HomeArticlesAstro Articlesअशुभ शनि की स्थितियों का डिग्री सहित वर्णन।।

अशुभ शनि की स्थितियों का डिग्री सहित वर्णन।।

अशुभ शनि की स्थितियों का डिग्री सहित वर्णन।। Inauspicious Saturn Placements by Degree.

अशुभ शनि की सूक्ष्म पहचान का परिचय।। Introduction.

मित्रों, हमने पिछले लेख में शनि की शुभ स्थितियों तथा उनसे मिलने वाले वरदानों को विस्तार से समझा था। परंतु यही शनि जब पीड़ित अथवा निर्बल स्थिति में हो, तो यह जातक के जीवन में दीर्घकालिक संघर्ष, स्वास्थ्य-समस्या तथा मानसिक तनाव भी उत्पन्न करता है। यहाँ यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि शनि की अशुभता केवल राशि देखकर ही नहीं। अपितु उसकी सटीक अंश अर्थात डिग्री देखकर भी सूक्ष्मता से जानी जाती है।।

वैदिक ज्योतिष में प्रत्येक राशि तीस अंश की होती है। तथा किसी भी ग्रह की नीचता अथवा अस्त होने की तीव्रता उसकी डिग्री के अनुसार घटती-बढ़ती रहती है। उदाहरण के तौर पर एक ग्रह अपनी नीच राशि में भले ही स्थित हो, परंतु यदि वह अपने परम नीच अंश पर न हो, तो उसकी पीड़ा उतनी तीव्र नहीं होती। जितनी ठीक परम नीच बिंदु पर होने पर होती है। यही सूक्ष्मता शनि के विश्लेषण में भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।।

मित्रों, इसी प्रकार सूर्य से निकटता अर्थात अस्त होने की स्थिति में भी डिग्री का विशेष महत्व होता है। शनि यदि सूर्य से एक निश्चित डिग्री के भीतर आ जाए, तो वह अस्त माना जाता है। साथ ही उसकी शक्ति भी क्षीण हो जाती है। इसी प्रकार गंडांत बिंदु, अर्थात दो राशियों के संधि-स्थान पर स्थित होना भी शनि को विशेष रूप से अस्थिर तथा अशुभ बना देता है।।

तो आज हम विस्तार से समझेंगे कि शनि किस राशि तथा किस डिग्री पर परम नीच का होता है। अस्त शनि किस डिग्री-सीमा में बनता है। गंडांत शनि क्या है। पापकर्तरी योग में पीड़ित शनि का क्या प्रभाव पड़ता है। तथा इन अशुभ स्थितियों से उत्पन्न होने वाले फल कौन-कौन से हैं।।

शनि की नीच राशि एवं परम नीच अंश।। Debilitation Sign and the Deepest Debilitation Degree of Saturn.

मित्रों, शनि मेष राशि में नीच का माना जाता है। तथा इसका परम नीच अंश ठीक बीस अंश पर होता है। अर्थात यदि शनि मेष राशि के बीस अंश पर स्थित हो, तो यह शनि की सर्वाधिक निर्बल तथा पीड़ित स्थिति मानी जाती है। जैसे-जैसे शनि इस बीस अंश के निकट आता है। उसकी नीचता की तीव्रता उतनी ही बढ़ती जाती है।।

इसके विपरीत यदि शनि मेष राशि में तो हो, परंतु बीस अंश से काफी दूर हो, जैसे आरंभिक अंशों में, तो इसकी नीचता अपेक्षाकृत कम तीव्र मानी जाती है। इसी कारण केवल इतना जान लेना कि शनि नीच राशि में है। पर्याप्त नहीं, उसकी सटीक डिग्री जानना भी अत्यंत आवश्यक माना जाता है।।

अस्त शनि की डिग्री-सीमा।। The Degree Range for Combust Saturn.

मित्रों, जब कोई ग्रह सूर्य के अत्यंत निकट आ जाता है, तो उसे अस्त अर्थात कमजोर माना जाता है। क्योंकि सूर्य के तीव्र तेज के सामने उस ग्रह की अपनी चमक तथा शक्ति धूमिल पड़ जाती है। शनि के लिए यह दूरी पंद्रह अंश निर्धारित की गई है। अर्थात यदि शनि सूर्य से पंद्रह अंश के भीतर आ जाए, तो वह अस्त शनि कहलाता है।।

अस्त शनि जातक को आत्मविश्वास की कमी, निर्णय लेने में असमर्थता तथा अपने ही प्रयासों का उचित श्रेय न मिल पाने जैसी स्थितियों की ओर ले जाता है। यह स्थिति विशेष रूप से तब और गंभीर हो जाती है। जब शनि सूर्य से एक अंश से भी कम दूरी पर हो, क्योंकि इसे अत्यंत प्रबल अस्त अवस्था माना जाता है।।

गंडांत शनि।। Gandanta Saturn.

मित्रों, जब कोई ग्रह एक राशि के अंतिम कुछ अंशों से अगली राशि के आरंभिक कुछ अंशों के बीच स्थित हो, विशेषकर जल राशि के अंत तथा अग्नि राशि के आरंभ के संधि-स्थान पर, तो इसे गंडांत कहा जाता है। यह संधि-स्थान अत्यंत अस्थिर तथा संवेदनशील माना जाता है। क्योंकि यहाँ एक राशि की ऊर्जा समाप्त होकर दूसरी राशि की ऊर्जा आरंभ हो रही होती है।।

यदि शनि इस गंडांत बिंदु पर स्थित हो, तो जातक के जीवन में अचानक तथा अप्रत्याशित उथल-पुथल, विशेषकर स्वास्थ्य तथा करियर से जुड़ी, देखने को मिल सकती है। ऐसे जातकों को जन्म के समय विशेष शांति-अनुष्ठान करवाने की परंपरा भी शास्त्रों में बताई गई है।।

पापकर्तरी योग में पीड़ित शनि।। Saturn Afflicted by Papkartari Yoga.

मित्रों, जब शनि के दोनों ओर अर्थात आगे तथा पीछे के भाव में पापग्रह स्थित हों, तो इसे पापकर्तरी योग कहा जाता है। इस स्थिति में शनि जिस भी भाव में हो, वह भाव तथा उससे जुड़े जीवन के क्षेत्र विशेष रूप से संघर्षपूर्ण बन जाते हैं। क्योंकि शनि चारों ओर से दबाव में घिरा हुआ प्रतीत होता है।।

यह स्थिति विशेष रूप से तब अधिक गंभीर हो जाती है, जब घेरने वाले पापग्रह शनि के अत्यंत निकट डिग्री पर स्थित हों। क्योंकि निकट डिग्री की युति अथवा दृष्टि सदैव दूर की तुलना में अधिक प्रबल फल देती है।।

अशुभ शनि से उत्पन्न होने वाले फल।। Results Arising from an Afflicted Saturn.

मित्रों, उपरोक्त किसी भी स्थिति में पीड़ित शनि जातक को दीर्घकालिक स्वास्थ्य-समस्या, विशेषकर हड्डी, जोड़ तथा जोड़ों के दर्द से जुड़े रोग, तथा मानसिक अवसाद अथवा निराशा जैसी स्थितियाँ देता है। करियर में बार-बार विलंब, अपयश अथवा उच्च अधिकारियों से अनावश्यक टकराव भी इसी पीड़ा के सामान्य लक्षण माने जाते हैं।।

इसके अतिरिक्त ऐसे जातकों को आत्मविश्वास की कमी, अकेलापन तथा जीवन के प्रति निराशावादी दृष्टिकोण का सामना भी करना पड़ता है। परन्तु यह ध्यान रहे कि शनि की यह पीड़ा स्थायी नहीं होती। उचित दशा-परिवर्तन तथा वैदिक उपायों से इसमें उल्लेखनीय सुधार संभव है।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में शनि को मेष राशि के बीस अंश पर परम नीच का बताया गया है। तथा सूर्य से पंद्रह अंश की दूरी को अस्त होने की सीमा माना गया है। फलदीपिका के अनुसार गंडांत बिंदु पर स्थित ग्रह अत्यंत अस्थिर तथा संवेदनशील फल देने वाला माना जाता है।।

सारावली में भी यह स्पष्ट किया गया है कि पापकर्तरी योग में घिरा हुआ शनि जातक के जीवन में संबंधित भाव के क्षेत्र में विशेष संघर्ष उत्पन्न करता है। तथा इसका सटीक आकलन संपूर्ण जन्मकुंडली के अध्ययन के पश्चात ही किया जाना चाहिए।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

प्रश्न 1. शनि का परम नीच अंश कौन-सा है।। What Is the Degree of Saturn’s Deepest Debilitation.

उत्तर:- शनि मेष राशि के बीस अंश पर परम नीच का माना जाता है। जो इसकी सर्वाधिक निर्बल स्थिति होती है।।

प्रश्न 2. शनि किस डिग्री पर अस्त माना जाता है।। At What Degree Is Saturn Considered Combust.

उत्तर:- यदि शनि सूर्य से पंद्रह अंश के भीतर आ जाए, तो उसे अस्त शनि कहा जाता है।।

प्रश्न 3. गंडांत शनि क्या होता है।। What Is Gandanta Saturn.

उत्तर:- जब शनि जल राशि के अंतिम अंशों तथा अग्नि राशि के आरंभिक अंशों के संधि-बिंदु पर स्थित हो, तो इसे गंडांत शनि कहा जाता है।।

प्रश्न 4. पापकर्तरी योग में शनि का क्या प्रभाव पड़ता है।। What Is the Effect of Saturn in Papkartari Yoga.

उत्तर:- इस स्थिति में शनि जिस भाव में हो, वह भाव तथा उससे जुड़े जीवन-क्षेत्र विशेष रूप से संघर्षपूर्ण बन जाते हैं। क्योंकि शनि चारों ओर से पापग्रहों से घिरा होता है।।

प्रश्न 5. क्या पीड़ित शनि का प्रभाव स्थायी होता है।। Is the Effect of an Afflicted Saturn Permanent.

उत्तर:- नहीं, यह पीड़ा दशा-परिवर्तन तथा उचित वैदिक उपायों से काफी हद तक संतुलित की जा सकती है।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, शनि की अशुभता को समझने के लिए केवल राशि ही नहीं, अपितु उसकी सटीक डिग्री, सूर्य से दूरी तथा गंडांत-स्थिति जैसी सूक्ष्म बातों का भी अध्ययन आवश्यक है। परम नीच अंश, अस्त होने की सीमा तथा पापकर्तरी योग, यह सभी मिलकर शनि की पीड़ा की वास्तविक तीव्रता को निर्धारित करते हैं।।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार इन सूक्ष्म स्थितियों को समझकर ही उचित वैदिक उपाय अपनाए जाने चाहिए। और यहाँ मैं यही कहूँगा कि शनि की पीड़ा चाहे जितनी भी गहरी क्यों न हो, धैर्य तथा सही दिशा में किए गए प्रयासों से उसका समाधान अवश्य संभव है।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि अपनी कुंडली में शनि की सटीक डिग्री तथा वास्तविक स्थिति जानने के लिए किसी विद्वान, योग्य, अनुभवी वैदिक ज्योतिषी से संपूर्ण जन्मकुंडली का विश्लेषण विधिपूर्वक अवश्य करवाना चाहिए। ताकि सही एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।।

#डिग्री_सहित_अशुभ_शनि_की_स्थितियां #शनि_परम_नीच_अंश_मेष #अस्त_शनि_डिग्री #गंडांत_शनि #पापकर्तरी_योग_शनि #Inauspicious_Positions_Of_Saturn_With_Degrees #Saturn_Deepest_Debilitation_Degree #Combust_Saturn_Degree_Range #Gandanta_Saturn #Papkartari_Yoga_Saturn

ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे  YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं – Click Here & Watch My YouTube Channel.

इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज – My facebook Page.

वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।

किसी भी तरह के पूजा-पाठ, विधी-विधान, ग्रह दोष शान्ति आदि के लिए तथा बड़े से बड़े अनुष्ठान हेतु योग्य एवं विद्वान् ब्राह्मण हमारे यहाँ उपलब्ध हैं ।।
 
संपर्क करें:- बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के बाजु में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा ।।
 
WhatsAap & Call: +91 – 8690 522 111.
E-Mail :: balajijyotish11@gmail.com
Balaji Jyotish Kendra
Balaji Jyotish Kendrahttp://balajijyotish.com
Balaji Jyotish Kendra par Vedic Astrology, Kundli Analysis, Horoscope Reading aur Astro Remedies step-by-step. Online astrology classes, practical training aur expert guidance ke saath apni jyotish knowledge ko professional level tak Pahuchaye. Contact Us.
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments