
माता शैलपुत्री की विशेष भोग-पूजन विधि एवं विशिष्ट मंत्र।। Maa Shailputri Special Bhog Mantras And Puja Vidhi.
माता शैलपुत्री के पूजन का परिचय।। Introduction.
मित्रों, नवरात्रि के प्रथम दिवस माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप, माता शैलपुत्री की उपासना की जाती है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण ही इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। तथा यह वृषभ अर्थात नंदी पर आरूढ़ होकर, एक हाथ में त्रिशूल तथा दूसरे हाथ में कमल-पुष्प धारण करती हैं। माता शैलपुत्री को मूलाधार-चक्र की अधिष्ठात्री देवी भी माना गया है। जो साधक के भीतर स्थिरता, दृढ़ता तथा संकल्प-शक्ति का संचार करती हैं। इसीलिए नवरात्रि के प्रथम दिन इनकी उपासना संपूर्ण नवरात्रि-साधना की सुदृढ़ नींव रखने के समान मानी जाती है।।
वैदिक शास्त्रों में माता शैलपुत्री को चंद्रमा का भी अधिष्ठाता माना गया है। अतः इनकी उपासना से मन को विशेष शांति तथा स्थिरता प्राप्त होती है। जो साधक अपने जीवन में दृढ़-संकल्प, आत्मविश्वास तथा स्थायित्व की कामना रखते हैं। उनके लिए प्रथम दिवस माता शैलपुत्री देवी का यह पूजन अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।।
परन्तु आप बिलकुल घबराएँ नहीं। आज हम इसी विषय पर विस्तार से समझेंगे कि माता शैलपुत्री का पूजन किस प्रकार करना चाहिए। इन्हें कौन सा भोग सर्वाधिक प्रिय होता है? तथा किस विशिष्ट श्रृंगार एवं विशिष्ट मंत्र के जप से माता शैलपुत्री की शीघ्र प्रसन्नता प्राप्त होती है।।
माता शैलपुत्री की पूजन-विधि।। Puja Vidhi Of Maa Shailputri.
मित्रों, नवरात्रि के प्रथम दिवस प्रातःकाल ब्रह्म-मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके पश्चात पूजा-स्थान को गंगाजल से शुद्ध करके, वहाँ एक लाल अथवा पीले वस्त्र पर माता शैलपुत्री की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करना चाहिए। इसी दिन घट-स्थापना अर्थात कलश-स्थापना भी की जाती है, जो संपूर्ण नवरात्रि-पूजन का आधार मानी जाती है।।
सर्वप्रथम गणेश जी का स्मरण करके पूजन आरंभ करना चाहिए। तत्पश्चात कलश-स्थापना करके माता शैलपुत्री का आवाहन करना चाहिए। माता को रोली-अक्षत अर्पित करने के पश्चात सफेद अथवा पीले रंग के पुष्प, विशेषकर श्वेत कनेर अथवा कमल का पुष्प अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके पश्चात धूप-दीप प्रज्वलित करके माता की आरती करनी चाहिए। तथा अंत में क्षमा-प्रार्थना के साथ पूजन संपन्न करना चाहिए।।
माता को सर्वाधिक प्रिय भोग, गाय के घी का योग।। The Bhog Most Dear To The Mother, The Offering Of Cow’s Ghee.
मित्रों, शास्त्रों के अनुसार माता शैलपुत्री को गाय के शुद्ध घी से निर्मित भोग सर्वाधिक प्रिय माना जाता है। क्योंकि यह शुद्धता, पवित्रता तथा स्थायित्व का प्रतीक माना जाता है। माता को घी से बनी मिठाई, विशेषकर खीर अथवा हलवा अर्पित करना चाहिए। जिससे साधक को निरोगी काया तथा दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।।
इसके साथ ही माता को सफेद मिठाई, जैसे बर्फी अथवा खोये की मिठाई भी विशेष प्रिय मानी जाती है। यदि साधक नित्य-पूजन में माता को शुद्ध घी का दीपक भी अर्पित करे। तो यह विशेष रूप से शुभ फलदायी सिद्ध होता है, तथा घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।।
माता का विशिष्ट श्रृंगार, श्वेत वस्त्र तथा चंद्र-तुल्य आभूषण।। Special Adornment Of The Mother, White Attire And Moon-Like Ornaments.
मित्रों, माता शैलपुत्री को श्वेत वस्त्र तथा श्वेत पुष्पों से सुसज्जित करना अत्यंत प्रिय माना जाता है। क्योंकि यह इनकी चंद्र-तुल्य शीतल तथा शांत प्रकृति का प्रतीक है। माता को श्रृंगार में श्वेत अथवा चांदी के आभूषण अर्पित करने चाहिए। तथा इनके मस्तक पर चंद्रमा के समान अर्ध-चंद्राकार तिलक अथवा आभूषण धारण कराना विशेष शुभ माना जाता है।।
इसके साथ ही माता को श्वेत चुनरी अर्पित करना भी अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। जो समर्पण, पवित्रता तथा शरणागति का प्रतीक माना जाता है। इस प्रकार के श्रृंगार से माता शीघ्र प्रसन्न होकर साधक को स्थिरता तथा संकल्प-शक्ति का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।।
माता शैलपुत्री के विशिष्ट मंत्र, जिसके जप से शीघ्र प्रसन्नता का योग।। Special Mantras Of Maa Shailputri, The Yoga Of Swift Grace Through Chanting.
मित्रों, माता शैलपुत्री की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए अग्रलिखित मूल-मंत्र का श्रद्धापूर्वक नियमित जप करना चाहिए। जैसे “ॐ ह्रीं शिवायै नमः।।” इसके साथ ही ध्यान-मंत्र के रूप में निम्न श्लोक का भी पाठ करना चाहिए।।
“वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।।
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।।”
मित्रों, इस मंत्र का अर्थ है कि जो देवी वांछित फल प्रदान करने वाली, मस्तक पर अर्ध-चंद्र धारण करने वाली हैं। जो वृषभ पर आरूढ़ तथा त्रिशूल धारण करने वाली हैं। उन यशस्विनी शैलपुत्री माता की मैं वंदना करता हूँ। प्रातः तथा सायं दोनों समय इस मंत्र का कम से कम एक माला अर्थात एक सौ आठ बार जप करने से माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं।।
मंत्र-जप के समय सावधानियाँ।। Precautions While Chanting The Mantra.
मित्रों, मंत्र-जप सदैव स्वच्छ आसन पर बैठकर, पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए। जप के समय रुद्राक्ष अथवा स्फटिक की माला का प्रयोग विशेष रूप से शुभ माना जाता है। मन में किसी भी प्रकार का नकारात्मक विचार न लाते हुए। पूर्ण श्रद्धा तथा एकाग्रता के साथ ही जप करना चाहिए। क्योंकि अश्रद्धापूर्वक किया गया जप पूर्ण फल प्रदान नहीं करता।।
इस पूजन से प्राप्त होने वाले फल।। Benefits Obtained From This Worship.
मित्रों, जो साधक नवरात्रि के प्रथम दिवस विधिपूर्वक माता शैलपुत्री का पूजन, निर्धारित भोग-अर्पण तथा मंत्र-जप करता है। उसे जीवन में स्थिरता, दृढ़-संकल्प तथा आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही मूलाधार-चक्र के जागृत होने से साधक के भीतर नवरात्रि की संपूर्ण साधना को सफलतापूर्वक पूर्ण करने की शक्ति भी उत्पन्न होती है। जो आगामी आठ दिनों की उपासना के लिए अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।।
और मेरी सलाह तो यही रहेगी कि इन उपायों को केवल औपचारिकता के लिए नहीं। बल्कि पूर्ण श्रद्धा तथा निरंतरता के साथ करना चाहिए। माता का पूजन शुद्ध मन, सात्विक आचरण तथा सच्ची भक्ति-भावना के साथ ही करना चाहिए। क्योंकि बाह्य आडंबर की अपेक्षा आंतरिक शुद्धता ही माता की वास्तविक प्रसन्नता का कारण बनती है।।
शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.
मित्रों, देवी भागवत पुराण तथा दुर्गा-सप्तशती में माता शैलपुत्री को नवदुर्गाओं में प्रथम तथा मूलाधार-चक्र की अधिष्ठात्री देवी बताया गया है। स्कंद पुराण में भी यह उल्लेख मिलता है कि प्रथम नवरात्रि में इनकी विधिपूर्वक उपासना करने से साधक को संपूर्ण नवरात्रि-साधना में सफलता प्राप्त होती है।।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)
प्रश्न 1. माता शैलपुत्री को कौन सा भोग सर्वाधिक प्रिय है।। Which Bhog Is Most Dear To Maa Shailputri.
उत्तर:- गाय के शुद्ध घी से निर्मित भोग, जैसे खीर, हलवा अथवा सफेद मिठाई माता को सर्वाधिक प्रिय माना जाता है।।
प्रश्न 2. माता शैलपुत्री का मूल-मंत्र क्या है।। What Is The Primary Mantra Of Maa Shailputri.
उत्तर:- “ॐ ह्रीं शिवायै नमः।।” यह माता का मूल-मंत्र माना जाता है। जिसका नियमित जप माता की शीघ्र प्रसन्नता प्रदान करता है।।
प्रश्न 3. माता को किस रंग के वस्त्र अथवा पुष्प अर्पित करने चाहिए।। Which Colour Clothes Or Flowers Should Be Offered To The Mother.
उत्तर:- माता को श्वेत अथवा पीले रंग के वस्त्र तथा श्वेत कनेर अथवा कमल के पुष्प अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है।।
प्रश्न 4. माता शैलपुत्री किस चक्र की अधिष्ठात्री देवी हैं।। Which Chakra Is Maa Shailputri The Presiding Deity Of.
उत्तर:- माता शैलपुत्री को मूलाधार-चक्र की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। जो स्थिरता तथा संकल्प-शक्ति का संचार करती हैं।।
प्रश्न 5. मंत्र-जप कितनी बार तथा किस समय करना चाहिए।। How Many Times And At What Time Should The Mantra Be Chanted.
उत्तर:- प्रातः तथा सायं दोनों समय कम से कम एक माला अर्थात एक सौ आठ बार माता के मंत्र का जप करना चाहिए। जिससे माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं।।
लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.
मित्रों, नवरात्रि के प्रथम दिवस माता शैलपुत्री की विधिपूर्वक उपासना, गाय के घी से निर्मित भोग का अर्पण, श्वेत श्रृंगार तथा “ॐ ह्रीं शिवायै नमः” इस मंत्र के नियमित जप से साधक को माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह पूजन न केवल आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। बल्कि साधक के भीतर संपूर्ण नवरात्रि की साधना को सफलतापूर्वक पूर्ण करने की दृढ़ता तथा स्थिरता भी उत्पन्न करता है।।
परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि इस पूजन को विधिपूर्वक संपन्न करने हेतु किसी विद्वान तथा अनुभवी ब्राह्मण अथवा आचार्य से विस्तृत मार्गदर्शन अवश्य प्राप्त करना चाहिए। ताकि पूजन में किसी प्रकार की त्रुटि न रह जाए तथा माता की पूर्ण कृपा प्राप्त हो सके।।
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