HomeKal Sarp Yogaकालसर्प दोष एवं उसका सरल उपाय ।।

कालसर्प दोष एवं उसका सरल उपाय ।।

कालसर्प दोष एवं उसका सरल उपाय ।। Kalsarpa dosha and simple solution

मित्रों, जब राहु और केतु के बीच में अन्य सभी ग्रह आ जाएं तो जन्मकुण्डली में कालसर्प योग का निर्माण होता है । इसे नागपाश एवं नागफन्द योग भी कहा जाता है ।।कालसर्प योग से प्रभावित जातक को आजीवन भिन्न-भिन्न तरह के कष्ट, ऋण, बेरोजगारी, संतानहीनता, दाम्पत्य जीवन में सुख के अभाव आदि का सामना करना पड़ता है ।।मित्रों, आज मैं इस योग के मुख्य भेदों और उनके उपायों का संक्षिप्त विवरण बताने का प्रयत्न करता हूँ । अनंत नामक कालसर्प योग तब बनता है जब लग्न में राहु और सप्तम में केतु हो तथा शेष ग्रह इन दोनों के किसी एक तरफ बैठे हों ।।

इसके कारण जातक का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता एवं साथ-साथ मानसिक अशांति भी रहती है । इसका सरल उपाय है अधिकाधिक महामृत्युंजय का जप स्वयं करना ।।

कुलिक नामक कालसर्प योग कुण्डली में तब बनता है जब द्वितीय स्थान में राहु एवं अष्टम में केतु बैठा हो तथा बाकी के ग्रह इन दोनों के किसी एक तरफ बैठे हों तो जातक को धन हानि होती है ।।

ऐसे जातक को अक्सर गले के रोग परेशान करते रहते हैं । कुलिक कालसर्प योग के कारण जातक की वाणी भी प्रभावित होती है । ऐसे जातक को पारिवारिक सुख में कमी का अनुभव सदैव होता है ।।

ऐसे जातक को अपने स्वजनों से सामजंस्य का अभाव रहता है । इस प्रकार वह पारिवारिक रूप से परेशान हो जाता है । इसका उपाय ये है कि चाँदी के 108 नाग-नागिन के जोड़े को जल में प्रवाहित करें ।।

मित्रों, जब तृतीय स्थान में राहु एवं नवम में केतु बैठता है और बाकी के समस्त ग्रह इन दोनों के बीच में बैठे हों तो वासुकी नामक कालसर्प योग का निर्माण होता है ।।

इस दोष के वजह से जातक को अपने भाई बहनों के कारण कष्ट या परेशानी बनी रहती है । ऐसे जातकों के भाग्योदय में भी अड़चनें आती है ।।

इस वजह से जातक को आर्थिक एवं मानसिक तनाव सदैव बना रहता है तथा चर्म रोग एवं पैरों से संबंधित रोग भी हो सकता है । ऐसे जातक को पार्टनरशिप में कोई कार्य नहीं करना चाहिए ।।

इस दोष से मुक्ति एवं जीवन में शुभ फल प्राप्ति के लिए नागपंचमी के दिन नागों को दूध पिलाएं । अमावस्या के दिन चाँदी के नाग बनवाकर यथाविधान पूजन करके शिवलिंग पर चढायें ।।

मित्रों, कुण्डली में जब चतुर्थ स्थान में राहु व दशम में केतु बैठते हैं और बाकी के सभी ग्रह इन दोनों के बीच में बैठे हों तो शंखपाल नामक कालसर्प योग का निर्माण होता है ।।

ऐसे जातक को अपनी माता से वैचारिक मतभेद सम्भव है अथवा उसकी माता को कष्ट, विवाह जन्म स्थान से दूर, विवाह में विलंब होना सम्भव है, दांपत्य जीवन के प्रारंभ में मुश्किल, विद्या अर्जन, मकान एवं वाहन इत्यादि में भी कठिनाई होता है ।।

 

ऐसे जातक को अपने खुद की पैतृक सम्पत्ति के मिलने में भी अड़चनें आती है । गले एवं कंधे की परेशानी एवं पारिवारिक सुख का अभाव लगभग अभाव ही रहता है ।।

इस दोष से मुक्ति एवं जीवन में शुभ फल प्राप्ति के लिए नागपंचमी के दिन नागों को दूध पिलाएं । अमावस्या के दिन चाँदी के नाग बनवाकर यथाविधान पूजन करके शिवलिंग पर चढायें ।।

पदम् नामक कालसर्प योग किसी कुण्डली में तब बनता है जब पंचम स्थान में राहु व एकादश में केतु बैठें और बाकी के सभी ग्रह इन दोनों के बीच में बैठे हों तो जातक को संतान प्राप्ति में बाधा उत्पन्न होती है ।।

किसी स्त्री की कुण्डली का यह दोष उसकी मासिक धर्म को अनियमित बनाता है । संतान सुख में विलंब करता है यौन/प्रसव संबंधी रोगों से ग्रस्त होने की आशंका भी होती है ।।

ऐसे जातक के प्रेम विवाह में रुकावटें आती हैं । उच्च शिक्षा की प्राप्ति में अड़चनें अर्थात् मन न लगना भी पद्म कालसर्प योग के कारण होता है । इसका सहज उपाय है अपने बेडरूम में चांदी का एक ठोस हाथी रखें ।।

अगले अंक में हम बाकि के बचें योगों के विषय में विस्तृत वर्णन करने का प्रयास करेंगे ।।

बृहत्पाराशर होराशास्त्रम् के 19वें अध्याय में वर्णित अनेकयोगाध्यायः में ज्योतिष के सभी महत्वपूर्ण योगों का विस्तृत वर्णन किया गया है । जातक के जीवन में इन योगों का क्या असर होता है, इस बात का विस्तृत वर्णन हम कर रहे हैं । तो आइये जानें इस विडियो टुटोरियल में चामर योग एवं उसके फल के विषय में. 

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।।। नारायण नारायण ।।।

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