी जातिकाएं ईश्वर और पितरों से डरने वाली होती है।।
मघा नक्षत्र में जन्मे लोगों की आयु यदि लम्बी हो तो जातक अत्यधिक धनवान होता है। परन्तु ऐसे लोगों को हार्ट अटैक, फ़ूड पोइस्निंग, पीठ का दर्द, किडनी सम्बन्धी समस्याएं होने की संभावनायें होती हैं।।
प्रथम चरण:- मघा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी मंगल हैं। यहाँ लग्न स्वामी, नक्षत्र स्वामी और नक्षत्र चरण स्वामी सभी में परम शत्रुता होती है। इसलिए मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा व्यक्ति अल्प पुत्र अर्थात संतति वाला होता है। लग्न बलि न हो तो जातक का विकास कार्य रुका हुआ रहता है। साथ ही सूर्य की दशा कमज़ोर फल देने वाली होती है।।
द्वितीय चरण:- मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शुक्र हैं। मघा नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्मा व्यक्ति तेजस्वी पुत्र अर्थात संतति वाला होता है। लग्नेश सूर्य की दशा उत्तम फलदायी होती है। मंगल की दशा भाग्योदय कारक होती है एवं शुक्र की दशा में पराक्रम बढता है।।
तृतीय चरण:- मघा नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी बुध हैं। मघा नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मा व्यक्ति प्रायः रोगी होता है। जातक को संक्रामक रोग शीघ्र ही पकड लेते हैं। लग्नेश सूर्य की दशा उत्तम फलदायी होती है। मंगल की दशा भाग्योदय कारक होती है एवं धन प्राप्ति के योग बुध की दशा में प्रबल बनेंगे।।
चतुर्थ चरण:- मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी सूर्य हैं। मघा नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मा व्यक्ति अपने क्षेत्र का विद्वान् पंडित होता है। लग्नेश सूर्य की दशा उत्तम फल फलदायी होती है। मंगल की दशा भाग्योदय कारक होती है।।
Panchang 13 August 2026
गुरुवार शॉपिंग के लिये अच्छा दिन माना जाता है।।
गुरुवार का विशेष – गुरुवार के दिन तेल मर्दन करने से धन एवं यश की हानि होती है – (मुहूर्तगणपति)।।
गुरुवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से तथा सर के बाल धोना, कपड़े धुलना अथवा धोबी के घर डालना, घर-आँगन की गोबर आदि से लिपाई करना इस प्रकार के कार्य नहीं करने चाहियें इससे धन एवं पूण्य की हानी होती है और लक्ष्मी घर छोड़कर चली जाती है।। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति का कारक ग्रह होता है। साथ ही बृहस्पति ही संतान का कारक ग्रह भी होता है। इसलिये बृहस्पति ग्रह अकेले ही स्त्री के संतान और पति दोनों के जीवन को प्रभावित करता है। अतः बृहस्पतिवार को सिर धोना बृहस्पति को कमजोर बनाता है जिससे कि बृहस्पति के शुभ प्रभाव में कमी आती है। इसी कारण से इस दिन बाल धोना या कटवाना भी नहीं चाहिए। इसका असर संतान और पति के जीवन पर पड़ता है और उनकी उन्नति बाधित होती है।।
वास्तु अनुसार घर के ईशान कोण का स्वामी गुरु होता है। ईशान कोण का संबंध परिवार के नन्हे सदस्यों यानी कि बच्चों से होता है। साथ ही घर के पुत्र संतान का संबंध भी इसी कोण से ही होता है। ईशान कोण धर्म और शिक्षा की दिशा है इसलिये घर में शुद्ध वजन वाले कपड़ों को धोना, कबाड़ घर से बाहर निकालना, घर को धोना या पोछा लगाना इत्यादि घर के ईशान कोण को कमजोर करता है। उससे घर के बच्चों, पुत्रों, घर के सदस्यों की शिक्षा, धर्म आदि पर गुरु का शुभ प्रभाव कम होता है।।
Panchang 13 August 2026
गुरुवार भगवान लक्ष्मी नारायण का दिन होता है। इसलिये इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से जीवन में अपार खुशियाँ आती है। इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से पति-पत्नी के बीच कभी दूरियाँ नहीं आती है साथ ही धन की वृद्धि भी होती है। जन्मकुंडली में गुरु ग्रह के प्रबल होने से उन्नति के रास्ते आसानी से खुलते हैं। परन्तु यदि गुरु ग्रह को कमजोर करने वाले कार्य किए जाए तो प्रमोशन होने में भी रुकावटें आती है।।
गुरुवार को गुरु ग्रह को कमजोर किए जाने वाले काम करने से धन की वृद्धि रुक जाती है। जैसे – सिर के बाल धोना, भारी कपड़े धोना, बाल कटवाना, शेविंग करवाना, शरीर के बालों को साफ करना, फेशियल करवाना, नाखून काटना, घर से मकड़ी के जाले साफ करना, घर के उन कोनों की सफाई करना जिन कोनों की रोज सफाई नहीं की जाती हो। ये सभी काम गुरुवार को करने से धन हानि होता है तथा तरक्की रुक जाती है।।
दिशाशूल – गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खा कर यात्रा कर सकते है।।
गुरुवार के दिन ये विशेष उपाय करें – गुरु धन एवं प्रतिष्ठा का कारक ग्रह होता है। जिस व्यक्ति पर गुरु की कृपा होती है उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है। गुरुवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान ध्यान करें और घी का दीप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें बिगड़े काम भी बन जायेंगे।।
Panchang 13 August 2026
बृहस्पतिवार को जिनका जन्म होता है, वह व्यक्ति विद्या एवं धन से युक्त होता है अर्थात ये ज्ञानी और धनवान होते हैं। ये विवेकशील होते हैं और शिक्षण को अपना पेशा बनाते हैं। ये लोगों के सम्मुख आदर और सम्मान के साथ प्रस्तुत होते हैं तथा उच्च स्तर के सलाहकार भी होते हैं। गुरुवार में जन्मे जातक सभ्य, खिलते रंग के, सुशील एवं मधुर स्वभाव के होते हैं तथा धर्म के प्रति सचेत होते हैं।।
ये सभी सद्गुणों से संपन्न होने के वजह से किसी के साथ विश्वासघात नहीं करते हैं। ऐसे लोग किसी का हक नहीं मारते तथा न्याय के प्रति सजग होते हैं। यह सफल राजनीतिज्ञ, न्यायधीश, क्लर्क, प्रकाशक एवं धर्मगुरु आदि के रूप में सफल होते हैं। गुरुवार को जन्मं लेने वाले व्यसक्ति बेहद मिलनसार और मधुर स्वभाव के होते हैं। ये जीवन को उत्सफव की तरह जीते हैं इसलिए हमेशा खिले-खिले रहते हैं।।
ऐसे व्यक्ति धर्म में विशेष रुचि रखने वाले होते हैं। धार्मिक प्रवृत्ति के कारण ये कभी किसी के साथ विश्वाससघात नहीं कर सकते हैं। यह किसी का हक भी नहीं मारते, न्याय के प्रति सजग होते हैं। इनको अपने जीवन में सफलता हेतु धर्मगुरु, राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लेखक, प्रकाशक एवं न्यायधीश आदि के क्षेत्र में भाग्य आजमाना चाहिये। इनका शुभ दिन मंगलवार और बृहस्पितिवार तथा शुभ अंक 4 होता है।।
आज का विचार – मित्रों, हम अपनी पिछली गलतियों से सबक लेकर अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। परन्तु याद रहे कि होशियार लोग अपनी गलती से लेते हैं, जबकि ज्यादा होशियार लोग दूसरों की गलतियों से गलतियों को दुहराना सीखते हैं। इसलिये अपनी गलतियों को सुधारना ही व्यक्ति में इंसानियत लाता है।।
Panchang 13 August 2026
जन्मकुण्डली के अनुसार आपके जीवन में धन कैसे और कब आयेगा?।।…. आज के इस लेख को पूरा पढने के लिये इस लिंक को क्लिक करें….. वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें:
