HomePanchangपञ्चांग 06 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार।।

पञ्चांग 06 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।

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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 06 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार।।

मित्रों, तारीख 06 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष कि एकादशी तिथि है। आज इन्दिरा एकादशी का पावन व्रत है। आज ग्यारहवें दिन का श्राद्ध किया जायेगा। अर्थात जिनके पिता का देहावसान किसी भी महीने के एकादशी तिथि को हुआ हो उनका आज ही तिथि मनाया जायेगा अर्थात श्राद्ध किया जायेगा। अश्विन मास का पहला पक्ष वैसे भी पितरों के लिये आरक्षित होता है। इस श्राद्ध पक्ष में पितरों का तर्पण और श्राद्ध करके मनुष्य अपने पितृगणों को तो तृप्त करता ही है इसके साथ ही समस्त गतात्मा जीव-जगत को भी तृप्त कर लेता है। पितृ पक्ष में श्राद्ध तो अपने स्वर्गीय पिता की मृत्यु की तिथि को अथवा तिथि ज्ञात न होने पर अमावस्या तिथि को करना चाहिए। देव, ऋषि, मनुष्य तर्पण पूर्व एवं पश्चात् करना चाहिए। शास्त्रानुसार देव कार्य से भी महत्वपूर्ण पितृकार्य को माना गया है। आज स्थायिजययोग है। आज सर्वार्थसिद्धियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “ग्यारहवें दिन के श्राद्ध एवं इन्दिरा एकादशी व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।

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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).

पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

पञ्चांग 06 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार।। Panchang 06 October 2026

आज का पञ्चांग 06 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार।।
Aaj ka Panchang 06 October 2026.

विक्रम संवत् – 2083.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.

शक – 1948.

अयन – सौम्यायनम्.

गोल – याम्य.

ऋतु – वर्षा.

मास – अश्विन.

पक्ष – कृष्ण.

गुजराती पंचांग के अनुसार – भाद्रपद कृष्ण पक्ष.

#Panchang_06_October_2026

तिथि – दशमी 02:08 AM बजे तक उपरान्त एकादशी तिथि है।।

नक्षत्र – आश्लेषा 22:18 PM तक उपरान्त मघा नक्षत्र है।।

योग – सिद्ध 07:21 AM तक उपरान्त साध्य योग है।।

करण – विष्टि 02:08 AM तक उपरान्त बव 13:20 PM तक उपरान्त बालव करण है।।

चन्द्रमा – कर्क राशि पर 22:18 PM तक उपरान्त सिंह राशि पर।।

सूर्य – कन्या राशि एवं हस्त नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।

मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:31:31

मुम्बई सूर्यास्त – सायं 18:20:30

वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 06:09:41

वाराणसी सूर्यास्त – सायं 05:51:38

राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:24 बजे से 16:53 बजे तक।।

शुभ मुहूर्त – दोपहर 12.14 बजे से 12.38 बजे तक।।

#Panchang_06_October_2026

मित्रों, तारीख 06 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष कि एकादशी तिथि है। आज इन्दिरा एकादशी का पावन व्रत है। आज ग्यारहवें दिन का श्राद्ध किया जायेगा। अर्थात जिनके पिता का देहावसान किसी भी महीने के एकादशी तिथि को हुआ हो उनका आज ही तिथि मनाया जायेगा अर्थात श्राद्ध किया जायेगा। अश्विन मास का पहला पक्ष वैसे भी पितरों के लिये आरक्षित होता है। इस श्राद्ध पक्ष में पितरों का तर्पण और श्राद्ध करके मनुष्य अपने पितृगणों को तो तृप्त करता ही है इसके साथ ही समस्त गतात्मा जीव-जगत को भी तृप्त कर लेता है। पितृ पक्ष में श्राद्ध तो अपने स्वर्गीय पिता की मृत्यु की तिथि को अथवा तिथि ज्ञात न होने पर अमावस्या तिथि को करना चाहिए। देव, ऋषि, मनुष्य तर्पण पूर्व एवं पश्चात् करना चाहिए। शास्त्रानुसार देव कार्य से भी महत्वपूर्ण पितृकार्य को माना गया है। आज स्थायिजययोग है। आज सर्वार्थसिद्धियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “ग्यारहवें दिन के श्राद्ध एवं इन्दिरा एकादशी व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।

एकादशी तिथि विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये। चावल खाना इस एकादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। ऐसा करने से पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।।

एकादशी तिथि के देवता विश्वदेवताओं को बताया गया है। यह एकादशी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी गयी है। यह एकादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।।

एकादशी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वो धार्मिक तथा सौभाग्यशाली होता है। मन, बुद्धि और हृदय से ऐसे लोग पवित्र होते हैं। इनकी बुद्धि तीक्ष्ण होती और लोगों में बुद्धिमानी के लिए जाने जाते है। इनकी संतान गुणवान और अच्छे संस्कारों वाली होती है, इन्हें अपने बच्चों से सुख एवं सहयोग भी प्राप्त होता है। समाज के प्रतिष्ठित लोगों से इन्हें मान सम्मान मिलता है।।।

इन्दिरा एकादशी व्रत कथा एवं विधि।। Read More.

शास्त्रानुसार एकादशी व्रत करने के नियम।। Read More.

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वैदिक सनातन धर्म में एकादशी तिथि बहुत ही पुण्य फलदायी तिथि मानी जाती है। प्रत्येक मास में एकादशी तिथि दो बार आती है। इसके अनुसार प्रत्येक वर्ष में 24 एकादशी तिथियां आती हैं। लेकिन अधिक मास की एकादशियों के साथ इनकी संख्या 26 हो जाती है। वैदिक पञ्चांग की ग्यारहवीं तिथि एकादशी कहलाती है। इस तिथि का नाम ग्यारस या ग्यास भी है। यह तिथि चंद्रमा की ग्यारहवीं कला है, इस कला में अमृत का पान उमा देवी करती हैं।।

एकादशी तिथि का निर्माण शुक्ल पक्ष में तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा का अंतर 121 डिग्री से 132 डिग्री तक होता है। वहीं कृष्ण पक्ष में एकादशी तिथि का निर्माण सूर्य और चंद्रमा का अंतर 301 से 312 डिग्री तक होता है। एकादशी तिथि के स्वामी विश्वेदेवा को माना गया है। संतान, धन-धान्य और घर की प्राप्ति के लिए इस तिथि में जन्मे जातकों को विश्वेदेवा की पूजा अवश्य करनी चाहिए।।

यदि एकादशी तिथि रविवार और मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा एकादशी तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किसी भी कार्य की सिद्धि प्राप्ति का योग निर्मित होता है। यदि किसी भी पक्ष में एकादशी सोमवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, जो अशुभ होता है। इसमें शुभ कार्य निषिद्ध बताये गये हैं। एकादशी तिथि नंदा तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं किसी भी पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।।

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आश्लेशा नक्षत्र  के जातकों का  गुण एवं स्वभाव:- आश्लेशा नक्षत्र में जन्मे व्यक्तियों का प्राकृतिक गुण सांसारिक उन्नति में प्रयत्नशीलता, लज्जा एवं सौदर्यौपसना होती है। इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति की आँखों एवं वचनों में विशेष आकर्षण होता है। लग्न स्वामी चन्द्रमा के होने के कारण ऐसे जातक उच्च श्रेणी के डॉक्टर, वैज्ञानिक या अनुसंधानकर्ता भी होते हैं इसका कारण चन्द्रमा का औषधिपति होना ही हैं। इस नक्षत्र में जन्मे जातक बहुत चतुर बुद्धि के होते हैं। आप अक्सर जन्म स्थान  से दूर ही रहते हैं। आपका वैवाहिक जीवन भी मधुर नहीं कहा जा सकता है। आश्लेशा नक्षत्र का स्वामी चन्द्र एवं नक्षत्र स्वामी बुध है। गंड नक्षत्र होने के कारण आश्लेशा का सर्पों से घनिष्ठ सम्बन्ध होता है।।

आश्लेशा नक्षत्र में जन्मा व्यक्ति अक्सर अपने वचनों से मुकर जाता है। क्रोध आपकी नाक पर रहता है। किसी पर भी शीघ्र क्रोधित हो जाना आपके स्वभाव में होता है। बुध और चन्द्रमा में शत्रुता के कारण इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति की विचारधारा संकीर्ण होती है और मन: स्थिति कर्तव्यविमूढ़ बन जाती है। अश्लेशा नक्षत्र का व्यक्ति स्वभाव से धूर्त, ईर्ष्यालु, शरारती, पाप कर्म करने से न हिचकने वाला होता है।  ऐसा व्यक्ति किसी भी प्रकार के नियम या आचरण को मानने वाला नहीं होता है।।
 
आश्लेशा नक्षत्र का जातक सदैव परकार्य सेवारत रहतें हैं। भाई की सेवा एवं नौकरी करना स्वाभाविक गुण होता है। स्वतंत्र होने पर परोपकारी होते हैं। अश्लेशा नक्षत्र में जन्मी स्त्रियाँ ऊँचे कद और सुन्दर परन्तु झगडालू प्रवृत्ति की होती हैं। यह सदा दूसरों का अहसान मानने वाली तथा उच्च कोटि की प्रेमिका साबित होती हैं। जिस से भी प्रेम करती है उसका साथ  मरते दम तक निभाती हैं। आश्लेशा के अंत में गंड है अतः व्यक्ति अल्पजीवी होता है, इसलिए अश्लेशा का विधि विधान से शांति करवाना आवश्यक होता है।।

ऐसी मान्यता है, कि जो उपकार पर उपकार करे वह अश्लेशा जातक हैं। सर्दी, कफ, वायु रोग, पीलिया  घुटनों का दर्द एवं विटामिन बी की कमी ऐसे जातकों में हो सकती है।।

प्रथम चरण:- आश्लेषा के चरण का स्वामी गुरु हैं। आश्लेशा नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा व्यक्ति अत्यधिक धनवान होता है। परन्तु ज़्यादातर देखा गया है, कि इसकी आमदनी अनैतिक कार्यों से ही होती है। विदेशों में भाग्योदय एवं वृद्धावस्था में अंग भंग का खतरा रहता है। धार्मिक, राजनितिक और सामाजिक कार्यों में पूर्ण रूचि परन्तु सफलता के लिए अन्याय और असत्य का सहारा भी लेते हैं। सच्ची मित्रता में कतई विश्वास नहीं रखते।।

द्वितीय चरण:- आश्लेषा के द्वितीय चरण का स्वामी शनि होता हैं। अश्लेशा नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्मा व्यक्ति धन एकत्रित करने में सदा असफल रहता है। पद प्रतिष्ठा में कोई कमी नहीं होती है परन्तु उसके हिसाब से धन प्राप्ति हेतु सारे  प्रयत्न विफल होते हैं।।

तृतीय चरण:- आश्लेशा नक्षत्र के तीसरे चरण का स्वामी भी शनि होता हैं। आश्लेशा नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मा व्यक्ति धन एकत्रित करने में सदा असफल रहता है। पद प्रतिष्ठा में कोई कमी नहीं होती है परन्तु उसके हिसाब से धन प्राप्ति हेतु सारे प्रयत्न विफल होते हैं।।

चतुर्थ चरण:- आश्लेशा नक्षत्र के चौथे चरण का स्वामी गुरु होता हैं। आश्लेशा नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मे व्यक्ति की पद प्रतिष्ठा में कोई कमी नहीं होती है परन्तु धन का अभाव सदा बना ही रहता है।।

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मंगलवार को नए कपड़े न ही खरीदना चाहिये और न ही पहली बार पहनना चाहिए। मंगलवार वाहन एवं भूमि-भवन आदि भी नहीं खरीदना चाहिये।।

मंगलवार का विशेष – मंगलवार के दिन तेल मर्दन (शरीर में तेल मालिश) करने से आयु घटती है – (मुहूर्तगणपति)।।

मंगलवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से भी आयु की हानि होती है।। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।

दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।।

मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात दाढ़ी या बाल काटने या कटवाने से उम्र कम होती है। अत: मंगलवार को बाल या दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए। मंगलवार को बजरंगबली की पूजा का विशेष महत्व है।।

मंगलवार को यथासंभव कोशिश करके मंदिर में जाकर हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी/लाल पेड़े या गुड़ और चने का प्रसाद चढ़ाएं। हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत एवं नज़र की बाधा से बचाव होता है साथ ही आपके समस्त शत्रु परास्त होते है।।

मंगलवार के व्रत से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है। मंगलवार को धरती पुत्र मंगलदेव की आराधना करने से जातक को मुक़दमे, राजद्वार में सफलता मिलती है, उत्तम भूमि, भवन का सुख मिलता है, मांगलिक दोष दूर होता है।।

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मंगलवार को जिनका जन्म होता है, वो जातक स्वभाव से उग्र, साहसी, प्रयत्नशील एवं महत्वाकांक्षी होते हैं। इनमें नेतृत्व की क्षमता अन्यों के मुकाबले बहुत शुद्ध होती है। ऐसे लोग जिम्मेदारियों के कार्य में सफल भी होते हैं। खिलाड़ी, पहलवान, सेना तथा पुलिस विभाग में सफल रहते हैं। यह जातक अधिकांशतः रक्तवर्ण या गेहूंआ रंग होता है।।

मंगलवार को जन्म लेनेवाला जातक जटिल बुद्धि वाला होता है। ये किसी भी बात को आसानी से नहीं मानते हैं। ऐसे लोग शक्की किस्म के होते हैं इसलिये सभी बातों में इन्हें कुछ न कुछ खोट दिखाई देता है। ये युद्ध प्रेमी और पराक्रमी होते हैं तथा अपनी बातों पर कायम रहने वाले होते हैं। जरूरत पड़ने पर ऐसे जातक हिंसा पर भी उतर आते हैं। इनके स्वभाव की एक बड़ी विशेषता है कि ये अपने कुटुम्ब का पूरा ख्याल रखते हैं।।

मंगलवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति स्वभावानुसार क्रोधी, उग्र, पराक्रमी, जुझारू, अदम्य साहसी, आलोचना सहन न करने वाले और सांगठनिक क्षमता वाले होते हैं। नेतागिरी, पुलिस, सेना, नौकरशाह तथा खिलाड़ी के रूप में इनका कैरियर सफल रहता है। इनका शुभ अंक 3, 6, 9 तथा शुभ रंग लाल एवं मैरुन और इनका शुभ दिन मंगलवार एवं शुक्रवार होता है।।

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मंगलवार का विशेष टिप्स – यदि आपके जीवन में कभी अचानक ज्यादा खर्च की स्थिति बन जाय, तो किसी भी मंगलवार के दिन हनुमानजी के मंदिर में गुड़-चने का भोग श्रद्धापूर्वक लगाएं। भोग लगाने के बाद वहीँ बैठकर 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ भी अवश्य करें।।

मंगलवार के दिन ये विशेष उपाय करें – मंगलवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्त्व होता है। आज हनुमान जी को चमेली का तेल चढ़ाना, चमेली के तेल का ही दीपक जलाना तथा माखन का भोग लगाना चाहिये, इससे हर प्रकार की मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।।

आज का सुविचार – मित्रों, दुनिया में भगवान का संतुलन कितना अद्भुत हैं, 50 कि.ग्रा. अनाज का बोरा जो उठा सकता हैं वो खरीद नही सकता और जो खरीद सकता हैं वो उठा नही सकता। जब आप गुस्सें में हो तब कोई फैसला न लेना और जब आप खुश हो तब कोई वादा न करना, अगर ये याद रखेंगे तो कभी नीचा नही देखना पड़ेगा।।

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अरिष्ट अर्थात एक्सिडेन्ट एवं चोट आदि लगने के योग ।।….. आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें:  &   ब्लॉग पर पढ़ें:

कुंडली में पैतृक धन प्राप्ति का योग।। Read More.   And  My Blog

कुंडली में विरासत से धन मिलने का योग।। Read More.  And  My Blog

इन्दिरा एकादशी व्रत कथा एवं विधि।। Read More.

शास्त्रानुसार एकादशी व्रत करने के नियम।। Read More.

“क्या बाबा के सर सज रही है, UP का ताज? क्या बाबा फिर CM बन सकते हैं।।” – My Latest video.
“क्या कहती है अखिलेश यादव की कुंडली? क्या मिलेगी सत्ता?।।” – My Latest video.
“शुक्र की महादशा में सूर्य अन्तर्दशा फलम्” – My Latest video.
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वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें।।
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