HomePanchangपञ्चांग 05 अक्टूबर 2026 दिन सोमवार।।

पञ्चांग 05 अक्टूबर 2026 दिन सोमवार।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।

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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 05 अक्टूबर 2026 दिन सोमवार।।

मित्रों, तारीख 05 अक्टूबर 2026 दिन सोमवार को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है। आज दशवें दिन का श्राद्ध किया जायेगा। अर्थात जिनके पिता का देहावसान किसी भी महीने के सप्तमी तिथि को हुआ है उनका आज ही तिथि मनाया जायेगा अर्थात श्राद्ध किया जायेगा। अश्विन मास का पहला पक्ष पितरों के लिये आरक्षित होता है तथा बहुत महत्वपूर्ण भी होता है। श्राद्ध-तर्पण के सम्बन्ध में एक सिद्धान्त होता है कि इस श्राद्ध पक्ष में पितरों का तर्पण करके मनुष्य अपने पितृगणों को तो तृप्त कर लेते हैं। इसके साथ ही समस्त गतात्मा जीव-जगत को भी तृप्त कर लेते हैं। पितृ पक्ष में श्राद्ध तो अपने स्वर्गीय पिता की मृत्यु की तिथि को अथवा तिथि ज्ञात न होने पर अमावस्या तिथि को करना चाहिए। देव, ऋषि, मनुष्य तर्पण पूर्व एवं पश्चात् करना चाहिए। “देवकार्यादपि सदापितृकार्यं विशिष्यते।” अर्थात् देव कार्य से भी महत्वपूर्ण पितृकार्य को माना गया है। आज यायिजययोग है। आज सर्वार्थसिद्धियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “दशवें दिन के श्राद्ध” की हार्दिक शुभकामनायें।।

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।

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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).

पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

पञ्चांग 05 अक्टूबर 2026 दिन सोमवार।। Panchang 05 October 2026

आज का पञ्चांग 05 अक्टूबर 2026 दिन सोमवार।।
Aaj ka Panchang 05 October 2026.

विक्रम संवत् – 2083.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.

शक – 1948.

अयन – सौम्यायनम्.

गोल – याम्य.

ऋतु – वर्षा.

मास – अश्विन.

पक्ष – कृष्ण.

गुजराती पंचांग के अनुसार – भाद्रपद कृष्ण पक्ष.

#Panchang_05_October_2026

तिथि – नवमी 03:55 AM बजे तक उपरान्त दशमी तिथि है।।

नक्षत्र – पुष्य 23:10 PM तक उपरान्त आश्लेषा नक्षत्र है।।

योग – शिव 09:52 AM तक उपरान्त सिद्ध योग है।।

करण – गर 03:55 AM तक उपरान्त वणिज 15:02 PM तक उपरान्त विष्टि करण है।।

चन्द्रमा – कर्क राशि पर।।

सूर्य – कन्या राशि एवं हस्त नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।

मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:31:15

मुम्बई सूर्यास्त – सायं 18:21:22

वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 06:08:41

वाराणसी सूर्यास्त – सायं 17:52:37

राहुकाल (अशुभ) – सुबह 08:00 बजे से 09:29 बजे तक।।

विजय (शुभ) मुहूर्त – दोपहर 12.14 बजे से 12.38 बजे तक।।

#Panchang_05_October_2026

दशमी तिथि विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देनेवाली अर्थात धनदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं। यह दशमी तिथि धर्म प्रदान करने वाली तिथि भी माना जाता है। अर्थात इस दिन धर्म से संबन्धित कोई बड़े अनुष्ठान वगैरह करने-करवाने से सिद्धि अवश्य मिलती है। इस दशमी तिथि में वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दशमी तिथि को सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये भी अत्यंत शुभ माना जाता है।।

दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इस दशमी तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है। पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। इस दशमी तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं।।

दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं। देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं। इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं।।

#Panchang_05_October_2026

पुष्य नक्षत्र  के जातकों का  गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म पुष्य नक्षत्र में हुआ है तो आपमें नित नए काम करने की प्रवृत्ति बनी रहेगी। हर बार नए काम की खोज और परिवर्तन आपसे अधिक परिश्रम भी कराएगा। कठिन परिश्रम करने पर भी आपको सफलता आसानी से नहीं मिलेगी और फल प्राप्ति में अक्सर देरी हो जाती है। परन्तु आपको निराश होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि आपकी बुद्धि बहुत तेज़ है और आगे बढ़ने के रास्ते भी खोज लेती है। आपके स्वभाव में भावुकता अधिक होने के कारण किसी भी कार्य की गहराई तक आप नहीं पहुँच पाते हैं।।

अधिक भावुकता के कारण आप एक अच्छे और सच्चे प्रेमी होते हैं। किसी भी सम्बन्ध को बीच में छोड़ना आपकी प्रकृति में नहीं है। आप किसी से प्रेम करेंगे तो पूरे तन मन धन से उसके हो जायेंगे। इसी प्रकार आप दोस्ती भी निभाएंगे। मित्रों को सहयोग देने में आप कभी पीछे नहीं हटते और न ही अपने स्वार्थ की चिंता करते है। आप स्वभाव से चंचल होंगे तथा जलप्रिय होने के कारण आपको तैरना भी बहुत पसंद होगा।।
 
पुष्य नक्षत्र में जन्मा व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति सचेत रहता है और अथक प्रयासों द्वारा शीघ्र ही अपनी मंजिल पा लेता है। आप अति साहसी किन्तु अति भावुक भी होते हैं। तीव्र बुद्धिशाली और बुद्धि के मामलों में आप किसी पर विश्वास नहीं करते। वाकपटुता एवं बातों ही बातों में सामने वाले को मोहित करके अपना काम निकलवाना आपको आपको भली भाँती आता है।।

चन्द्रमा की चाँदनी आपको बहुत अधिक आकर्षित करती है। कल्पनाशील होने के कारण आप एक अच्छे लेखक, सुन्दर कवी, महान दार्शनिक एवं उच्च कोटि के साहित्यकार एवं भविष्यवक्ता भी हो सकते हैं। आप मन से शांत एवं धार्मिक स्वभाव के होंगे। अपने क्षेत्र के पंडित एवं विद्वान् होने के साथ-साथ भाग्यशाली और धनि भी होंगे। पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि है परन्तु इसके गुण गुरु तुल्य बताये गये है। ईश्वर में पूर्ण आस्था, भाई बहनों से स्नेहपूर्ण सम्बन्ध एवं अपने से बड़ो का आदर सम्मान आपके स्वभाव में होगा।।

पुष्य नक्षत्र में जन्मी महिलाएं भी बहुत धार्मिक विचारों वाली होती हैं। हर प्रकार के कार्यों में रूचि दिखाना इनके स्वभाव में होता है। यह विशाल ह्रदय वाली तथा दयाभाव रखने वाली होती हैं। पुष्य नक्षत्र में जन्मे जातक हमेशा अभ्यासी पाए जाते हैं। इनको फेफड़ों एवं छाती से सम्बंधित रोग, कफ, पीलिया आदि होने की संभावनायें होती है।।

प्रथम चरण:- पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी सूर्य देवता हैं। पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा व्यक्ति भाग्यशाली होता है एवं यात्राओं द्वारा धन अर्जित करता है। अपनी प्रतिभा के कारण उच्च वाहन, विशाल भवन, पद एवं प्रतिष्ठा को प्राप्त करता है।।

द्वितीय चरण:- पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी बुध हैं। पुष्य नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्मा व्यक्ति एक से अधिक स्रोतों से धन अर्जित करता है। अपनी वाक्पटुता के कारण पक्ष विपक्ष दोनों से ही मधुर सम्बन्ध बना कर रखता है।।

तृतीय चरण:- पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शुक्र देवता हैं। पुष्य नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मा व्यक्ति विद्यावान होता है। उच्च शिक्षा प्राप्त कर कई शैक्षणिक उपाधियाँ प्राप्त करता है। ऐसा जातक जिस भी कार्य में हाथ डालता है उसे सफलता अवश्य मिलती है।।

चतुर्थ चरण:- पुष्य नक्षत्र के चौथे चरण का स्वामी मंगल देवता हैं। पुष्य नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मा व्यक्ति धार्मिक स्वभाव वाला होता है। अतः जातक धार्मिक और परोपकारी कार्यों में पूर्ण रूचि दिखाते हैं। ऐसा जातक जिस भी कार्य में हाथ डालता है उसे सफलता अवश्य मिलती है।।

#Panchang_05_October_2026

सामान्यतया सोमवार शॉपिंग के लिए अच्छा दिन माना जाता है।।

सोमवार का विशेष – सोमवार के दिन तेल मर्दन अर्थात् तेल मालिश करने से चहरे और शरीर की कान्ति बढ़ती है – (मुहूर्तगणपति)।।

सोमवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से शिव भक्ति की हानि होती है। पुत्रवान पिता को तो कदापि नहीं करना चाहिये। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।

दिशाशूल – सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई दर्पण देखकर घर से प्रस्थान कर सकते है।।

सोमवार के दिन ये विशेष उपाय करें – सोमवार को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।

#Panchang_05_October_2026

मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म सोमवार को होता है, वो जातक शांत प्रवृत्ति के गौर वर्ण लिए हुये होते हैं। सोमवार चन्द्र प्रधान दिन होता है, इसलिये इस जातक में कल्पनाशीलता, दया भाव, नम्रता के गुण परिलक्षित होते हैं। माता के प्रिय एवं सद्गुणों से युक्त ये जातक कवि ह्रदय, सफेद वस्तुओं से लाभ पाने वाला, यात्रा का शौकीन, जलाशयों एवं प्रकृति का प्रेमी होता है।।

सोमवार को जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है। इनकी प्रकृति यानी इनका स्वभाव शान्त होता है। इनकी वाणी मधुर और मोहित करने वाली होती है। ये स्थिर स्वभाव वाले होते हैं सुख हो या दु:ख सभी स्थिति में ये समान रहते हैं। धन के मामले में भी ये भाग्यशाली होते हैं तथा इन्हें सरकार एवं समाज से मान-सम्मान मिलता है।।

इस दिन जन्म लेने वाले जातक को पर्यावरण के क्षेत्र में, समुद्र विज्ञान के क्षेत्र में, पानी से जुड़े रोजगार जैसे मत्य् क पालन या मछली का व्यवसाय, पत्थरों का व्यवसाय, कपड़े का व्यंवसाय शुद्ध फलता है। इनके लिए सफेद रंग सदा शुभकारी होता है इसलिए कैरियर के लिहाज से आप जहां भी जायें सफेद रुमाल अपनी जेब में रखें और उस क्षेत्र को ही चुने जिसमें सफेद रंग की प्रधानता हो, जैसे पानी, कपड़ा, फूल, पत्थयर आदि से जुड़ा व्यवसाय।।

आज का सुविचार – मित्रों, जीना हैं, तो उस दीपक की तरह जियो जो बादशाह के महल में भी उतनी ही रोशनी देता हैं जितनी किसी गरीब की झोपड़ी में। जो भाग्य में हैं वह भाग कर आयेगा और जो भाग्य में नही हैं वह आकर भी भाग जायेगा। हँसते रहो तो दुनिया साथ हैं, वरना आँसुओं को तो आँखो में भी जगह नही मिलती।।

#Panchang_05_October_2026

चन्द्रमा द्वारा निर्मित कुछ अतुलनीय धनदायक योग।।…… आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें:  & ब्लॉग पर पढ़ें:

कुंडली से जानें आपका विवाह कब होगा।। Read More.  And  My Blog

कुंडली से जानें विवाह में देरी का कारण और उपाय।। Read More.  And My Blog

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