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नवरात्रि में जन्म लेने वाले बच्चों की कुंडली।।

नवरात्रि में जन्म लेने वाले बच्चों की कुंडली।। Fate of Children Born During Navratri.

नवरात्रि-जन्म का ज्योतिषीय परिचय।। Introduction.

मित्रों, नवरात्रि के नौ पावन दिवसों में जन्म लेने वाले बालक-बालिकाओं को ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत भाग्यशाली तथा विशेष माना जाता है। क्योंकि इस अवधि में संपूर्ण वातावरण माँ जगदंबा की दिव्य शक्ति से आप्लावित रहता है। मान्यता है कि इस काल में जन्मे जातक की कुंडली में स्वाभाविक रूप से कुछ विशेष शुभ संकेत विद्यमान रहते हैं, जो उसके संपूर्ण जीवन को प्रभावित करते हैं। आज हम इसी विषय पर विस्तार से चर्चा करेंगे।।

नवरात्रि-जन्म का सामान्य स्वभाव पर प्रभाव देखें। तो नवरात्रि में जन्मे जातक सामान्यतः सकारात्मक चिंतन, मधुर स्वभाव तथा प्रसन्नचित्त प्रकृति के होते हैं। जिस कारण इनके मित्रों की संख्या भी अधिक होती है। ऐसे जातक प्रायः बुद्धिमान, ज्ञानवान तथा आध्यात्मिक प्रवृत्ति के होते हैं। और इन्हें बाल्यकाल से ही धार्मिक कार्यों तथा उपासना में विशेष रुचि रहती है। इनकी कुंडली में चंद्रमा तथा गुरु की स्थिति सामान्यतः सौम्य तथा बलवान पाई जाती है। जो इस स्वभाव का प्रमुख कारक मानी जाती है।।

मित्रों, यदि लग्न तथा लग्नेश के स्थिति की बात करें। तो नवरात्रि में जन्मे जातकों की कुंडली में लग्न तथा लग्नेश की स्थिति का विशेष अध्ययन किया जाना चाहिए। यदि लग्नेश बलवान स्थिति में हो, तथा शुभ ग्रहों से दृष्ट अथवा युत हो, तो जातक को आत्मविश्वासी, साहसी तथा नेतृत्व-क्षमता से संपन्न बनाता है। ऐसे जातक जीवन में कम संघर्ष के साथ सफलता प्राप्त करते हैं। तथा उनके व्यक्तित्व में स्वाभाविक आकर्षण एवं प्रभावशीलता पाई जाती है।।

और यदि चंद्रमा तथा मानसिक दृढ़ता के संकेतकी बात करें। तो नवरात्रि में माँ की उपासना का काल होने के कारण, इस अवधि में जन्मे जातकों की कुंडली में चंद्रमा की स्थिति का विशेष महत्व माना जाता है। यदि चंद्रमा बलवान तथा शुभ दृष्टि से युक्त हो, तो जातक मानसिक रूप से दृढ़, संवेदनशील तथा सहज रूप से सबका विश्वास जीतने में सक्षम होता है। ऐसे जातकों में सहनशीलता तथा धैर्य की मात्रा स्वाभाविक रूप से अधिक पाई जाती है। जो उन्हें जीवन की विषम परिस्थितियों में भी स्थिर बनाए रखती है।।

कुछ अन्य ज्ञान एवं कारकत्व की बातें।। Some further insights and significations.

मित्रों, कुंडली में गुरु ग्रह ज्ञान, धर्म तथा सौभाग्य का कारक माना जाता है। और नवरात्रि में जन्मे जातकों की कुंडली में गुरु की स्थिति सामान्यतः शुभ फलदायी पाई जाती है। यदि गुरु पंचम, नवम अथवा लग्न भाव से संबंध बनाए। तो जातक को उच्च शिक्षा, धार्मिक प्रवृत्ति तथा समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है। ऐसे जातक प्रायः गुरु-तुल्य व्यक्तियों का सम्मान करने वाले तथा स्वयं भी ज्ञान-प्रदाता की भूमिका में सफल होते हैं।।

पंचम भाव तथा भाग्येश की स्थिति भी अत्यन्त महत्वपूर्ण होता है। नवरात्रि में जन्मे जातकों की कुंडली में पंचम भाव तथा नवम भाव अर्थात भाग्य-स्थान का अध्ययन करना भी अत्यंत आवश्यक है। यदि ये दोनों भाव शुभ ग्रहों से प्रभावित हों, तो जातक को जीवन में अप्रत्याशित सहायता, आकस्मिक भाग्योदय तथा समाज में विशेष प्रतिष्ठा प्राप्त होती है। ऐसे जातकों के जीवन में संकट के समय भी किसी न किसी रूप में दैवीय सहायता प्राप्त होती रहती है। ऐसी मान्यता है।।

कन्याओं की कुंडली पर विशेष प्रभाव।। Special Effect On The Kundli Of Girls.

मित्रों, नवरात्रि में जन्मी कन्याओं को शास्त्रों में विशेष रूप से शक्ति-स्वरूपा माना जाता है। और मान्यता है कि ऐसी कन्याओं पर माँ दुर्गा की शक्ति का विशेष प्रभाव रहता है। इनकी कुंडली में यदि शुक्र तथा चंद्रमा की स्थिति शुभ हो, तो ऐसी कन्याएँ आत्मनिर्भर, साहसी तथा परिवार का नाम रोशन करने वाली सिद्ध होती हैं। साथ ही विवाहोपरांत भी अपने ससुराल में मान-सम्मान प्राप्त करती हैं।।

इसके लिए वैदिक उपाय तथा सावधानियाँ भी कुछ रखनी चाहिए। जैसे यद्यपि नवरात्रि में जन्म लेना स्वयं में एक शुभ संकेत माना जाता है। तथापि प्रत्येक बालक की पृथक जन्म-कुंडली में ग्रहों की वास्तविक स्थिति का अध्ययन करना आवश्यक है। क्योंकि कुंडली के अन्य भावों में अशुभ ग्रह-योग भी विद्यमान हो सकते हैं। ऐसे बालकों के नामकरण में देवी के किसी स्वरूप से संबंधित नाम रखना चाहिए। नियमित रूप से दुर्गा सप्तशती अथवा देवी-स्तुति का श्रवण करवाना चाहिए। साथ ही प्रत्येक नवरात्रि में विधिवत पूजन कराना चाहिए। ऐसे उपाय बालक के जीवन में माँ की कृपा को और अधिक सुदृढ़ करता है।।

शास्त्रीय आधार।। Shastric Reference.

मित्रों, बृहत्पाराशर होरा शास्त्र तथा फलदीपिका में लग्न, चंद्रमा एवं गुरु की स्थिति के आधार पर जातक के स्वभाव तथा भाग्य का निर्धारण किया गया है। देवी भागवत पुराण में नवरात्रि काल में जन्म लेने को विशेष पुण्य-फलदायी बताया गया है। तथा ऐसे जातकों को माँ की विशेष कृपा-प्राप्त संतान के रूप में वर्णित किया गया है।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions.

प्रश्न- क्या नवरात्रि में जन्म लेने वाले सभी बच्चे भाग्यशाली होते हैं?

उत्तर- मित्रों, सामान्य मान्यता के अनुसार नवरात्रि में जन्म लेना शुभ माना जाता है। परंतु वास्तविक फल जातक की संपूर्ण कुंडली में ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है।।

प्रश्न- नवरात्रि में जन्मी कन्याओं की क्या विशेषता मानी जाती है?

उत्तर- नवरात्रि में जन्मी कन्याओं पर माँ दुर्गा की शक्ति का विशेष प्रभाव माना जाता है। तथा ऐसी कन्याएँ साहसी, आत्मनिर्भर तथा परिवार का मान बढ़ाने वाली होती हैं।।

प्रश्न- नवरात्रि में जन्मे बालक की कुंडली में किन ग्रहों का विशेष अध्ययन करना चाहिए?

उत्तर- ऐसे बालक की कुंडली में लग्न, चंद्रमा, गुरु तथा पंचम-नवम भाव की स्थिति का विशेष अध्ययन करना आवश्यक माना गया है।।

प्रश्न- क्या नवरात्रि में जन्मे बालकों को किसी विशेष उपाय की आवश्यकता होती है?

उत्तर- सामान्यतः विशेष उपाय आवश्यक नहीं, परंतु देवी-स्वरूप नामकरण तथा नियमित पूजन-संस्कार से माँ की कृपा और अधिक सुदृढ़ होती है।।

प्रश्न- क्या नवरात्रि में जन्म होने से कुंडली के अशुभ योग समाप्त हो जाते हैं?

उत्तर- नहीं, नवरात्रि का जन्म एक शुभ संकेत अवश्य है। परंतु कुंडली में विद्यमान अन्य ग्रह-दोषों का निवारण हेतु पृथक रूप से वैदिक उपायों द्वारा ही करवाना आवश्यक होता है।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, नवरात्रि के पावन दिवसों में जन्म लेने वाले जातकों को माँ जगदंबा की विशेष कृपा-प्राप्त संतान माना जाता है। तथा इनकी कुंडली में लग्न, चंद्रमा, गुरु एवं भाग्य-स्थान के शुभ प्रभाव से सकारात्मक स्वभाव, बुद्धि तथा सौभाग्य के संकेत प्रायः पाए जाते हैं। तथापि संपूर्ण एवं सटीक फल जानने के लिए जातक की पूर्ण जन्म-कुंडली का सूक्ष्म विश्लेषण आवश्यक है।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि इस विषय पर किसी भी निर्णायक निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले किसी विद्वान, योग्य, अनुभवी वैदिक ज्योतिषी से बालक की संपूर्ण जन्मकुंडली का विश्लेषण विधिपूर्वक अवश्य करवाना चाहिए। ताकि सही एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।।

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