Home Mangal Graha कुंडली के षष्ठ भाव में मंगल का प्रभाव और उपाय।।

कुंडली के षष्ठ भाव में मंगल का प्रभाव और उपाय।।

कुंडली के षष्ठ भाव में मंगल का प्रभाव और उपाय।। Mars in 6th House Effects And Remedies
कुंडली के षष्ठ भाव में मंगल का प्रभाव और उपाय।। Mars in 6th House Effects And Remedies

कुंडली के षष्ठ भाव में मंगल का प्रभाव और उपाय।। Mars in 6th House Effects And Remedies.

परिचय।। Introduction.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष में मंगल को साहस, पराक्रम, ऊर्जा तथा रक्त का कारक ग्रह माना गया है। षष्ठ भाव शत्रु, रोग, ऋण, प्रतिस्पर्धा तथा सेवा-नौकरी का प्रतिनिधित्व करता है। जब साहस के कारक मंगल इसी षष्ठ भाव में स्थित हों, तब जातक की शत्रुओं पर विजय तथा प्रतिस्पर्धा क्षमता पर विशेष प्रभाव देखने को मिलता है।।

षष्ठ भाव उपचय भाव होने के कारण मंगल के लिए अपेक्षाकृत अनुकूल माना जाता है। तथापि मंगल की स्थिति यदि अत्यधिक पीड़ित हो तो जातक के स्वभाव में उग्रता तथा रक्त संबंधी विकार भी उत्पन्न करता है। वास्तविक फल का निर्णय तो सदैव संपूर्ण जन्मकुंडली, दशा और गोचर के आधार पर ही किया जाता है।।

सामान्य स्वभाव।। General Nature.

मित्रों, षष्ठ भाव में मंगल जातक को साहसी, प्रतिस्पर्धी तथा संघर्षशील स्वभाव प्रदान करता है। ऐसे जातक कठिन परिस्थितियों में भी विरोधियों का सामना निडरता से करते हैं। प्रतिस्पर्धा में सदैव विजयी रहते हैं। सेवा तथा अनुशासित कार्यक्षेत्र में इनकी विशेष रुचि देखी जाती है।।

स्वभाव में तीव्रता तथा शीघ्र निर्णय लेने की प्रवृत्ति के कारण ये अपने अधिकारों की रक्षा दृढ़तापूर्वक करते हैं। कई बार यही दृढ़ता विवाद तथा शत्रुता का रूप भी ले लेती है। जिसके कारण कार्यक्षेत्र में तनाव भी उत्पन्न हो जाता है।।

मंगल का षष्ठ भाव में शुभ फल।। Auspicious Effects.

मित्रों, यदि षष्ठ भाव का मंगल स्वराशि, उच्च राशि अथवा शुभ ग्रहों की दृष्टि से युक्त होकर बलवान हो तो जातक को शत्रुओं तथा प्रतिस्पर्धियों पर विजय, मुकदमों में सफलता तथा ऋण से मुक्ति प्राप्त होती है। ऐसे जातक सेना, पुलिस, चिकित्सा अथवा प्रशासनिक क्षेत्रों में विशेष सफलता प्राप्त करते हैं।।

कार्यक्षेत्र में अनुशासन तथा प्रतिस्पर्धा में भी जातक सदैव आगे रहता है। शत्रु भी इससे सदैव भयभीत ही रहते हैं। साहसपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता के कारण जातक कठिन परिस्थितियों में भी सफलता प्राप्त करने में सक्षम होता है। सेवा के क्षेत्र में भी उन्नति के अवसर मिलते रहते हैं।।

छठे घर में मंगल के अशुभ फल।। Malefic Effects.

मित्रों, यदि षष्ठ भाव का मंगल नीचस्थ, पापग्रहों से अत्यधिक पीड़ित अथवा निर्बल हो तो जातक के स्वभाव में उग्रता, आवेश अथवा झगड़ालू प्रवृत्ति देखी जाती है। ऐसे जातकों को सहकर्मियों अथवा प्रतिस्पर्धियों से अनावश्यक शत्रुता का सामना करना पड़ता है।।

मुकदमों तथा विवादों में उलझने की प्रवृत्ति भी देखी जाती है। जिससे धन तथा समय की हानि होती है। शीघ्रता में लिए गए निर्णयों के कारण कभी-कभी कार्यक्षेत्र में भी हानि उठानी पड़ती है। ऐसे जातक के जीवन में ऋण संबंधी समस्याएँ भी उत्पन्न होती हैं।।

छठे घर के मंगल से स्वास्थ्य पर प्रभाव।। Health Effects.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष के अनुसार षष्ठ भाव का संबंध रोग तथा आंतरिक अंगों से होता है। मंगल ग्रह का संबंध रक्त तथा शरीर की ऊर्जा से माना गया है। षष्ठ भाव में मंगल यदि शुभ हो तो रोगों पर विजय प्राप्त करने की शक्ति तथा शारीरिक स्फूर्ति बनी रहती है।।

इसके विपरीत यदि मंगल अशुभ हो तो रक्त संबंधी विकार, त्वचा रोग, पेट में जलन अथवा शल्य चिकित्सा जैसी स्थिति उत्पन्न होती है। ऐसी स्थिति में सावधानी रखना, ज्योतिषीय सलाह के अनुसार उपाय करना तथा आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श भी अवश्य लेना चाहिए।।

मंगल ग्रह के वैदिक उपाय।। Vedic Remedies.

मित्रों, षष्ठ भाव के मंगल को शुभ अथवा बलवान बनाए रखने के लिए आप मंगल देवता के मंत्र का जप (Chant Mars Mantra) “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” का श्रद्धापूर्वक जप करें। हनुमान जी की उपासना (Worship Lord Hanuman) तथा हनुमान चालीसा का नियमित पाठ अत्यन्त शुभ फलदायी माना गया है।।

एक विकल्प मंगलवार का व्रत (Observe Tuesday Fast) रखना तथा शत्रुओं के प्रति क्षमाशील दृष्टिकोण अपनाना (Practice Forgiveness) भी शुभ माना जाता है। लाल वस्तुओं का दान (Donate Red Items) जैसे मसूर की दाल, गुड़ अथवा तांबा दान करना तथा नियमित व्यायाम करना षष्ठ भाव के मंगल को संतुलित बनाने में सहायक माना जाता है।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में मंगल को साहस, पराक्रम तथा ऊर्जा का प्रमुख कारक ग्रह बताया गया है। फलदीपिका के अनुसार षष्ठ भाव को उपचय भाव मानते हुए यहाँ स्थित बलवान मंगल जातक को शत्रुओं पर विजय प्रदान करता है। जबकि अत्यधिक पीड़ित मंगल रोग तथा विवाद उत्पन्न करता है।।

बृहज्जातक में षष्ठस्थ मंगल को प्रतिस्पर्धा में सफलता तथा शत्रु-विजय का प्रमुख कारक माना गया है। इसी प्रकार जातक पारिजात में भी षष्ठ भाव के मंगल को शत्रु तथा रोग दोनों पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालने वाला ग्रह बताया गया है।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

1. षष्ठ भाव में शुभ मंगल क्या फल देता है? Effects of Auspicious Mars in 6th House.

उत्तर:- षष्ठ भाव का शुभ मंगल शत्रुओं पर विजय, मुकदमों में सफलता, प्रतिस्पर्धा में उन्नति तथा ऋण से मुक्ति जैसे उत्तम फल प्रदान करता है।।

2. षष्ठ भाव में अशुभ मंगल क्या नुकसान देता है? Problems Caused by Malefic Mars in 6th House.

उत्तर:- षष्ठ भाव का अशुभ मंगल उग्रता, शत्रुता में वृद्धि, विवाद तथा रक्त संबंधी विकार जैसी बाधाएँ उत्पन्न करता है।।

3. षष्ठ भाव के मंगल से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ कौन-सी हैं? Health Issues Linked to Mars in 6th House.

उत्तर:- वैदिक ज्योतिष में षष्ठ भाव का संबंध रोग तथा आंतरिक अंगों से माना गया है। पीड़ित मंगल रक्त विकार तथा त्वचा रोग जैसी समस्याओं की प्रवृत्ति का संकेत देता है। ऐसे में ज्योतिषीय परामर्श के साथ-साथ डॉक्टर से इलाज भी आवश्यक होता है।।

4. षष्ठ भाव के मंगल को बलवान बनाने का सबसे प्रभावी वैदिक उपाय क्या है? Most Effective Remedy for Mars in 6th House.

उत्तर:- ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः मंत्र का जप, हनुमान जी की उपासना, मंगलवार का व्रत और लाल वस्तुओं का दान ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।।

5. क्या षष्ठ भाव का मंगल सदैव अशुभ ही होता है? Is Mars in 6th House Always Inauspicious.

उत्तर:- नहीं। षष्ठ भाव उपचय भाव माना जाता है, अतः यहाँ स्थित मंगल सामान्यतः शत्रु-विजय जैसे शुभ फल भी देता है। इसका वास्तविक प्रभाव राशि, दृष्टि तथा संपूर्ण जन्मकुंडली पर निर्भर करता है।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, कुंडली के षष्ठ भाव में स्थित मंगल शुभ हो तो जातक को शत्रुओं पर विजय, प्रतिस्पर्धा में सफलता तथा मुकदमों में जीत प्रदान करता है, वहीं अत्यधिक अशुभ होने पर उग्रता, रक्त संबंधी विकार तथा विवाद जैसी चुनौतियाँ भी उत्पन्न कर सकता है।।

वैदिक परंपरा के अनुसार मंगल मंत्र जप, हनुमान उपासना, मंगलवार का व्रत तथा क्षमाशील स्वभाव इसे संतुलित एवं बलवान बनाने में सहायक माना गया है। किसी भी विशेष उपाय से पहले योग्य वैदिक ज्योतिषी से संपूर्ण जन्मकुंडली का विश्लेषण कराना उचित रहेगा।।

ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे  YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं – Click Here & Watch My YouTube Channel.

इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज – My facebook Page.

वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।

किसी भी तरह के पूजा-पाठ, विधी-विधान, ग्रह दोष शान्ति आदि के लिए तथा बड़े से बड़े अनुष्ठान हेतु योग्य एवं विद्वान् ब्राह्मण हमारे यहाँ उपलब्ध हैं ।।
 
संपर्क करें:- बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के बाजु में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा ।।
 
WhatsAap & Call: +91 – 8690 522 111.
E-Mail :: astroclassess@gmail.com

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

error: Content is protected !!
Exit mobile version