बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।
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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 01 अक्टूबर 2026 दिन गुरुवार।।
मित्रों, तारीख 01 अक्टूबर 2026 दिन गुरुवार को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की पञ्चमी तिथि है। आज पांचवे दिन का श्राद्ध किया जायेगा। जिनके पिता का देहावसान किसी भी महीने के पञ्चमी तिथि को हुआ है उनका आज ही तिथि मनाया जायेगा। आश्विन मास का पहला पक्ष पितरों के लिये आरक्षित है तथा बहुत महत्वपूर्ण भी होता है। 27 सितम्बर रविवार से ही पितृपक्ष आरम्भ हो चूका है। और इसमें पितरों का श्राद्ध एवं तर्पण करना हम सनातनियों के लिए प्रथम कार्य होना चाहिए। श्राद्ध-तर्पण के सम्बन्ध में एक सिद्धान्त होता है कि इस श्राद्ध पक्ष में पितरों का तर्पण करके मनुष्य अपने पितृगणों को तो तृप्त कर लेते हैं। इसके साथ ही समस्त गतात्मा जीव-जगत को भी तृप्त करते हैं। पितृ पक्ष में श्राद्ध तो अपने स्वर्गीय पिता की मृत्यु तिथि को अथवा तिथि ज्ञात न होने पर अमावस्या तिथि को करना चाहिए। देव, ऋषि, मनुष्य तर्पण पूर्व एवं पश्चात् करना चाहिए। “देवकार्यादपि सदापितृकार्यं विशिष्यते।” अर्थात् देव कार्य से भी महत्वपूर्ण पितृकार्य को माना गया है। आज श्रीचन्द्रषष्ठीव्रत भी (चन्द्रोदय व्यापिनी, चन्द्रोदय:- रात्रि 21:04 PM) आज यायिजययोग है। आज यमघंटयोग भी है। आप सभी सनातनियों को “पांचवे दिन के पितृश्राद्ध” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आप का आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।
वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

आज का पञ्चांग 01 अक्टूबर 2026 दिन गुरुवार।।
Aaj ka Panchang 01 October 2026.
विक्रम संवत् – 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.
शक – 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल – याम्य.
ऋतु – वर्षा.
मास – अश्विन.
पक्ष – कृष्ण.
गुजराती पंचांग के अनुसार – भाद्रपद कृष्ण पक्ष.
#Panchang_01_October_2026
तिथि – पञ्चमी 12:36 PM बजे तक उपरान्त षष्ठी तिथि है।।
नक्षत्र – कृत्तिका 06:03 AM तक उपरान्त रोहिणी नक्षत्र है।।
योग – सिद्धि 21:19 PM तक उपरान्त व्यतिपात योग है।।
करण – तैतिल 12:36 PM तक उपरान्त गर 23:26 PM तक उपरान्त वणिज करण है।।
चन्द्रमा – वृषभ राशि पर।।
सूर्य – कन्या राशि एवं हस्त नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:30:12
मुम्बई सूर्यास्त – सायं 18:24:55
वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 06:05:39
वाराणसी सूर्यास्त – सायं 17:55:45
राहुकाल (अशुभ) – सुबह 13:58 बजे से 15:27 बजे तक।।
विजय मुहूर्त (शुभ) – दोपहर 12.16 बजे से 12.40 बजे तक।।
#Panchang_01_October_2026
पञ्चमी तिथि विशेष:- पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। पञ्चमी तिथि को पूर्णा संज्ञक तिथियों में स्थान प्राप्त है। नन्दा, भद्रा, जया, रिक्ता और पूर्णा—इन पाँच संज्ञाओं में पूर्णा संज्ञा की तिथि सभी प्रकार की सिद्धि, पूर्णता तथा समृद्धि प्रदान करने वाली मानी गई है। इस कारण इस पञ्चमी तिथि में प्रारम्भ किए गए कार्य प्रायः सफलता को प्राप्त होते हैं। शास्त्रों में पञ्चमी तिथि को विद्या, ज्ञान, औषधि, नागोपासना तथा ऋषि-पूजन के लिए विशेष प्रशस्त बताया गया है। विशेषतः यदि यह पञ्चमी तिथि शुभ नक्षत्र के साथ संयोग करे तो अध्ययन, दीक्षा, मन्त्र ग्रहण, शास्त्र अध्ययन तथा विद्यारम्भ के लिए अत्यन्त उत्तम मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।।
शिवपुराण में तथा आगमों में भी नागों को भगवान शिव का आभूषण बताया गया है। इसलिए पञ्चमी तिथि में भगवान शिव का पूजन, अभिषेक, रुद्राष्टाध्याय का पाठ तथा “ॐ नमः शिवाय” मन्त्र का जप करने से भी नागदेवताओं की भी कृपा प्राप्त होती है। शिवलिङ्ग पर कच्चा दूध, जल, बिल्वपत्र तथा अक्षत चढ़ाने से अनेक प्रकार की बाधाओं का निवारण होता है। पञ्चमी तिथि में विद्यारम्भ, पुस्तक क्रय, मन्त्रदीक्षा, स्वाध्याय, देवप्रतिष्ठा, गृह में धार्मिक कार्य, औषधि सेवन का प्रारम्भ, भूमि सम्बन्धी शुभ कार्य, व्यापार विस्तार, धन संचय, आभूषण धारण, वाहन क्रय आदि कार्य शुभ माने गए हैं, यदि अन्य पंचांग दोष उपस्थित न हों।।
यद्यपि पञ्चमी शुभ तिथि मानी जाती है, तथापि अनावश्यक हिंसा, वृक्षों का विनाश, सर्प अथवा अन्य जीवों को कष्ट देना, कटु वचन बोलना, ऋषि, गुरु तथा माता-पिता का अपमान, इनसे विशेष रूप से बचना चाहिए। नागों के अधिपत्य वाली इस पञ्चमी तिथि में जीवों के प्रति दया का विशेष महत्व बताया गया है। आयुर्वेद और लोकपरम्परा में पञ्चमी को शरीर की शुद्धि तथा औषधि सेवन प्रारम्भ करने के लिए भी शुभ माना गया है। अनेक वैद्य आज भी औषधि सिद्धि एवं नई चिकित्सा के प्रारम्भ के लिए शुभ तिथि का विचार करते हैं।।
पञ्चमी तिथि में जिनका जन्म होता है:- पञ्चमी तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है। आज पञ्चमी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति गुणवान होता है। इस तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह माता पिता की सेवा को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म समझता है। इनके व्यवहार में उत्तम श्रेणी का एक सामाजिक व्यक्ति दिखाई देता है। इनके स्वभाव में उदारता और दानशीलता स्पष्ट दिखाई देती है। ये हर प्रकार के सांसारिक भोग का आनन्द लेते हैं और धन धान्य से परिपूर्ण जीवन का आनंद उठाते हैं। पञ्चमी तिथि में जन्म लेने वाला जातक सामान्यतः बुद्धिमान, मधुरभाषी, दयालु, धर्मप्रिय, माता-पिता का सेवक, गुरुजन का सम्मान करने वाला, आर्थिक दृष्टि से उन्नति करने वाला, उत्तम सलाहकार, समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखते हैं तथा जीवन में धीरे-धीरे उत्तम सफलता प्राप्त करते हैं। इनमें धार्मिक प्रवृत्ति, तीर्थाटन तथा देवपूजन के प्रति विशेष श्रद्धा देखने को मिलती है।।
#Panchang_01_October_2026
रोहिणी नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- रोहिणी नक्षत्र में जन्म लेने वाला व्यक्ति सदा दूसरों में गलतियां ढूँढता रहता है। आप कोई भी ऐसा मौका हाथ से नहीं जाने देते जिसमें कि सामने वाले की त्रुटियों की चर्चा आप न करें। आप शारीरिक रूप से कमज़ोर होते हैं इसलिए कोई भी छोटी से छोटी मौसमी बदलाव के रोग भी आपको अक्सर जकड लेते हैं। आप एक ज्ञानी परन्तु स्त्रियों में आसक्ति रखने वाले होतें हैं।।
रोहिणी नक्षत्र में जन्मे जातक सुन्दर एवं मीठा बोलने वाले होते हैं। आप घर और कार्य क्षेत्र में व्यवस्थित रहना ही पसंद करते हैं। आपको गन्दगी से बेहद नफरत होता है। घर का सामान भी आप सुव्यवस्थित ढंग से रखना पसंद करते हैं। स्वभाव से कोमल और सौन्दर्य के प्रति लगाव आपके प्रमुख गुणों में से एक होता है। रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चन्द्रमा है। इसलिए इस नक्षत्र में जन्मे जातक स्त्रियों में विशेष आसक्ति रखते हैं।।
रोहिणी नक्षत्र में जन्मे जातक कभी-कभी बहुत ही कोमल और विनम्र स्वभाव के दीखते हैं तो कभी कठोर और अभद्र। अपने प्रियजनों की मदद के लिए सदा तत्पर रहतें हैं और कठिन से कठिन परिस्तिथियों में भी पीछे नहीं हटते। यदि आपको कोई कष्ट पहुंचाए तो आप उग्र रूप ले लेते हैं और किसी को भी अपने ऊपर हावी नहीं होने देते। आप दिमाग की अपेक्षा दिल की सुनते हैं।।
आप न तो योजनाबद्ध तरीके से चलते हैं और न ही बहुत लम्बे समय तक एक ही राह पर चलना पसंद करते हैं। अपने इसी दृष्टिकोण के कारण आप जीवन में अनेकों बार कठिनाईयों को झेलते हैं। आप मानवता में विश्वास रखते हैं परन्तु अत्यधिक संवेदनशील होने के कारण आप चोट पहुंचाने वालों को कभी क्षमा नहीं करते। स्वतंत्र सोच और धैर्य की कमी के कारण जीवन में आप बहुत बार निराशा का सामना करते हैं।।
सभी प्रकार के कार्यों में भाग्य आज़माना आपके लिए संकट की स्तिथि पैदा कर सकता है। दूसरों पर आँखे बंद कर के विश्वास कर लेना आपके स्वभाव में है। परन्तु व्यवसायिक क्षेत्र में यह स्वभाव आपको बहुत हानि पहुंचाएगा। 18 से 36 वर्ष का समय आपके लिए सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य के लिए संघर्ष पूर्ण रहेगा। परन्तु 36 से 50 वर्ष तक का समय आपके लिए शुभ होगा।।
पिता की अपेक्षा माता या मातृपक्ष से आपका अधिक स्नेह रहेगा। वैवाहिक जीवन में भी उतार चढ़ाव बना रहेगा। रोहिणी नक्षत्र में जन्मी महिलाएं दुबली पतली परन्तु विशेष रूप से आकर्षक होती हैं। सदा अपने से बड़ों और माता पिता की आज्ञाकारिणी होती हैं। आप अपने रहने और खाने पीने में सदा सतर्क और सावधान रहती हैं। पति के साथ सहमति बनाए रखना आपका स्वभाव है।।
इसलिए आपके वैवाहिक सम्बन्ध मधुर ही होते हैं। आपकी संतान पुत्र और पुत्री दोनों ही होते हैं। आप एक धनवान और ऐश्वर्यशाली जीवन व्यतीत करते हैं। विशाल आँखें बहुत ही खुबसूरत एवं आकर्षण का केन्द्र होता है। ज्यादातर रोहिणी नक्षत्र के जातकों को मुंह, गले, जीभ एवं गर्दन से सम्बंधित रोग होने की संभावनायें होती हैं।।
प्रथम चरण:- रोहिणी नक्षत्र का स्वामी ग्रह चन्द्रमा हैं तथा राशि स्वामी शुक्र माना जाता हैं। इसके प्रथम चरण का स्वामी ग्रह मंगल हैं। रोहिणी नक्षत्र के पहले चरण में जन्म होने के कारण जातक सौभाग्यशाली होगा। चन्द्रमा और मंगल की मित्रता के कारण धन एवं ख्याति भी मिलता है। चन्द्रमा एवं मंगल की दशा-अन्तर्दशा में जातक की उन्नत्ति होगी। लग्नेश शुक्र की दशा उन्नति में विशेष सहायक होगी।।
द्वितीय चरण:- रोहिणी नक्षत्र का स्वामी ग्रह चन्द्रमा हैं तथा राशि स्वामी शुक्र माना जाता हैं। इसके द्वितीय चरण का स्वामी ग्रह शुक्र हैं। रोहिणी नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्म होने के कारण जातक को कुछ न कुछ पीड़ा बनी रहेगी। शुक्र की दशा-अन्तर्दशा में जातक की विशेष उन्नत्ति होगी।।
तृतीय चरण:- रोहिणी नक्षत्र का स्वामी ग्रह चन्द्रमा हैं तथा राशि स्वामी शुक्र माना जाता हैं। इसके तृतीय चरण का स्वामी ग्रह बुध हैं। रोहिणी नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्म होने के कारण जातक डरपोक और भावुक होगा। चन्द्र एवं बुध की दशा अशुभ परन्तु लग्नेश शुक्र की दशा-अन्तर्दशा में जातक की विशेष उन्नत्ति होगी।।
चतुर्थ चरण:- रोहिणी नक्षत्र का स्वामी ग्रह चन्द्रमा हैं तथा राशि स्वामी शुक्र माना जाता हैं। इसके चतुर्थ चरण का स्वामी ग्रह चन्द्रमा हैं। रोहिणी नक्षत्र के चौथे चरण में जन्म होने के कारण जातक सत्यवादी एवं सौन्दर्य प्रेमी होगा। चन्द्रमा की दशा शुभ फल देगी एवं शुक्र की दशा-अन्तर्दशा में जातक की विशेष उन्नत्ति होगी।।
#Panchang_01_October_2026
गुरुवार शॉपिंग के लिये अच्छा दिन माना जाता है।।
गुरुवार का विशेष – गुरुवार के दिन तेल मर्दन करने से धन एवं यश की हानि होती है – (मुहूर्तगणपति)।।
गुरुवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से तथा सर के बाल धोना, कपड़े धुलना अथवा धोबी के घर डालना, घर-आँगन की गोबर आदि से लिपाई करना इस प्रकार के कार्य नहीं करने चाहियें इससे धन एवं पूण्य की हानी होती है और लक्ष्मी घर छोड़कर चली जाती है।। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति का कारक ग्रह होता है। साथ ही बृहस्पति ही संतान का कारक ग्रह भी होता है। इसलिये बृहस्पति ग्रह अकेले ही स्त्री के संतान और पति दोनों के जीवन को प्रभावित करता है। अतः बृहस्पतिवार को सिर धोना बृहस्पति को कमजोर बनाता है जिससे कि बृहस्पति के शुभ प्रभाव में कमी आती है। इसी कारण से इस दिन बाल धोना या कटवाना भी नहीं चाहिए। इसका असर संतान और पति के जीवन पर पड़ता है और उनकी उन्नति बाधित होती है।।
वास्तु अनुसार घर के ईशान कोण का स्वामी गुरु होता है। ईशान कोण का संबंध परिवार के नन्हे सदस्यों यानी कि बच्चों से होता है। साथ ही घर के पुत्र संतान का संबंध भी इसी कोण से ही होता है। ईशान कोण धर्म और शिक्षा की दिशा है इसलिये घर में शुद्ध वजन वाले कपड़ों को धोना, कबाड़ घर से बाहर निकालना, घर को धोना या पोछा लगाना इत्यादि घर के ईशान कोण को कमजोर करता है। उससे घर के बच्चों, पुत्रों, घर के सदस्यों की शिक्षा, धर्म आदि पर गुरु का शुभ प्रभाव कम होता है।।
#Panchang_01_October_2026
गुरुवार भगवान लक्ष्मी नारायण का दिन होता है। इसलिये इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से जीवन में अपार खुशियाँ आती है। इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से पति-पत्नी के बीच कभी दूरियाँ नहीं आती है साथ ही धन की वृद्धि भी होती है। जन्मकुंडली में गुरु ग्रह के प्रबल होने से उन्नति के रास्ते आसानी से खुलते हैं। परन्तु यदि गुरु ग्रह को कमजोर करने वाले कार्य किए जाए तो प्रमोशन होने में भी रुकावटें आती है।।
गुरुवार को गुरु ग्रह को कमजोर किए जाने वाले काम करने से धन की वृद्धि रुक जाती है। जैसे – सिर के बाल धोना, भारी कपड़े धोना, बाल कटवाना, शेविंग करवाना, शरीर के बालों को साफ करना, फेशियल करवाना, नाखून काटना, घर से मकड़ी के जाले साफ करना, घर के उन कोनों की सफाई करना जिन कोनों की रोज सफाई नहीं की जाती हो। ये सभी काम गुरुवार को करने से धन हानि होता है तथा तरक्की रुक जाती है।।
दिशाशूल – गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खा कर यात्रा कर सकते है।।
गुरुवार के दिन ये विशेष उपाय करें – गुरु धन एवं प्रतिष्ठा का कारक ग्रह होता है। जिस व्यक्ति पर गुरु की कृपा होती है उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है। गुरुवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान ध्यान करें और घी का दीप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें बिगड़े काम भी बन जायेंगे।।
#Panchang_01_October_2026
बृहस्पतिवार को जिनका जन्म होता है, वह व्यक्ति विद्या एवं धन से युक्त होता है अर्थात ये ज्ञानी और धनवान होते हैं। ये विवेकशील होते हैं और शिक्षण को अपना पेशा बनाते हैं। ये लोगों के सम्मुख आदर और सम्मान के साथ प्रस्तुत होते हैं तथा उच्च स्तर के सलाहकार भी होते हैं। गुरुवार में जन्मे जातक सभ्य, खिलते रंग के, सुशील एवं मधुर स्वभाव के होते हैं तथा धर्म के प्रति सचेत होते हैं।।
ये सभी सद्गुणों से संपन्न होने के वजह से किसी के साथ विश्वासघात नहीं करते हैं। ऐसे लोग किसी का हक नहीं मारते तथा न्याय के प्रति सजग होते हैं। यह सफल राजनीतिज्ञ, न्यायधीश, क्लर्क, प्रकाशक एवं धर्मगुरु आदि के रूप में सफल होते हैं। गुरुवार को जन्मं लेने वाले व्यसक्ति बेहद मिलनसार और मधुर स्वभाव के होते हैं। ये जीवन को उत्सफव की तरह जीते हैं इसलिए हमेशा खिले-खिले रहते हैं।।
ऐसे व्यक्ति धर्म में विशेष रुचि रखने वाले होते हैं। धार्मिक प्रवृत्ति के कारण ये कभी किसी के साथ विश्वाससघात नहीं कर सकते हैं। यह किसी का हक भी नहीं मारते, न्याय के प्रति सजग होते हैं। इनको अपने जीवन में सफलता हेतु धर्मगुरु, राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लेखक, प्रकाशक एवं न्यायधीश आदि के क्षेत्र में भाग्य आजमाना चाहिये। इनका शुभ दिन मंगलवार और बृहस्पितिवार तथा शुभ अंक 4 होता है।।
आज का विचार – मित्रों, हम अपनी पिछली गलतियों से सबक लेकर अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। परन्तु याद रहे कि होशियार लोग अपनी गलती से लेते हैं, जबकि ज्यादा होशियार लोग दूसरों की गलतियों से गलतियों को दुहराना सीखते हैं। इसलिये अपनी गलतियों को सुधारना ही व्यक्ति में इंसानियत लाता है।।
#Panchang_01_October_2026
जन्मकुण्डली के अनुसार आपके जीवन में धन कैसे और कब आयेगा?।।…. आज के इस लेख को पूरा पढने के लिये इस लिंक को क्लिक करें….. वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें:
