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कुंडली से अपना स्वयं का घर खरीदने का योग।।

कुंडली से अपना स्वयं का घर खरीदने का योग।। House Buying Yoga From Horoscope.

अपना घर खरीदने के योग का परिचय।। Introduction.

मित्रों, हर व्यक्ति के जीवन में एक सपना अवश्य होता है कि उसका अपना घर हो। किराये के मकान में वर्षों रहने के बाद जब कोई परिवार अपनी छत का स्वामी बनता है। तो उसे केवल संपत्ति नहीं मिलती, अपितु सुरक्षा, स्थिरता तथा मन की शांति भी मिलती है। परंतु बहुत से लोग वर्षों से प्रयास करते हैं, बजट भी बनाते हैं, फिर भी किसी न किसी कारण सौदा टलता चला जाता है। तब स्वाभाविक रूप से मन में यह प्रश्न उठता है कि क्या मेरी कुंडली में अपना घर खरीदने का योग है। और यदि है तो वह कब फलित होगा।।

ज्योतिष में इस प्रश्न का उत्तर कुंडली के कुछ विशेष भावों, ग्रहों तथा दशा-काल को देखकर ढूँढा जाता है। परंतु यहाँ यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि घर का योग केवल एक ग्रह अथवा एक भाव को देखकर नहीं जाना जाता। अपितु चतुर्थ भाव, चतुर्थेश, भूमि के कारक मंगल, सुख के कारक शुक्र, लाभ भाव तथा चल रही दशा, इन सभी को मिलाकर देखा जाता है। इसी कारण एक ही योग दो अलग कुंडलियों में अलग समय तथा अलग रूप में फलित होता है।।

मित्रों, तो आज हम विस्तार से समझेंगे कि कुंडली में घर के लिए कौन-से भाव तथा ग्रह देखे जाते हैं। किन योगों में अपना घर बनने की संभावना प्रबल मानी जाती है। कौन-सी स्थितियाँ इस मार्ग में बाधा बनती हैं। दशा तथा गोचर से समय का अनुमान कैसे लगाया जाता है। तथा इन बाधाओं को शांत करने के वैदिक तथा व्यावहारिक उपाय क्या हैं।।

घर के लिए देखे जाने वाले मुख्य भाव एवं ग्रह।। Main Houses And Planets Examined For A House.

मित्रों, सर्वप्रथम घर का सीधा संबंध चतुर्थ भाव से माना जाता है। यह चतुर्थ भाव सुख, गृह, भूमि, भवन, वाहन तथा माता का भाव होता है। जब भी कुंडली में अपने घर की बात देखी जाती है, तो पहला प्रश्न यही होता है कि चतुर्थ भाव कितना बलवान है। उस पर किन ग्रहों की दृष्टि है तथा उसका स्वामी कहाँ बैठा है। यदि चतुर्थ भाव तथा चतुर्थेश शुभ स्थिति में हों, तो जातक के जीवन में स्वयं का आवास बनने की संभावना सुदृढ़ हो जाती है।।

ग्रहों में मंगल को भूमि का कारक ग्रह माना गया है। इसीलिए भूखंड, भवन-निर्माण तथा संपत्ति के विषय में मंगल की स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। शुक्र को सुख-सुविधा, सजे-सँवरे भवन तथा आरामदायक जीवन का कारक माना जाता है। और शनि को निर्माण तथा दीर्घकालिक प्रक्रिया का कारक कहा गया है। जो प्रायः ऋण के साथ घर बनने की स्थिति में भी भूमिका निभाता है। बृहस्पति शुभ आशीर्वाद, धन तथा सफलता प्रदान करने वाला ग्रह माना जाता है।।

मित्रों, चतुर्थ भाव के साथ-साथ कुछ अन्य भावों का भी विचार किया जाता है। द्वितीय भाव धन-संचय का, एकादश भाव आय तथा लाभ का, नवम भाव भाग्य तथा पैतृक संपत्ति का, तथा षष्ठ भाव ऋण का भाव माना जाता है। द्वादश भाव व्यय तथा विदेश-स्थित संपत्ति से जुड़ा होता है। इसलिए जो जातक होम-लोन लेकर घर खरीदने की सोच रहा हो, उसके लिए षष्ठ भाव तथा षष्ठेश की स्थिति भी देखी जानी चाहिए। इस प्रकार घर का योग केवल एक भाव से नहीं, अपितु कई भावों के समन्वय से तय होता है।।

चतुर्थ भाव तथा चतुर्थेश की स्थिति से योग की पहचान।। Identifying The Yoga From The Fourth House And Its Lord.

मित्रों, सबसे पहले चतुर्थ भाव को देखें कि उसमें कौन-सा ग्रह बैठा है अथवा किन ग्रहों की दृष्टि उस पर पड़ रही है। यदि चतुर्थ भाव में शुभ ग्रह, जैसे बृहस्पति, शुक्र अथवा बुध स्थित हों अथवा उस पर इनकी शुभ दृष्टि हो, तो यह अपने घर के लिए अनुकूल संकेत माना जाता है। इसके विपरीत यदि चतुर्थ भाव पर राहु, केतु, शनि अथवा मंगल जैसे पाप-ग्रहों का अत्यधिक प्रभाव हो। तो घर की प्राप्ति में विलंब, विवाद अथवा किसी न किसी प्रकार की बाधा देखी जाती है।।

इसके पश्चात चतुर्थेश अर्थात चतुर्थ भाव के स्वामी की स्थिति देखनी चाहिए। यदि चतुर्थेश अपनी राशि, उच्च राशि अथवा मित्र राशि में हो, तथा केंद्र अथवा त्रिकोण भाव में स्थित हो, तो घर बनने की संभावना बलवान मानी जाती है। यदि चतुर्थेश का संबंध नवमेश, दशमेश, लग्नेश अथवा एकादशेश से बन रहा हो, तो इसे विशेष रूप से शुभ फलदायी योग माना जाता है। क्योंकि इससे सुख, भाग्य, कर्म तथा लाभ, चारों का संयोग बनता है।।

मित्रों, इसी प्रकार यदि चतुर्थेश तथा मंगल का परस्पर संबंध बन जाए। चाहे वह युति से हो, दृष्टि से हो अथवा राशि-परिवर्तन से। तो भी भूमि तथा भवन की प्राप्ति का योग अधिक प्रबल माना जाता है। यदि लग्नेश, चतुर्थेश तथा एकादशेश का परस्पर शुभ संबंध हो। तो जातक अपने ही पुरुषार्थ से घर बनाने में सक्षम माना जाता है। वहीं यदि चतुर्थेश षष्ठ, अष्टम अथवा द्वादश भाव में नीच, अस्त अथवा पीड़ित अवस्था में हो। तो घर की प्राप्ति में कठिनाइयों की संभावना देखी जाती है।।

मंगल, शुक्र तथा अन्य कारक ग्रहों का विश्लेषण।। Analysis Of Mars, Venus And Other Significators.

मित्रों, भूमि के कारक मंगल को कुंडली में विशेष रूप से देखना चाहिए। यदि मंगल अपनी राशि, उच्च राशि अथवा किसी शुभ भाव में स्थित हो, तथा चतुर्थ भाव अथवा चतुर्थेश से उसका संबंध बन रहा हो। तो भूमि-संपत्ति के लिए यह अनुकूल माना जाता है। परंतु यदि मंगल नीच का हो, अस्त हो, अथवा राहु, शनि जैसे पाप-ग्रहों से पीड़ित हो। तो भूमि के सौदों में विवाद, देरी अथवा धोखे की आशंका भी बढ़ जाती है। इस विषय पर हमने पिछले लेख में अशुभ मंगल की स्थितियों को विस्तार से समझा था।।

शुक्र ग्रह की स्थिति यह दर्शाती है कि जातक को घर में सुख-सुविधा, सुंदरता तथा आराम कितना मिलेगा। यदि शुक्र बलवान तथा शुभ भाव में हो, तो घर आधुनिक, सुसज्जित तथा सुविधाजनक होने की संभावना मानी जाती है। शनि की भूमिका निर्माण तथा पुराने भवन से जुड़ी मानी जाती है। जब शनि का संबंध चतुर्थ भाव से बनता है, तो कई बार जातक का घर देरी से, परंतु स्थायी रूप से बनता है। अथवा पुराना मकान अथवा किसी पुराने प्रोजेक्ट में संपत्ति मिलने के संकेत भी इसी से जोड़कर देखे जाते हैं।।

बृहस्पति की दृष्टि चतुर्थ भाव अथवा चतुर्थेश पर होना शुभ माना जाता है। क्योंकि इससे संपत्ति के मामलों में शुभ संयोग तथा सही मार्गदर्शन मिलता है। इसके साथ ही एकादश भाव का बलवान होना यह दर्शाता है कि जातक के पास आय के स्रोत तथा पूँजी जुटाने की क्षमता है। द्वितीय भाव मजबूत हो, तो बचत से घर खरीदने की स्थिति बनती है। इस प्रकार कारक ग्रहों की यह समन्वित स्थिति ही घर के योग को वास्तविक रूप देती है।।

चतुर्थांश कुंडली का महत्व।। Importance Of The Chaturthamsha Chart.

मित्रों, जन्म-कुंडली के साथ-साथ वैदिक ज्योतिष में चतुर्थांश अर्थात डी-4 कुंडली को भी भूमि, भवन तथा अचल संपत्ति के सूक्ष्म विश्लेषण के लिए देखा जाता है। इस कुंडली में लग्न, चतुर्थ भाव, चतुर्थेश तथा मंगल की स्थिति यह दर्शाती है कि संपत्ति के क्षेत्र में जातक को कितना लाभ, किस प्रकार तथा किस मात्रा में प्राप्त हो सकता है। यदि जन्म-कुंडली तथा चतुर्थांश कुंडली, दोनों में चतुर्थ भाव एवं चतुर्थेश शुभ स्थिति में हों, तो उसे अधिक विश्वसनीय संकेत माना जाता है।।

यदि जन्म-कुंडली में घर के योग दिखाई दें, परंतु चतुर्थांश में संबंधित ग्रह पीड़ित हों, तो फल में देरी अथवा अपेक्षा से कम परिणाम मिलने की संभावना देखी जाती है। और यदि जन्म-कुंडली में कुछ कमजोरियाँ हों, पर चतुर्थांश में स्थिति मजबूत हो, तो वहाँ से कुछ राहत मिलने की संभावना मानी जाती है। इसीलिए अनुभवी ज्योतिषी केवल जन्म-कुंडली पर ही नहीं रुकते। अपितु इस प्रकार के विभागीय चक्र भी देखते हैं, जिससे निष्कर्ष अधिक संतुलित बनता है।।

दशा तथा गोचर से समय का निर्धारण।। Determining The Timing Through Dasha And Transit.

मित्रों, केवल योग का होना ही पर्याप्त नहीं, उसके फलित होने का समय भी आवश्यक होता है। सामान्यतः जब चतुर्थेश, मंगल, शुक्र, एकादशेश अथवा लग्नेश की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो, तो घर खरीदने अथवा बनाने की संभावना बढ़ जाती है। विशेषकर यदि चल रही दशा का स्वामी चतुर्थ भाव अथवा चतुर्थेश से संबंध रखता हो, तो वह समय संपत्ति के विषय में सक्रिय माना जाता है। यह दशा-विचार ही बताता है कि वर्षों से रुका हुआ कार्य अचानक कब गति पकड़ता है।।

दशा के साथ-साथ गोचर का भी विचार किया जाता है। जब गोचर में बृहस्पति चतुर्थ भाव, चतुर्थेश अथवा चतुर्थ भाव पर दृष्टि डालता है। तब सामान्यतः शुभ संयोग बनते हैं। इसी प्रकार जब गोचर में मंगल अथवा शनि चतुर्थ भाव या चतुर्थेश को प्रभावित करते हैं। तब भी संपत्ति से जुड़ी गतिविधियाँ बढ़ जाती हैं। परंतु इनमें सावधानी की आवश्यकता भी होती है। इसलिए जब दशा तथा गोचर दोनों अनुकूल हों। तभी घर के योग के फलित होने की संभावना सर्वाधिक प्रबल मानी जाती है।।

घर खरीदने में बाधा डालने वाली स्थितियाँ।। Conditions That Obstruct Buying A House.

मित्रों, कुछ ग्रह-स्थितियाँ ऐसी होती हैं जो घर की प्राप्ति में बाधा डालती हैं। यदि चतुर्थ भाव में राहु अथवा केतु बैठे हों, तो घर में अस्थिरता, बार-बार स्थान-परिवर्तन अथवा सौदों में भ्रम की स्थिति देखी जाती है। यदि चतुर्थ भाव में शनि, राहु अथवा मंगल की अशुभ युति हो, तो संपत्ति के विवाद, कानूनी अड़चन अथवा निर्माण में देरी की संभावना बढ़ती है। चतुर्थेश का षष्ठ, अष्टम अथवा द्वादश भाव में जाना भी इसी प्रकार की चुनौती का संकेत माना जाता है।।

इसके अतिरिक्त यदि मंगल नीच, अस्त अथवा पीड़ित हो, तो भूमि के क्षेत्र में धोखे अथवा विवाद की संभावना रहती है। यदि द्वितीय तथा एकादश भाव कमजोर हों, तो पर्याप्त धन जुटाने में कठिनाई आती है। तथा घर होने के बाद भी आर्थिक दबाव बना रह सकता है। इसी प्रकार यदि षष्ठ भाव अत्यंत प्रबल तथा चतुर्थ भाव कमजोर हो, तो ऋण का बोझ अधिक रहने की स्थिति भी देखी जाती है। परंतु इन सब बातों का अंतिम निष्कर्ष कुंडली के संपूर्ण विश्लेषण के बाद ही निकाला जाना चाहिए। क्योंकि कई बार अन्य शुभ योग इन बाधाओं को शांत भी कर देते हैं।।

बाधाओं के वैदिक उपाय।। Vedic Remedies For The Obstacles.

मित्रों, यदि घर के योग में बाधाएँ दिखाई दें, तो ग्रह-शांति के कुछ सरल उपाय परंपरा में बताए गए हैं। मंगल के लिए मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ, श्री हनुमान जी की उपासना तथा लाल मसूर की दाल अथवा गुड़ का दान किया जाता है। “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” इस मंगल देवता के बीज-मंत्र का जप भी प्रचलित है। चतुर्थ भाव अथवा चतुर्थेश की शांति के लिए संबंधित ग्रह का मंत्र-जप तथा उस ग्रह के दिन दान-पुण्य करना उपयुक्त माना जाता है।।

शुक्र की शुभता के लिए शुक्रवार को माता लक्ष्मी की उपासना। श्री सूक्त का पाठ तथा सफेद वस्तुओं का दान शुभ माना जाता है। बृहस्पति के लिए गुरुवार को भगवान विष्णु अथवा गुरु देवता की उपासना तथा पीले पदार्थों का दान करना चाहिए। वास्तु की दृष्टि से भी जिस घर में आप रहते हैं, वहाँ ईशान कोण को स्वच्छ तथा हल्का रखना चाहिए। उत्तर दिशा को व्यवस्थित रखना तथा पूजा-स्थान को शुद्ध रखना चाहिए। यह सब सकारात्मक वातावरण बनाने में सहायक माना जाता है। परंतु रत्न धारण बिना कुंडली-विश्लेषण के कदापि नहीं करना चाहिए।।

व्यावहारिक उपाय एवं सावधानियाँ।। Practical Remedies And Precautions.

मित्रों, ज्योतिषीय उपायों के साथ-साथ यह भी अत्यंत आवश्यक होता है कि घर खरीदने से पूर्व व्यावहारिक तैयारी पूर्ण की जाए। अपनी आय तथा बचत का सही आकलन करें। होम-लोन की किस्त अपनी क्षमता के भीतर रखें। साथ ही संपत्ति के सभी दस्तावेज़, भूमि का स्वामित्व, भवन की स्वीकृति तथा रजिस्ट्री से जुड़ी बातें किसी योग्य विधिक सलाहकार से जँचवा लें। क्योंकि कोई भी शुभ योग तभी फलदायी होता है जब निर्णय सोच-समझकर तथा पारदर्शिता से लिया जाए।।

बहुत से लोग ज्योतिषीय योग के भरोसे बिना पर्याप्त जाँच-पड़ताल के जल्दबाज़ी में सौदा कर लेते हैं, जो उचित नहीं होता है। यदि कुंडली में योग बलवान हो, तब भी दस्तावेज़ों की जाँच तथा वित्तीय योजना की आवश्यकता कम नहीं होती। इसी प्रकार यदि योग कमजोर दिखाई दे, तो निराश होने की आवश्यकता भी नहीं। धैर्य, बचत, उचित योजना तथा सही समय की प्रतीक्षा से भी स्थिति बदल सकती है। और गृह-प्रवेश अथवा रजिस्ट्री के लिए शुभ मुहूर्त का विचार अपने पंडित जी से करवा लेना उचित रहता है।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में द्वादश भावों का विस्तृत वर्णन मिलता है। जिसमें चतुर्थ भाव को सुख, गृह, भूमि, वाहन तथा माता का भाव कहा गया है। तथा चतुर्थेश की स्थिति के अनुसार इनके फलों का विवेचन किया गया है। फलदीपिका में भी भावों के कारकत्व तथा भाव-स्वामी की स्थिति के अनुसार फल-कथन का आधार मिलता है। मंगल को भूमि का कारक तथा शुक्र को सुख एवं वाहन का कारक मानने की परंपरा भी इन्हीं पराशरी तथा अन्य फलित-ग्रंथों में प्रचलित है।।

परंतु यहाँ यह स्पष्ट रूप से समझना भी उचित होगा कि घर के योग से जुड़ी कुछ विशेष अवधारणाएँ। जैसे चतुर्थांश कुंडली का उपयोग तथा दशा-गोचर के आधार पर समय-निर्धारण के विभिन्न तरीके, ज्योतिष तथा विद्वान ब्राह्मणों के अनुसार कुछ भिन्न भी हो सकते हैं। इसीलिए किसी एक नियम को अंतिम मानकर निर्णय न लें। संपूर्ण जन्मकुंडली, चतुर्थांश तथा चल रही दशा के समन्वित अध्ययन के बाद ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

प्रश्न 1. कुंडली में घर खरीदने के लिए कौन-सा भाव सबसे महत्वपूर्ण है।। Which House Is Most Important For Buying A Home.

उत्तर:- चतुर्थ भाव सबसे प्रमुख माना जाता है। जो सुख, गृह तथा भूमि का भाव है। इसके साथ चतुर्थेश, मंगल, शुक्र तथा द्वितीय एवं एकादश भाव भी देखे जाते हैं।।

प्रश्न 2. भूमि का कारक ग्रह कौन-सा होता है।। Which Planet Is The Significator Of Land.

उत्तर:- मंगल को भूमि तथा संपत्ति का कारक ग्रह माना जाता है। इसलिए घर के योग के विश्लेषण में मंगल की स्थिति विशेष रूप से देखी जाती है।।

प्रश्न 3. क्या होम-लोन लेकर घर खरीदने के लिए भी कुंडली में कोई संकेत होता है।। Is There A Chart Indication For Buying A House With A Home Loan.

उत्तर:- हाँ, षष्ठ भाव ऋण का भाव माना जाता है। षष्ठ भाव, षष्ठेश तथा शनि की स्थिति से होम-लोन के योग तथा उसके बोझ का अनुमान लगाया जाता है।।

प्रश्न 4. घर कब खरीदना चाहिए, यह कैसे जानें।। How To Know When To Buy A House.

उत्तर:- चतुर्थेश, मंगल, शुक्र, एकादशेश अथवा लग्नेश की दशा-अंतर्दशा तथा बृहस्पति जैसे ग्रहों के अनुकूल गोचर के समय घर के योग फलित होने की संभावना अधिक मानी जाती है। इसके लिए योग्य ज्योतिषी से कुंडली दिखवाएँ।।

प्रश्न 5. क्या कमजोर योग होने पर घर खरीदना असंभव है।। Is Buying A House Impossible With A Weak Yoga.

उत्तर:- नहीं, कमजोर योग का अर्थ असंभव होना नहीं है। उपायों, धैर्य, उचित योजना तथा समय के साथ स्थिति बदल सकती है। साथ ही अन्य शुभ योग भी बाधाओं को कम कर सकते हैं।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, कुंडली से अपना घर खरीदने का योग देखने के लिए चतुर्थ भाव, चतुर्थेश, मंगल, शुक्र, द्वितीय तथा एकादश भाव, चतुर्थांश कुंडली तथा चल रही दशा-गोचर, इन सभी का समन्वित अध्ययन आवश्यक होता है। जब चतुर्थ भाव तथा चतुर्थेश बलवान हों, मंगल तथा शुक्र शुभ स्थिति में हों, तथा धन-संचय एवं आय के भाव पुष्ट हों, तब अपने घर का योग प्रबल माना जाता है।।

और यहाँ मैं यही कहूँगा कि कुंडली केवल संभावना का नक्शा होता है। घर तो परिश्रम, बचत तथा सही निर्णय से बनता है। योग बलवान हो तो उसे सही समय पर सही योजना से ही साकार होता है। और यदि योग कमजोर दिखे तो धैर्य तथा उपायों के साथ अपनी तैयारी बढ़ाते रहें। क्योंकि पुरुषार्थ के बिना केवल योग किसी को घर नहीं देता।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि अपनी कुंडली में घर के योग तथा उसके सही समय को जानने के लिए किसी विद्वान, योग्य, अनुभवी वैदिक ज्योतिषी से अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली, चतुर्थांश कुंडली तथा वर्तमान दशा-गोचर का विश्लेषण विधिपूर्वक अवश्य करवाना चाहिए। ताकि सही एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।।

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