बुध अष्टोत्तरशत नाम स्तोत्रम्।।

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Budh Ashtottarshat Name Stotram
Budh Ashtottarshat Name Stotram

अथ श्रीबुध अष्टोत्तरशत नाम स्तोत्रम् ।। Budh Ashtottarshat Name Stotram.

बुध बीज मन्त्र – ॐ ब्राँ ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः ।।

बुधो बुधार्चितः सौम्यः सौम्यचित्तः शुभप्रदः ।
दृढव्रतो दृढबल श्रुतिजालप्रबोधकः ॥ १॥

सत्यवासः सत्यवचा श्रेयसाम्पतिरव्ययः ।
सोमजः सुखदः श्रीमान् सोमवंशप्रदीपकः ॥ २॥

वेदविद्वेदतत्त्वज्ञो वेदान्तज्ञानभास्करः ।
विद्याविचक्षण विदुर् विद्वत्प्रीतिकरो ऋजः ॥ ३॥

विश्वानुकूलसञ्चारी विशेषविनयान्वितः ।
विविधागमसारज्ञो वीर्यवान् विगतज्वरः ॥ ४॥

त्रिवर्गफलदोऽनन्तः त्रिदशाधिपपूजितः ।
बुद्धिमान् बहुशास्त्रज्ञो बली बन्धविमोचकः ॥ ५॥

वक्रातिवक्रगमनो वासवो वसुधाधिपः ।
प्रसादवदनो वन्द्यो वरेण्यो वाग्विलक्षणः ॥ ६॥

सत्यवान् सत्यसंकल्पः सत्यबन्धिः सदादरः ।
सर्वरोगप्रशमनः सर्वमृत्युनिवारकः ॥ ७॥

वाणिज्यनिपुणो वश्यो वातांगी वातरोगहृत् ।
स्थूलः स्थैर्यगुणाध्यक्षः स्थूलसूक्ष्मादिकारणः ॥ ८॥

अप्रकाशः प्रकाशात्मा घनो गगनभूषणः ।
विधिस्तुत्यो विशालाक्षो विद्वज्जनमनोहरः ॥ ९॥

चारुशीलः स्वप्रकाशो चपलश्च जितेन्द्रियः ।
उदऽग्मुखो मखासक्तो मगधाधिपतिर्हरः ॥ १०॥

सौम्यवत्सरसञ्जातः सोमप्रियकरः सुखी ।
सिंहाधिरूढः सर्वज्ञः शिखिवर्णः शिवंकरः ॥ ११॥

पीताम्बरो पीतवपुः पीतच्छत्रध्वजांकितः ।
खड्गचर्मधरः कार्यकर्ता कलुषहारकः ॥ १२॥

आत्रेयगोत्रजोऽत्यन्तविनयो विश्वपावनः ।
चाम्पेयपुष्पसंकाशः चारणः चारुभूषणः ॥ १३॥

वीतरागो वीतभयो विशुद्धकनकप्रभः ।
बन्धुप्रियो बन्धयुक्तो वनमण्डलसंश्रितः ॥ १४॥

अर्केशानप्रदेषस्थः तर्कशास्त्रविशारदः ।
प्रशान्तः प्रीतिसंयुक्तः प्रियकृत् प्रियभाषणः ॥ १५॥

मेधावी माधवासक्तो मिथुनाधिपतिः सुधीः ।
कन्याराशिप्रियः कामप्रदो घनफलाश्रयः ॥ १६॥

बुधस्येवम्प्रकारेण नाम्नामष्टोत्तरं शतम् ।
सम्पूज्य विधिवत्कर्ता सर्वान्कामानवाप्नुयात् ॥ १७॥

।। इति बुध अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ।।

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