HomeArticlesAstro Articlesकुंडली में विरासत से धन मिलने का योग।।

कुंडली में विरासत से धन मिलने का योग।।

कुंडली में विरासत से धन मिलने का योग।। Inheritance Wealth Yogas in Kundli.

विरासत और अष्टम भाव का संबंध।। Introduction.

मित्रों, हमने पिछले लेख में पैतृक धन अर्थात चतुर्थ तथा नवम भाव से जुड़ी पारिवारिक संपत्ति तथा पिता के माध्यम से मिलने वाली समृद्धि को विस्तार से समझा था। परंतु विरासत एक अत्यंत विशिष्ट तथा इससे थोड़ी भिन्न अवधारणा है। विरासत का धन प्रायः किसी परिजन के निधन के पश्चात वसीयत, बीमा-दावे, उत्तराधिकार के कानूनी अधिकार अथवा किसी दूरस्थ अथवा अप्रत्याशित संबंधी से प्राप्त होता है। यह धन आवश्यक नहीं कि केवल माता-पिता से ही मिले, यह ससुराल पक्ष, दूर के रिश्तेदार अथवा किसी अनजान अपरिचित से भी प्राप्त हो सकता है।।

वैदिक ज्योतिष में इसी विशिष्ट प्रकार के धन-लाभ के विश्लेषण के लिए अष्टम भाव को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना गया है। अष्टम भाव को स्वयं वारिस-भाव अर्थात उत्तराधिकार का भाव कहा जाता है। तथा यह मृत्यु, बीमा, वसीयत तथा अचानक हस्तांतरित होने वाली संपत्ति का सीधा प्रतिनिधित्व करता है। इसके साथ-साथ केतु ग्रह को भी इस विश्लेषण में विशेष भूमिका दी जाती है। क्योंकि यह मोक्षकारक होने के साथ-साथ अप्रत्याशित तथा अनायास प्राप्त होने वाली वस्तुओं का भी कारक ग्रह भी माना जाता है।।

मित्रों, यहाँ यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि पैतृक धन तथा विरासत का धन, दोनों भिन्न-भिन्न ज्योतिषीय भावों से देखे जाते हैं। पैतृक धन जहाँ चतुर्थ तथा नवम भाव से संबंधित है। वहीं विरासत का धन विशेष रूप से अष्टम भाव से जुड़ा हुआ होता है। कई बार किसी जातक की कुंडली में पैतृक धन का योग सामान्य हो, परन्तु अष्टम भाव अत्यंत बलवान हो, तो ऐसा जातक अपने स्वयं के परिवार से न सही, परंतु किसी अन्य अप्रत्याशित स्रोत से बड़ी विरासत अवश्य प्राप्त कर सकता है।।

तो आज हम विस्तार से इसी अप्रत्याशित धन प्राप्ति के योग के विषय में विस्तार से इस लेख में चर्चा करेंगे। साथ ही यह भी समझेंगे कि अष्टम भाव किस प्रकार विरासत के योग को दर्शाता है। केतु की क्या भूमिका होती है, ससुराल पक्ष से मिलने वाली विरासत को कैसे देखा जाता है। यह योग कब फलित होता है, तथा इसे सुदृढ़ बनाने के लिए कौन-कौन से वैदिक उपाय अपनाए जा सकते हैं।।

अष्टम भाव से विरासत के योग का विश्लेषण।। Analysis of Inheritance Yoga Through the Eighth House.

मित्रों, यदि अष्टम भाव बलवान हो, तथा इसका स्वामी अर्थात अष्टमेश शुभ ग्रहों से युक्त अथवा दृष्ट होकर केंद्र अथवा त्रिकोण भाव में स्थित हो, तो जातक को जीवन में किसी न किसी मोड़ पर विरासत के रूप में महत्वपूर्ण धन-प्राप्ति होने की प्रबल संभावना बनती है। यह धन वसीयत, बीमा-दावे अथवा किसी संबंधी के निधन के पश्चात कानूनी उत्तराधिकार के रूप में प्राप्त होता है।।

विशेष रूप से यदि अष्टमेश द्वितीय भाव अर्थात संचित धन के भाव में स्थित हो, अथवा द्वितीयेश से शुभ संबंध बनाए। तो यह विरासत के धन को स्थायी तथा उपयोगी बनाने का प्रबल योग माना जाता है। इसके विपरीत यदि अष्टम भाव पीड़ित हो, तो विरासत प्राप्त करने में कानूनी अड़चनें, पारिवारिक विवाद अथवा दीर्घकालिक विलंब की स्थिति भी बन जाती है।।

केतु की विशेष भूमिका।। The Special Role of Ketu.

मित्रों, केतु को मोक्ष, वैराग्य तथा अप्रत्याशित रूप से प्राप्त होने वाली वस्तुओं का कारक ग्रह माना गया है। जब केतु अष्टम भाव में स्थित हो अथवा अष्टमेश से शुभ संबंध बनाए। तो यह जातक को किसी ऐसे स्रोत से भी अकस्मात विरासत प्राप्त होने का संकेत देता है। जिसकी उसे स्वयं भी अपेक्षा नहीं होती। जैसे किसी दूर के संबंधी अथवा किसी अनपेक्षित व्यक्ति से मिलने वाली संपत्ति।।

केतु से जुड़ी विरासत की एक विशेषता यह भी होती है, कि इसके साथ प्रायः कुछ वैराग्य अथवा भावनात्मक जटिलता भी जुड़ी रहती है। क्योंकि यह धन किसी के निधन से जुड़ा होता है। ऐसे जातकों को इस धन को केवल भौतिक लाभ की दृष्टि से न देखकर, श्रद्धा तथा जिम्मेदारी के साथ स्वीकार करना चाहिए। तथा इसका एक अंश पुण्य-कार्य में अवश्य लगाना चाहिए।।

ससुराल पक्ष से मिलने वाली विरासत।। Inheritance Received from the Spouse’s Family.

मित्रों, यह एक रोचक तथा कम चर्चित ज्योतिषीय सिद्धांत है। कि अष्टम भाव सप्तम भाव अर्थात जीवनसाथी के भाव से द्वितीय स्थान पर भी पड़ता है। अर्थात यह ससुराल पक्ष के धन-भाव का भी प्रतिनिधित्व करता है। इसी कारण अष्टम भाव की शुभ स्थिति जातक को अपने ससुराल पक्ष से भी विरासत अथवा महत्वपूर्ण धन-सहयोग प्राप्त होने का संकेत देती है।।

विशेषकर विवाहित स्त्रियों की कुंडली में इस भाव का विशेष महत्व माना जाता है। क्योंकि पारंपरिक रूप से ससुराल पक्ष की संपत्ति से जुड़ाव इसी भाव के माध्यम से देखा जाता है। यदि अष्टम भाव तथा सप्तम भाव दोनों शुभ स्थिति में हों, तो यह योग ससुराल पक्ष से प्राप्त होने वाली समृद्धि का एक बलवान संकेत माना जाता है।।

विरासत का धन कब फलित होगा।। When Will the Inheritance Wealth Materialize.

मित्रों, विरासत के धन का समय जानने के लिए अष्टमेश अथवा केतु की महादशा-अंतर्दशा का विश्लेषण किया जाता है। सामान्यतः जिस अवधि में अष्टमेश की स्वयं की दशा-अंतर्दशा चल रही हो, अथवा गोचर में शनि या फिर गुरु का अष्टम भाव पर शुभ प्रभाव हो, उस अवधि को विरासत-प्राप्ति के लिए विशेष रूप से अनुकूल माना जाता है।।

इसके साथ ही यदि इसी अवधि में द्वितीयेश अथवा एकादशेश की दशा-अंतर्दशा भी साथ-साथ चल रही हो, तो यह संयोग विरासत के धन को शीघ्रता से तथा सुगमता से प्राप्त होने की पुष्टि करता है। अनुभवी ज्योतिषी इन सभी कारकों का समन्वित अध्ययन करके ही इस विशेष घटना के फलित होने का सटीक समय बता सकते हैं।।

विरासत योग को सुदृढ़ बनाने के वैदिक उपाय।। Vedic Remedies to Strengthen Inheritance Yoga.

मित्रों, विरासत के योग को सुदृढ़ तथा सुगम बनाने के लिए शनिवार के दिन “ॐ शं शनैश्चराय नमः” इस शनिदेव के मंत्र का, तथा केतु की शांति हेतु “ॐ कें केतवे नमः” इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक नियमित जप करना चाहिए। क्योंकि यह दोनों ग्रह अष्टम भाव से विशेष रूप से जुड़े माने जाते हैं। मृत्युंजय मंत्र का जप भी इस संदर्भ में अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।।

पितरों तथा दिवंगत परिजनों के निमित्त श्राद्ध-तर्पण नियमित रूप से करना चाहिए। साथ ही असहायों एवं जरूरतमंदों की सेवा करना भी इस योग को अनुकूल बनाने में विशेष रूप से सहायक सिद्ध होता है। शनिवार के दिन काले तिल तथा कंबल का दान करना भी लाभकारी माना जाता है। विरासत से जुड़े कानूनी दस्तावेज़ों को स्पष्ट तथा व्यवस्थित रखना चाहिए। ताकि उचित कानूनी परामर्श लेना भी सहज हो जायेगा अथवा क़ानूनी सलाह लेना आवश्यक भी माना जाता है।।

और मेरी सलाह तो यही रहेगी कि इन उपायों को केवल औपचारिकता के लिए नहीं, बल्कि पूर्ण श्रद्धा तथा निरंतरता के साथ करें। ज्योतिषीय उपायों के साथ-साथ विरासत से प्राप्त धन का सम्मानपूर्वक तथा जिम्मेदारी से प्रबंधन करना भी उतना ही आवश्यक होता है। क्योंकि यह धन प्रायः किसी की स्मृति से जुड़ा होता है।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में अष्टम भाव को स्वयं वारिस-भाव अर्थात उत्तराधिकार का प्रमुख भाव बताया गया है। फलदीपिका के अनुसार बलवान अष्टमेश तथा इसका द्वितीय भाव से शुभ संबंध जातक को विरासत के रूप में उल्लेखनीय धन-प्राप्ति की ओर संकेत करता है।।

सारावली में भी यह उल्लेख मिलता है कि अष्टम भाव सप्तम भाव से द्वितीय स्थान होने के कारण ससुराल पक्ष के धन का भी प्रतिनिधित्व करता है। तथा इसका पूर्ण फलादेश अष्टमेश, केतु तथा दशा-गोचर के समन्वित अध्ययन के पश्चात ही निश्चित किया जाना चाहिए।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

प्रश्न 1. विरासत से धन-प्राप्ति के लिए कुंडली का कौन-सा भाव देखा जाता है।। Which House in Kundli Is Seen for Wealth from Inheritance.

उत्तर:- अष्टम भाव को स्वयं वारिस-भाव अर्थात उत्तराधिकार का भाव माना गया है। इसलिए इसकी शुभ स्थिति ही विरासत-प्राप्ति का मुख्य आधार होती है।।

प्रश्न 2. पैतृक धन तथा विरासत के धन में क्या अंतर है।। What Is the Difference Between Ancestral Wealth and Inheritance Wealth.

उत्तर:- पैतृक धन चतुर्थ तथा नवम भाव से जुड़ा होता है। जो प्रायः माता-पिता से जीवित रहते अथवा पारिवारिक संपत्ति के रूप में मिलता है। जबकि विरासत का धन अष्टम भाव से जुड़ा होता है। जो किसी के निधन के पश्चात वसीयत अथवा उत्तराधिकार के रूप में प्राप्त होता है।।

प्रश्न 3. क्या ससुराल पक्ष से भी विरासत मिलने का योग कुंडली में देखा जा सकता है।। Can the Yoga for Inheritance from the Spouse’s Family Also Be Seen in Kundli.

उत्तर:- हाँ, अष्टम भाव सप्तम भाव से द्वितीय स्थान होने के कारण ससुराल पक्ष के धन का भी प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए इसकी शुभ स्थिति ऐसी विरासत का भी संकेत देती है।।

प्रश्न 4. केतु विरासत के योग में क्या भूमिका निभाता है।। What Role Does Ketu Play in the Inheritance Yoga.

उत्तर:- केतु अकस्मात तथा अप्रत्याशित रूप से प्राप्त होने वाली विरासत का कारक माना जाता है। विशेषकर जब यह किसी दूरस्थ अथवा अनपेक्षित स्रोत से प्राप्त हो।।

प्रश्न 5. विरासत योग को सुदृढ़ बनाने का सबसे प्रभावी वैदिक उपाय क्या है।। What Is the Most Effective Vedic Remedy to Strengthen Inheritance Yoga.

उत्तर:- शनिदेव तथा केतु देवता के मन्त्र का जप, नियमित पितृ-तर्पण तथा असहायों की सेवा सबसे प्रभावी उपाय माने जाते हैं।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, अष्टम भाव, अष्टमेश तथा केतु की स्थिति का समन्वित विश्लेषण करके यह जाना जा सकता है। कि जातक को विरासत के रूप में धन-प्राप्ति होगी अथवा नहीं। तथा यह किस स्रोत से तथा किस समय प्राप्त होगी। यह पैतृक धन के विश्लेषण से भिन्न, परंतु उतनी ही महत्वपूर्ण ज्योतिषीय पद्धति है।।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार शनि-केतु की उपासना तथा नियमित पितृ-तर्पण विरासत योग को सुदृढ़ बनाने में सहायक माने गए हैं। और यहाँ मैं यही कहूँगा कि विरासत का धन केवल भौतिक लाभ नहीं। अपितु किसी की स्मृति तथा विश्वास का प्रतीक भी होता है। इसलिए इसे श्रद्धा तथा जिम्मेदारी के साथ स्वीकार करना ही इसका सच्चा सम्मान है।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि इस विषय पर किसी भी निर्णायक निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले किसी विद्वान, योग्य, अनुभवी वैदिक ज्योतिषी से अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली का विश्लेषण विधिपूर्वक अवश्य करवाना चाहिए। ताकि सही एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।।

#कुंडली_में_विरासत_से_धन #अष्टम_भाव_और_विरासत_योग #वसीयत_से_धन_प्राप्ति_ज्योतिष #केतु_और_उत्तराधिकार #ससुराल_से_विरासत_योग #Inheritance_Wealth_Yoga_In_Kundli #Eighth_House_And_Legacy #Will_And_Astrology #Ketu_And_Inheritance #Vedic_Remedies_For_Inheritance_Wealth

ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे  YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं – Click Here & Watch My YouTube Channel.

इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज – My facebook Page.

वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।

किसी भी तरह के पूजा-पाठ, विधी-विधान, ग्रह दोष शान्ति आदि के लिए तथा बड़े से बड़े अनुष्ठान हेतु योग्य एवं विद्वान् ब्राह्मण हमारे यहाँ उपलब्ध हैं ।।
 
संपर्क करें:- बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के बाजु में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा ।।
 
WhatsAap & Call: +91 – 8690 522 111.
E-Mail :: balajijyotish11@gmail.com
Balaji Jyotish Kendra
Balaji Jyotish Kendrahttp://balajijyotish.com
Balaji Jyotish Kendra par Vedic Astrology, Kundli Analysis, Horoscope Reading aur Astro Remedies step-by-step. Online astrology classes, practical training aur expert guidance ke saath apni jyotish knowledge ko professional level tak Pahuchaye. Contact Us.
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments