बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।
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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 31 अगस्त 2026 दिन सोमवार।।
मित्रों, तारीख 31 अगस्त 2026 दिन सोमवार को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। आज संकष्टी (बहुला) श्रीगणेशचतुर्थी का पावन व्रत है। इस चतुर्थी को कही-कहीं हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इसे सामान्य भाषा में गणेश चौथ के नाम से भी जाना जाता है। आज श्रीगणेश चतुर्थी यह पावन व्रत सनातनी स्त्रियाँ अपने पुत्रों के दीर्घायु हेतु दिन भर अखण्ड उपवास रखकर, सायंकाल में भगवान श्रीगणेश जी की पुजा करने के बाद चन्द्रमा देवता के निकलने (चंद्रोदय:- रात्रि 21:28 PM बजे) पर उन्हें देखकर अर्घ्य देकर ही व्रत खोलती हैं। आज विशालाक्षी यात्रा तृतीया भी है। आज कज्जली (कजरी) का पावन व्रत भी है। आज का दिन कजरी तीज के रूप में अत्यंत प्रसिद्ध है। विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में विवाहित एवं अविवाहित महिलाएँ भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा कर अखण्ड सौभाग्य, सुखी दाम्पत्य तथा परिवार की समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। आज गौपूजा तृतीया का पावन उत्सव भी है। आज गाय माता को अलंकार-श्रृंगार करके उनकी पूजा किया जाता है। आज सूर्य देवता मघा नक्षत्र से चलकर पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में (सायं 07:19 PM बजे) चले जायेंगे। इसका विवरण इस प्रकार है:- स्त्री. पु.-सू.चं. योग, खर (गदहा) की सवारी है। जिसका स्वामी मंगल है, अग्नि नाड़ी है और सामान्य वर्षा का योग है। आज से पंचक अर्थात पचखा की निवृत्ति हो जाएगी। आज यायिजययोग है। आप सभी सनातनियों को “कजरी व्रत एवं संकष्टी (बहुला) श्रीगणेश चतुर्थी के पावन व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आपका आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।
वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

आज का पञ्चांग 31 अगस्त 2026 दिन सोमवार।।
Aaj ka Panchang 31 August 2026.
विक्रम संवत् – 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.
शक – 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल – याम्य.
ऋतु – वर्षा.
मास – भाद्रपद.
पक्ष – कृष्ण.
गुजराती पंचांग के अनुसार – श्रावण कृष्ण पक्ष.
#Panchang_31_August_2026
तिथि – तृतीया 08:52 AM बजे तक उपरान्त चतुर्थी तिथि है।।
नक्षत्र – उत्तराभाद्रपद 03:46 AM तक उपरान्त रेवती नक्षत्र है।।
योग – शूल 03:46 AM तक उपरान्त गंड योग है।।
करण – विष्टि 08:52 AM तक उपरान्त बव 20:20 PM तक उपरान्त बालव करण है।।
चन्द्रमा – मीन राशि पर।।
सूर्य – सिंह राशि एवं मघा नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:23:16
मुम्बई सूर्यास्त – सायं 18:53:11
वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 05:43:41
वाराणसी सूर्यास्त – सायं 18:17:37
राहुकाल (अशुभ) – सुबह 07:57 बजे से 09:31 बजे तक।।
विजय (शुभ) मुहूर्त – दोपहर 12.26 बजे से 12.50 बजे तक।।
#Panchang_31_August_2026
तृतीया तिथि विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है।।
तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।।
मित्रों, तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है। इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है। ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है। इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।।
#Panchang_31_August_2026
रेवती नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म रेवती नक्षत्र में हुआ है तो आप एक माध्यम कद और गौर वर्ण के व्यक्ति होंगे। रेवती नक्षत्र में जन्मे जातकों के व्यक्तित्व में संरक्षण, पोषण और प्रदर्शन प्रमुख होते है। आप एक निश्चल प्रकृति के व्यक्ति होंगे जो किसी के साथ छल कपट करने में स्वयं डरता है। परंतु आप को क्रोध शीघ्र ही आ जाता है।।
किसी की ज़रा सी विपरीत बात आपसे सहन नहीं होती है। क्रोध में आप आत्म नियंत्रण भी खो देते हैं। परन्तु क्रोध जितनी जल्दी आता है उतनी जल्दी चला भी जाता है। साहसिक कार्य और पुरुषार्थ प्रदर्शन की आपको ललक सदा ही रहती है। आध्यात्मिक होते हुए भी आपका दृष्टिकोण व्यवहारिक होगा। आप किसी भी बात को मानने से पहले भली भाँती जांचते हैं।।
यही दृष्टिकोण आपका अपने मित्रों और सम्बन्धियों के साथ भी रहेगा। आप आँख बंद करके किसी पर भी भरोसा नहीं करेंगे। आप एक बुद्धिमान परन्तु मनमौजी व्यक्ति होंगे जो स्वतंत्र विचारधारा में विश्वास रखता है। आप परिवार से जुड़े हुए व्यक्ति होंगे जो दूसरों की मदद के लिए सदा तैयार रहते हैं। आपके जीवनकाल में विदेश यात्राओं की संभावनाएं प्रबल होंगी।।
रेवती नक्षत्र में पैदा हुए जातक संवेदनशील होते हैं इसलिए शीघ्र ही भावुक हो जाते हैं। आप सिद्धांतों और नैतिकता पर चलने वाले व्यक्ति होंगे जो सबसे अधिक अपनी आत्मा की सुनना और उसी पर चलना भी पसंद करता है। आप किसी भी निर्णय पर पहुँचने से पहले सभी तथ्यों के बारे में जान लेना आवश्यक समझते हैं, और निर्णय लेने के उपरान्त बदलते नहीं हैं।।
बाहरी दुनिया के लिए आप एक जिद्दी और कठोर स्वभाव के व्यक्ति होंगे। परन्तु जीवन में कई बार आप कठिनाईयों से घबराए एवं हारे हुये लगेंगे। इश्वर में पूर्ण आस्था के कारण आप जीवन में सभी अडचनों को साहस के साथ पार कर लेंगे। अपनी कुशाग्र बुद्धि के कारण आप किसी भी प्रकार के कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के योग्य होंगे।।
रेवती नक्षत्र के जातकों को सरकारी नौकरी, बैंक, शिक्षा, लेखन, व्यापार, ज्योतिष एवं कला के क्षेत्र में कार्य करते देखा गया है। अपने जीवन के 23वें वर्ष से 26वें वर्ष तक आप अनेक सकारात्मक परिवर्तन देखेंगे। परन्तु 26वें वर्ष के बाद का समय कुछ रुकावटों भरा होगा जो कि 42वें वर्ष तक चलेगा। 50वें वर्ष के उपरान्त आपके जीवन में स्थिरता, संतुष्टि एवं शांति का अनुभव होगा।।
अपने स्वतंत्र विचारों और स्वभाव के कारण अपने कार्यों में किसी का हस्तक्षेप आपको कतई पसंद नहीं होगा। और न ही आप किसी क्षेत्र में स्थिर होकर कर कार्य कर पाते हैं। अपने बदलते कार्यक्षेत्रों के कारण आपको अपने परिवार से भी दूर रहना पड़ सकता है। अपने कार्यों के प्रति निष्ठा और परिश्रम के कारण आप करियर की ऊँचाईयों तक पहुंच जाते हैं।।
परन्तु मेहनत के अनुरूप जीवन में अपेक्षित मान-सम्मान और पहचान नहीं मिल पाती है। अपने जीवन में रेवती नक्षत्र के जातकों को माता पिता का सहयोग कभी नहीं प्राप्त होता है। यही नहीं आपके करीबी मित्र या रिश्तेदार भी कष्ट के समय आपके साथ नहीं होते हैं। परन्तु आपका दाम्पत्य जीवन बहुत खुशहाल होगा।।
विवाह के उपरान्त आपका जीवन साथी आपके साथ हर प्रकार से सहयोग करेगा तथा आपका जीवन सुखमय और आनंदित रहेगा। रेवती नक्षत्र के जातकों का प्रमुख लक्षण उनका साहस एवं सदव्यहार होता है। रेवती नक्षत्र के जातकों को बुखार, मुख, कान और आंतड़ियों से सम्बंधित रोग होने की संभावनाएं होती हैं।।
प्रथम चरण:- रेवती नक्षत्र के देवता पूषा हैं तथा नक्षत्र स्वामी बुध है। इस रेवती नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी गुरु हैं। रेवती नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा जातक ज्ञानी होता है। लग्न नक्षत्र स्वामी बुध, नक्षत्र चरण स्वामी से शत्रुता रखता है। अतः गुरु की दशा अत्यंत शुभ फल देती है। गुरु की दशा में जातक को पद प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है एवं यह दशा जातक के लिए स्वास्थ्य वर्धक रहेगी। बुध की दशा माध्यम फल देनेवाली होती है।।
द्वितीय चरण:- रेवती नक्षत्र के देवता पूषा हैं तथा नक्षत्र स्वामी बुध है। इस नक्षत्र के दूसरे चरण का स्वामी शनि हैं। रेवती नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्मे जातक की रूचि तस्करी में होती है। नक्षत्र चरण के स्वामी शनि से लग्नेश गुरु शत्रुता रखता है तथा नक्षत्र स्वामी बुध की भी गुरु से शत्रुता है। अतः गुरु और शनि की दशा माध्यम फलदायी होती है। तथा बुध की दशा अत्यंत शुभ फल देती है। बुध की दशा में गृहस्थ सुख एवं भौतिक उपलब्धियां प्राप्त होंगी।।
तृतीय चरण:- रेवती नक्षत्र के देवता पूषा हैं तथा नक्षत्र स्वामी बुध है। इस नक्षत्र के तीसरे चरण का स्वामी शनि हैं। रेवती नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मा जातक कोर्ट कचेहरी के मुकदमे अथवा वाद विवाद में सदैव विजयी होता है। नक्षत्र चरण स्वामी शनि लग्नेश गुरु का शत्रु है परन्तु बुध से शनि की मित्रता है। अतः गुरु की दशा मध्यम परन्तु शनि की दशा उत्तम फल देती है। बुध की दशा में गृहस्थ सुख एवं भौतिक उपलब्धियां प्राप्त होंगी।।
चतुर्थ चरण:- रेवती नक्षत्र के देवता पूषा हैं तथा नक्षत्र स्वामी बुध है। इस नक्षत्र के चौथे चरण का स्वामी गुरु हैं। रेवती नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मा जातक सदैव गृह कलेश में ही उलझा रहता है। लग्नेश और नक्षत्र चरण स्वामी दोनों ही गुरु हैं अतः गुरु की दशा में जातक को अति उत्तम फलों की प्राप्ति होती है। गुरु की दशा में जातक पद प्रतिष्ठा की प्राप्ति करेगा। गुरु की नक्षत्र स्वामी बुध में परस्पर शत्रुता है। अतः बुध की दशा जातक के लिए माध्यम फलदायी होती है।।
#Panchang_31_August_2026
सामान्यतया सोमवार शॉपिंग के लिए अच्छा दिन माना जाता है।।
सोमवार का विशेष – सोमवार के दिन तेल मर्दन अर्थात् तेल मालिश करने से चहरे और शरीर की कान्ति बढ़ती है – (मुहूर्तगणपति)।।
सोमवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से शिव भक्ति की हानि होती है। पुत्रवान पिता को तो कदापि नहीं करना चाहिये। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
दिशाशूल – सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई दर्पण देखकर घर से प्रस्थान कर सकते है।।
सोमवार के दिन ये विशेष उपाय करें – सोमवार को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।
#Panchang_31_August_2026
मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म सोमवार को होता है, वो जातक शांत प्रवृत्ति के गौर वर्ण लिए हुये होते हैं। सोमवार चन्द्र प्रधान दिन होता है, इसलिये इस जातक में कल्पनाशीलता, दया भाव, नम्रता के गुण परिलक्षित होते हैं। माता के प्रिय एवं सद्गुणों से युक्त ये जातक कवि ह्रदय, सफेद वस्तुओं से लाभ पाने वाला, यात्रा का शौकीन, जलाशयों एवं प्रकृति का प्रेमी होता है।।
सोमवार को जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है। इनकी प्रकृति यानी इनका स्वभाव शान्त होता है। इनकी वाणी मधुर और मोहित करने वाली होती है। ये स्थिर स्वभाव वाले होते हैं सुख हो या दु:ख सभी स्थिति में ये समान रहते हैं। धन के मामले में भी ये भाग्यशाली होते हैं तथा इन्हें सरकार एवं समाज से मान-सम्मान मिलता है।।
इस दिन जन्म लेने वाले जातक को पर्यावरण के क्षेत्र में, समुद्र विज्ञान के क्षेत्र में, पानी से जुड़े रोजगार जैसे मत्य् क पालन या मछली का व्यवसाय, पत्थरों का व्यवसाय, कपड़े का व्यंवसाय शुद्ध फलता है। इनके लिए सफेद रंग सदा शुभकारी होता है इसलिए कैरियर के लिहाज से आप जहां भी जायें सफेद रुमाल अपनी जेब में रखें और उस क्षेत्र को ही चुने जिसमें सफेद रंग की प्रधानता हो, जैसे पानी, कपड़ा, फूल, पत्थयर आदि से जुड़ा व्यवसाय।।
आज का सुविचार – मित्रों, जीना हैं, तो उस दीपक की तरह जियो जो बादशाह के महल में भी उतनी ही रोशनी देता हैं जितनी किसी गरीब की झोपड़ी में। जो भाग्य में हैं वह भाग कर आयेगा और जो भाग्य में नही हैं वह आकर भी भाग जायेगा। हँसते रहो तो दुनिया साथ हैं, वरना आँसुओं को तो आँखो में भी जगह नही मिलती।।
#Panchang_31_August_2026
चन्द्रमा द्वारा निर्मित कुछ अतुलनीय धनदायक योग।।…… आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें:
ॐ अथ शिवप्रातः स्मरणस्तोत्रम् – यहाँ क्लिक करें और पढ़ें:
