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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 01 सितम्बर 2026 दिन मंगलवार।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आप का आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।
वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

आज का पञ्चांग 01 सितम्बर 2026 दिन मंगलवार।।
Aaj ka Panchang 01 September 2026.
विक्रम संवत् – 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.
शक – 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल – याम्य.
ऋतु – वर्षा.
मास – भाद्रपद.
पक्ष – कृष्ण.
गुजराती पंचांग के अनुसार – श्रावण कृष्ण पक्ष.
#Panchang_01_September_2026
तिथि – चतुर्थी 07:43 AM बजे तक उपरान्त पञ्चमी तिथि है।।
नक्षत्र – रेवती 03:25 AM तक उपरान्त अश्विनी नक्षत्र है।।
योग – वृद्धि 23:39 PM तक उपरान्त ध्रुव योग है।।
करण – बालव 07:43 AM तक उपरान्त कौलव 19:01 PM तक उपरान्त तैतिल करण है।।
चन्द्रमा – मीन राशि पर 03:25 AM तक उपरान्त मेष राशि पर।।
सूर्य – सिंह राशि एवं पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:23:30
मुम्बई सूर्यास्त – सायं 18:52:19
वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 05:44:49
वाराणसी सूर्यास्त – सायं 01:16:38
राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:46 बजे से 17:20 बजे तक।।
शुभ मुहूर्त – दोपहर 12.26 बजे से 12.50 बजे तक।।
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चतुर्थी तिथि विशेष:- चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी श्रीगणेश जी महाराज को बताया गया है। यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।।
इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज चतुर्थी तिथि में गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।।
मित्रों, ज्योतिष शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।।
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अश्विनी नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- अश्विनी नक्षत्र में जन्मे जातक सामान्यतः सुन्दर, चतुर, सौभाग्यशाली एवं स्वतंत्र विचारों वाले होते हैं। वह पारंपरिक रूढ़ीवादी विचारधारा से विपरीत अपनी आधुनिक सोच के लिए मित्रों में प्रिसिद्ध होते हैं। आप सभी से बहुत प्रेम करने वाले होते हैं परन्तु आप अपने ऊपर किसी का भी दबाव बर्दास्त नहीं करते हैं। आपको स्वतंत्र कार्य करने एवं निर्णय लेने की आदत होती है।।
इसलिए किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप आपको पसंद नहीं होता है। आपकी उन्नति भी स्वतंत्र कार्य करने और स्वतंत्र निर्णय लेने के कारण ही होती है। आप स्वभाव से गुणी, धैर्यवान एवं प्रखर बुद्धि के स्वामी होते हैं। धन ऐश्वर्य से युक्त जीवन में आपको किसी भी प्रकार का अभाव नहीं झेलना पड़ेगा। अपने कार्य के प्रति रुझान और लगन के कारण आप कम उम्र में ही सफलता प्राप्त करते हैं एवं आपका यश और कीर्ति समाज में चारों और फैलता है।।
आप अन्तर्मुखी एवं धैर्यवान होते हैं और जल्द ही किसी की बातों का विश्वास नहीं करते। आपको अपने मनोभाव पर नियंत्रण रखने में कभी-कभी कठिनाई महसूस होती है परन्तु यह आवश्यक भी है। क्रोध आने पर आप किसी की भी नहीं सुनते। आप आत्म नियंत्रण खो बैठते हैं और क्रोध में कई बार अपनी ही हानि करा बैठते हैं। आपको क्रोध जितनी शीघ्रता से आता है उतनी ही तीव्रता से उतर भी जाता है।।
अश्विनी नक्षत्र में जन्मे जातक अक्सर सेक्स के मामलों में उतावले होते हैं। किसी भी स्त्री से मिलने के बाद आप उसके प्रति विशेष रुझान एवं लगाव महसूस करने लगते हैं और यही आपकी सबसे बड़ी कमजोरी है। आप अपने कार्य सज्जनता की उपेक्षा लड़ाई-झगड़े से करवाने में सदा सक्षम रहते हैं। अश्वनी नक्षत्र के जातक साज-सज्जा में अधिक विश्वास रखते हैं। इसलिए सदा ही आकर्षक, महंगी और आरामदायक वस्तुओं में रूचि रखते है।।
अपने जीवन के 30 वर्ष तक आप कई प्रकार के उतार चढ़ाव झेलते हैं। उसके उपरान्त ही आपका आगे बढ़ने का रास्ता साफ़ और सुगम होता है। आप अपने परिवार से बहुत जुड़े हुए रहते हैं परन्तु कुछ परिजन आपके जिद्दीपन के कारण आपको पसंद नहीं करते। पिता की अपेक्षा आपको माता से अधिक सहयोग और प्रेम प्राप्त होता है। 26 से 30 वर्ष की आयु में विवाह संभव है। संतान में पुत्र संतति की संभावना अधिक होगी।।
इस अश्विनी नक्षत्र में जन्मी स्त्रियाँ सुन्दर, धन-धान्य से युक्त, श्रृंगार में रूचि रखने वाली होती हैं। अश्वनी नक्षत्र में जन्मी महिलाएं मीठा बोलती हैं और बहुत अधिक सहनशील भी होती है। माता-पिता की लाडली एवं आज्ञाकारी पुत्री होने के साथ-साथ ईश्वर में भी पूरी आस्था रखती हैं। सदा बड़ों का आदर एवं गुरु का सम्मान करने वाली होती है। अश्वनी नक्षत्र में जन्मी स्त्रियाँ मनोहर छवि वाली एवं बुद्धिशाली होती है।।
अश्विनी नक्षत्र में जन्मे जातक समाज और मित्रों में लोकप्रिय होते हैं। अश्वनी नक्षत्र में जन्मे जातकों के दिमाग से सम्बंधित रोग, मलेरिया एवं चेचक जैसी बीमारियों से ग्रसित होने की संभावनायें अधिक होती हैं।।
प्रथम चरण:- ज्योतिष शास्त्र में अश्विनी नक्षत्र पहला नक्षत्र है। भचक्र में शून्य से 13 अंश 20 कला तक का विस्तार अश्विनी नक्षत्र के अधिकार में आता है। अश्विनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु है। इसके प्रथम चरण का स्वामी ग्रह मंगल हैं। प्रथम चरण में जन्मे जातकों को दूसरों की वस्तुएं उठाने की आदत होती है। जन्म नक्षत्र स्वामी केतु, लग्नेश मंगल का मित्र होने के कारण जातक की मंगल एवं केतु की दशा शुभ फल देंगी। मंगल ग्रह भी शुभ फल देता है।।
द्वितीय चरण:- अश्विनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु है। इसके द्वितीय चरण का स्वामी शुक्र हैं। अश्वनी के द्वितीय चरण में जन्म होने के कारण जातक कड़ी मेहनत से कतरायेगा और छोटे-छोटे अल्प अवधी वाले कार्य करने में रूचि रखेगा। जन्म नक्षत्र स्वामी केतु लग्नेश मंगल का मित्र है और नक्षत्र के चरण का स्वामी शुक्र भी केतु से मित्रता पूर्वक व्यवहार रखता है। इसलिए जातक की मंगल, शुक्र एवं केतु की दशायें भी शुभ फल ही देती हैं।।
तृतीय चरण:- अश्विनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु है। इसके तृतीय इस चरण का स्वामी बुध हैं। शास्त्रों के अनुसार अश्वनी नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मा जातक सुन्दर, धनी एवं ऐश्वर्यशाली होते हैं। मंगल और केतु की दशा अति उत्तम फल देती है। परन्तु नक्षत्र चरण का स्वामी बुध केतु से शत्रु भाव रखता है। इस कारण बुध की दशा में जातक अशांत एवं विचलित रहेगा।।
चतुर्थ चरण:- अश्विनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु है। इसके चतुर्थ चरण का स्वामी चन्द्रमा हैं। शास्त्रों के अनुसार अश्वनी नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मे जातक भोगी एवं दीर्घायु होते है। नक्षत्र स्वामी केतु, लग्नेश मंगल का मित्र है। नक्षत्र चरण स्वामी चन्द्रमा, केतु से शत्रु भाव रखता है। अतः जातक को मंगल एवं केतु की दशा उत्तम फल देती है। परन्तु चन्द्रमा की दशा में जातक अशांत एवं उद्विग्न रहता है।।
#Panchang_01_September_2026
मंगलवार को नए कपड़े न ही खरीदना चाहिये और न ही पहली बार पहनना चाहिए। मंगलवार वाहन एवं भूमि-भवन आदि भी नहीं खरीदना चाहिये।।
मंगलवार का विशेष – मंगलवार के दिन तेल मर्दन (शरीर में तेल मालिश) करने से आयु घटती है – (मुहूर्तगणपति)।।
मंगलवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से भी आयु की हानि होती है।। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।।
मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात दाढ़ी या बाल काटने या कटवाने से उम्र कम होती है। अत: मंगलवार को बाल या दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए। मंगलवार को बजरंगबली की पूजा का विशेष महत्व है।।
मंगलवार को यथासंभव कोशिश करके मंदिर में जाकर हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी/लाल पेड़े या गुड़ और चने का प्रसाद चढ़ाएं। हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत एवं नज़र की बाधा से बचाव होता है साथ ही आपके समस्त शत्रु परास्त होते है।।
मंगलवार के व्रत से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है। मंगलवार को धरती पुत्र मंगलदेव की आराधना करने से जातक को मुक़दमे, राजद्वार में सफलता मिलती है, उत्तम भूमि, भवन का सुख मिलता है, मांगलिक दोष दूर होता है।।
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मंगलवार को जिनका जन्म होता है, वो जातक स्वभाव से उग्र, साहसी, प्रयत्नशील एवं महत्वाकांक्षी होते हैं। इनमें नेतृत्व की क्षमता अन्यों के मुकाबले बहुत शुद्ध होती है। ऐसे लोग जिम्मेदारियों के कार्य में सफल भी होते हैं। खिलाड़ी, पहलवान, सेना तथा पुलिस विभाग में सफल रहते हैं। यह जातक अधिकांशतः रक्तवर्ण या गेहूंआ रंग होता है।।
मंगलवार को जन्म लेनेवाला जातक जटिल बुद्धि वाला होता है। ये किसी भी बात को आसानी से नहीं मानते हैं। ऐसे लोग शक्की किस्म के होते हैं इसलिये सभी बातों में इन्हें कुछ न कुछ खोट दिखाई देता है। ये युद्ध प्रेमी और पराक्रमी होते हैं तथा अपनी बातों पर कायम रहने वाले होते हैं। जरूरत पड़ने पर ऐसे जातक हिंसा पर भी उतर आते हैं। इनके स्वभाव की एक बड़ी विशेषता है कि ये अपने कुटुम्ब का पूरा ख्याल रखते हैं।।
मंगलवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति स्वभावानुसार क्रोधी, उग्र, पराक्रमी, जुझारू, अदम्य साहसी, आलोचना सहन न करने वाले और सांगठनिक क्षमता वाले होते हैं। नेतागिरी, पुलिस, सेना, नौकरशाह तथा खिलाड़ी के रूप में इनका कैरियर सफल रहता है। इनका शुभ अंक 3, 6, 9 तथा शुभ रंग लाल एवं मैरुन और इनका शुभ दिन मंगलवार एवं शुक्रवार होता है।।
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मंगलवार का विशेष टिप्स – यदि आपके जीवन में कभी अचानक ज्यादा खर्च की स्थिति बन जाय, तो किसी भी मंगलवार के दिन हनुमानजी के मंदिर में गुड़-चने का भोग श्रद्धापूर्वक लगाएं। भोग लगाने के बाद वहीँ बैठकर 01 बार हनुमान चालीसा का पाठ भी अवश्य करें।।
मंगलवार के दिन ये विशेष उपाय करें – मंगलवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्त्व होता है। आज हनुमान जी को चमेली का तेल चढ़ाना, चमेली के तेल का ही दीपक जलाना तथा माखन का भोग लगाना चाहिये, इससे हर प्रकार की मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।।
आज का सुविचार – मित्रों, दुनिया में भगवान का संतुलन कितना अद्भुत हैं, 50 कि.ग्रा. अनाज का बोरा जो उठा सकता हैं वो खरीद नही सकता और जो खरीद सकता हैं वो उठा नही सकता। जब आप गुस्सें में हो तब कोई फैसला न लेना और जब आप खुश हो तब कोई वादा न करना, अगर ये याद रखेंगे तो कभी नीचा नही देखना पड़ेगा।।
#Panchang_01_September_2026
अरिष्ट अर्थात एक्सिडेन्ट एवं चोट आदि लगने के योग ।।….. आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें:
